हर देश में कोरोना के सिर्फ एक ही प्रकार से संक्रमित नहीं हो रहे लोग, रिसर्च में खुलासा

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जून 3, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कोरोना वायरस की बीमारी कोविड- 19 को लेकर दुनियाभर में शोध जारी है। अब कैंब्रिज यूनिवर्सिटी (Cambridge University) की हाल में हुई एक नई शोध में खुलासा हुआ है कि, दुनिया के हर देश में लोगों को संक्रमित करने वाला कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट (Coronavirus Covid- 19 Variant) अलग-अलग है। शोधकर्ताओं ने कोविड- 19 का कारण बनने वाली कोरोना वायरस की प्रजातियों को ए, बी और सी नाम से विभाजित किया है। उनका कहना है कि, बेशक यह वायरस चीन से शुरू हुआ है, लेकिन चीन में मुख्य कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘ए’ से संक्रमित होने वाले लोगों के मामले कम हैं। आइए, जानते हैं कि कौन-सा कोरोना वायरस वैरिएंट कौन-से देश में ज्यादा देखा जा रहा है और यह स्टडी कैसे हुई।

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कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट कितने हैं?

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने Phylogenetic Network Analysis तकनीक का इस्तेमाल करके कोविड- 19 मुख्य स्त्रोत का पता लगाया। स्टडी में सामने आया कि, कोरोना वायरस की बीमारी कोविड- 19 का संक्रमण सिर्फ एक स्त्रोत के जरिए नहीं फैल रहा है। बल्कि, विश्व के अलग-अलग देशों में इसके अलग-अलग वैरिएंट देखे जा रहे हैं। जिन्हें शोधकर्ताओं ने ए, बी और सी नाम दिया है।

Phylogenetic Network Analysis तकनीक का इस्तेमाल डीएनए (DNA) के द्वारा प्री-हिस्टोरिक ह्यूमन पोपूलेशन (Prehistoric human populations) की मूवमेंट का पता करने के लिए किया जाता है। हालांकि, कोविड- 19 जैसे कोरोना वायरस के इंफेक्शन रूट (Infection Route) को ट्रेस करने के लिए इसका इस्तेमाल पहली बार किया जा रहा है।

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कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट का पता करने के लिए कैसे हुई स्टडी?

प्रोसिडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस (PNAS) में प्रकाशित स्टडी में डॉ. पीटर फोर्स्टर के नेतृत्व में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पहले ह्यूमन पेशेंट के 160 कंप्लीट वायरस जीनोम्स (Virus Genomes) का अध्ययन किया। जिससे वैज्ञानिकों ने कोविड- 19 के फैलने का मूल स्त्रोत जाना। अध्ययन में ए, बी और सी विभिन्न तीन कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट देखे गए। टीम ने 24 दिसंबर 2019 से लेकर 4 मार्च 2020 तक की अवधि में दुनियाभर से इकट्ठा किए वायरस जीनोम्स के आंकड़ों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोविड- 19 का मुख्य स्त्रोत ‘ए’ वैरिएंट को माना गया, जो कि मुख्य रूप से चमगादड़ों और पैंगोलिन (bats and pangolins) में मौजूद होता है। यह कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट वुहान से मिले मामलों में पाया गया, लेकिन यह वैरिएंट शहर के अधिकतर संक्रमित मरीजों में नदारद रहा, जिससे इसे शहर का डोमिनेंट वैरिएंट नहीं माना जा सकता।

कोविड-19 की ताजा जानकारी
देश: भारत
आंकड़े

1,435,453

कंफर्म केस

917,568

स्वस्थ हुए

32,771

मौत
मैप

कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘ए’

जैसा कि हमने बताया कि, कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘ए’ वुहान के अधिकतर मरीजों में नदारद रहा, लेकिन इसका म्यूटेटेड वर्जन (Mutated Version) वुहान में रह रहे अमेरिकी लोगों में देखा गया। इसके अलावा कोविड- 19 का ‘ए’ प्रकार मुख्य रूप से अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के अधिकतर मरीजों में पाया गया।

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कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘बी’

वुहान से शुरू हुए कोविड- 19 इंफेक्शन का मुख्य स्त्रोत ‘ए’ था, लेकिन वुहान के अधिकतर मामलों में कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘बी’ देखा गया, जो कि मुख्य वैरिएंट ‘ए’ से म्यूटेटेड (परिवर्तित) हुआ था। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ‘यही वैरिएंट वुहान का डोमिनेंट वैरिएंट रहा और यह बिना परिवर्तित हुए ईस्ट एशिया से बाहर नहीं फैल पाया।’

कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘सी’

कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘सी’ मुख्य रूप से यूरोपियन देशों के मरीजों में पाया गया। जो कि फ्रांस, इटली, स्वीडन और इंग्लैंड के शुरुआती मामलों में मौजूद था। यह वैरिएंट चीन के मुख्य क्षेत्र से लिए गए सैंपल में नहीं पाया गया, लेकिन सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग और साउथ कोरिया के कुछ मरीजों में यह वैरिएंट पाया गया। इस नए शोध में यह बात भी सामने आई कि, इटली में शुरुआती कोरोना वायरस संक्रमण का कारण 27 जनवरी को जर्मन व्यक्ति से फैला था और उसके बाद इटली में संक्रमण फैलने की रफ्तार सिंगापुर से संबंध या कॉन्टेक्ट रखने वाले मरीजों की वजह से तेज हुई।

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कोरोना वायरस के प्रकार क्यों बदलें?

किसी वायरस का प्रकार म्यूटेशन के कारण बदलता है, जो कि उसके जीनोम्स के आधार पर होता है। यह जीनोम्स अन्य भौगोलिक और डीएनए, क्रोमोजोम आदि बॉयोलॉजिकल कारणों की वजह से प्रभावित होता है। इसलिए, चीन, यूरोप, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि के नागरिकों में फैलते हुए कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट म्यूटेट होता रहा। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बाद में स्टडी में 1 हजार सैंपल का अध्ययन किया।

निष्कर्ष

स्टडी के मुताबिक, वायरस का प्रमुख स्त्रोत कोरोना वायरस कोविड- 19 वैरिएंट ‘ए’ रहा, जो कि चमगादड़ों और पैंगोलिन में मौजूद वायरस से काफी हद तक मेल खाता है। इसके बाद आउटब्रेक होने पर यह वैरिएंट ‘बी’ में परिवर्तित हुआ और ‘बी’ से कोरोना वायरस वैरिएंट ‘सी’ में बदला। शोधकर्ताओं का कहना है कि, वुहान के स्थानीय लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता और पर्यावरण की दृष्टि के आधार पर अधिकतर लोगों ने वैरिएंट ‘बी’ से जल्दी संक्रमण पाया।

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कोरोना वायरस से सावधानी

कोरोना वायरस इंफेक्शन से बचने के लिए भारत सरकार ने लोगों के लिए कुछ सलाह दी है। सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के साथ इन एहतियात रूपी सलाह को फॉलो करने से आप कोरोना वायरस संक्रमण से काफी हद तक बच सकते हैं।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

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