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जानिए अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रोनॉट्स को किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम आती हैं

जानिए अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रोनॉट्स को किस तरह की हेल्थ प्रॉब्लम आती हैं

अंतरिक्ष की दुनिया जो रहस्‍यों से भरी है। यहां तक पहुंचना हर किसी के बस में भी नहीं है। इन रहस्यों को जानने के लिए कई एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष मीशन पर जाते हैं, यह बात हम सभी को पता है। लेकिन क्या आप में किसी को यह पता है कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रोनॉट के शरीर में क्या फर्क पड़ता है। वहां का वातावरण धरती से बिल्कुल अलग होता है। जीरो ग्रैविटी के कारण वहां रहना इतना आसान भी नहीं होता है। नासा एक ऐसे ही प्रोजेक्ट पर काम भी कर रहा है, जिसमें यह देखा जा रहा है कि अंतरिक्ष यात्री के शरीर पर किस तरह का प्रभाव पड़ता है। उन्हें किसी तरह के चैलेंजेस का सामना करना पड़ता है।

क्या है अंतरिक्ष स्टेशन?

स्पेस स्टेशन को ऑर्बिटल स्टेशन भी कहा जाता है। इसे इंसानों के रहने के लिहाज से सभी सुविधाओं को ध्‍यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। यह मानव द्वारा बनया गया ही एक स्टेशन है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि यह अंतरिक्ष में मानव निर्मित ऐसा स्टेशन है, जिससे पृथ्वी से कोई अंतरिक्ष यान जाकर मिल सकता है। इसमें इतनी क्षमता होती है कि इस पर अंतरिक्ष यान उतारा जा सके। इसके लिए इन्हें पृथ्वी के लो-ऑर्बिट कक्षा में ही स्थापित किया जाता है। स्पेस स्टेशन से पृथ्वी का सर्वेक्षण किया जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण 1998 में हुआ था। स्‍पेस स्‍टेशन 357 फीट में बना हुआ है, जो एक फुटबॉल के मैदान से भी बड़ा है। इसका वजन 420,000 किलोग्राम है. यह 320 कारों के वजन के बराबर है

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एस्टोनॉट्स को होने वाली हेल्थ प्रॉब्लम

नासा के द्वारा किए जाने वाले एक्सपेरिमेंट प्रोजक्ट आइडेंटिकल ट्विन्ज स्कॉट और मार्क केली पर किया गया है। ये दोनों बिलकुल एक जैसे हैं। स्कॉट केली ने इंटरनैशनल स्पेस स्टेशन ISS में करीब एक साल का वक्त बिताया है। इसमें यह जानने की कोशिश की गई है कि अंतरिक्ष में रहने पर एस्ट्रोनॉट के शरीर और दिमाग पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस स्टडी के आधार पर ही मंगल ग्रह के 3 साल के मिशन की तैयारी की जा सकती है। वैसे तो आमतौर पर ऐस्ट्रॉनॉट्स स्पेस में 6 महीने तक रहते हैं लेकिन स्कॉट केली ने स्पेस में 340 दिन का वक्त बिताया जो अब तक का सबसे लंबा स्पेस मिशन है।

रेडिएशन का प्रभाव

नासा की एक रिपोर्ट के अनुसार स्पेस में रहने वाले एस्ट्रोनॉटस के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। धरती से बहार निकलने के बाद गुरुत्वाकर्षण के बिना शरीर पर कई तरह के बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं। सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव रेडिएशन का बुरा प्रभाव पड़ता है। एक एस्ट्रोनॉट्स काे धरती के मुकाबले 10 गुना ज्यादा रेडिएशन प्रभावित करता है। जिसके वजह से कई तरह की उनमें शरीर की समस्या हो सकती है। यदि एस्ट्रोनॉट्स 3 महीने तक स्पेशन स्टेशन में रहते हैं तो उन्हें स्किन प्रॉब्लम हो सकती है, यानि की त्वचा खराब होने लगती है। इसके अलावा अगर वे 1 साल के करीब हैं तो उनमें कैंसर होने का खतरा भी बढ् जाता है।

मेंटल हेल्थ प्रभावित होती है

एस्ट्रोनॉट्स को केवल शारीरिक ही नहीं बल्कि उनकी मेंटल हेल्थ भी प्रभावित होती है। उनके व्यवहार में भी कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं, जैसे कि सबसे ज्यादा उनमें मूड स्विंग्स की समस्या होना, तनाव या स्ट्रेस का शिकार होना। किसी व्यक्ति का एक छोटी से जगह में लगातार रहना, वो एक से दो लोगों के बीच में तो इससे उनके मानसिक स्वास्थ पर काफी प्रभाव पड़ता है। ऐसे व्यक्ति स्पेस स्टेशन से वॉपसी के बाद भी अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं। उनका यह तनाव भी लंबे समय तक बना रह सकता है।

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मोशन सिकनेस

सभी प्लैनेट्स में गुरुत्वाकर्षण का स्तर अलग होता है, जैसे कि कोई एस्ट्रोनॉट्स धरती से मंगल ग्रह पर जाते हैं तो उनके शरीर के लिए गुरुत्वाकर्षण का स्तर बदल जाता है। जिसका उनकी बॉडी को एडॉप्ट करने में मुश्किल आती है। गुरुत्वाकर्षण कम हाेने की वजह से हडि्डयां कमजोर भी होने लगती हैं। र्नव्स सिस्टम पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण बॉडी मोशन में भी दिक्कत आती है। कई बार मितली और चक्कर जैसा महसूस हाेना आदि समस्या भी होती है। शरीर के रक्त संचार भी प्रभावित होता है। इसके अलावा चलने में दिक्कत, मांसपेशिया और आंखे कमजोर होने लगती हैं।

न्यूट्रिशन की कमी

अंतरिक्ष यात्रा के दौरान एस्ट्रोनॉट का भोजन धरती की तरह सामान्य नहीं होता है। बल्कि वहां उनके लिए दूसरे तरह खाना होता है और पूरे यात्रा के दौरान उन्हें वही मिलता है। जिसकी वजह से उनके शरीर से आवश्यक पोषक तत्वाें की कमी होने लगती है।

महिलाओं में पीरियड्स प्रॉब्लम

महिला एस्ट्रोनॉट के लिए जीरो ग्रेविटी में पीरियड्स को मैनेज करना काफी मुश्किल होता है। वहां पर उनके साथ डॉक्टरों की टीम होती है। धरती की तरह स्पेश स्टेशन में भी पीरिड‌्स अपने समय पर आता है, लेकिन उन्हें पीरियड्स रोकने की दवा दी जाती है। पीरियड्स रोकना उनकी मर्जी पर निर्भर करता है। महिला सैनेटरी पैड और टैंपोंस का भी इस्तेमाल कर सकती है।

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बीएमआई कैलक्युलेटर

अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें और पता करें कि क्या आपका वजन हेल्दी है। आप इस उपकरण का उपयोग अपने बच्चे के बीएमआई की जांच के लिए भी कर सकते हैं।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 12/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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