हार्ट अटैक से हुआ सुषमा स्वराज का निधन, दिल का दौरा पड़ने से पहले दिखाई देते हैं ये लक्षण

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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का देर शाम दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। दुनियाभर में बेहतरीन वक्ता के तौर पर फेमस सुषमा स्वराज को देर शाम को हार्ट अटैक की वजह से एम्स हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली ।गौरतलब है कि तीन साल पहले सुषमा स्वराज का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था जिसकी वजह से पिछले कुछ दिनों से उनकी तबियत कुछ ठीक नहीं चल रही थी। इसी वजह से उन्होंने लोकसभा का चुनाव भी नहीं लड़ा था। निधन से लगभग तीन घंटे पहले ही उन्होंने कश्मीर में धारा 370 हटाने को लेकर आखिरी ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने लिखा था, ‘इस दिन की ही प्रतीक्षा कर रही थी।’

सुषमा स्वराज का निधन हार्ट अटैक के चलते हुआ है। हाल ही में कांग्रेस की पूर्व मुख्य मंत्री शीला दीक्षित का निधन भी हार्ट अटैक के चलते हुआ था। हार्ट अटैक और कार्डिएक अटैक के मामले इन दिनों काफी बढ़ रहे हैं। हृदय रोग देश में होने वाली मृत्यु के कारणों में सबसे आगे है। बता दें कि आज भी अधिकतर लोग हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट जैसी बीमारी को लेकर भ्रमित रहते हैं और इन दोनों ही बीमारियों को एक समझते हैं। हालांकि, ये दोनों ही हृदय से जुड़ी बीमारियां हैं लेकिन, इन दोनों बीमारियों के बीच काफी अंतर है। आइए जानते हैं, इन दोनों के बीच के अंतर को-

हार्ट अटैक क्या है ?

शरीर के अन्य हिस्सों की तरह हमारा हृदय भी मांसपेशियों से बना हुआ महत्त्वपूर्ण अंग है, जिसे काम करने के लिए ऑक्सिजन युक्त खून के प्रवाह की आवश्यकता होती है। हमारे शरीर में कोरोनरी आर्टरी (धमनी) हृदय तक खून पहुंचाने का काम करती है और जब वहां तक खून पहुंचना बंद हो जाता है, तो हृदय के भीतर की कुछ पेशियां काम करना बंद कर देती हैं। खून पहुंचाने वाली धमनियों में जमे वसा या खून के थक्कों के कारण ब्लॉकेज होती है, जिसे हम हार्ट ब्लॉकेज भी कहते हैं। इन आर्टरीज में अवरोध आने की स्थिति में ही हार्ट अटैक आता है।

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कार्डिएक अरेस्ट क्या है?

हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक है कार्डिएक अरेस्ट की स्थिति। कार्डिएक अरेस्ट ज्यादा घातक इसलिए है क्योंकि इसमें हमारा दिल अचानक से शरीर के विभिन्न हिस्सों में खून पहुंचाना बंद कर देता है और हदय का धड़कना बंद हो जाता है। इससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है, जब हदय के अंदर वेंट्रीकुलर फाइब्रिलेशन पैदा होता है। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि हार्ट अटैक में भले ही हृदय की धमनियों में खून का प्रवाह नहीं हो, पर हृदय की धड़कन चलती रहती है। जबकि कार्डियक अरेस्‍ट में दिल की धड़कन बंद हो जाती है।

इसके अलावा, कुछ अन्य लक्षण हैं जिनकी मदद से हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट के बीच के अंतर को समझा जा सकता है, जैसे कि—

हार्ट अटैक के लक्षण

  • सीने में दर्द होना , इसमें अचानक से आपके सीने के बीच में दर्द होगा और ऐंठन महसूस होगी, जोकि आराम करने पर भी ठीक नहीं होगी। सभी मामलों में ऐसा हो ये जरुरी नहीं है लेकिन, आमतौर पर ये लक्षण ज्यादातर मरीजों में देखे गए हैं।  सीने का दर्द धीरे—धीरे  शरीर के और भी हिस्सों फैलने लगता है, जैसे कि हाथ, एब्डोमेन, गले और पीठ में  आशंका ज्यादा रहती है।
  • सांस उखड़ना।
  • खांसी आना।
  • चिड़चिड़ापन होना।
  • ​सिर भारी होना।
  • अत्यधिक पसीना आना।
  • कमजोरी महसूस होना।

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कार्डिएक अरेस्ट के लक्षण

  • हृदय की गति का रुक जाना।
  • अचानक से बेहोश हो होना।
  • सांस लेने में दिक्क्त महसूस होना और धीरे—धीरे सांस की गति धीमी होते जाना।
  • घबराहट और बेचैनी महसूस होना।

कार्डिएक अरेस्ट की स्थिति होने पर उपर दिए गए लक्षण, आपको इसके आने का संकेत दे सकते हैं। ऐसा महसूस करने पर तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

कार्डिएक अरेस्ट के क्या कारण हो सकते हैं ?

कार्डिएक अरेस्ट नीचे दिए हुए कारणों की वजह से हो सकता है, जैसे कि,

  • वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन( Ventricular Fibrillation )
  • वेंट्रीकुलर टैकीकार्डिया( Ventricular Tachycardia )
  • कोरोनरी हार्ट डिजीज ( Coronary Heart Disease )
  • हार्ट के साइज या आकार में बदलाव आना।
  • पेसमेकर ( Pacemaker ) का खराब होना।
  • रेस्पिरेटरी अरेस्ट ( Respiratory Arrest )
  • घुटन या जकड़न का होना
  • हार्ट अटैक का होना।
  • एलेक्ट्रोक्युशन ( Electrocution )
  • ह्य्पोथर्मिया ( Hypothermia )
  • बहुत ज्यादा शराब या नशे का सेवन करना।
  • ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की रिपोर्ट में पाया गया है कि यूनाइटेड किंगडम में ज्यादातर कार्डिएक अरेस्ट, हार्ट अटैक की वजह से ही होते हैं।

हार्ट अटैक की स्थिति में हार्ट की मांसपेशियों तक खून पहुंचना रुक जाता है। अगर हार्ट की सभी मांसपेशियों तक खून पहुंचना बंद हो जाता है, तब कार्डिएक अरेस्ट का होना निश्चित है।  ये बात तो हो गई कार्डिएक अरेस्ट के बारे में लेकिन, हार्ट अटैक के होने का मूल कारण है कोरोनरी हार्ट डिजीज ( Coronary Heart Disease )। आइए जानते हैं इसके बारे में और कैसे ये हार्ट अटैक को बढ़ावा देती हैं।

डॉक्टर बृजेश कुमार ,सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट -हीरानंदानी हॉस्पिटल , वाशी – फोर्टिस नेटवर्क हॉस्पिटल हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट के बारे में बताते हैं कि 
“हृदय रोग देश में होने वाली सबसे अधिकतर मृत्यु के कारणों में से एक है।  कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD) से होने वाली मृत्युदर में इस्केमिक हार्ट डिजीज 80 प्रतिशत की भागीदारी रखती हैं। प्रतिवर्ष कार्डियोवैस्कुलर डिजीज से होने वाली मृत्युदर में वृद्धि हो रही है। “

कोरोनरी हार्ट डिजीज कैसे हार्ट अटैक का कारण बनती है ?

कोरोनरी आर्टरीज में फैट्स ( Fats ) के जमने की वजह से धमनियों में अवरोध पैदा हो जाता है। जिसकी वजह से  हार्ट को सही मात्रा में खून नहीं पहुंचता है। जब हार्ट का एक बड़ा हिस्सा इस स्थिति से प्रभावित हो जाता है, तब हार्ट अटैक के होने संभावना बढ़ जाती है।

किन लोगों में कोरोनरी हार्ट डिजीज की संभावना ज्यादा होती है ?

  • जो लोग अधिक ध्रूमपान करते हैं।
  • ​अधिक तैलीय युक्त भोजन करने वाले लोगों में।
  • हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त लोगों में।
  • मोटापे के शिकार लोगों में।
  • बहुत अधिक प्रदूषित जगह पर रहने वाले लोगों में।
  • डायबिटिक लोगों में।
  • जैनेटिक तौर पर हार्ट अटैक की हिस्ट्री रखने वाले लोगों में।

हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट दो अलग स्थितियां हैं, इनके कारण और लक्षण भी अलग हैं। इस विषय पर और अधिक जानकारी या सवाल के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी चिकित्सा परामर्श या इलाज की सलाह नहीं देता है। 

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रिव्यू की तारीख अगस्त 7, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अगस्त 7, 2019

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