Liver biopsy: लिवर बायोप्सी क्या है?

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

परिभाषा

लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) क्या है?

लिवर बायोप्सी एक प्रक्रिया है जिसमें सुई की मदद से लिवर से टिशू का नमूना लिया जाता है। फिर इसे लैब में भेजा जाता है मूल्यांकन के लिए जिससे डॉक्टर को कई तरह के रोगों और लिवर की बीमारियों के निदान में मदद मिलता है।

पर्क्यूटेनियस लिवर बायोप्सी का सबसे आम तरीका है जिसमें पेट के माध्यम से एक पतली सी सुई डालकर लिवर से टिशू का छोटा सा टुकड़ा निकाला जाता है। लिवर बायोप्सी के दो अन्य तरीके भी हैं- एक में गर्दन की नस (ट्रांसजुगुलर) का इस्तेमाल होता है जबकि दूसरे में पेट में छोटा चीरा (लैप्रोस्कोपिक) लगाकर सुई से लिवर का टिशू निकाला जाता है।

लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) क्यों किया जाता है ?

लिवर बायोप्सी किसी तरह की क्षति और बीमारी के संकेतों की पहचान के लिए किया जाता है। यह लिवर की बीमारी की गंभीरता भी निर्धारित करता है।

डॉक्टर आपको लिवर बायोप्सी की सलाह देगा यदि आपकाः

  • लिवर टेस्ट का परिणाम असामान्य है जिसे समझाया नहीं जा सकता
  • इमेजिंग टेस्ट में लिवर में ढेर सारे ट्यूमर या असामान्यताएं दिखना
  • लगातार बुखार आना, वज़ह स्पष्ट न होना

लिवर बायोप्सी आमतौर पर लिवर की कुछ बीमारियों के निदान और उनका स्टेज पता करने के लिए भी कियाजाता है जिसमें शामिल हैं-

  • नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिसीज
  • क्रोनिक हेपेटाइटिस बी या सी
  • ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस
  • एल्कोहलिक लिवर डिसीज
  • प्राइमरी पित्त सिरोसिस
  • प्राइमरी स्केलेरोसिंग कोलिन्जाइटिस
  • हेमोक्रोमैटोसिस
  • विल्सन डिसीजf

और पढ़ें: Testicular biopsy: टेस्टिक्युलर बायोप्सी क्या है?

एहतियात/चेतावनी

लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए ?

लिवर बायोप्सी हर किसी के लिए नहीं होता। इसकी सलाह नहीं दी जाती यदिः

  • मरीज प्रक्रिया की लंबी अवधि के दौरान शांत रहने में असमर्थ है।
  • संदिग्ध वैस्क्युलर लिजन
  • रक्तस्राव की प्रवृत्ति (जैसे, INR> 1.2 विटामिन K प्राप्त करने के बावजूद, रक्तस्राव का समय> 10 मिनट)
  • गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (<50,000 / एमएल)

बायोप्सी वाली जगह पर आपको थोड़ा दर्द महसूस होगा और असहज महूसस होगा। आपके कंधे और पीठ में भी दर्द हो सकता है। यदि ज़रूरी हुआ तो आपको पेन किलर दिया जाएगा।

अनुभवी डॉक्टर द्वारा लिवर बायोप्सी किया जाना बिल्कुल सुरक्षित है। इसके संभावित जोखिम:

  • बायोप्सी के बाद उस जगह पर दर्द और असहजता महसूस करना सामान्य है। यदि दर्द ज़्यादा है तो आपको दर्द की दवा दी जा सकती है, जैसे- कोडीन के साथ एसिटामिनोफेन (कोडीन के साथ टाइलेनोल)।
  • लिवर बायोप्सी के बाद रक्तस्राव भी होता है। बहुत ज़्यादा रक्तस्राव होने पर इसे रोकने के लिए ब्लड ट्रांसफ्यूज़न या सर्जरी करनी पड़ सकती है।
  • शायद ही कभी, बैक्टीरिया उदर गुहा या रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं।
  • लिवर बायोप्सी के दौरान शायद कभी आकस्मिक रूप से चोट पहुंच सकती है। सुई किसी आंतरिक अंग जैसे पिताशय की थैली या फेफड़े में चिपक सकती है।

ट्रांसजुगुलर प्रक्रिया में एक पतली ट्यूब को गर्दन की बड़ी नस में डाला जाता है जो लिवर से गुजरता है। ट्रांसजुगुलर लिवर बायोप्सी से जुड़े जोखिमः

  • गर्दन में रक्त (हेमटोमा) का संग्रह। ब्लड उस साइट के आसपास पूल कर सकता है जहां कैथेटर डाला गया था, संभवतः जिससे दर्द और सूजन हो सकता है।
  • चेहरे की नसों की अस्थाई समस्या। ट्रांसजुगुलर प्रक्रिया में हो सकता है कभी चेहरे या आंखों की नसों को नुकसान पहुंचे जिससे कुछ समय के लिए ड्रॉपिंग आईलिड जैसी समस्या हो सकती है।
  • कुछ समय के लिए आवाज़ से संबंधित समस्या हो सकती है। आवाज़ कम हो सकती है या कुछ देर के लिए जा सकती है।
  • फेफड़े पंचर हो सकते हैं। यदि सुई गलती से फेफड़े में चिपक गई तो वह क्षतिग्रस्त हो सकता है।

और पढ़ें : Lymph node biopsy: लिम्फ नोड बायोप्सी क्या है?

प्रक्रिया

लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) के लिए कैसे तैयारी करें ?

लिवर बायोप्सी के लिए तैयारी करते समय आपको:

  • डॉक्टर को बताना होगा अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में, लंग या ह्रार्ट कंडिशन के बारे में, यदि किसी दवा से एलर्जी है या रक्तस्राव की समस्या है।
  • डॉक्टर को बताएं यदि आप रक्त को पतला करने के लिए कोई दवा ले रहे हैं। प्रक्रिया से पहले डॉक्टर आपको इसका कोई और विकल्प बताएगा।
  • प्रक्रिया के बारे में डॉक्टर से बात करें।
  • यदि कोई ज़रूरी ब्लड टेस्ट किया गया है तो बताएं।
  • पता करें कि प्रक्रिया से कितने घंटे पहले आपको कुछ नहीं खाना है।
  • प्रक्रिया के बाद घर जाने की व्यवस्था कर लें।

प्रक्रिया से कुछ हफ्ते पहले एस्प्रिन न लें, एस्प्रिन वाले उत्पाद या एंटी इंफ्लामेट्री ड्रग्स (जैसे आईब्रूफेन, एडविल, मोट्रिन, नैप्रोसिन आदि) न लें जब तक डॉक्टर इसकी सलाह न दें। डॉक्टर की सलाह के बिना पहले से ली जाने वाली कोई दवा भी बंद न करें।

लैब टेस्ट लिवर बायोप्सी के दिन या उससे 2-3 दिन पहले किया जा सकता है, जैसे डॉक्टर कहे। इन टेस्ट में ब्लड काउंट, प्लेटलेट काउंड और खून के थक्का जमाने की क्षमता का परीक्षण किया जाता है।

लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) के दौरान क्या होता है ?

इस प्रक्रिया में सिर्फ 5 मिनट लगते हैं। आपको ऑब्ज़र्वेशन के लिए 4 घंटे रिकवरी रूम में रखा जा सकता है।

यह टेस्ट अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्र पर किया जा सकता है। इसके लिए आपको सुबह जल्दी आना होगा। हेल्थ टीम आपकी मेडिकल हिस्ट्री और ली जाने वाली दवाओं की जांच करेगी।

बायोप्सी से तुरंत पहले आपको:

  • बांह की नस में एक आईवी लाइन लगाई जाएगी ताकि जरूरत पड़ने पर दवा दी जा सके।
  • प्रक्रिया के दौरान आप रिलैक्स रह सके इसके लिए सीडेटिव दिया जा सकता है।
  • यदि ज़रूरत हो तो शौचालय का इस्तेमाल करें, क्योंकि प्रक्रिया के बाद कुछ घंटों तक आपको बिस्तर पर ही रहना होगा

लिवर बायोप्सी के चरण इसके लिए अपनाए गए तरीकों के आधार पर अलग हो सकती है:

  • पर्क्यूटेनियस बायोप्सी। आपकी बायोप्सी शुरू करने के लिए डॉक्टर पेट पर टैब करके या अल्ट्रासाउंड पिक्चर के ज़रिए लिवर का पता लगाएगा। कुछ मामलों में बायोप्सी के दौरान सुई को लिवर तक पहुंचाने के लिए अल्ट्रासाउंड का इस्तेमाल किया जाता है। आप पीठ के बल लेट जाएंगे और दाहिने हाथ को सिर के ऊपर टेबल पर रखेंगे। जहां सुई लगाई जानी हां इस हिस्से को सुन्न करने के लिए डॉक्टर दवा लगाएगा। फिर डॉक्टर आपके दाहिने तरफ रिब केज के नीचे एक छोटा सा चीरा लगाकर बायोप्सी सुई डालता है। बायोप्सी में बस चंद सेकंड लगते हैं। सुई जब लिवर के अंदर जाकर बाहर आती है तो तब तक आपको सांस रोककर रखने के लिए कहा जाता है।
  • ट्रांसजुगुलर बायोप्सी। आप एक्स रे टेबल पर पीठ के बल ले जाएंगे। आपका डॉक्टर आपकी गर्दन की एक तरफ सुन्न करने वाली दवा लगाएगा, फिर छोटा सा चीरा लगाकर एक लचीली प्लास्टिक की ट्यूब जुगुलर नस में डालेगा। ट्यूब को जुगुलर नस और लिवर की सबसे बड़ी नस (हेपाटिक वेन) में पिरोया जाता है। इसके बाद डॉक्टर ट्यूब में कॉन्ट्रास्ट डाई इंजेक्ट करके एक्स-रे इमेज की सीरिज बनाता है। डाई चित्रों पर नज़र है जिससे डॉक्टर को हेपाटिक नस दिखाई देती है। इसके बाद बायोप्सी सुई ट्यूब में डाली जाती है और एक या उससे ज़्यादा सेल्स लिवर से सैंपल के लिए निकाले जाते हैं। कैथेटर को सावधानीपूर्वक निकाला जाता है और गले पर जो चीरा लगाया गया है वहां बैंडेज लगा दिया जाता है।
  • लेप्रोस्कोपिक बायोप्सी। लेप्रोस्कोपिक बायोप्सी के दौरान आपको सामान्य एनेस्थेटिक्स दिया जाता है। टेबल पर आपको पीठ के बल लेटना होगा, डॉक्टर आपके पेट में एक या अधिक छोटा सा चीरा लगाएगा। इसके माध्यम से खास औजार अंदर डाले जाते हैं जिसमें एक छोटा वीडियो कैमरा भी शामिल है जिसकी मदद से ऑपरेटिंग रूम में अंदर की फोटो दिखती है। डॉक्टर इन फोटो की मदद से खास औजार को लिवर के टिशू निकालने के निर्देश देता है। फिर औजार निकालकर चीरे पर टांके लगाए जाते हैं।

लिवर बायोप्सी (Liver Biopsy) के बाद क्या होता है ?

बायोप्सी के बाद आप उम्मीद कर सकते हैं:

  • आपको रिकवरी रूम में ले जाया जाएगा, जहां नर्स आपका ब्लड प्रेशर, प्लस और सांस चेक करेगी।
  • 2 से 4 घंटे आराम करें यदि ट्रांसजुगुलर प्रक्रिया से बायोप्सी हुई है तो ज़्यादा आराम की ज़रूरत है।
  • कुछ हफ्ते के बाद आप अपनी रूटीन लाइफ शुरू कर सकते हैं।

लिवर बायोप्सी बारे में किसी तरह का प्रश्न होने पर और उसे बेहतर तरीके से समझने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

और पढ़ें: Breast biopsy: ब्रेस्ट बायोप्सी क्या है?

परिणामों को समझें

मेरे परिणामों का क्या मतलब है?

लैब में विशेषज्ञ डॉक्टर (पैथोलॉजिस्ट) आपके लिवर टिशू की जांच करेगा। वह इसके ज़रिए लिवर की बीमारी या किसी तरह की क्षति का पता लगाता है। बायोप्सी का परिणाम कुछ दिनों से एक हफ्ते के अंदर आ जाता है।

परिणाम आने के बाद डॉक्टर इसके बारे में आपको समझाएगा।आपकी लिवर की बीमारी का निदान किया जाता है या उसकी गंभीरता के आधार पर इसे ग्रेड नंबर दिए जाते हैं- बहुत थोड़ा, सामान्य या गंभीर। यदि आपको किसी तरह के इलाज की ज़रूरत है तो डॉक्टर इस बारे में आपसे बात करेगा।

सभी लैब और अस्पताल के आधार पर लिवर बायोप्सी की सामान्य सीमा अलग-अलग हो सकती है। परीक्षण परिणाम से जुड़े किसी भी सवाल के लिए कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

 हैलो हेल्थ ग्रुप किसी तरह की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता है।  

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 20, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अक्टूबर 9, 2019