क्यों कुछ लोगों की हाइट छोटी होती है ?

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

गिनिस वर्ल्ड रिकार्ड्स में दुनिया की सबसे छोटी महिला के खिताब से नवाजी गई ज्योति को कौन नहीं जनता है। ज्योति पूरे विश्व में सबसे छोटी महिला हैं। लेकिन, क्या आपने कभी ये सोचा है कि कुछ लोगों की लंबाई (हाइट) इतनी कम क्यों होती है ? जिन लोगों की लंबाई जरूरत से ज्यादा कम होती है, उन्हें बौना (Dwarf) या नाटा कहा जाता है।

क्या है बौनापन ?

मनुष्य का अत्यधिक या सामान्य से कम छोटा होना, पैर छोटे होना और हाथों की लंबाई ज्यादा होना या हाथ छोटे और पैर की लंबाई ज्यादा होना और शारीरिक रचना सामान्य लोगों से अलग होने की स्थिति को बौना या नाटा कहा जाता है।

इसके दो प्रकार होते हैं-

1. डिस्प्रपोर्शन ड्वॉर्फिजम (Disproportionate dwarfism)- यदि शरीर का आकार सामान्य नहीं होगा, तो शरीर के कुछ हिस्से छोटे हैं। डिसऑर्डर के कारण हड्डियों का विकास नहीं हो पाता है। जिसका असर शारीरिक रचना पर पड़ती है।

2. प्रोपोशनेट ड्वॉर्फिजम (Proportionate dwarfism)- जन्म से हाइट कम होना या बचपन से ही लंबाई नहीं बढ़ना प्रोपोशनेट ड्वॉर्फिजम कहलाता है।

बौनेपन का कारण क्या है ?

ज्यादातर लंबाई कम होने की पीछे जेनेटिक डिसऑर्डर माना जाता है। लेकिन, कुछ लोगों में इसके कारणों का पता नही चल पाता है। बौनेपन की अधिकांश घटनाएं माता-पिता से जुड़ी हुई होती है।

  • (Achondroplasia)- जेनेटिक परेशानियों की वजह से एकॉन्ड्रोप्लाजिया होता है।
  • टर्नर सिंड्रोम- टर्नर सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जो सिर्फ लड़कियों और महिलाओं को प्रभावित करती है। जब एक क्रोमोसोम (एक्स गुणसूत्र) गायब या आंशिक रूप से गायब होता है। एक महिला को प्रत्येक माता-पिता से एक एक्स क्रोमोसोम विरासत में मिलता है। टर्नर सिंड्रोम वाली महिला में एक ही सेक्स क्रोमोसोम काम करता है।
  • ग्रोथ हॉर्मोन में कमी- ग्रोथ हॉर्मोन में कमी की वजह से किसी भी व्यक्ति की लंबाई नहीं बढ़ सकती है।
  • अन्य कारण- बौनेपन के अन्य कारणों में आनुवंशिक विकार (जेनेटिकल), हार्मोन की कमी या पौष्टिक आहार की कमी हो सकती है। वैसे कभी-कभी इसके कारणों को समझना मुश्किल भी हो सकता है।

बौनेपन की वजह से क्या-क्या परेशानी हो सकती है ?

  • शरीर का विकास सही वक्त पर न होना।
  • बैठने या चलने में परेशानी होना।
  • बार-बार कानों में इंफेक्शन होना और सुनने में दिक्कत होना।
  • पैरों का सीधा न होना।
  • सोने के दौरान सांस लेने में समस्या होना।
  • स्पाइनल कॉर्ड पर अत्यधिक दबाव पड़ना।
  • मस्तिष्क के चारों ओर अतिरिक्त द्रव (हाइड्रोसिफलस) होना।
  • सामान्य से अलग दांत होना।
  • पीठ में दर्द या सांस लेने में तकलीफ होने के साथ-साथ पीठ में दर्द होना।
  • निचली रीढ़ (स्पाइनल स्टेनोसिस) में परेशानी महसूस होना।
  • अर्थराइटिस।
  • अत्यधिक वजन बढ़ना। जिससे जोड़ो की समस्या हो सकती है।
  • टर्नर सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्ति को दिल की बीमारी भी हो सकती है।

बौनेपन का इलाज क्या है ?

शुरुआती निदान और उपचार बौनापन से जुड़ी कुछ समस्याओं को रोकने या कम करने में मदद कर सकते हैं। ग्रोथ हॉर्मोन की कमी से संबंधित बौनेपन वाले लोगों का विकास हॉर्मोन के साथ इलाज किया जा सकता है। कई मामलों में बौनापन आर्थोपेडिक या मेडिकल प्रॉब्लम की वजह से भी होती हैं। अगर एक साल तक बच्चे में विकास ठीक से न हो, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जरूर मिलें। डॉक्टर भी 2 से 3 साल तक बच्चे पर कड़ी निगरानी रख इलाज करते हैं। बच्चों को नियमितरूप से आउटडोर एक्टिविटी में जरूर शामिल होने दें।

यह भी पढ़ें: Turner syndrome: टर्नर सिंड्रोम क्या है?

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 13, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 13, 2019

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