क्या मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Multiple Personality Disorder) का मतलब पागलपन है ?

By Medically reviewed by Dr. Hemakshi J

मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर एक ऐसी समस्या है जिसमें कोई व्यक्ति दो या दो से ज्यादा  पहचान लिये जीने लगता है। ये सभी पहचान एक दूसरे से अलग होती हैं। एक समय पर वो अलग-अलग पहचान अख़्तियार कर बर्ताव कर सकता है। यह समस्या बहुत ही गंभीर है। आपने कुछ हिंदी फ़िल्मों में भी इस समस्या को उजागर होते देखा होगा, जैसे भूल भूलैया, तमाशा, अपरिचित, कार्तिक कॉलिंग कार्तिक एवं अन्य। इस समस्या को आमतौर पर पागलपन से जोड़ा जाता है। तो क्या है इस परेशानी का कारण, लक्षण, और उपाय इससे बचने का आज हम ये सब आपको बताने वाले हैं।

कहीं आप मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Multiple Personality Disorder) से ग्रस्त तो नहीं?

मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर की समस्या कब आपके असली व्यक्तित्व से चिपक जाती है आपको पता भी नहीं चलता। आपको ऐसा लगता है कि आप सिर्फ ख़ुद से बातें कर रहें हैं पर असल में आप उस समय किसी और व्यक्तित्व की गिरफ़्त में होते हैं। डॉक्टरों द्वारा पहचाने गए कुछ लक्षण निम्नलिखित हैं जो आपको ये पहचानने में मदद कर सकते हैं कि आपको मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर है या नहीं।

  •   हमेशा ऐसा लगना कि ‘समय का भान न होना
  •   मन में सदा उलझन या भ्रम की स्थिति बने रहना
  •   याददाश्त का कमज़ोर होना
  •   अपने रेगुलर बिहेव्यर से अलग बिहेव करना 
  •   एक से ज्यादा व्यक्तित्व का प्रदर्शन 
  •   डिटैच्मेंट की भावना

मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर (Multiple Personality Disorder) का कारण क्या है?

अधिकतर लोगों में मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर की समस्या उनके बचपन के अनुभवों की वजह से विकसित होती है। विशेषज्ञों के अनुसार जिन बच्चों के साथ बचपन में मानसिक तनाव, यौन उत्पीड़न और मारपीट की घटना हुई होती है उन्हें आगे चलकर मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर होने की संभावना बहुत ही प्रबल होती है। यह समस्या किसी भी उम्र, जाति, लिंग या सोशल बैक्ग्राउंड के व्यक्ति को हो सकती है। अपनी वास्तविकता से दूर होकर किसी और व्यक्तित्व को अपनाना लोगों को स्थायी रूप से शांत और सुखी होने का एक उपाय दिखता है पर उसके लंबे समय तक जाने वाले दुष्परिणाम बहुत ही गंभीर होते हैं।

मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर का इलाज क्या है?

मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर का उपचार आमतौर पर मनोचिकित्सक द्वारा किया जाता है। मनोचिकित्सक ‘टॉकिंग थेरपी’ की मदद से इस समस्या की जड़ को खोजता है और उसका निवारण करता है। इस सेशन में रोगी को मुख्यतः निम्नलिखित बिंदुओं पर जागरूक किया जाता है।

  •   रोगी को उसकी स्थिति के बारे में बताया जाता है 
  •   मानसिक रूप से अलग-अलग भावनाओं को सहने की शक्ति बढ़ायी जाती है 
  •   इम्पल्सिव नेचर को नियंत्रित करने पर काम करते हैं
  •   भविष्य में दोबारा से डिटैच्मेंट की भावना ना आये 
  •   टाइम और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर ज़ोर 
  •   रिश्तों में सुधार की सीख 

ऐसे ही कई और बिंदु हैं जिन पर मनोचिकित्सक रोगी का मार्गदर्शन करता है। इस प्रकार की चिकित्सा शैली से रोगी का आत्मबल और विश्वास बढ़ता है और वह मानसिक रूप से और भी दृढ़निश्चय होता है।

निष्कर्ष :

मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर को ठीक करने में लंबा समय लगता है। मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर की वजह से व्यक्ति को सामाजिक शर्म, ग्लानि, चिंता और दुःख का सामना करना पड़ता है। मल्टिपल पर्सनालिटी डिसऑर्डर के रोगियों में आत्महत्या का भय भी रहता है। इसीलिए सही और शीघ्र उपचार बहुत ही जरूरी है। यह बाक़ी अन्य बीमारियों की तरह ही है। बस इसके उपचार के दौरान हमें रोगी से थोड़ी संवेदनशीलता रखनी चाहिए।

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रिव्यू की तारीख जुलाई 10, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया जुलाई 10, 2019

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