बच्चों के विकास के लिए परिवार और कम्युनिटी क्यों है जरूरी ?

By Medically reviewed by Dr. Abhishek Kanade

भले ही आज समय बदल गया हो लेकिन, बच्चों के लिए परिवार का  महत्व आज भी वही है जो पहले हुआ करता था। बच्चों के अंदर अच्छे मैनर्स और रिश्तों की समझ परिवार में रहकर के ही विकसित हो सकती है। लेकिन, एक सच ये भी है कि बच्चे के विकास में परिवार के साथ और आस-पास के लोगों का भी बहुत योगदान रहता है। यह कहावत एकदम सही है। बच्चे के जन्म के बाद आपके घरों में भले ही किलकारियां गूंजी हो। खुशियों की लहर पूरे गांव और रिश्तेदार के बीच होती है।  पेरेंट्स बच्चों के पहले टीचर होते हैं। वहीं, समाज उनकी दूसरी पाठशाला माना जाता है।

बच्चों के लिए परिवार क्यों है जरूरी?

एक शोध से पता चलता है कि बच्चे के मानसिक विकास में उसका सक्रिय शारीरिक और मनो-भावनात्मक (Psycho-emotional) होना बहुत आवश्यक होता है। शोध में यह भी पता चला कि बच्चे जान पहचान और अपने करीबी लोगों पर जल्दी विश्वास करते हैं। इन संबंधों से उन्हें प्यार, संरक्षण, सुरक्षा, उत्तरदायित्व और प्रोत्साहन मिलता है। रिश्ते के साथ बच्चे का पहला अनुभव माता-पिता और उसका परिवार व घर होता है।

  • परिवार और समुदाय की भागीदारी स्कूलों, परिवार और सामुदायिक समूहों और व्यक्तियों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देती है।
  • शोध से पता चलता है कि जिन छात्रों के माता-पिता उनकी शिक्षा में शामिल होते हैं, उनमें इसकी संभावना अधिक होती है।
  • अगर बच्चा स्कूल में है तो वहां इन्हें अच्छी तरह से अपनाएं :

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सभी बच्चों को सीखने को बढ़ावा देने के लिए स्कूल, पेरेंट्स, परिवार और समुदाय को मिलकर काम करना चाहिए। जब स्कूल सक्रिय रूप से माता-पिता और सामुदायिक संसाधनों को शामिल करते हैं तो वे छात्रों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं के लिए अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होते हैं। परिवार और समुदाय की भागीदारी स्कूलों, परिवार और सामुदायिक समूहों और व्यक्तियों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देती है। इन साझेदारियों के परिणामस्वरूप संसाधनों को साझा और अधिकतम किया जाता है। और वे बच्चों और युवाओं को स्वस्थ व्यवहार विकसित करने और स्वस्थ परिवारों को बढ़ावा देने में मदद करते हैं।

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शोध से पता चलता है कि जिन छात्रों के माता-पिता उनकी शिक्षा में शामिल होते हैं, उनमें इसकी संभावना अधिक होती है:

  • बच्चों को बड़ा करने में परिवार और समुदाय (समाज) का योगदान किस प्रकार होता है ? इसमें कोई दो राय नहीं कि जो परिवार बड़े होते हैं वहां बच्चे को बहुत प्यार और दुलार मिलता है। यही स्नेह और प्यार हमारे बच्चे के भीतर सुरक्षित होने की भावना को बढाता है। इससे बच्चों में दुनिया को देखने और जानने की उत्सुकता बढ़ी रहती है।
  • एक परिवार में बच्चे की जन्म के बाद उसका परिवार में एक अलग ही स्थान बन जाता है। उसे केवल परिवार के सदस्य का हिस्सा नहीं समझा जाता। बल्कि, घर के सभी सदस्य उसका दिलो-जान से खास ध्यान रखते हैं। इस तरह बच्चा विभिन्न व्यक्तियों के साथ रहता है, और सबका दुलारा बनता है। इतने व्यक्तियों के सम्पर्क में रहने से जाहिर है बच्चों पर सबका कुछ-न-कुछ प्रभाव पड़ता है।
  • बच्चा परिवारऔर समाज में रह कर ही चीजों को देखना, उसे परखना और नई चीजों को सीखता है। समुदाय में रहकर ही उसे नयी बातें सीखने के अवसर मिलते हैं।
  • अपने परिवार व लोगों को विभिन्न कार्यों में लगा देख उसे भी धीरे-धीरे अपने कामों को समझने का ललक जगता। इतना ही नहीं, अपनी उम्र के मुताबिक जैसे-जैसे वह बड़ा होता है, जिम्मेदारी भी उठाना सीखता है।
  • बड़े परिवार में हर उम्र के लोग होते हैं। चूंकि बच्चा हर समय देखता और सीखता रहता है,इसलिए हर उम्र के लोगों के साथ रहना उसके लिए फायदेमंद होता है। उसे परिवार में तरह तरह के लोगों से मिलने,खेलने तथा सीखने के अवसर मिलते हैं।
  • बच्चा परिवार और समुदाय नहीं बल्कि हर समय और हर जगह सीखता रहता है। इसलिए उसे सिखाने या समझाने का कोई खास समय या स्थान नहीं बनाना चाहिए।

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रिव्यू की तारीख अक्टूबर 10, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अक्टूबर 10, 2019

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