सप्ताह दर सप्ताह

प्रेग्नेंसी का पहले सप्ताह में मुझे किन जा​नकारियों का आवश्यकता है?

By Medically reviewed by Dr. Pooja Bhardwaj

गर्भ में शिशु का विकास

ज्यादातर महिलाओं को उनके पहले हफ्ता की प्रेग्नेंसी का पता ही नहीं चल पाता है। उनके लिए यह अंदाजा लगाना ही बहुत मुश्किल होता है कि वह प्रेग्नेंट है या नहीं? प्रेग्नेंसी कंर्मेशन होते-होते आपकी प्रेग्नेंसी अमूमन चार सप्ताह की भी हो चुकी होती है। हालांकि कंसेपशन ऑफ प्रेग्नेंसी एग्जैक्टली कब हुआ होगा, ये पता लगा पाना बेहद मुश्किल है, यही वजह है कि डॉक्टर्स लास्ट पीरियड्स के पहले दिन से ड्यू डेट का कैलक्युलेशन करते हैं। अभी भी कन्फ्यूज्ड? बस आप इतना समझिए कि डॉक्टर आपकी प्रेग्नेंसी के ड्यू डेट कैलक्युलेशन में पहले के दो हफ्ते भी काउंट करते हैं। प्रेग्नेंसी कंफर्म होते ही आपके शुभचिंतकों की ओर से सलाहों की बौछार सी लग जाती है, जिससे महिलाएं अकसर कंफ्यूज हो जाती हैं।
प्रेग्नेंसी अमूमन 40 हफ्ते की होती है। कभी-कभी बच्चे 38 हफ्ते में भी पैदा हो सकते हैं और कभी 42 हफ्ते भी लग सकते हैं। 42 हफ्ते से ज्यादा इंतजार करना मुश्किल भरा भी हो सकता है। इसलिए, डॉक्टर्स 42 हफ्ते से ज्यादा इंतजार करने की सलाह कभी नहीं देते हैं।
हालांकि, आपने कब कंसीव किया यह पता लगा पाना बेहद मुश्किल है, यही वजह है कि डॉक्टर लास्ट मेंस्ट्रुअल साइकिल के पहले दिन से ड्यू डेट का कैलक्युलेशन करते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को उनके शारीरिक बदलावों को समझना बेहद जरूरी है।  मेंस्ट्रुअल साइकिल के पहले दिन से ही एग बढ़ना शुरू कर देता है। एमसी के 14 दिनों तक एक अच्छी तरह से मैच्योर हो जाता है और ओव्युलेशन के लिए तैयार हो जाता है। ओव्युलेशन के दौरान आपकी ओवरी से एग रिलीज होता है।

शारीरिक और दैनिक जीवन में बदलाव

मेरी बॉडी में कैसे बदलाव आएंगे?

प्रेग्नेंसी हार्मोन के कारण आपके बॉडी में कई बदलाव होते हैं, जैसे कि :

  • ब्रेस्ट में सूजन या दर्द रहना।
  • लोअर एब्डॉमिनल क्रैंप्स का होना, जो एक-दो दिनों में सामान्य हो जाते हैं। अगर ज्यादा दिनों तक दर्द रहे और दर्द बढ़ता जाए, तो तुरंत अपने गायनाकोलॉजिस्ट को संपर्क करें। कई बार पेट दर्द गर्भपात का भी संकेत भी हो सकता है। इसलिए, इसे नजरअंदाज ना करें।

प्रेग्नेंसी में किन ख़ास बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

प्रेग्नेंसी के दौरान, नेगेटिव विचार और चिंता से तो आप कोसों दूर रहने की कोशिश करें। आप के आसपास का माहौल स्ट्रेस फ्री होना भी जरूरी है, आप को अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। कुल मिलाकर तनाव रहित खुश हाल लाइफस्टाइल आने वाले बच्चे और मां के लिए एक पॉजिटिव वातावरण तैयार करता है। इस दौरान, आपको एकदम हेल्दी और बैलेंस डाइट रखना होता है।

  • कार्बोहाइड्रेट की मात्रा थोड़ी कम करनी है और प्रोटीन की मात्रा थोड़ी बढ़ा देनी है।
  • अपनी डाइट में फ्रेश फ्रूट्स और ड्राई फ्रूट्स को जरूर शामिल करें।
  • डेयरी प्रोडक्ट्स की मात्रा बढ़ानी है। 
  • बाहरी खाना, बेकरी प्रोडक्ट्स और खासकर जंक फूड अवॉइड करना चाहिए। 
  • नियमित रूप से व्यायाम करती रहें।
  • कैफीन की मात्रा कम करनी है जैसे कि चाय कॉफी।
  • कोल्ड ड्रिंक्स न लें।
  • शराब, तंबाकू या फिर स्मोकिंग करते हों, तो वह आपको बंद करनी है।
  • आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।
  • बदलते हार्मोन के कारण एसिडिटी और गैस की समस्या प्रेग्नेंसी में बनी रहती है। बेहतर होगा कि आप कुछ कुछ देर में थोड़ा-थोड़ा खाना खाएं और तली हुई चीजों से परहेज करें।
  • प्रिनटल विटामिंस डॉक्टर्स की सलाह से शुरू कर देना चाहिए, जैसे कि फोलिक एसिड, विटामिन B12,D3 आदि।

डॉक्टरी सलाह

इस दौरान आपको प्रिकनसेप्शन चेकअप उतना ही जरूरी है, जितना प्रेग्नेंसी के दौरान के चेकअप। अगर यह आपकी सेकंड प्रेग्नेंसी हो, तो भी प्रिकंसेप्शन चेकअप जरूर करवाएं। पहली प्रेग्नेंसी के दौरान जो भी परेशानियां आपने फेस की हों, वो अपने डॉक्टर से खुलकर डिस्कस करें। अगर आप पहले से ही किसी मेडिकेशन पर हैं, तो डॉक्टर को अपना प्रिस्क्रिप्शन दिखाएं। डायबिटिज, ब्लड प्रेशर, अस्थमा और डिप्रेशन के मरीज अपनी चल रही दवाइयों को डॉक्टर की परामर्श लेकर ही जारी रखें।

कुछ सवाल जो आप डॉक्टर से पूछ सकती हैं-

  • क्या मैं प्रेगनेंसी के दौरान अपनी प्रिसक्रिप्शन और ओवर द काउंटर मेडिकेशंस लेना जारी रख सकती हूं?
  • प्रेगनेंसी से पहले हमें क्या करना चाहिए?
  • क्या प्रेग्नेंट होने से पहले किसी वैक्सीनेशन की जरूरत है?

मुझे कौन से टेस्ट कराने चाहिए?

पैपस्मियर-

इस टेस्ट से उन सारे कारणों का पता लग जाएगा जो आपके कंसीव होने के चांसेस को प्रभावित कर सकते हैं।

जेनेटिक टेस्ट

इस टेस्ट में जेनेटिकली माता पिता के थ्रू बच्चों में ट्रांसफर होने वाली बीमारियों का पता लगाया जाता है। सिकल सेल एनीमिया और थैलासीमिया जैसी बीमारियां जेनेटिक डिसऑर्डर की लिस्ट में शामिल हैं।

ब्लड टेस्ट

इससे आप प्रेग्नेंसी के समय कई आने वाली गंभीर समस्या से बच सकती हैं या फिर समस्या का पहले ही हल निकाल सकती हैं। ब्लड टेस्ट से हीमोग्लोबिन के लेवल का पता लगाया जाता है। प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड ग्रुप का जानना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि डिलिवरी के समय कभी भी आप को खून की जरूरत पड़ सकती है। ब्लड टेस्ट से आपके शरीर में किसी प्रकार के इंफेक्शन का पता लगाया जा सकता है, जिसका गलत असर प्रेग्नेंसी के दौरान या बाद में आपके होने वाले बच्चे पर भी पड़ सकता है।

इन सारे टेस्ट्स की मदद से आपकी गायनेकोलॉजिस्ट समय रहते ऐसी किसी भी समस्या का हल निकाल सकती है।

हेल्दी और सुरक्षित प्रेग्नेंसी टिप्स

आप यह जानकर हैरान हो जाएंगी कि प्रेग्नेंसी के दौरान आपका शरीर की इम्यूनिटी पहले की तुलना में कमजोर हो जाती है। इसका मतलब आपका बॉडी इंफेक्शन प्रोन हो जाता है, इसलिए बेहतर यही रहेगा कि आप सुरक्षित प्रेग्नेंसी के लिए कुछ वैक्सीन का डिस्कशन अपने डॉक्टर से जरूर कर लें। प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले वैक्सीनेशन का सबसे बढ़िया समय होता है। सामान्यत: लाइव अटेन्यूटेड वैक्सिन डॉक्टर्स प्रेग्नेंसी के दौरान अवॉइड करते हैं। जैसे कि पोलियो, एमएमआर, चिकनपॉक्स आदि। आइए जानें कौन-कौन से वैक्सीन आपको प्रेग्नेंसी से पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान लेने चाहिए :

मीजल्स मम्प्स, रुबेला (MMR)

ये तीनों ही एयर बॉर्न बीमारियां है। रुबेला को जर्मन मीजल्स के नाम से भी जाना जाता है। यह वायरल इंफेक्शन शरीर पर रेड रैशेज के रूप में दिखाई देता है और धीरे-धीरे पूरे शरीर पर फैल जाता है। रुबेला और मिजल्स के लक्षण लगभग एक जैसे ही होते हैं। मीजल्स और रुबेला में एक खास अंतर ये होता है कि मीजल्स के दाने ज्यादातर लाल होते हैं और ये रूबेला से ज्यादा गंभीर होता है। अगर प्रेग्नेंसी के पहले महीने में यह बीमारी हो, तो डॉक्टर एबॉर्शन की सलाह दे सकते हैं। मम्प्स भी एक वायरल इंफेक्शन ही है, जिसका असर खासकर पैरोटिड ग्लैंड पर स्वैलिंग के रूप में दिखता है।
एमएमआर संक्रमित प्रेग्नेंसी से पैदा होने वाले लगभग 85% बच्चे गंभीर बीमारियों के शिकार हो सकते हैं।

गर्भधारण से तीन महीने पहले डॉक्टर से आप एमएमआर के वैक्सीन के लिए बात कर सकती हैं।

चिकनपॉक्स वैक्सीन

चिकनपॉक्स तेजी से फैलने वाली बीमारी है। वैरिसेला-जोस्टर वायरस के अटैक के कारण यह पूरे शरीर में फैल जाता है। चिकनपॉक्स इंफेक्टेड प्रेग्नेंसी वाले नवजात बच्चों में बर्थ डिफेक्ट का रिस्क हाई होता है।
इंफेक्टेड मरीज के डायरेक्ट स्किन कॉन्टैक्ट और उनके टॉवेल को भी इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। चिकनपॉक्स से प्रेग्नेंट महिला और उसके होने वाले बच्चे दोनों को नुकसान होने की पूरी आशंका रहती है। प्रेग्नेंसी से पहले ही इसकी वैक्सीन के लिए अपने डॉक्टर से बात जरूर कर लें।

फ्लू शॉट

नॉर्मली यह वैक्सीन प्रेग्नेंसी के पहले या तीसरे ट्राइमेस्टर में लगाया जाता है। किसी भी वजह से अगर आप वैक्सीन लेना भूल जाती हैं, तो चिंता की कोई बात नहीं। फ्लू शॉट आप अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान कभी भी ले सकती हैं। मां और उसके होने वाले बच्चे के लिए गंभीर उलझन पैदा कर सकता है। इसलिए, इसको टालना नहीं चाहिए। कायदे से प्रेग्नेंसी के पहले एक फ्लू वैक्सीन और दूसरा सातवें महीने में लेना चाहिए। डॉक्टर्स अगर रिकमेंड करें, तो आप फ्लू वैक्सीन को कभी मना न करें, क्योंकि आप पूरी प्रेग्नेंसी और डिलिवरी के बाद बच्चा भी छह महीने तक सुरक्षित रहता है।

मिलते हैं अगले हफ्ते की जानकारियों के साथ।

अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल है, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना न भूलें।

हेलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की चिकित्सा, परामर्श और निदान नहीं देता।

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रिव्यू की तारीख अगस्त 15, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अगस्त 15, 2019

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