जानिए ग्रीन कॉफी (Green Coffee) के फायदे

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जनवरी 22, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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ग्रीन कॉफी क्या है?

बहुत-से लोगों की दिन की शुरुआत ग्रीन-टी से होती है। लेकिन, आज इस आर्टिकल में हम ग्रीन टी की नहीं, बल्कि ग्रीन कॉफी की बात करेंगे। ग्रीन टी के साथ-साथ ग्रीन कॉफी का चलन भी इन दिनों काफी बढ़ गया है। दरअसल, ग्रीन कॉफी बिना भुने हुए कॉफी के ही फल होते हैं। भूनने के बाद कॉफी के बीजों में क्लोरोजेनिक एसिड नाम का रसायन कम हो जाता है। जबकि कच्ची ग्रीन कॉफी बीन्स में क्लोरोजेनिक एसिड की मात्रा ज्यादा होती है, जिसके कई स्वास्थ्य गुण हैं। लोग ग्रीन कॉफी का इस्तेमाल मोटापे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अल्जाइमर और बैक्टीरियल इन्फेक्शन जैसी बीमारियों के लिए करते हैं। आइए, जानते हैं और किस तरह फायदे करती है ग्रीन कॉफी।

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ग्रीन कॉफी (Green Coffee) के फायदे:

वजन कम करने में मददगार:

अगर आप बढ़ते वजन से परेशान हैं और कोई डायट या एक्सरसाइज रुटीन फॉलो नहीं कर पा रहे हैं, तो ग्रीन कॉफी आपके काम आ सकती है। कुछ अध्ययन बताते हैं कि यह पाचन तंत्र से कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को कम कर सकती है, जो ब्लड शुगर और इंसुलिन को कम करता है।

इसे पीने से बार-बार कुछ खाने का मन नहीं करता, जिसके कारण हम बहुत ज्यादा खाने से बचे रहते हैं। इससे लिवर में जमा हुई वसा कम होने में मदद मिलती है और वसा जलने वाले हॉर्मोन एडिपोनेक्टिन के कार्य में सुधार कर सकता है।

डायबिटीज पर नियंत्रण:

टाइप-2 डायबिटीज के शिकार मरीजों को ग्रीन कॉफी पीने की सलाह दी जाती है। इसके इस्तेमाल से ब्लड में शुगर का स्तर नॉर्मल रहता है।

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दिल के लिए फायदेमंद है ग्रीन कॉफी:

ग्रीन कॉफी में पाए जाने वाले क्लोरोजेनिक एसिड हार्ट की सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स रक्त वाहिकाओं को फैलाते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से ब्लड प्रेशर पर कंट्रोल हो जाता है। ब्लड प्रेशर नियंत्रण में रहने से दिल की कई बीमारियों के खतरे को टाला जा सकता है।

बढ़ती उम्र छुपाए:

ग्रीन कॉफी बढ़ती उम्र त्वचा पर झलकने नहीं देती। बढ़ती उम्र की निशानियां जैसे झुर्रियां, झाइयां, फाइन लाइंस, डार्क सर्कल्स आदि चेहरे पर उभरने लगते हैं। यह पीने से उसमे मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा में निखार लाते हैं। इसका इस्तेमाल खराब और मुहांसों वाली त्वचा को सुंदर बनाने के लिए भी किया जाता सकता है। ऐसा मानना है कि ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरोजेनिक एसिड शरीर के ब्लड शुगर और मेटाबोलिज्म को प्रभावित करके वजन कम करने में मदद करती है।

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ग्रीन कॉफी लिवर के लिए फायदेमंद:

ग्रीन कॉफी पीने से लिवर नेचुरल तरीके से डिटॉक्स होता है, जो लिवर के लिए अच्छा होता है।

तो अगर भी चाहते हैं ऊपर बताई गई समस्याओं से बचना, तो ग्रीन कॉफी का सेवन आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। इसका सेवन कब-कब और कितनी मात्रा में करना है, उसके लिए अपने डायटीशियन से सलाह ले सकते हैं।

ग्रीन कॉफी के शारीरिक फायदे समझने के बाद जानते हैं ये किस तरह शरीर में काम करता है। दरअसल ग्रीन कॉफी से जुड़े अभी ज्यादा शोध मौजूद नहीं है। इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए आप किसी डॉक्टर या हर्बलिस्ट से संपर्क कर सकते हैं। हालांकि ऐसा माना जाता है कि ग्रीन कॉफी में मौजूद क्लोरेजेनिक एसिड खून की नालियों (Blood Vessels) पर सकारात्मक प्रभाव डालता है जिसकी वजह से ब्लड प्रेशर कम होता है या कंट्रोल रह सकता है।

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ग्रीन कॉफी बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करता है

रिसर्च के अनुसार ग्रीन कॉफी के नियमित और संतुलित सेवन से शरीर में मौजूद बैड कोलेस्ट्रॉल को गुड कोलेस्ट्रॉल बनाने में मदद करता है।

ग्रीन कॉफी के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं।

इसका सेवन वयस्कों के लिए लाभदायक हो सकता है लेकिन, कुछ शारीरिक परेशानी भी हो सकती है। जैसे-

अगर ज्यादा समय से ग्रीन कॉफी का सेवन करते हैं तो ऐसा न करें क्योंकि इससे होमोसिस्टिनेमिया (Homocysteine) का खतरा बढ़ सकता है। वैसे इसके सेवन से पहले कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें।
प्रेग्नेंसी- गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
स्तनपान- अगर आप ब्रेस्ट फीडिंग करवाती हैं, तो भी ग्रीन कॉफी के सेवन से बचें।
एंग्जाइटी डिसऑर्डर- अगर आप एंग्जाइटी की समस्या से पीड़ित हैं, तो आपको ग्रीन कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे एंग्जाइटी बढ़ सकती है।
ब्लीडिंग डिसऑर्डर- अगर कोई व्यक्ति ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या से पीड़ित हैं, तो इसके सेवन से ब्लीडिंग डिसऑर्डर की समस्या और ज्यादा बिगड़ सकती है।
डायरिया- ग्रीन कॉफी में कैफीन मौजूद होता है। कैफीन का सेवन डायरिया जैसी बीमारी में ज्यादा सेवन किया गया तो स्थिति बिगड़ सकती है। यही नहीं अगर इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) की समस्या है तो ऐसी स्थिति में ग्रीन कॉफी के सेवन से बचना चाहिए।
ग्लूकोमा- ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन की ज्यादा मात्रा आंखों पर दवाब बढ़ा सकता है। इसलिए ग्लूकोमा के पेशेंट को इसके सेवन से पहले हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर- जरूरत से ज्यादा कैफीन की मात्रा ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में सहायक हो सकता है। जो व्यक्ति इसका संतुलित सेवन करते हैं वो परेशानी से बच सकते हैं।

ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)- ग्रीन कॉफी में मौजूद कैफीन शरीर में मौजूद कैलशियम को यूरिन के माध्यम से बाहर निकाल देते हैं। ऐसी स्थिति में हड्डियां और कमजोर हो सकती हैं। इसलिए ऑस्टियोपोरोसिस के पेशेंट को एक दिने में 2 कप से ज्यादा ग्रीन कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।
इन बातों का भी ख्याल रखें। जैसे-

एल्कोहॉल- अगर आप एल्कोहॉल का सेवन कर रहें हैं तो ग्रीन कॉफी का सेवन न करें। इससे शरीर में कैफीन की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाएगी और ब्लडस्ट्रीम में मिलने के कारण सिरदर्द और हार्ट रेट को बढ़ा सकता है।

डिप्रेशन की दवा

मेडिकेशन फॉर डिप्रेशन (MAOIs) जैसी दवाओं का अगर सेवन करते हैं तो ग्रीन कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। कई सारी डिप्रेशन की के कारण नर्वसनेस की समस्या हो सकती है और ग्रीन कॉफी नर्वसनेस को और ज्यादा बढ़ा सकता है।

बर्थ कंट्रोल पिल्स

ग्रीन कॉफी और गर्भनिरोधक दवाओं का सेवन एक साथ नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से सिरदर्द और तनाव बढ़ सकता है।

ग्रीन कॉफी का सेवन कितना करना चाहिए?

ग्रीन कॉफी का सेवन उम्र और शारीरिक स्थिति को समझकर करना चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार ग्रीन कॉफी या कोई भी अन्य हर्बल टी का सेवन 24 घंटे में 2 या 3 बार से ज्यादा नहीं करना चाहिए।

अगर आप ग्रीन कॉफी से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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