क्या आप एलजीबीटी समुदाय के सदस्य हैं, तो खुद को इस तरह से लाएं दुनिया के सामने

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अपडेट डेट अगस्त 28, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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अगर आप एलजीबीटी समुदाय के सदस्य हैं या खुद को  ऐसा महसूस करते हैं कि आप लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुएल या ट्रांसजेंडर हैं तो आपके मन में एक डर जरूर घर कर के बैठा होगा। वो डर है खुद को एक्सप्लोर करने का, समाज के सामने खुद को उस रूप में स्वीकार करने का जो आप असल में हो। अक्सर देखा गया है कि एलजीबीटी समुदाय के सदस्य होने के बावजूद लोग खुद को समाज के सामने डर के कारण उजागर नहीं कर पाते हैं। अगर किसी ने खुद को उजागर करने की कोशिश भी की तो उसका मजाक बनाया जाता है या बल प्रयोग से उसे दबाने की कोशिश की जाती है। शायद यही कारण है कि धारा 377 हटने के बाद भी एलजीबीटी समुदाय का डर अभी भी बना हुआ है। इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि एलजीबीटी समुदाय का डर हम दूर कैसे कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति एलजीबीटी समुदाय का है और खुद को दुनिया के सामने लाना चाहता है तो उसे क्या करना चाहिए और उस व्यक्ति के प्रति समाज की क्या जिम्मेदारी बनती है?

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एलजीबीटी समुदाय का डर क्या होता है?

सेक्स और जेंडर में अंतर

अगर हम सरकार के द्वारा जारी किए गए क्राइम रिकॉर्ड को देखे तो एलजीबीटी समुदाय के लोगों के खिलाफ क्राइम की एक लंबी लिस्ट मिल जाएगी। जिसमें ट्रांसजेंडर वयस्कों और बच्चों के गुमशुदा होने का मामला है। 2018 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार 2018 में पूरे भारत में  3,47,524 लोगों की गुमशुदा होने की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई गई थी, जिसमें 1,23,339 पुरुष, 2,23,621 महिलाएं और 564 एलजीबीटी समुदाय के सदस्य थे। 2018 में 67,134 बच्चों के गुमशुदा होने के मामले पूरे देश में दर्ज हुए, जिसमें 19,784 लड़के, 47,191 लड़कियां और 159 ट्रांसजेंडर बच्चे थे। इन आंकड़ों से आप समझ ही गए होंगे कि एलजीबीटी समुदाय का डर कितना जायज है। एलजीबीटी समुदाय का डर उनके खिलाफ हो रहे अपराध, अपमान आदि है।

वेबिनार के जरिए एलजीबीटी कम्यूनिटी के बारे में बात करते हुए इंडियन साइकियाट्रिक सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष और चेयरमैन LGBT टास्कफोर्स आईपीएस डॉ. अजीत भीड़े ने एलजीबीटी समुदाय का डर निकालने और उन्हें खुद से बाहर निकलने की सलाह दी है। 

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एलजीबीटी समुदाय का डर : खुद को समाज के सामने कैसे लाएं?

एलजीबीटी समुदाय का डर

हमेशा याद रखें कि एक बार में कुछ भी नहीं होता है, कोई भी काम करने से ही होता है। ठीक इसी तरह एलजीबीटी समुदाय का डर भी निकाला जा सकता है। एलजीबीटी समुदाय के सदस्य को अगर खुद को समाज के सामने लाना है तो एक चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ना होगा। पहले आप खुद को स्वीकार करें कि आप क्या हैं और कौन हैं। इसके बाद अपने किसी विश्वसनीय मित्र को ये बात बताएं कि आप कौन हैं। इसके बाद फिर जब आपका मित्र आपको समझ ले तो परिवार के सदस्यों को अपने बारे में बताएं। परिवार के सदस्यों को समझाएं कि आप अगर एलजीबीटी समुदाय के सदस्य हैं तो क्यों हैं? आप अंदर से कैसा महसूस करते हैं? इसके बाद आप समाज के सामने या किसी अजनबी के सामने खुद को एक्सप्लोर कर सकते हैं। 

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एलजीबीटी समुदाय का डर : लोगों की बातों से ना घबराएं

एलजीबीटी समुदाय का डर

समाज क्या सोचेगा, लोग क्या कहेंगे ये एलजीबीटी समुदाय का डर होता है। जब आप खुद ही डरेंगे और खुद को ही नहींं समझेगें, तो आपका आत्मविश्वास ही कम होगा। सिर्फ यही समझें कि ‘सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग’, तो इस रोग को ना पालें। आप सिर्फ खुद पर भरोसा रखें और आप खुद को समाज के सामने लाएं। ये बिल्कुल ना सोचें कि समाज क्या सोचेगा? आप अपनी खुशी के बारे में सोचें और परिवार का ख्याल रखें।

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एलजीबीटी समुदाय का डर : खुद से करें सवाल

कई बार एलजीबीटी समुदाय के सदस्य खुद इस उलझन में रहते हैं कि वो हैं क्या और क्या महसूस करते हैं? ऐसी स्थिति में खुद को समाज के सामने लाने में उन्हें समस्या हो सकती है। इसलिए सबसे पहले आप खुद से सवाल करें। अपने अंदर से आने वाले संकेतों को समझें और जानें कि अभी आपको खुद को समाज के सामने उजागर करना है या नहीं!

एलजीबीटी समुदाय का डर

अगर आपको लगता है कि आप अंदर से खुद को कुछ और महसूस करते हैं तो निम्न सवाल पूछें :

  1. क्या आप अपने अंदर किसी बोझ को महसूस कर रहे हैं?
  2. क्या आप को अंदर से राहत नहीं, बल्कि घुटन महसूस होती है?
  3. क्या आप अपने जेंडर और पहचान को लेकर सुनिश्चित हैं?

अगर इन सवालों के जवाब ‘हां’ हैं तो आप खुद को समाज के सामने उजागर करने के लिए तैयार हैं। 

  1. क्या आप अपने सेक्सुअल ओरिएंटेशन को लेकर अभी निश्चित नहीं है?
  2. क्या आप अभी आत्मनिर्भर नहीं हैं?
  3. क्या आपको अभी किसी का सपोर्ट नहीं मिला है?
  4. क्या आपको भी एलजीबीटी समुदाय का डर सता रहा है, जैसे हिंसा या शोषण?

अगर आपके इन सवालों का जबा ‘हां’ हैं तो आप अभी तैयार नहीं हो पाए हैं। ऐसी स्थिति में आप थोड़ा और समय लें और आत्मनिर्भर बन कर अंदर के डर को बाहर निकालें।

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एलजीबीटी समुदाय के प्रति समाज की क्या जिम्मेदारी है?

एलजीबीटी समुदाय का डर समाज के कारण ही होता है। ऐसे में समाज, जिसमें दोस्त, परिवार और रिश्तेदार होते हैं उनकी भागीदारी अहम होती है। वेबिनार में हिंदुजा हॉस्पिटल के कंसल्टेंट साइकाइट्रिस्ट डॉ. केर्सी चावड़ा ने बताया कि, “नेशनल हेल्थ स्टडी के अनुसार एलजीबीटी समुदाय के 31 प्रतिशत लोग डिप्रेशन के शिकार होते हैं। वहीं, 71 फीसदी ट्रांसजेंडर लोग आत्महत्या के विचार (Suicidal Tendency) से ग्रसित होते हैं। ऐसी स्थिति में एलजीबीटी समुदाय के किसी व्यक्ति को समझने की जरूरत है, ना कि उसे डांटने, डराने, हिंसा करने आदि की जरूरत है।” एलजीबीटी समुदाय के प्रति समाज को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए :

एलजीबीटी समुदाय का डर

  • एलजीबीटी समुदाय का कोई भी व्यक्ति पहले से ही घबराया हुआ है या परेशान है। ऐसे में अगर आप उसके दोस्त है या रिश्तेदार हैं तो खुद को उसे स्वीकार करने में मदद करें।
  • एलजीबीटी समुदाय के उस व्यक्ति को बताएं कि आप उसके लिए कितना खुश हैं। आप उसे सपोर्ट कर रहे हैं और आप उसके साथ हमेशा हैं।
  • एलजीबीटी समुदाय के उस व्यक्ति को आप विश्वास दिलाएं कि वह जिस भी सेक्सुअल ओरिएंटेशन से हैं, आपको इस बात का आभास पहले से था, सिर्फ आप उसके मुंह से इस बात को स्वीकार कराना चाहते थे। आप उसके आत्मविश्वास से खुश हैं।
  • आप एलजीबीटी समुदाय के उस व्यक्ति के साथ उसके एक्सपीरिएंस और भावनाओं को सुनें। साथ ही उसे सेक्सुअल लाइफ के लिए टिप्स भी दें और सेफ सेक्स के ऊपर भी बात करें। हो सके तो एचआईवी (HIV), सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डिजीज (STD) आदि के बारे में भी जागरूक करें।
  • दूसरी तरफ अगर आप एलजीबीटी समुदाय के उस व्यक्ति से जो आपका दोस्त या रिश्तेदार हैं, उसकी बातों से आप आहत हुए हैं तो उसे सच बताएं। लेकिन उससे ये भी कहें कि “ये मेरे लिए आश्चर्यचकित करने वाली बात हैं, मुझे थोड़ा समय चाहिए तुम्हारी आइडेंटिटी को स्वीकार करने के लिए।” इससे एलजीबीटी समुदाय के व्यक्ति का मनोबल भी कम नहीं होगा और आप उसके भरोसेमंद बन जाएंगे।
  • हमेशा याद रखें कि आपको उस व्यक्ति को दबाना नहीं और ना ही उसे बदलना है। इससे एलजीबीटी समुदाय का वह व्यक्ति डिप्रेशन में जा सकता है और अपना आत्मविश्वास खो सकता है। 
  • आप एलजीबीटी समुदाय के व्यक्ति से पूछें कि “वह आपसे क्या मदद चाहता है या आप उसे किस तरह से सपोर्ट कर सकते हैं।”
  • आप एलजीबीटी समुदाय के व्यक्ति को सपोर्ट करने के लिए भारत के संविधान में एलजीबीटी समुदाय के लिए बने अधिकारों और कानूनों की जानकारी जुटाएं। इसके बारे में आप एलजीबीटी समुदाय के उस व्यक्ति को भी बताएं। इसके साथ ही उसे नए लोगों से घुलने मिलने के लिए प्रेरित करें। उस व्यक्ति को ये महसूस कराएं कि वह भी अन्य लोगों की तरह ही सामान्य है।

इस तरह से आप एलजीबीटी समुदाय का डर निकालने में मदद कर सकते हैं। तो आइए आज से आप और हम प्रण लें कि एलजीबीटी समुदाय के लोगों को भी हम अपनी तरह ही सामान्य व्यक्ति समझेंगे और उन्हें समाज के सामने आने में मदद करेंगे। हमेशा याद रखें कि आप महिला या पुरुष हैं, इसमें आपकी कोई भागीदारी नहीं है। ठीक उसी तरह से वह व्यक्ति लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल या ट्रांसजेंडर है, तो इसमें भी उसकी गलती नहीं है। क्योंकि ये प्रकृति की देन है कि सभी का एक सेक्सुअल ओरिएंटेशन होता है। इसलिए आप सपोर्ट करें और हो सके तो किसी मनोचिकित्सक भी सलाह लें। इस विषय में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर और मनोचिकित्सक से संपर्क करें।श्

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