सीडी 4 काउंट ब्लड का मेडिकल टेस्ट है। इस टेस्ट को टी-सेल टेस्ट (T-cell Test) भी कहा जाता है। जिससे एचआईवी (HIV) का पता लगाया जाता है। आसान भाषा में इसे एचआईवी टेस्ट की एक प्रक्रिया कह सकते हैं। सीडी 4 कोशिकाएं सफेद रक्त कोशिकाओं (White Blood Cells) का प्रकार है। जो संक्रमण से शरीर की सुरक्षा करने का काम करता है। सीडी 4 कोशिकाओं को टी-लिम्फोसाइट्स (T-lymphocytes), टी-कोशिकाएं (T-cells) या टी-सहायक कोशिकाएं (T-helper cells) भी कहते हैं।

जब किसी व्यक्ति को एड्स होता है तो एचआईवी के वायरस सीधे सीडी 4 कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं। इसके बाद दिन बदिन सीडी 4 कोशिकाओं की संख्या खून में कम होती जाती है और एचआईवी बढ़ता जाता है। सीडी 4 काउंट का कम होना आपके कमजोर इम्यून सिस्टम को दर्शाता है। जिससे आप किसी अन्य संक्रमण की चपेट में बहुत जल्दी आ सकते हैं।
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सीडी 4 काउंट टेस्ट को डॉक्टर तब कराने के लिए कहते हैं जब आपका इम्यून सिस्टम कमजोर मालूम पड़ता है। इसके साथ ही अगर लिम्फ नोड्स में किसी तरह का संक्रमण हो तो भी सीडी 4 काउंट टेस्ट होता है। वहीं, एचआईवी एड्स के संक्रमण की स्थिति को जानने के लिए डॉक्टर सीडी 4 काउंट कराते हैं। एंटी-एचआईवी थेरिपी देने के दो या आठ हफ्ते बाद सीडी 4 काउंट दोबारा करा सकते हैं। ऐसा इसलिए कराते हैं कि पता चल सके कि एंटी-एचआईवी थेरिपी मरीज पर असर कर रही है या नहीं। वहीं, एचआईवी एड्स की ट्रीटमेंट एक बार शुरू होने के बाद डॉक्टर सीडी 4 काउंट हर तीसरे या चौथे महीने कराने के लिए कहते हैं।
यदि कोई अंग प्रत्यारोपण करना हो तो उसके लिए आपको सीडी 4 काउंट की भी आवश्यकता पड़ सकती है। अंग प्रत्यारोपण वाले रोगी विशेष दवाएं लेते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली नए अंग को प्रभावित तो नहीं करेगी। ऐसे रोगियों के लिए लो सीडी 4 काउंट टेस्ट सही है।
सीडी 4 काउंट सुबह के समय कम और शाम के वक्त ज्यादा रहता है। ऐसे में कभी-कभी सीडी 4 काउंट टेस्ट में समस्या आती है। वहीं, निमोनिया, इंफ्लूएंजा, हर्पिस सिंपलेक्स वायरस इंफेक्शन जैसी बीमारियां सीडी 4 काउंट की रिपोर्ट को भी प्रभावित करती हैं। साथ ही कैंसर में कीमोथेरिपी भी सीडी 4 काउंट को कम कर सकती है। वहीं, अगर दूसरी तरफ बात की जाए एचआईवी की तो सीडी 4 काउंट हमेशा ये नहीं बता सकता है कि मरीज के शरीर की क्रियाएं कैसे हो रही हैं? उदाहरण के तौर पर, कुछ लोग जिनका सीडी 4 काउंट ज्यादा है वे फिर भी हमेशा बीमार रहते हैं और वहीं, कुछ लोग जिनका सीडी 4 काउंट कम है फिर भी वे कम बीमार रहते हैं व काम अच्छे से करते हैं।
सीडी 4 काउंट में समस्याएं बहुत कम हैं। लेकिन, फिर भी आपको उससे जुड़ी संभावित समस्याओं के बारे में पता होना चाहिए। इसमें रिस्क उनके लिए ज्यादा बढ़ जाता है जो लोग संक्रमित होते हैं। उन्हें निम्न समस्या हो सकती है :
सीडी 4 काउंट टेस्ट कराने के बाद होने वाले रिस्क से अगर ज्यादा समस्या होती है तो आप अपने डॉक्टर से मिलें। क्योंकि सीडी 4 काउंट टेस्ट कराने वाले व्यक्ति का प्रतिरक्षा तंत्र पहले से ही कमजोर है इसलिए उसमें संक्रमण का खतरा बहुत ज्यादा हो सकता है। ऐसे में परेशानी ज्यादा हो या कम डॉक्टर से परामर्श ले लें।
सीडी 4 काउंट टेस्ट कराने से पहले आपको काउंसलर से मिलना चाहिए। क्योंकि जब डॉक्टर सीडी 4 काउंट टेस्ट कराने के लिए कहते हैं तो मरीज मानसिक तौर पर काफी आहत हो जाता है कि उसे एचआईवी का टेस्ट कराने के लिए कहा गया है। इस स्थिति में मरीज को एक काउंसलर की जरूरत पड़ती हा ताकि वह उसे इस टेस्ट का महत्व समझा सके। साथ ही रिपोर्ट के पॉजिटिव आने के बाद जीवनशैली में सुधार के लिए प्रेरित कर सके।
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सीडी 4 काउंट टेस्ट की प्रक्रिया बेहद आसान है :
सीडी 4 काउंट के दौरान बाजू पर बांधी गई पट्टी आपको टाइट महसूस हो सकती है। जिसका असर कुछ मिनटों बाद तक रहता है। वहीं, सूई जब आपके नसों में डाली जाती है तो आपको कुछ हल्का सा चुभने जैसा एहसास होगा। किसी भी तरह की समस्या होने पर आप हेल्थ प्रोफेशनल से तुरंत बात करें।
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सीडी 4 काउंट का रिजल्ट मिलने में कुछ घंटों या एक दिन का समय लग सकता है। लैबोरेट्री आपकी रिपोर्ट डॉक्टर के पास भेजती है। जब डॉक्टर आपको रिपोर्ट समझाने के लिए बुलाए तो आप अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ जाएं। ताकि आप और आपके परिवार के सदस्य रिपोर्ट को अच्छे से समझ लें। वहीं, बता दें कि सीडी 4 काउंट की रिपोर्ट हॉस्पिटल और लैबोरेट्री के तरीकों पर निर्भर करती है। इसलिए आप अपने डॉक्टर से टेस्ट रिपोर्ट के बारे में अच्छे से समझ लें।
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हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।
डिस्क्लेमर
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What Is Cystitis? https://www.healthline.com/health/cystitis Accessed on December 13, 2019
Current Version
13/12/2019
Shayali Rekha द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील
Updated by: Suniti Tripathy