ब्लड का पीएच कैसे होता है प्रभावित जानें?

    ब्लड का पीएच कैसे होता है प्रभावित जानें?

    ब्लड की पीएच रेंज 7.35- 7.45 होता है इसका मतलब है कि ब्लड नैचुरली हल्का सा अल्काइन होता है। वहीं स्टमक का पीचए 1.5-3.5 से होता है। इसकी वजह से यह एसिडिक होता है। लो पीचए फूड को डायजेस्ट करने और फूड से आने वाली कीटाणुओं को मारने के लिए अच्छा होता है। ब्लड का पीचए (pH of blood) कैसे बदलता है और कौन से फैक्टर्स इससे प्रभावित करते हैं इससे जुड़ी अधिक जानकारी हम आगे जानेंगे, लेकिन इससे पहले जान लेते हैं कि पीएच स्केल क्या होती है।

    पीएच स्केल (pH scale) क्या है?

    पीएच स्केल से इसको मापा जाता है कि कोई चीज कितनी एसिडिक और अल्काइन है। आपका शरीर रक्त और अन्य तरल पदार्थों के पीएच स्तर को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करने के लिए लगातार काम करता है। शरीर के पीएच संतुलन को अम्ल-क्षार या अम्ल-क्षारीय संतुलन भी कहा जाता है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए सही पीएच स्तर की आवश्यकता होती है। पीएच स्केल 0 से 14 तक होता है। रीडिंग 7 के पीएच के आसपास आधारित होती है, जो शुद्ध पानी की तरह तटस्थ होती है:

    • 7 से नीचे का pH अम्लीय होता है।
    • 7 से अधिक का pH क्षारीय होता है।

    पैमाना छोटा लग सकता है, लेकिन प्रत्येक स्तर अगले से 10 गुना बड़ा है। उदाहरण के लिए, 9 का पीएच 8 के पीएच से 10 गुना अधिक क्षारीय होता है।

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    ब्लड का पीएच कैसे बदलता है और असामान्य कैसे बनता है?

    हेल्थ प्रॉब्लम्स जो बॉडी को बहुत एसिडिक या अलकाइन बनाती हैं सामान्य तौर पर ब्लड के पीएच से संबंधित होती हैं। नॉर्मल ब्लड पीएच में होने वाले सामान्य बदलाव कुछ हेल्थ कंडिशन और इमरजेंसी के संकेत हो सकते हैं। जिसमें निम्न शामिल हैं।

    • अस्थमा (Asthma)
    • डायबिटीज (Diabetes)
    • हार्ट डिजीज (Heart disease)
    • किडनी डिजीज (Kidney disease)
    • लंग डिजीज (Lung disease)
    • गाउट (Gout)
    • इंफेक्शन (Infection)
    • शॉक (Shock)
    • ब्लीडिंग (Bleeding)
    • ड्रग ओवरडोज (Drug overdose)

    ब्लड का पीएच बैलेंस (pH balance of blood)

    जब ब्लड का पीएच 7.35 के नीचे गिर जाता है तो यह बहुत एसिडिक हो जाता है। वहीं 7.45 से अधिक होने पर यह अल्काइन माना जाता है। ब्लड का पीएच बैलेंस रखने में बॉडी के दो ऑर्गन मददगार हो सकते हैं। जो निम्न हैं।

    विभिन्न टाइप के ब्लड एसिडोसिस और अल्कालोसिस इसके कारण पर निर्भर करते हैं। इसके दो मुख्य प्रकार हैं:

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    रेस्पिरेटरी (Respiratory)

    यह प्रकार तब होता है जब ब्लड का पीएच में बदलाव लंग या किसी ब्रीदिंग कंडिशन के कारण होता है।

    मेटाबॉलिक (Metabolic)

    यह प्रकार तब होता है जब ब्लड का पीएच किडनी कंडिशन या समस्या के कारण परिवर्तित होता है।

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    ब्लड के पीएच का परीक्षण ( Blood pH testing)

    रक्त पीएच परीक्षण रक्त गैस परीक्षण या धमनी रक्त गैस (एबीजी) परीक्षण का एक सामान्य हिस्सा है। यह मापता है कि आपके रक्त में कितनी ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड है। डॉक्टर नियमित स्वास्थ्य जांच के रूप में या यदि कोई स्वास्थ्य स्थिति है, तो रक्त के पीएच का परीक्षण कर सकते हैं। रक्त पीएच परीक्षण में ब्लड का सैम्पल लेना शामिल है। फिर रक्त के नमूने को परीक्षण के लिए एक प्रयोगशाला में भेजा जाता है।

    क्या आप घर पर परीक्षण कर सकते हैं?

    घर पर किया गया ब्लड फिंगर-प्रिक टेस्ट डॉक्टर के ऑफिस में ब्लड पीएच टेस्ट जितना सटीक नहीं होगा। यूरिन पीएच लिटमस पेपर परीक्षण आपके रक्त के पीएच स्तर को नहीं दिखाएगा, लेकिन यह दिखाने में मदद कर सकता है कि कुछ असंतुलित है या नहीं।

    ब्लड के पीएच में बदलाव के कारण (Causes of Changes in Blood pH)

    ब्लड का पीएच बदलता है जिसके निम्न कारण है।

    हाय ब्लड पीएच (High blood pH)

    क्षारीयता तब होती है जब आपके रक्त का पीएच सामान्य सीमा से अधिक होता है। उच्च रक्त पीएच के कई कारण हैं। एक बीमारी अस्थायी रूप से आपके रक्त का पीएच बढ़ा सकती है। अधिक गंभीर स्वास्थ्य स्थितियां भी क्षारीयता का कारण बन सकती हैं।

    फ्लूइड लॉस (Fluid loss)

    शरीर से बहुत अधिक मात्रा में पानी जाने से ब्लड का पीएच बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आप कुछ ब्लड इलेक्ट्रोलाइट्स खो देते हैं। जिसमें नमक और मिनरल्स भी शामिल हैं। साथ ही सोडियम और पोटेशियम भी कमी हो जाती है। फ्लूइड लॉस के कारण निम्न हैं।

    मूत्रवर्धक दवाएं और अन्य दवाएं आपको बहुत अधिक पेशाब करने का कारण बन सकती हैं जिससे उच्च रक्त पीएच हो सकता है। फ्लूइड लॉस के उपचार में बहुत सारे तरल पदार्थ प्राप्त करना और इलेक्ट्रोलाइट्स को लेना शामिल है। स्पोर्ट ड्रिंक कभी-कभी इसमें मदद कर सकती हैं। डॉक्टर किसी भी दवा को बंद कर सकता है जो फ्लूइड लॉस का कारण बनती हैं।

    किडनी प्रॉब्लम्स (Kidney problems)

    ब्लड का पीचए (pH of blood)

    किडनी आपके शरीर के एसिड-बेस बैलेंस को बनाए रखने में मदद करती है। किडनी की समस्या से उच्च रक्त पीएच हो सकता है। यह तब हो सकता है जब किडनी यूरिन के माध्यम से पर्याप्त क्षारीय पदार्थ नहीं निकाल पाती हैं। उदाहरण के लिए, बाइकार्बोनेट गलत तरीके से वापस रक्त में आ सकता है। किडनी के लिए दवाएं और अन्य उपचार उच्च रक्त पीएच को कम करने में मदद करते हैं।

    लो ब्लड पीएच (Low Blood pH)

    ब्लड एसिडोसिस आपके शरीर के प्रत्येक अंग के कार्य करने के तरीके को प्रभावित कर सकती है। लो ब्लड पीएच हाय ब्लड पीएच की तुलना में अधिक कॉमन परेशानी है। एसिडोसिस एक वार्निंग साइन हो सकता है कि स्वास्थ्य स्थिति ठीक से नियंत्रित नहीं है। कुछ हेल्थ कंडिशन्स के कारण ब्लड में प्राकृतिक अम्ल बनने लगते हैं। ब्लड का पीएच कम करने वाले एसिड में निम्न शामिल हैं।

    • लैक्टिक एसिड (Lactic acid)
    • कीटो एसिड्स (Keto acids)
    • सल्फ्युरिक एसिड (Sulphuric acid)
    • फास्फोरिक एसिड (Phosphoric acid)
    • हायड्रोक्लोरिक एसिड (Hydrochloric acid)
    • कार्बोनिक एसिड (Carbonic acid)

    डायट (Diet)

    स्वस्थ व्यक्ति के लिए डायट ब्लड पीएच को प्रभावित नहीं करती है।

    डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (Diabetic ketoacidosis)

    यदि आपको डायबिटीज है, तो ब्लड शुगर का लेवल ठीक से प्रबंधित नहीं होने पर बल्ड अम्लीय हो सकता है। डायबिटिक कीटोएसिडोसिस तब होता है जब आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता है या इसका ठीक से उपयोग नहीं कर पाता है।

    इंसुलिन खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों से शुगर को कोशिकाओं में ले जाने में मदद करता है जहां इसे शरीर के लिए ईंधन के रूप में यूज किया जा सकता है। यदि इंसुलिन का उपयोग नहीं किया जा सकता है, तो आपका शरीर संग्रहीत वसा को शक्ति के लिए तोड़ना शुरू कर देता है। इससे कीटोन्स नामक एसिड वेस्ट निकलता है। एसिड बनता है, जिससे निम्न रक्त पीएच ट्रिगर होता है।

    मेटाबॉलिक एसिडोसिस (Metabolic acidosis)

    किडनी की बीमारी या किडनी फेलियर के कारण निम्न रक्त पीएच को मेटाबोलिक एसिडोसिस कहा जाता है। ऐसा तब होता है जब किडनी आपके शरीर से एसिड को निकालने के लिए ठीक से काम नहीं करती है। यह रक्त एसिड बढ़ाता है और रक्त पीएच को कम करता है।

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    रेस्पिरेटरी एसिडोसिस (Respiratory acidosis)

    जब आपके फेफड़े आपके शरीर से पर्याप्त कार्बन डाइऑक्साइड को जल्दी से बाहर निकालने में सक्षम नहीं होते हैं, तो रक्त पीएच कम हो जाता है। इसे रेस्पिरेटरी एसिडोसिस कहते हैं। यह तब हो सकता है जब आपको फेफड़े की कोई गंभीर या पुरानी स्थिति हो।

    उम्मीद करते हैं कि आपको ब्लड का पीएच कैसे प्रभावित होता है इससे संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    लेखक की तस्वीर badge
    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 05/05/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड