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आइडियल पेरेंट्स और उनका मानसिक स्वास्थ्य, इन बातों का रखें ध्यान...

आइडियल पेरेंट्स और उनका मानसिक स्वास्थ्य, इन बातों का रखें ध्यान...

पेरेंट्स, इनके बिना बच्चों की हेल्दी लाइफ और बैलेंस लाइफ (Healthy and Balance life) की कल्पना करना भी मुश्किल है। हम बच्चे, चाहें कितने भी बड़े हो जाएं, लेकिन माता-पिता के प्यार और हमारे प्रति उनकी चिंता में एक अलग ही अपनापन मिलता है। बच्चों को अच्छा भविष्य मिल सके, इसलिए वो खुद कई चुनौतियों का सामना करते हैं। फिर चाहें बात उनके मानिसक स्वास्थ्य (Mental Health)) की ही क्यों न हो। इस बार के पेरेंट्स डे (Parents Day) पर हम बात कर रहे हैं, आदर्श पेरेंट्स को किन-किन चुनौतियों से गुजरना पड़ता है। नेशनल पेरेंट्स डे मनाने की शुरुआत पहली बार 8 मई, 1973 को दक्षिण कोरिया में हुई थी। दक्षिण कोरिया में हर साल 8 मई को मातृ और पितृ दिवस (Fathers Day) के बजाय पेरेंट्स डे सेलिब्रेट किया जाता है। अब बात करते हैं, आईडियल पेरेंट्स (Ideal Parents) और उनके मानिसक स्वास्थ्य के बारें। जानें किस तरह से आईडियल पेरेंट्स (Ideal Parents) को मानसिक तनाव से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

और पढ़ें: पेरेंटिंग के बारे में क्या जानते हैं आप? जानिए अपने बच्चों की परवरिश का सही तरीका

आईडियल पेरेंट्स (Ideal Parents) : एक्‍सपर्ट की सलाह

पेरेंटिंग (Parenting) अपने आप में किसी चुनौती से कम नहीं है। अगर हम बात करें आईडियल पेरेंट्स की तो यह बात उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। अलग-अलग स्‍टेज पर, पेरेंट्स को अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। बच्चों की परवरिश से लेकर उनके उम्मीदों पर खरा उतरना काफी आसान नहीं होता है। तो ऐसे में पेरेंट्स चाइल्‍ड डेवलेपमेंट और इससे जुड़ी चुनौतियों (Parenting Challenges)के बारे में जानकर आसानी से अपने तनाव को कम कर सकते हैं। इससे उन्हें अपने बच्‍चे की सही परवरिश करने में भी मदद मिलेगी। कुछ उपायों को अपनाकर आप अपने और बच्‍चे की भावनात्‍मक रूप से भी मदद कर पाएंगे। लेकिन जब कई बार पेरेंट्स को लगता है कि वो आईडियल नहीं बन पा रहे हैं, तो उनके ऊपर मानिसक तनाव (Mentally Stress) बनने लगता है। बच्‍चों की परवरिश करना कोई आसान काम नहीं है, तो आइए जानते हैं कि पेरेंटिंग से जुड़ी कॉमन प्रॉब्‍लम्‍स क्‍या हैं और आप किस तरह इनसे निपट सकते हैं?

और पढ़ें: पेरेंटिंग का तरीका बच्चे पर क्या प्रभाव डालता है? जानें अपने पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में

भवनात्मक रूप से खुद को मजबूत रखें (Emotional Strong)

कई बार ऐसा होता है कि बच्चे के लिए लाख कुछ करने के बाद भी, आपका बच्चा दूसरे बच्चे को देखते हुए यह बोल ही देता होगा कि देखों उनके पेरेंट्स अपने बच्चे के लिए ये-ये चीजें करते हैं, फिर चाहें वो महंगे कपड़े या खिलौने ही हों। तो ऐसे पेरेंट्स (Parents) काे बच्चों की इन बातों को अपने मन पर नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह फैक्ट (Fact) सभी पेरेंट्स बच्चों की एक जैसी परवरिश (Parenting) नहीं कर सकते हैं। आप भी अपने बच्चों के लिए बहुत सही ऐसी चीजें करते होंगो, जो दूसरे पेरेंट्स नहीं कर पाते होंगे। आईडियल पेरेंट्स के रूप में आप खुद को इस नजरिए से न देखें कि आपको बच्चे की सभी इच्छा पूरी करनी है।

इसके लिए आप बच्चे को भी भवनात्मक रूप से मजबूज रखें। ऐसा होता है कि कई बार बच्‍चे किसी बात को लेकर दुखी होने लगते हैं। कई स्थितियों या बच्चों की असफलता में पेरेंट्स बच्‍चों को खुश करने के लिए कह देते हैं कि ‘ये कोई बड़ी बात नहीं है’ ऐसे में बच्‍चों को लगता है कि भावनाएं ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण नहीं होती हैं। तो ऐसे में बच्‍चों को खुद से अपनी भावनाओं को संभालने (Emotional) और उनसे निपटना सिखाएं। इस तरह से आप खुद को तनाव में महसूस नहीं करेंगे।

और पढ़ें: मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं कुछ ऐसे करती हैं हमें प्रभावित, जानिए कैसे करें इससे बचाव!

आईडियल परेंट्स : बच्‍चों को अपनी लड़ाई खुद लड़ना सिखाएं (Fight their own battles)

अगर आप आईडियल पेरेंट्स (Ideal Parents) बनना चाहते हैं, तो जरूरी है कि आप अपने बच्चे की लड़ाई (Child’s fight) लड़ने की जगह, आप उसे खुद की लड़ाई, खुद लड़ना सिखाएं। कई बार ऐसा भी हुआ होगा कि कई स्थितियो, गलती या लड़ाई में अपने बच्‍चे को बचाने के लिए उसकी तरफ से आपने कदम उठाए होंगे। क्योंकि पेरेंट्स नहीं चाहते हैं कि उनके बच्‍चों को किसी प्रकार मुश्किलों और चुनौतियों (Challenges) का सामना करना पड़े। इस वजह से पेरेंट्स अपने बच्‍चों की लड़ाई खुद ही लड़ने लगते हैं। जो कि गलत है, अगर स्थिति बहुत गंभीर है, तो आप ऐसा करें, लेकिन हर छोटी-छोटी मुश्किल में उसे अपनी लड़ाई खुद ही लड़ने दें। आप बस उसका सहयोग करें।

और पढ़ें: WHO के अनुसार, लॉकडाउन में ये पेरेंटिंग टिप्स अपनाने हैं बेहद जरूरी, रिश्ता होगा मजबूत

बच्‍चों की हर बात पूरी करना जरूरी नहीं है (Don’t have to do everything)

कई पेरेंट्स को लगता है कि वो जब बच्चे की सभी बात मानेंगे, तभी ही वो आइडियल पेरेंट्स कहलाएंगे। पर यह धारणा गलत हैं, इससे सिर्फ आपको तनाव ही महसूस होगा और कुछ नहीं। कई पेरेंट्स(Parents) को लगता है कि जब भी बच्चे कुछ मांगे, उसे पूरा करना जरूरी है। ऐसा करने से आप उसे अनुशासन में रखने से चूक रहे हैं। जब आगे चलकर, जो चीजें उन्‍हें नहीं मिल पाती हैं, तो बच्चे अलग व्यवहार (Bad Behavior) करने लगते हैं, तब जाकर पेरेंट्स को महसूस होता है कि वो आईडियल पेरेंट्स बनने में कोई कमी रह गई है। इसलिए आप ऐसी गलती से बचें।

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न ही खुद से और न ही बच्चे से परफेक्‍ट होने की उम्‍मीद रखें (Perfect)

जब भी पेरेंटिंग (Parenting) की बात आती है तो परेंट्स खुद के ऊपर परफेक्‍ट (Perfect Parents) बनने का बोझ सबसे ज्‍यादा रखते हैं। आपको इस बोझ से लदना नहीं है। अपने बच्‍चों को बड़े लक्ष्‍य देना और अच्‍छा परफॉर्म (Perform) करने के लिए प्रोत्‍साहित करने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इस मामले में आपको अपने बच्‍चे की क्षमता पर भी ध्‍यान देना चाहिए। ज्‍यादा ऊंचे लक्ष्‍य बनाकर आगे चलकर बच्‍चों के आत्‍म-विश्‍वास (Self confidence) और आत्‍म-सम्‍मान को ठेस पहुंच सकती है। इसके अलावा आप ये सोच से साथ पेरेंटिंग न करें कि आपको आइडियल पेरेंट्स बनना है, बल्कि यह सोच रखें कि आपके बच्चे के लिए क्या अच्छा है। यही सही आईडियल पेरेटिंग है।

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पेरेंट्स और बच्चे के बीच कोडिपेंडेंसी होना काफी सामान्‍य है, जिसे माता-पिता का का प्‍यार भी कहा जा सकता है। लेकिन बच्चे की हर बात को पूरा करना ही आईडियल पेरेंटिंग है, यह जरूरी नहीं है। आप उन बातों पर ध्यान दें, जिससे आपके बच्चे का भविष्य अच्छा हो। जरूरत पड़ने पर खुद के प्यार और भावनाओं पर कंट्रोल भी रखें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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डॉ. धवल मोदी द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 4 weeks ago को
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