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WHO के अनुसार, लॉकडाउन में ये पेरेंटिंग टिप्स अपनाने हैं बेहद जरूरी, रिश्ता होगा मजबूत

WHO के अनुसार, लॉकडाउन में ये पेरेंटिंग टिप्स अपनाने हैं बेहद जरूरी, रिश्ता होगा मजबूत

प्रधानमंत्री ने पहले लॉकडाउन 2.0 का ऐलान किया था। फिर अनलॉक का ऐलान किया गया। लेकिन लॉकडाउन और अनलॉक के इस फेज में बच्चों को घर के अंदर संभालना काफी चुनौतीपूर्ण हो चुका है। ऐसे में अभिभावकों के लिए ये बेहद जरूरी है ऐसे समय में बच्चों पर पूरा ध्यान दें और उन्हें एहसास कराएं कि वो आपके साथ घर के अंदर पूरी तरह से सुरक्षित हैं। कोरोना महामारी के दौरान पेरेंटिंग आपको रिश्ते में नयापन लाने का मौका दे रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने लॉकडाउन में पेरेंटिंग के लिए कुछ टिप्स दिए हैं। आप भी इन टिप्स को पढ़ें। लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स इसलिए भी जरूरी हो जाता है क्योंकि बच्चे कई महीनों से घरों में हैं।

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लॉकडाउन में पेरेंटिंग : तय करें एक फिक्स टाइम

ये तो सच है कि लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स के लिए जरूरी है कि अभिभावक अपने ऑफिस के काम या फिर अन्य कामों की वजह से पूरा दिन बिजी होंगे। ऐसे में आपको दिन में एक समय तय करना होगा जब आप बच्चे के साथ कुछ खेल सके या फिर उसके साथ क्वालिटी टाइम स्पेंड कर सके। आप बच्चे के साथ कुछ समय के लिए उसका पसंदीदा गाना या कविता गा कर उसे खुश कर सकते हैं। बच्चे स्कूल में पोयम एक साथ गाते हैं और एंजॉय भी करते हैं। आप घर में भी ऐसा कर सकते हैं।

अगर बच्चों को म्यूजिक पसंद है तो आप बच्चों को खिलौने दें और उनके साथ खेलें। ऐसा करने से बच्चे को ये एहसास नहीं होगा कि वो अकेला है। बच्चों को कलर करना भी पसंद होता है। आप उनका बैग खोलें और बुक निकाल कर उनके फेवरेट कलर से कलर करवाना शुरू कर दें। ब्लॉक, कप और घर के अन्य सामान के साथ भी बच्चों को खेलना अच्छा लगता है। आप घर के सामान को पहले चेक कर लें कहीं वो उन्हें चोट न पहुंचाएं। फिर आप उनके साथ खेल सकते हैं। बच्चों को स्टोरी सुनना भी बहुत पसंद होता है। आप रोज एक स्टोरी सर्च कर लें और बच्चों को सुनाएं। ऐसा करने से बच्चे घर में बोरियत महसूस नहीं करेंगे। घर में टीवी और फोन से बच्चों को दूर ही रखें तो बेहतर रहेगा। लॉकडाउन में पेरेंटिंग के इन टिप्स को अपनाकर आप कमियों को दूर कर सकते हैं।

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लॉकडाउन में पेरेंटिंग : सकारात्मकता है जरूरी

जब आप बच्चों की शरारत से परेशान हो जाते हैं तो उन्हें डांट कर बोलते हैं कि ‘बस करो’। बच्चों पर गुस्सा करने से उनका व्यवहार नकारात्मक हो सकता है। बेहतर है कि लॉकडाउन के समय में संयम रख आप बच्चों के साथ सकारात्मक रवैया अपनाएं। आप बच्चों को डांट कर बातें न करें। किसी भी काम के लिए उनसे रिक्वेस्ट करना बेहतर रहेगा। बच्चों से चिल्लाकर बात करने से वो भी गुस्सा हो सकते हैं। अगर बच्चा ज्यादा परेशान कर रहा है तो भी आप उसे शांती से समझाएं। जब भी बच्चा अच्छा व्यवहार करें, उसकी तुरंत प्रशंता करें। ऐसा करने से बच्चे को समझ आ जाएगा कि उसे किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। लॉकडाउन में पेरेंटिंग के दौरान आपका बिहेवियर बहुत महत्वपूर्ण है।

अगर आप टीनएजर्स के पेरेंट्स हैं तो आप ऐसे समय में बच्चों को एक तय समय पर उनके फ्रेंड्स से सोशल मीडिया या फिर फोन की हेल्प से बात करने की सलाह दें। ऐसा करने से टीनएजर्स को अकेलापन महसूस नहीं होगा। आप अपने टीनएजर्स के साथ इनडोर गेस्म एंजॉय कर सकती हैं। ऐसा करने से किसी को भी बोरियत महसूस नहीं होगी।

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कोरोना महामारी के दौरान पेरेंटिंग है चैलेंजिंग, ये काम जरूर करें

  • छुट्टी है तो क्या हुआ, दिनभर का रूटीन तय करें।
  • बच्चों को सेफ डिस्टेंसिंग के बारे में जानकारी दें।
  • बच्चों के साथ हैंडवॉशिंग और हाइजीन फन गेम खेलें।
  • बच्चों के अच्छे बिहेवियर के लिए आप जिम्मेदार हैं, उनके साथ नरमी से पेश आएं।
  • दिन भर जो भी किया है, उसके बारे में रात को चर्चा जरूर करें।
  • दिनभर की अच्छी एक्टीविटी के बारे में बच्चों को बताएं और अगले दिन कि एक्टीविटी प्लान करें।
  • बच्चों पर हर वक्त न चिल्लाएं। उन्हें कुछ समय दें।
  • बच्चों की अच्छी आदतों के लिए उनकी तारीफ जरूर करें।
  • बच्चों को कुछ काम की जिम्मेदारी भी दें, जैसे कि खुद के कपड़े सही से रखना आदि।
  • फोन का तभी यूज करें जब बहुत जरूरी हो।

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जानें कैसे करें समस्याओं को कम

लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स की बात करें तो अपने गुस्से और उससे जुड़ी हार्ड फिलिंग्स पर काबू पाने के साथ बीमारी के बारे में जितना संभव हो उसके बारे में जानकारी हासिल करें। परिवार के सदस्यों के साथ खासतौर पर बच्चों के साथ बातचीत करें। वहीं बच्चों के साथ खेलने-कूदने के लिए समय निकालें, जिससे वो तरोजाता महसूस करेंगे।

  • कम्युनिकेशन पर दें ध्यान : कोरोनाकाल में परिवार के साथ बातचीत जरूरी होता है। ऐसे में तीन सी पर ध्यान देना चाहिए, जिसमें चेक इन (Check-In) सबसे पहले आता है। इसके तहत बच्चों से पूछे कि वो कैसा महसूस कर रहे हैं। दूसरा क्रिएट (Create), इसके तहत अच्छे से जीवन यापन करने के लिए नए व क्रिएटिव आइडिया को अपनाए। तीसरा होता है कंफर्म (Confirm) यानी आपने जो भी निर्णय लिए हैं उसे लागू करें।
  • बच्चों के साथ खेलना : कोरोना काल में बच्चों को खेलने का उतना समय नहीं मिल पाता है, क्योंकि सामान्य दिनों में बच्चे स्कूल में आसानी से खेल लेते थे, लेकिन कोरोनाकाल में वो खेल नहीं पा रहे हैं, ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि, बच्चों के साथ खेलने का समय निकालें। इससे शारिरिक व मानसिक स्वास्थ्य को फायदा होता है।

बच्चों से पूछे कोरोना महामारी के बारे में

लॉकडाउन के बाद आपके बच्चे को भी समझ आ गया होगा कि आखिर चल क्या रहा है बाहर ? बच्चों को कोरोना वायरस महामारी के बारे में जानकारी देना बहुत जरूरी है। आप पहले बच्चे से कोरोना वायरस के बारे में पूछें। अगर बच्चा थोड़ा-बहुत जानता होगा तो आपको जरूर बताएगा। फिर उसे बीमारी के लक्षण और बचाव के बारे में भी बताएं। ऐसा करने से बच्चे खांसी या छींक दौरान हाथ लगाना और रुमाल का यूज करना सीख जाएंगे। अगर बच्चा कोई कठिन सवाल पूछे तो उसका गलत जवाब न दें। बच्चों को बताएं कि कोविड-19 की बीमारी से बचने का तरीका बचाव ही है। यानी साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखना चाहिए। आप चाहे तो कोविड-19 के बचाव के तरीकों को एक स्टोरी के रूप में भी बच्चों के साथ शेयर कर सकती हैं। बच्चे स्टोरी ज्यादा पसंद करते हैं। इस तरह से आप बच्चों को सोशल डिस्टेंसिंग के बारे में भी बताएं। कोरोना के लक्षण दिखने पर लापरवाही बिल्कुल न बरतें। कोरोना से सावधानी ही आपका महामारी से बचाव कर सकती है।

लॉकडाउन में पेरेंटिंग करना थोड़ा मुश्किल जरूर है, अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें तो बच्चे भी बोर नहीं होंगे और आप भी बच्चों को रोजाना नई अच्छी आदतों सीखा सकेंगी। हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर आपको किसी भी तरह की समस्या हो तो आप अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
14/04/2020 पर Bhawana Awasthi के द्वारा लिखा
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
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