मोनोन्यूक्लियोसिस एक आम बीमारी है, इस बीमारी में आपको हफ्तों या महीनों तक थकावट और कमजोरी का एहसास होगा। आमतौर पर मोनो की समस्या धीरे-धीरे अपने आप गायब हो जाती है, ठीक तरीके से ख्याल रखने पर आप जल्द ही बेहतर महसूस करते हैं और परेशानी नहीं होती।

मोनोन्यूक्लियोसिस होना बहुत आम है। मोनोन्यूक्लियोसिस का खतरा किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। किसी भी और जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।
मोनोन्यूक्लियोसिस के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं :
इस संक्रमण के वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड लगभग चार से छह हफ्तों का होता है और छोटे बच्चो में इस वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड कम होगा। इस बीमारी से जुड़े कुछ आम लक्षण जैसे कि बुखार, गले में खराश आदि हैं जो कि समय के साथ गायब हो जाएंगे। लेकिन कुछ गंभीर लक्षण जैसे कि थकान, बढ़े हुए लिम्फ नोड्स और स्प्लीन (spleen) में सूजन कुछ दिनों तक रह सकती है।
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इनमें से कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से जरूर मिलें :
इपस्टीन वायरस (Epstein-Barr virus (EBV)) से होने वाला संक्रमण मोनो (Mononucleosis) कहलाता है। ये स्थिति आमतौर पर महिलाओं और वयस्कों में पाई जाती है।बच्चों में भी ये संक्रमण संभव है लेकिन इसके लक्षण बहुत अधिक गंभीर नहीं होंगे। आमतौर पर वयस्कों को मोनो नहीं होता है क्योंकि बच्चों के मुकाबले उनकी इम्यूनिटी कई गुना ज्यादा होती है। म्यूकस, सलाइवा और आसुओं से संक्रमण फैल सकता है। अगर आपको मोनो की समस्या है तो दूसरों के साथ अपना सामान (जैसे कि टूथ ब्रश, बर्तन और पानी ) न बांटे। इससे संक्रमण और ज्यादा फैल सकता है।
आप मोनो के लक्षणों से कुछ दिनों में उभर सकते हैं लेकिन इसके वायरस हमेशा आपके शरीर में रहेंगे। वायरस के सक्रिय होने पर ये एक शरीर के एक हिस्से से शरीर के दूसरे हिस्से में आसानी से फैल सकता है। बचपन से बड़े होने तक हर किसी को एक न एक बार ये संक्रमण जरूर होता है ।
मोनोन्यूक्लियोसिस का खतरा इन कारणों की वजह से बढ़ सकता है।
EBV का एक बार संक्रमण हो जाने के बाद संक्रमण की संभावना नहीं होती है। हालांकि ये वायरस आपके शरीर में हमेशा रहेगा लेकिन एक बार संक्रमण के बाद दोबारा ये संक्रमण नहीं होगा।
EBV हवा से नहीं फैलता इसलिए अगर आप किसी प्रभावित व्यक्ति के साथ रह रहे हैं तब भी आपको ये संक्रमण नहीं होगा।
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यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। इसलिए अपने अनुसार सही इलाज के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।
शारीरिक जांच : मोनोन्यूक्लियोसिस (mononucleosis) की जांच आपके संकेत और लक्षणों को देखकर की जा सकती है। लिम्फ नोड्स, टॉन्सिल और स्प्लीन (Spleen )में सूजन होने पर ध्यानपूर्वक देखा जाएगा।
एंटीबाडी टेस्ट (Antibody Test): EBV वायरस के लिए बनने वाली एंटीबाडीज की जांच की जाती है जिससे की संक्रमण होने की पुष्टि की जा सके।
वाइट ब्लड सेल्स काउंट टेस्ट (White Blood Cells Count Test ): संक्रमण होने पर वाइट ब्लड सेल्स में बढ़ोतरी हो जाएगी, जिससे संक्रमण हो सकता है। इन टेस्ट से मोनोन्यूक्लियोसिस की पुष्टि तो नहीं होती लेकिन आशंका जताई जा सकती है।
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मोनोन्यूक्लियोसिस का कोई सटीक इलाज नहीं है। बहुत अधिक पानी पीने से, साफ खाना खाने से और आराम करने से इस स्थिति में आपको आराम मिलेगा।
मोनोन्यूक्लियोसिस के संक्रमण के चलते आपको स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण (streptococcal (strep) infection) भी हो सकता है साथ ही टॉन्सिलाइटिस या फिर साइनस संक्रमण होने की भी संभावना है। अगर वाइरल संक्रमण के बाद आपको बैक्टीरियल संक्रमण होता है तो आपको एंटीबायोटिक्स लेनी पड़ेंगी ताकि संक्रमण आगे न बढ़े।
कुछ दवाओं से आपको रैशेस हो सकते हैं इसलिए ध्यान रखें कि कहीं आप गलत दवाएं तो नहीं ले रहे। मोनोन्यूक्लिओसिस होने पर अमोक्सीसीलीन (Amoxicillin) या फिर पेनिसिलिन (Penicillin) सम्बंधित दवाएं न खाएं।
डॉक्टर की सलाह से ही एंटीबायोटिक्स लें।
किन बदलावों और घरेलू नुस्खों की मदद से आप इस संक्रमण पर नियंत्रण पा सकते हैं :
किसी भी और सवाल या जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से मिलें।
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