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Mono: मोनो बीमारी क्या है?

परिभाषा|लक्षण |कारण|खतरों के कारण को क्या बढ़ाता है?|जांच और इलाज|जीवनशैली में बदलाव और घरेलू नुस्खे
Mono: मोनो बीमारी क्या है?

परिभाषा

मोनोन्यूक्लियोसिस एक आम बीमारी है, इस बीमारी में आपको हफ्तों या महीनों तक थकावट और कमजोरी का एहसास होगा। आमतौर पर मोनो की समस्या धीरे-धीरे अपने आप गायब हो जाती है, ठीक तरीके से ख्याल रखने पर आप जल्द ही बेहतर महसूस करते हैं और परेशानी नहीं होती।

ये संक्रमण किस करने से फैल सकता है, इसलिए इसे किसिंग डिजीज (Kissing Disease) भी कहते हैं। किस करते समय सलाइवा के संक्रमण से ये बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जा सकती है। खराश और छींक आने से या फिर संक्रमित बर्तनों को उपयोग करने से ये संक्रमण हो सकता है।

मोनोन्यूक्लियोसिस (Mononucleosis) होना कितना आम है ?

मोनोन्यूक्लियोसिस होना बहुत आम है। मोनोन्यूक्लियोसिस का खतरा किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। किसी भी और जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।

लक्षण

मोनोन्यूक्लियोसिस (Mononucleosis) के क्या लक्षण हो सकते हैं ?

मोनोन्यूक्लियोसिस के लक्षण कुछ इस प्रकार हो सकते हैं :

इस संक्रमण के वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड लगभग चार से छह हफ्तों का होता है और छोटे बच्चो में इस वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड कम होगा। इस बीमारी से जुड़े कुछ आम लक्षण जैसे कि बुखार, गले में खराश आदि हैं जो कि समय के साथ गायब हो जाएंगे। लेकिन कुछ गंभीर लक्षण जैसे कि थकान, बढ़े हुए लिम्फ नोड्स और स्प्लीन (spleen) में सूजन कुछ दिनों तक रह सकती है।

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अपने डॉक्टर से कब मिलें ?

इनमें से कोई भी परेशानी होने पर डॉक्टर से जरूर मिलें :

  • अगर आपके एब्डोमेन के बाएं हिस्से में दर्द है तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी स्प्लीन में चोट आ गई है।
  • आपके टॉन्सिल्स में सूजन आ सकती है जिसकी वजह से आपको खाना चबाने और निगलने में परेशानी होगी। इस स्थिति में भी डॉक्टर से जरूर मिलें।
  • आपकी शारीरिक जांच में मोनो नहीं दिख रहा है लेकिन आपके गले में कई दिनों से खराश है। बहुत से घरेलू नुस्खों का इस्तमाल करने से भी आपकी स्थिति में सुधार न हो रहा है।
  • आपके शरीर में ऊर्जा की कमी हो रही हो , शरीर में दर्द हो या फिर लिम्फ नोड्स में बहुत अधिक सूजन होने पर भी डॉक्टर से जरूर मिलें।

कारण

मोनोन्यूक्लियोसिस (Mononucleosis) के क्या कारण हो सकते हैं ?

इपस्टीन वायरस (Epstein-Barr virus (EBV)) से होने वाला संक्रमण मोनो (Mononucleosis) कहलाता है। ये स्थिति आमतौर पर महिलाओं और वयस्कों में पाई जाती है।बच्चों में भी ये संक्रमण संभव है लेकिन इसके लक्षण बहुत अधिक गंभीर नहीं होंगे। आमतौर पर वयस्कों को मोनो नहीं होता है क्योंकि बच्चों के मुकाबले उनकी इम्यूनिटी कई गुना ज्यादा होती है। म्यूकस, सलाइवा और आसुओं से संक्रमण फैल सकता है। अगर आपको मोनो की समस्या है तो दूसरों के साथ अपना सामान (जैसे कि टूथ ब्रश, बर्तन और पानी ) न बांटे। इससे संक्रमण और ज्यादा फैल सकता है।

आप मोनो के लक्षणों से कुछ दिनों में उभर सकते हैं लेकिन इसके वायरस हमेशा आपके शरीर में रहेंगे। वायरस के सक्रिय होने पर ये एक शरीर के एक हिस्से से शरीर के दूसरे हिस्से में आसानी से फैल सकता है। बचपन से बड़े होने तक हर किसी को एक न एक बार ये संक्रमण जरूर होता है ।

खतरों के कारण को क्या बढ़ाता है?

संक्रमण के खतरे को क्या बढ़ाता है ?

मोनोन्यूक्लियोसिस का खतरा इन कारणों की वजह से बढ़ सकता है।

  • 15 से 24 वर्ष तक की उम्र में किसी को भी ये संक्रमण हो सकता है। अगर आप बहुत सारे लोगों के संपर्क में हैं तो भी आपको संक्रमण हो सकता है।
  • मोनो संक्रमित व्यक्ति को किस करने पर या फिर उससे बहुत ज्यादा नजदीकी संबंध बनाने पर भी ये संक्रमण फैल सकता है।
  • पीने के पानी को एक दूसरे से बांटने पर भी ये संक्रमण हो सकता है।

EBV का एक बार संक्रमण हो जाने के बाद संक्रमण की संभावना नहीं होती है। हालांकि ये वायरस आपके शरीर में हमेशा रहेगा लेकिन एक बार संक्रमण के बाद दोबारा ये संक्रमण नहीं होगा।

EBV हवा से नहीं फैलता इसलिए अगर आप किसी प्रभावित व्यक्ति के साथ रह रहे हैं तब भी आपको ये संक्रमण नहीं होगा।

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जांच और इलाज

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। इसलिए अपने अनुसार सही इलाज के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।

मोनो की जांच किन तरीकों से की जा सकती है ?

शारीरिक जांच : मोनोन्यूक्लियोसिस (mononucleosis) की जांच आपके संकेत और लक्षणों को देखकर की जा सकती है। लिम्फ नोड्स, टॉन्सिल और स्प्लीन (Spleen )में सूजन होने पर ध्यानपूर्वक देखा जाएगा।

एंटीबाडी टेस्ट (Antibody Test): EBV वायरस के लिए बनने वाली एंटीबाडीज की जांच की जाती है जिससे की संक्रमण होने की पुष्टि की जा सके।

वाइट ब्लड सेल्स काउंट टेस्ट (White Blood Cells Count Test ): संक्रमण होने पर वाइट ब्लड सेल्स में बढ़ोतरी हो जाएगी, जिससे संक्रमण हो सकता है। इन टेस्ट से मोनोन्यूक्लियोसिस की पुष्टि तो नहीं होती लेकिन आशंका जताई जा सकती है।

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मोनोन्यूक्लियोसिस (Mononucleosis) का इलाज कैसे किया जा सकता है ?

मोनोन्यूक्लियोसिस का कोई सटीक इलाज नहीं है। बहुत अधिक पानी पीने से, साफ खाना खाने से और आराम करने से इस स्थिति में आपको आराम मिलेगा।

मोनोन्यूक्लियोसिस के संक्रमण के चलते आपको स्ट्रेप्टोकोकल संक्रमण (streptococcal (strep) infection) भी हो सकता है साथ ही टॉन्सिलाइटिस या फिर साइनस संक्रमण होने की भी संभावना है। अगर वाइरल संक्रमण के बाद आपको बैक्टीरियल संक्रमण होता है तो आपको एंटीबायोटिक्स लेनी पड़ेंगी ताकि संक्रमण आगे न बढ़े।

कुछ दवाओं से आपको रैशेस हो सकते हैं इसलिए ध्यान रखें कि कहीं आप गलत दवाएं तो नहीं ले रहे। मोनोन्यूक्लिओसिस होने पर अमोक्सीसीलीन (Amoxicillin) या फिर पेनिसिलिन (Penicillin) सम्बंधित दवाएं न खाएं।

डॉक्टर की सलाह से ही एंटीबायोटिक्स लें।

जीवनशैली में बदलाव और घरेलू नुस्खे

किन बदलावों और घरेलू नुस्खों की मदद से आप इस संक्रमण पर नियंत्रण पा सकते हैं :

  • बहुत सारा पानी और जूस पिएं। पानी-पीने से आपका शरीर हाइड्रेटेड रहेगा और आपको गले में खराश नहीं होगी।
  • दर्द से छुटकारा पाने के लिए आयब्रुफेन या एसिटेमेनोफेन खाएं।
  • बच्चों को एस्प्रिन(Asprin) न दें इससे रेये सिंड्रोम (Reye’s Syndrome ) का खतरा हो सकता है।
  • नमक पानी से गरारे करने से भी राहत मिल सकती है।

किसी भी और सवाल या जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से मिलें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी चिकित्सा सलाह , जांच या इलाज की सलाह नहीं देता है।

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हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Infectious Mononucleosis.http://www.healthline.com/health/mononucleosis#Overview1. Accessed October 10, 2016.

Infectious Mononucleosis (Mono).http://www.medicinenet.com/infectious_mononucleosis/article.htm. Accessed October 10, 2016.

Mononucleosis (Mono) – Topic Overview. http://www.webmd.com/a-to-z-guides/tc/infectious-mononucleosis-topic-overview#1. Accessed October 10, 2016.

Mononucleosis. http://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/mononucleosis/home/ovc-20165827. Accessed October 10, 2016.

लेखक की तस्वीर
Suniti Tripathy द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 02/12/2019 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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