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ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Leukemia) के बारे में जान लें

    ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Leukemia) के बारे में जान लें

    ल्यूकेमिया तब शुरू होता है जब बोन मैरो में मौजूद एकल कोशिका में बदलाव होता है और यह सामान्य तौर पर कार्य नहीं कर पाती। ल्यूकेमिया कोशिकाएं अक्सर असामान्य सफेद रक्त कोशिकाओं की तरह बर्ताव करती हैं। इसका इलाज ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Leukemia) के आधार पर निर्भर करता है।

    बता दें कि ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर है। जिसमें असामान्य रक्त कोशिकाओं की तेजी से वृद्धि होती है। यह आसामन्य वृद्धि हमारे बोन मैरो में होती है जहां पर रक्त का निमार्ण होता है। ल्यूकेमिया कोशिकाएं आमतौर पर इंमैच्योर व्हाइट ब्लड सेल्स होती हैं। दूसरे ट्यूमर्स की तरह ल्यूकेमिया में किसी प्रकार के ट्यूमर का निमार्ण नहीं होता है जो कि इमेजिंग टेस्ट जैसे कि एक्स रे या सीटी स्कैन में दिखाई देते हैं। कई प्रकार क ल्यूकेमिया हैं। कुछ बच्चों में आम तो कुछ व्यस्कों में। ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of leukemia) उनके प्रकार पर निर्भर करती हैं।

    ल्यूकेमिया के प्रकार (Types of Leukemia)

    चार मुख्य प्रकार के ल्यूकेमिया होते हैं।

    • एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (Acute lymphocytic leukemia) (ALL)- यह ल्यूकेमिया का सबसे कॉमन प्रकार है जो बच्चों, किशोरों और व्यस्कों में बताया जाता है।
    • एक्यूट मायलोजेनस ल्यूकेमिया (Acute myelogenous leukemia) (AML) – यह ल्यूकेमिया व्यस्कों में होना बहुत आम है। जिनकी उम्र 65 से ऊपर हो उनमें इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
    • क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (Chronic lymphocytic leukemia) (CLL) – यह भी व्यस्कों में होने वाला आम ल्यूकेमिया है। खासकर जिनकी उम्र 65 से ऊपर है उनमें। इसके लक्षण कई सालों तक दिखाई नहीं देते हैं।
    • क्रोनिक मायलोजेनस ल्यूकेमिया (Chronic myelogenous leukemia) (CML) – यह ल्यूकेमिया भी उन लोगों में अधिक होता है जिनकी उम्र 65 से ऊपर है, लेकिन ये किसी भी उम्र के व्यस्क व्यक्ति को हो सकता है। ये बच्चों में बहुत दुर्लभ मामले में ही होता है।

    ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Leukemia)

    ल्यूकेमिया की स्टेजेस की जानकारी ल्यूकेमिया के प्रकार के अनुसार दी जा रही है। जो निम्न है।

    एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Acute Lymphocytic Leukemia)

    इस कैंसर को ऑल (ALL) भी कहा जाता है। इस ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Leukemia) डायग्नोसिस के दौरान व्हाइट ब्लड सेल के आधार पर तय की जाती है। ऑल इंमच्यौर व्हाइट ब्लड सेल्स में होता है और बहुत तेजी से फैलता है।

    और पढ़ें: एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया के लिए टार्गेटेड थेरिपी: इन ड्रग्स से रोका जाता है कैंसर को फैलने से

    बच्चों में लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Childhood ALL stages)

    बच्चों में ऑल की स्टेजेस के दो रिस्क ग्रुप हैं।

    • लो रिस्क: बच्चे जो दस साल से कम के होते हैं और जिनका व्हाइट ब्लड सेल्स काउंट 50 हजार से कम हो जाता है उनको रिस्क कम होता है। बच्चों का सर्वाइवल रेट भी व्यस्कों से ज्यादा होता है।
    • हाय रिस्क: बच्चे जिनकी उम्र दस साल से अधिक और जिनका बल्ड काउंट 50 हजार से ज्यादा है उन्हें हाय रिस्क माना जाता है।

    व्यस्कों में एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Adult ALL stages)

    व्यस्कों में एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Leukemia) को तीन स्टेजेज में बांटा गया है। जो निम्न प्रकार हैं।

    और पढ़ें: क्या एनीमिया से ल्यूकेमिया हो सकता है?

    अनुपचारित एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (Untreated ALL)

    ऐसे लोग जिनमें अभी-अभी ऑल को डायग्नोस किया गया है वे इस स्टेज में आते हैं। अनुपचारित से मतलब है कि यह वह स्टेज है जिसमें कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए उपचार शुरू नहीं किया गया है।

    एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया रेमिशन (ALL remission)

    रेमिशन कैंसर ट्रीटमेंट्स के बाद आता है। व्यक्ति को रेमिशन स्टेज में तब माना जाता है जब बॉडी में 5 प्रतिशत या इससे कम बोन मैरो कोशिकाएं कैंसरस होती हैं। डब्ल्यूवीसी काउंट लिमिट में होता है और व्यक्ति लक्षणों को महसूस नहीं करता। इस स्टेज पर यह देखने के लिए कि बॉडी में कैंसर तो नहीं बचा है लैब टेस्ट किए जा सकते हैं।

    और पढ़ें: Leukemia : ल्यूकेमिया क्या है? जाने इसके कारण लक्षण और उपाय

    ऑल का वापस आना (Recurrent ALL)

    यह वह स्टेज होती है जब ट्रीटमेंट के ऑल वापस आ जाता है। इसके बाद व्यक्ति को फिर से टेस्टिंग और ट्रीटमेंट की मदद लेनी पड़ती है।

    एक्यूट मायलोजेनस ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of AML)

    यह कैंसर तेजी से वृद्धि करता है और आपके ब्लडस्ट्रीम में पाया जाता है। डॉक्टर आमतौर एएमएल की स्टेज निर्धारित नहीं करते हैं ब्लकि वे इसे सबटाइम में बांट देते हैं। सबटाइप्स में ल्यूकेमिया कोशिकाओं की मैच्योरिटी और वे बॉडी में कहां से आ रही हैं ये जांचा जाता है।

    • M0: अविभाजित एक्यूट मायलोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (Acute myeloblastic leukemia)
    • M1: न्यूनतम मैच्यूरेशन के साथ एक्यूट प्रोमयलोसाइटिक ल्यूकेमिया (Acute promyelocytic leukemia)
    • M2: मैच्यूरेशन के साथ एक्यूट मायलोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (Acute myelomonocytic leukemia)
    • M3: एक्यूट प्रोमायलोसाइटिक ल्यूकेमिया
    • M4: एक्यूट मायलोमोनोसाइटिक ल्यूकेमिया
    • M4 EOS: ईसिनोफीलिया के साथ एक्यूट मायलोमोनोसाइटिक ल्यूकेमिया
    • M5: एक्यूट प्रोमयलोसाइटिक ल्यूकेमिया (Acute promyelocytic leukemia)
    • M6: एक्यूट एरिथ्रोइड ल्यूकेमिया (Acute erythroid leukemia)
    • M7: एक्यूट मेगाकारियोब्लास्टिक ल्यूकेमिया (Acute megakaryoblastic leukemia)

    ये सब टाइप ल्यूकेमिया कहां से शुरू होता है इस पर निर्भर करते हैं। सबटाइप MO-M5 सफेद रक्त कोशिकाओं में होते हैं वहीं सबटाइप एम6 आरबीसी में और स्टेज ए7 प्लेटलेट्स से।

    क्रोनिक मायलोजेनस ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Chronic Myelogenous Leukemia)

    सीएलएल धीरे-धीरे वृद्धि करने वाला ल्यूकेमिया है। चूंकि यह धीरे-धीरे ग्रो करता है इसकी स्टेजेज ऑल और सीएमल से अलग दूसरे कैंसर की स्टेज की तरह ही होती हैं। इसकी स्टेजिंग के लिए राय स्टेजिंग सिस्टम का सहारा लिया जाता है। जो निम्न प्रकार है।

    • स्टेज 0 – मरीज में व्हाइट ब्लड सेल्स अधिक मात्रा में मौजूद हैं, लेकिन किसी प्रकार के कोई शारीरिक लक्षण नहीं है।
    • स्टेज 1- व्यक्ति में हाय लेवल व्हाइट ब्लड सेल्स के साथ इनलार्ज्ड लिम्फ नोड्स मौजूद हैं।
    • स्टेज-2 हाय लेवल व्हाइट ब्लड सेल्स मौजदू हैं और इंलार्ज्ड लिम्फ नोड्स स्वेलन लिम्फ नोड्स में परिवर्तित हो चुकी हैं।
    • स्टेज 3- दूसरी ब्लड सेल्स प्रभावित होना शुरू हो जाती हैं। इस स्टेज में लोग एनीमिक हो जाते हैं और उनमें पर्याप्त मात्रा में आरबीसी नहीं होती। डब्लयूबीसी का काउंट हाय होता है और लिम्फ नोड्स, स्पलीन और लिवर में सूजन आ जाती है। स्टेज 3 को हाय रिस्क माना जाता है।
    • स्टेज 4- इस स्टेज में पहले की स्टेजेज के सभी लक्षणों के साथ प्लेटेलेट्स और रेड ब्लड सेल्स प्रभावित होती हैं। ब्लड सामान्य रूप से क्लॉट नहीं बना पाता। इस स्टेज को हाय रिस्क माना जाता है।

    क्रोनिक मायलोजेनस ल्यूकेमिया की स्टेजेस (Stages of Chronic Myelogenous Leukemia)

    सीएमएल होने पर मरीज का बोन मैरो बहुत अधिक डब्ल्यूबीसी जिन्हें ब्लास्ट सेल्स कहते हैं का निमार्ण करता है। यह कैंसर धीरे-धीरे विकसित होता है। स्टेजिंग बॉडी में मौजूद कैंसरस व्हाइट ब्लड सेल्स के आधार पर की जाती है। इसे तीन स्टेजेज में बांटा गया है।

    क्रोनिक फेज सीएमएल (Chronic phase CML)

    इस स्टेज में बोन मैरो और ब्लड की 10 प्रतिशत कोशिकाएं ब्लास्ट सेल्स बन जाती हैं। इस स्टेज में लोग थकान और दूसरे हल्के लक्षणों को महसूस करते हैं। सीएमएल अक्सर इस फेज में ही डायग्नोस होता है और ट्रीटमेंट की शुरुआत होती है। क्रोनिक फेज में अधिकतर लोग ट्रीटमेंट के प्रति रिस्पॉन्स करते हैं।

    ओर पढ़ें: हॉजकिन्स डिजीज: 20-40 उम्र के लोगों में होता है ये ब्लड कैंसर, बेहद कॉमन हैं लक्षण

    एक्सक्लेरेटेड फेज सीएमएल (Accelerated phase CML)

    इस फेज में बोन मैरो और ब्लड में 10 से 19 प्रतिशत कोशिकाएं ब्लास्ट कोशिकाएं होती हैं। यह फेज तब आता है जब कैंसर क्रोनिक फेज में ट्रीटमेंट के प्रति रिस्पॉन्ड नहीं करता है। इस फेज के दौरान मरीज में अधिक लक्षण दिखाई दे सकते हैं। एक्सक्लेरेटेड फेज भी उपचार के लिए भी प्रतिक्रिया नहीं करता है।

    ब्लास्टिक फेज सीएमएल (Blastic phase CML)

    ब्लास्टिक फेज सीएलएल की अग्रेसिव स्टेज है। 20 प्रतिशत से अधिक बोन मैरो कोशिकाएं और ब्लड ब्लास्ट कोशिकाओं में बदल जाता है। ब्लास्ट कोशिकाएं पूरी बॉडी में फैलने लगेगी, जिससे ट्रीटमेंट और भी मुश्किल हो जाएगा। मरीज को बुखार, थकान, भूख कम लगना, वजन कम होना और स्पलीन पर सूजन महसूस हो सकती है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको ल्यूकेमिया की स्टेजेस से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/07/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड