सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स क्या हैं? क्या आपको है सही जानकारी

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अगस्त 10, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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सेक्स एक दिलचस्प शारीरिक और मानसिक अनुभूति है, जो कि दो लोगों के बीच के संबंध को कई पहलुओं पर मजबूत बनाती है। सेक्स के साथ ही एक और शब्द काफी ज्यादा सुनाई देता है और वो है ऑर्गेज्म। सेक्स ऑर्गेज्म (Sex Orgasm) को हिंदी में चरमोत्कर्ष व चरमसुख भी कहा जाता है। आमतौर पर गाहे-बगाहे इस शब्द का प्रयोग काफी चलन में है, लेकिन इसके बारे में पर्याप्त और उचित जानकारी शायद ही किसी-किसी को पता होगी। ऑर्गेज्म को लेकर हर व्यक्ति का अपना अलग मत है, जो कि उसने अपने या दूसरों के आधे-अधूरे ज्ञान और धारणाओं पर बनाया है। लेकिन हम आपको सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स के बारे में जानकारी देंगे, ताकि इसपर पड़ी धूल को हटाया जा सके।

सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स (Sex Orgasm Facts) से पहले जानिए चरमसुख है क्या (What is Orgasm)?

सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स से पहले हम जान लेते हैं कि, आखिर चरमसुख यानी ऑर्गेज्म किसे कहते हैं। दरअसल, ऑर्गेज्म का मतलब और अनुभव हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हो सकता है। लेकिन, सामान्य भाषा में इसे यौन संबंध के दौरान होने वाली उत्तेजना का शिखर स्तर कहा जाता है। इसमें आपको शरीर, पेल्विक मसल्स, नसों और जननांग व उसके आसपास एक मजबूत औऱ ताकतवर सेंसेशन महसूस होती है, जो कि एक इरोटिक टेंशन के रिलीज होने के साथ खत्म होती है। यह प्रक्रिया पुरुष और महिला में अलग-अलग अवधि तक रह सकती है।

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पुरुषों में ऑर्गेज्म को वीर्य स्खलन से भी जोड़ कर देखा जाता है। लेकिन, हर बार यह धारणा सही नहीं होती है। क्योंकि, सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स के अनुसार कई बार पुरुषों को ड्राई ऑर्गेज्म भी होता है, जिसमें न के बराबर वीर्य स्खलित होता है या फिर होता ही नहीं है। वहीं, महिलाओं में ऑर्गेज्म के दौरान स्खलन हो भी सकता है और नहीं भी

ऑर्गेज्म मॉडल (Orgasm Model) क्या है?

विशेषज्ञों के मुताबिक ऑर्गेज्म प्राप्त करता एक प्रक्रिया है, जो कि अलग-अलग फेज से होकर गुजरती है। मुख्यतः दो प्रकार के ऑर्गेज्म मॉडल के बारे में बात की जाती है, जिसमें मास्टर एंड जॉनसन्स फोर-फेज मॉडल (Master and Johnson’s Four-Phase Model) और कप्लान्स थ्री-स्टेज मॉडल (Kaplan’s Three-Stage Model) शामिल हैं। मास्टर एंड जॉनसन्स फोर-फेज मॉडल के मुताबिक, चरमसुख के चरणों में एक्साइटमेंट, प्लेटियो, ऑर्गेज्म और रेसोल्यूशन होते हैं। वहीं, कप्लान्स थ्री-स्टेज मॉडल के मुताबिक ऑर्गेज्म के चरणों में डिजायर, एक्साइटमेंट और ऑर्गेज्म होते हैं। आइए, मास्टर एंड जॉनसन्स फोर-फेज मॉडल के मुताबिक चरणों के बारे में जानते हैं।

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  1. एक्साइटमेंट स्टेज उस स्थिति को कहा जाता है, जब जननांगों में ब्लड सप्लाई बढ़ जाती है और आपके शरीर का ब्लड प्रेशर और हृदयगति बढ़ने लगती है।
  2. प्लेटियो स्टेज में यह प्रक्रिया थोड़ी आगे बढ़ती है और जननांगों के पास, पेल्विक मसल्स और शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित करने लगती है। जिससे शरीर में मसल्स टेंशन बढ़ती है और महिलाओं में स्तनों और पुरुषों में टेस्टिकल्स आदि का आकार भी बढ़ने लगता है।
  3. ऑर्गेज्म स्टेज में पेल्विक मसल्स में लगातार एक संकुचन और सेंसेशन महसूस होने लगती है, जो कि द्रव्य स्खलन के साथ खत्म हो सकती है। कई मामलों में द्रव्य स्खलित नहीं होता है।
  4. इसके बाद आखिरी स्टेज यानी रेसोल्यूशन महिला और पुरुष में अलग-अलग होता है। जहां पुरुष एक बार ऑर्गेज्म प्राप्त करने के कुछ सेकेंड से लेकर कुछ दिन के बाद ही ऑर्गेज्म प्राप्त कर सकता है, वहीं महिला एक के बाद दूसरा ऑर्गेज्म प्राप्त कर सकती है। लेकिन, आमतौर पर ऑर्गेज्म प्राप्त करने के बाद शरीर के वापिस सामान्य स्थिति में आने की प्रक्रिया को रेसोल्यूशन कहा जाता है।

ऑर्गेज्म कितने प्रकार के हो सकते हैं?

चरमसुख निम्नलिखित प्रकार के हो सकते हैं। जैसे-

  1. कॉम्बिनेशन या ब्लेंडेड ऑर्गेज्म
  2. मल्टीपल ऑर्गेज्म
  3. प्रेशर ऑर्गेज्म
  4. रिलेक्सेशन ऑर्गेज्म
  5. टेंशन ऑर्गेज्म
  6. जी-स्पॉट ऑर्गेज्म
  7. फैंटेसी ऑर्गेज्म
  8. क्लिटोरियल ऑर्गेज्म
  9. वजायनल ऑर्गज्म
  10. एनल ऑर्गेज्म, आदि

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सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स क्या हैं?

आइए, सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स के बारे में जानते हैं। जैसे-

  • सेक्स से मिलने वाले फायदों की तरह ऑर्गेज्म प्राप्त करने से भी सिरदर्द या माइग्रेन के दर्द में राहत मिलती है। इसके अलावा, कुछ शोध के मुताबिक यह भी माना जाता है कि, अर्थराइटिस, पीरियड्स पेन आदि में भी ऑर्गेज्म प्राप्त करने से राहत मिलती है। हालांकि, इस राहत की अवधि 8 से 10 मिनट तक ही रहती है, लेकिन इसके बाद भी दर्द की गंभीरता में आराम रहता है।
  • कई लोगों को लगता है कि, कॉन्डम का उपयोग करने से ऑर्गेज्म प्राप्त करने में समस्या होती है। लेकिन, पुरुष हो या महिला कॉन्डम के उपयोग के साथ और इसके बिना चरमसुख प्राप्त करने की संभावना बराबर रहती है।
  • पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में ऑर्गेज्म प्राप्त करने की प्रक्रिया थोड़ी ज्यादा जटिल होती है। क्योंकि, महिलाओं में थायरॉइड, डिप्रेशन आदि जैसी शारीरिक समस्याओं या फिर फोरप्ले में कमी, क्लिटोरिस और सेंसिटिव पॉइंट्स स्टीमूलेशन को अनदेखा करना आदि की वजह से चरमसुख प्राप्त करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, दूसरा कारण यह भी होता है कि महिलाओं को ऑर्गेज्म मिलने की प्रक्रिया पुरुषों के मुकाबले थोड़ी लंबी होती है।

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  • ऑर्गेज्म प्राप्त करने के लिए आपको अपने पार्टनर से खुलकर बात करना काफी जरूरी है। क्योंकि, हर व्यक्ति के शरीर में अलग-अलग संवेदनशील अंग या हिस्से हो सकते हैं। इसके अलावा, ऑर्गेज्म आपके पार्टनर की पसंद व नापसंद पर भी निर्भर करता है। इसलिए, आपको अपने पार्टनर से खुलकर बात करनी चाहिए, कि कैसे साथ में मिलकर सेक्स को बेहतर बनाया जा सकता है और चरमसुख प्राप्त किया जा सकता है।
  • कुछ शोध के मुताबिक, करीब 80 प्रतिशत महिलाओं ने कभी न कभी फेक ऑर्गेज्म किया है। जबकि, ऐसा करना बिल्कुल भी जरूरी नहीं है। हालांकि, ऐसा करने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। लेकिन, इस तरह आपका पार्टनर कभी भी आपकी पसंद व नापसंद को नहीं पहचान पाएगा और आपको असंतुष्टि महसूस होती है। इसलिए बेहतर है कि, ऑर्गेज्म प्राप्त न होने के बारे में अपने पार्टनर से बात करें और एक-दूसरे की पसंद के बारे में जानें।
  • सेक्स ऑर्गेज्म फैक्ट्स में यह भी शामिल है कि कैसे महिलाएं आसानी से चरमसुख प्राप्त कर सकती हैं। शोध के मुताबिक, महिलाओं में ऑर्गेज्म प्राप्त करने के लिए क्लिटोरिस के साथ प्ले करना काफी फायदेमंद है, जबकि पुरुषों में यह कार्य पेनिस करता है। महिलाओं के क्लिटोरिस में करीब 8000 नर्व एंडिंग होती हैं, जो कि क्लाइमेक्स को प्राप्त करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, जी-स्पॉट रबिंग दूसरा मददगार पहलू हो सकता है।

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