home

आपकी क्या चिंताएं हैं?

close
गलत
समझना मुश्किल है
अन्य

लिंक कॉपी करें

फैक्टर VII डेफिसिएंशी है एक रेयर ब्लीडिंग डिसऑर्डर, इन लोगों को होता है इसका ज्यादा खतरा

फैक्टर VII डेफिसिएंशी है एक रेयर ब्लीडिंग डिसऑर्डर, इन लोगों को होता है इसका ज्यादा खतरा

फैक्टर VII डेफिसिएंशी (Factor VII Deficiency) एक ब्लीडिंग डिसऑर्डर (Bleeding disorder) है। जिसका गंभीरता इससे पीड़ित हर व्यक्ति के लिए अलग होती है। इस कंडिशन के लक्षण किसी भी उम्र में दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, बीमारी के सीवियर कैसेज बचपन में सामने आते हैं। फैक्टर VII डेफिसिएंशी होने पर नाक से खून आना, मसूड़ों से खून आना, आसानी से चोट लगना, सर्जरी या चोट लगने के बाद लगातार ब्लीडिंग होना जैसी परेशानियां होती हैं। इसके साथ ही जॉइंट से ब्लीडिंग और ब्लड में यूरिन आना जैसी तकलीफें भी कभी-कभी हो सकती हैं।

फैक्टर VII डेफिसिएंशी (Factor VII Deficiency) से पीड़ित महिलाओं को पीरियड्स के दौरान ब्लीडिंग लंबे समय तक और अधिक मात्रा में होती है। स्थिति गंभीर होने पर गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक में भी ब्लीडिंग हो सकती है। इससे पीड़ित कुछ लोगों में एक्सेसिव ब्लड क्लॉटिंग (Excessive blood clotting) की परेशानी भी होती है। हालांकि, फैक्टर VII डेफिसिएंशी का सामना करने वाले एक तिहाई लोगों को किसी प्रकार की ब्लीडिंग प्रॉब्लम का सामना नहीं करना पड़ता है।

फैक्टर VII डेफिसिएंशी के कारण (Causes of Factor VII Deficiency)

फैक्टर VII डेफिसिएंशी (Factor VII Deficiency) का एक रेयर ब्लीडिंग डिसऑर्डर (Bleeding disorder) है। तीन से पांच लाख लोगों में कोई एक इंसान इस बीमारी से प्रभावित होता है। हालांकि, यह रेयर डिसऑर्डर्स (Rare disorders) के ग्रुप में से सबसे अधिक बार होने वाला डिसऑर्डर है। यह डिसऑर्डर एफ7 जीन (F7 Gene) के म्यूटेशन के कारण होता है जो प्रोटीन बनाने का निर्देश प्रदान करता है जिसे कोआगुलेशन फैक्टर VII (Coagulation Factor VII ) कहा जाता है। यह प्रोटीन कोएगुलेशन सिस्टम (Coagulation system) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जो कि कैमिकल रिएक्शन्स की एक सीरीज है जो इंजरी के रिस्पॉन्स में ब्लड क्लॉट का निमार्ण करती है। ये म्यूटेशन ब्लडस्ट्रीम (Bloodstream) में कोआगुलेशन फैक्टर VII की मात्रा को कम करते हैं। इस तरह की कमी ब्लड क्लॉट (Blood clot) बनने से रोकती है जिससे एक्सेसिव ब्लीडिंग होती है। हालांकि, इसका कारण अब तक पता नहीं है कि इस स्थिति के कुछ लोगों में थ्रोम्बोसिस (Thrombosis) क्यों होता है।

और पढ़ें: Hemophilia: कुछ ऐसे किया जाता है हीमोफीलिया का ट्रीटमेंट

इसके अन्य कारण निम्न हो सकते हैं।

  • इस स्थिति से जेनेटिक रूप से प्रभावित होने के लिए जरूरी है कि दोनों पेरेंट्स में डिजीज वाले जीन हो और फिर वे उनके द्वारा बच्चों में पास हो।
  • अगर व्यक्ति को एक नॉर्मल जीन और एक डिजीज वाला जीन मिलता है तो वह व्यक्ति बीमारी का कैरियर होगा , लेकिन उसमें बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देंगे,लेकिन दोनों जीन डिफेक्टिव होने पर बच्चे में बीमारी का रिस्क बढ़ने के 25 प्रतिशत चांसेज बढ़ जाते हैं।
    यह स्थिति महिला और पुरुष दोनों को समान रूप से प्रभावित करती है।
  • इसके नॉनइंहेरिटेड डिसऑर्डर (Non inherited disorder) जिसे एक्वायर्ड फैक्टर VII डेफिसिएंशी (Acquired Factor VII Deficiency) कहते हैं यह कॉन्जेनिटल फॉर्म (Congenital Form) की तुलना में कम कॉमन है।
  • यह लिवर डिजीज या माएलोमा (Myeloma) या अप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia) के कारण भी हो सकता है।
  • एक्वायर्ड फैक्टर VII डेफिसिएंशी सिंड्रोम (Acquired Factor VII Deficiency Syndrome) कुछ दवाओं के कारण भी हो सकता है जो क्लॉटिंग को रोकने का काम करती हैं।
  • विटामिन के (Vitamin K) की कमी होने पर भी एक्वायर्ड फैक्टर VII डेफिसिएंशी सिंड्रोम (Acquired Factor VII Deficiency Syndrome) हो सकता है।

फैक्टर VII डेफिसिएंशी के लक्षण क्या हैं? (Factor VII deficiency Symptoms)

फैक्टर VII डेफिसिएंशी/Factor VII deficiency

बता दें कि VII डेफिसिएंशी सिंड्रोम (VII deficiency Syndrome) दो प्रकार का होता है। टाइप 1 में फैक्टर VII ब्लड में उपस्थित होता है, लेकिन इसका लेवल लो होता है। वहीं टाइप 2 में फैक्टर VII प्रेजेंट होता है, लेकिन ठीक से काम नहीं करता। रक्त में मौजूद फैक्टर VII की मात्रा और उसकी गतिविधि के आधार पर लक्षणों की गंभीरता माइल्ड से सीवियर तक होती है। जिन बच्चों में फैक्टर VII कम होता है या बिलकुल नहीं होता उनमें लक्षण शीघ्र ही दिखाई देने लगते हैं। जबकि कुछ लोग जिनमें कुछ VII फैक्टर फंक्शनिंग होता है उनमें जब तक कोई सर्जरी या इंजरी नहीं होती लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसके लक्षण एक ही फैमिली के लोगों में अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार लक्षण बहुत माइल्ड होते हैं जिनसे किसी प्रकार की कोई पेरशानी नहीं होती।

सीवियर डेफिसिएंशी का सामना कर रहे लोगों में सर्जरी या इंजरी के बाद लंबे समय तक ब्लीडिंग होती है। जिसका कारण ब्लड में VII फैक्टर की कमी है जिससे क्लॉटिंग प्रॉसेस कंप्लीट नहीं हो पाती। जैसे कि ऊपर पहले ही हम बता चुके हैं कि कई बार ब्लीडिंग स्किन के अंदर नहीं बाहर भी होती है। जिसमें जॉइंट में ब्लीडिंग शामिल है।

और पढ़ें: Lymphoma: लिम्फोमा क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

फैक्टर VII डेफिसिएंशी (Factor VII deficiency Diagnosis) के बारे में पता कैसे चलता है?

फैक्टर VII डेफिसिएंशी के बारे में बर्थ के पहले पता चल सकता है यदि फैमिली हिस्ट्री हो तो। ऐसा होने पर प्रेग्नेंसी के 15-20 वें हफ्ते में टेस्ट करवाया जाता है।

वहीं शिशुओं के जन्म के बाद ब्रेन के अंदर ब्लीडिंग (इंट्राक्रैनियल हैमरेज) या गर्भनाल काटने के बाद अत्यधिक ब्लीडिंग या खतना जैसी सर्जरी के बाद होने वाली लगातार ब्लीडिंग क्लॉटिंग डिसऑर्डर (Bleeding clotting disorder) के प्रति इशारा करती है।

बड़े बच्चों और व्यस्कों में इस ब्लड डिसऑर्डर का पता चोट लगने या ऑपरेशन या इंजरी के दौरान होने वाली ब्लीडिंग से लगता है। फैक्टर VII डेफिसिएंशी को मासिक धर्म और डिलिवरी की वजह से पुरुषों की तलुना में महिलाओं में जल्दी डायग्नोस कर लिया जाता है। फैक्टर VII डेफिसिएंशी (VII deficiency) के बारे में ब्लड टेस्ट के द्वारा भी पता किया जा सकता है। टेस्ट में इस बात का पता लगाया जाता है कि ब्लड का थक्का बनने में कितना समय लग रहा है। इसके बाद आगे की जांच की जाती है।

डॉक्टर ब्लड में फैक्टर VII के लेवल के बारे में भी पता करने की कोशिश करेंगे। इसके साथ ही वे जीन म्यूटेशन (Gene mutation) को भी पहचानने की कोशिश करेंगे। जिससे आगे की पीढ़ी को इस बीमारी से बचाया जा सके। इमैजिंग स्केन जैसे कि एमआरआई, सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड स्कैन्स की मदद से इंटरनल ब्लीडिंग के बारे में जानकारी प्राप्त की जाएगी।

और पढ़ें: नॉरमोसाइटिक एनीमिया: क्या एनीमिया के इस प्रकार के बारे में जानते हैं आप?

अन्य टेस्ट

इसके अलावा निम्न टेस्ट फैक्टर VII डेफिसिएंशी की जांच के लिए किए जाते हैं।

  • फैक्टर एसेज (Factor Assays) की मदद से मिसिंग या कम परफॉर्म करने वाले फैक्टर्स के बारे में पता किया जाता है।
  • प्रोथ्रोम्बिन टाइम (Prothrombin time) की मदद से फंक्शनिंग फैक्टर्स I, II, V, VII, और X के बारे में पता किया जाता है।
  • इंहिबिटर टेस्ट्स (Inhibitor tests) की मदद से यह पता लगाया जाता है कि कहीं मरीज का इम्यून सिस्टम क्लॉटिंग फैक्टर्स पर अटैक तो नहीं कर रहा।

फैक्टर्स VII डेफिसिएंशी का इलाज कैसे किया जाता है? (Factor VII deficiency treatment)

फैक्टर्स VII डेफिसिएंशी के लक्षण अगर परेशानी का कारण नहीं बन रहे, VII का लेवल बहुत कम रिड्यूस हुआ है तो ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है। कई मामलों में रोकथाम के बजाय लक्षणों के इलाज के लिए ट्रीटमेंट की आवश्यकता होती है। ट्रीटमेंट का उद्देश्य मिसिंग या कम हुए VII फैक्टर को मानव निर्मित सब्सिट्यूट से इंजेक्शन के जरिए रिप्लेस करना है।

  • वहीं ब्लीडिंग एपिसोड्स के दौरान क्लॉटिंग फैक्टर्स को बूस्ट करने के लिए क्लॉटिंग एजेंट दिए जा सकते हैं।
  • ब्लीडिंग को कंट्रोल करने के बाद VII फैक्टर के प्रोडक्शन और फंक्शनिंग को प्रभावित करने वाली डिजीज या इसका कारण बनने वाली दवाओं की मॉनटरिंग की जाती है।
  • सर्जरी के दौरान डॉक्टर एक्सेसिव ब्लीडिंग को कम करने के लिए ड्रग्स को प्रिस्क्राइब कर सकते हैं।
  • फैक्टर VII डेफिसिएंशी का सामना कर रहे व्यक्ति को नॉन स्टीरियोडल एंटी इंफ्लामेटरी ड्रग्स का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि ये ब्लीडिंग का रिस्क बढ़ाने का काम करती हैं। इनकी जगह दूसरे पेन रिलीविंग मेथड को अपनाना चाहिए।
  • पेनफुल स्वेलिंग से बचने के लिए इंजेक्शन का उपयोग भी स्किन के अंदर करना चाहिए ना कि मसल्स के अंदर।
  • फैक्टर VII डेफिसिएंशी से पीड़ित व्यक्ति को रेगुलर डॉक्टर विजिट करनी चाहिए। ताकि यह पता चल सके कि ट्रीटमेंट के प्रति रिस्पॉन्स कैसा है और किसी प्रकार साइड इफेक्ट तो नहीं हो रहा।

और पढ़ें: Megaloblastic Anemia: मेगालोब्लास्टिक एनीमिया क्या है? जानिए इसके लक्षण और इलाज

फैक्टर VII डेफिसिएंशी के मरीज इन बातों का रखें विशेष ध्यान (Factor VII deficiency syndrome)

फैक्टर VII डेफिसिएंशी का सामना कर रहे व्यक्ति का नॉर्मल लाइफ स्पेन होता है। बस कुछ एक्टिविटीज को अवॉयड करना चाहिए जो निम्न हैं।

  • ऐसे खेलों को अवॉयड करें जिनके कारण हेड इंजरी (Head injury) हो सकती है।
  • किसी प्रकार की सर्जरी या प्रेग्नेंसी प्लानिंग करने पर फैक्टर VII डेफिसिएंशी के बारे में डॉक्टर को बताएं ताकि इसके बारे में एडवांस में प्लानिंग की जा सके।
  • यह एक जेनेटिक बीमारी है जो पेरेंट्स से बच्चे में पास होती है। इसलिए फैमिली प्लानिंग के पहले डॉक्टर से इसके बारे में काउंसलिंग कर लें।
  • इस बीमारी का सामना कर रहे लोगों को लाइफ लॉन्ग मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। इसलिए नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें।

उम्मीद हैं कि आपको फैक्टर VII डेफिसिएंशी (Factor VII Deficiency) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर badge
Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 02/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड