लॉकडाउन के दौरान पेरेंट्स को डिसिप्लिन का तरीका बदलने की है जरूरत

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 5, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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दुनियाभर के लोग इस समय कोरोना वायरस से जंग लड़ रहे हैं। इस जानलेवा वायरस से बचने का फिलहाल एकमात्र तरीका घर पर रहना है। कोविड-19 महामारी के कारण देशभर में लॉकाउन की स्थिति बनी हुई है। आज लॉकडाउन का 42 वां दिन है। घर में कैद अच्छे खासे लोग तनाव महसूस कर रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत घर में बंद बच्चों में देखने को मिल रही है। बाहर न निकल पाने के कारण बच्चे परेशान हो रहे हैं। बच्चे अब इंडोर गेम्स से भी बोर हो चुके हैं। पेरेंट्स इस बात से परेशान हैं कि वह कैसे बच्चों का समय काटने में मदद करें। बच्चों के व्यवहार में भी काफी बदलाव दिख रहा है। बाहर न निकल पाने की वजह से बच्चे उदास और चिड़चिड़े होने लगे हैं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, बच्चे डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। ऐसे समय में बच्चों का खास ख्याल रखने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स की मानें तो इस समय बच्चों को डांटने की बजाय प्यार और धैर्य के साथ हैंडल करने की जरूरत है। लॉकडाउन का तीसरा फेज चल रहा है और 17 मई के बाद हालात नॉर्मल होंगे फिलहाल इसकी भी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। ऐसे में जानते हैं लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स के बारे में, जो बच्चों का ख्याल रखने में आपकी मदद करेंगे।

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लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स

अपने बच्चों को कैसे हैंडल करना है यह आप अच्छे से जानते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक लॉकडाउन में आपको अपने तरीके में थोड़े बदलाव करने की जरूत होगी। सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि आपके बच्चे का सिर्फ घर से बाहर जाना बंद नहीं हुआ है। इसके साथ ही वह अपने दोस्त, स्कूल, प्लेग्राउंड, टीचर और बहुत सारी चीजों को मिस कर रहे हैं। बच्चों की परेशानी को गहराई से समझने के लिए हमने कुछ पेरेंट्स से भी बात की। आइए जानते हैं लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स…

लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स: सबसे पहले बच्चे के बुरे बिहेवियर की वजह को समझें

दिल्ली में रहने वाले वैभव तनेजा की मां बताती हैं- बच्चों को किस बात की टेंशन है। बड़ों की तरह बच्चों को न जॉब जाने का डर है। न ही उन्हें इस बात की टेंशन कि घर में राशन पूरा है या नहीं। फिर बच्चों को किस बात की टेंशन है मुझे यह नहीं समझ आ रहा। इस लॉकडाउन में वैभव बहुत जिद्दी और शरारती हो गया है, जिससे मेरी टेंशन जरूर बढ़ गई है।

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गाजियाबाद की रहने वाली अमायरा खुराना की मां बताती हैं- मेरी बेटी के व्यवहार में काफी बदलाव आया है। मैं उसे खुश रखने का हर प्रयास कर रही हूं। मैं दिनभर उसे किसी न किसी एक्टिविटी में व्यस्त रखती हूं। मैं उसके साथ गेम्स खेलती हूं। उसके लिए नई नई रेसिपी बनाती हूं। बावजूद इसके वो बहुत उदास और चुप रहने लगी है। वह स्कूल जाने की जिद करती है। अमायरा को नीचे गार्डन लेकर जाती हूं तो गार्ड वापस ऊपर भेज देते हैं। मुझे नहीं समझ आ रहा कि उसे खुश रखने के लिए ओर क्या किया जाए।

साइकोथेरेपिस्ट अनुपम गर्ग ने लॉकडाउन में बच्चों के व्यवहार में आ रहे बदलाव को लेकर बताया कि सबसे पहले पेरेंट्स को बच्चों को समझने की जरूरत है। बच्चे ज्यादातर समय अपने दोस्तों के साथ समय बिताते हैं। फिर बात स्कूल की हो या प्ले टाइम की। अभी वो घर के अंदर अपने परिवार के साथ रहने को मजबूर हैं। ऐसा एक दो दिन के लिए भी नहीं है। इसलिए उन्हें परेशानी हो रही है। बहुत सारे बच्चे अपना पूराना रूटीन मिस कर रहे हैं। छोटे बच्चों को यह नहीं मालूम होता है कि बुरे समय को कैसे हैंडल करना होता है। जब चीजे सभी नहीं होती तो उनके लिए इसे सहन करना मुश्किल होता है। इसलिए बच्चों को इस समय प्यार और धैर्य के साथ हैंडल करने की जरूरत है।

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लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स:  शरारत करने पर डांटने की बजाय प्यार से समझाएं

बच्चे इन दिनों काफी परेशान कर रहे होंगे। लेकिन एक्सपर्ट्स की मानें तो ऐसे समय में उन्हें डांटने की बजाय प्यार से चीजों को समझाएं। लॉकडाउन पीरियड में बहुत सारे बच्चों के डिप्रेशन में जाने के मामले सामने हैं। इसलिए बच्चे को मानसिक और शारीरिक रूप से खुश रहने के लिए उन्हें स्ट्रेस फ्री रखना बेहद जरूरी होता है। साइकोलॉजिस्ट अनुपम गर्ग इसे लेकर कहते हैं बच्चे इस समय अकेला फील कर रहे हैं। ऐसे में उनके व्यवहार में चिड़चिड़ापन आना लाजमी है। आप उनकी उनके दोस्तों या कजिन भाई बहनों से वीडियो कॉल पर बात करा सकते हैं। इसके साथ ही उनके दिनभर का शेड्यूल तैयार कर दें। इससे वह पूरा दिन किसी न किसी काम में व्यस्त रहेंगे। वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी खाली दिमाग शैतान का घर।

डॉ गर्ग ने बताया  कि अगर आपका बच्चा सामान उठाकर फेंक रहा है तो सबसे पहले अपने गुस्से पर कंट्रोल करें। एक गहरी सांस लें चीजों को जगह पर रख दें। बच्चों को गुस्सा करने का यह सही समय नहीं है। उन्हें प्यार से समझाएं। वो किसी बात को लेकर जिद कर रहे हैं तो उनकी हर जिद को पूरा नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर वो किसी बात को लेकर नहीं मान रहे हैं, तो उनके साथ आप भी जमीन पर बैठ जाएं और उन्हें प्यार से समझाएं। इस पूरी स्थिति में आपको अपने गुस्से पर आपको पूरा काबू रखना होगा। अगर आपका बच्चा मिसबिहेव कर रहा है तो आप याद करें कि जब आपका बच्चा बीमार होता है तब आप उसका ख्याल कैसे रखते हैं। बिल्कुल वैसा ही आपको अभी उनका ख्याल रखना है। बच्चे के गुस्से को शांत करने के लिए उन्हें प्यार से झप्पी दें।

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लॉकडाउन में पेरेंटिंग टिप्स:  मानसिक रूप से बीमार हो रहे हैं बच्चे

बच्चा घर में भाग दौड रहा है तो उसे रोके नहीं। बच्चों को बाहर जाना नहीं मिल रहा है। ऐसे में उन्हें घर पर खेलने से न रोकें। बच्चों का घर से बाहर निकलना बिल्कुल बंद हो गया है, जिससे वो मानसिक बीमार होते जा रहे हैं। बच्चों में स्ट्रेस लेवल काफी बढ़ गया है। ज्यादातर बच्चों के बिहेवियर में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

किसी में चिड़चिड़ापन आ गया है तो किसी में गुस्सा बढ़ रहा है। इसका सीधा असर उनके शारीरिक और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर देखने को मिल सकता है। इस मुश्किल समय का असर अपने बच्चों पर न पड़ने दें। लॉकाउन आने वाले कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा, लेकिन अगर आपके बच्चे की मेंटल हेल्थ पर इसका असर पड़ा तो उसे सुधारने में काफी समय लग जाएगा।

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