एनोरेक्सिया नर्वोसा एक डिसऑर्डर है जिसमें मरीज को वजन बढ़ने का डर बना रहता है। जो लोग इस भावनात्मक डिसऑर्डर से पीड़ित होते हैं, उनका वजन कम होने के बावजूद भी उन्हें वजन बढ़ने का डर होता है। जिसके कारण वे अत्यधिक व्यायाम करने के साथ ही या वजन कम करने के लिए अन्य तरीकों (जैसे जुलाब, खाने के बाद उल्टी) का उपयोग करते हैं।

1. प्रतिबंधित एनोरेक्सिया
2. अत्यधिक खाने वाले एनोरेक्सिया
1. प्रतिबंधित एनोरेक्सिया:- प्रतिबंधित एनोरेक्सिया के शिकार व्यक्ति अपने खाने-पीने पर अत्यधिक प्रतिबंध लगाते हैं। इनलोगों में हमेशा अपनी कैलोरी की चिंता बनी रहती है और ऐसे लोग कैलोरी काउंट भी करते रहते हैं। आहार से दूरी बनाते हुए ऐसे लोग विशेष तौर से कार्बोहाइड्रेट पदार्थ पर ही निर्भर रहते हैं। ऐसे लोग एक्सरसाइज भी अत्यधिक करते हैं।
2. अत्यधिक खाने वाले एनोरेक्सिया:- ऐसे लोग भी अपने खान-पान पर प्रतिबंध लगाते हैं। लेकिन, खाने के दौरान अत्यधिक खाना खाने से पीछे भी नहीं हटते हैं। लेकिन, ऐसे लोग खाने के बाद उल्टी भी कर देते हैं। ध्यान नहीं देने पर ऐसे लोग धीरे-धीरे मानसिक रूप से भी बीमार पड़ने लगते हैं।
पुरुषों की तुलना में महिलाओं में एनोरेक्सिया नर्वोसा अधिक पाया जाता है। यह अक्सर युवावस्था के दौरान शुरू होता है। एनोरेक्सिया नर्वोसा शरीर के वजन को बहुत कम कर सकता है। समय रहते इलाज न करवाने पर जीवन को खतरा हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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एनोरेक्सिया नर्वोसा के लक्षण क्या निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:
एनोरेक्सिया व्यक्ति पर बुरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी डाल सकता है। ऐसे लोग हर समय वजन और भोजन के बारे में बात कर सकते हैं, दूसरों के सामने खा नहीं सकते हैं, मूडी या उदास हो रहते हैं या दोस्तों के साथ बाहर नहीं जाना चाहते। एनोरेक्सिया से पीड़ित लोगों को अन्य मानसिक और शारीरिक बीमारियां भी हो सकती हैं, जिनमें शामिल हैं:
हो सकता है ऊपर दिए गए लक्षणों में कुछ लक्षण शामिल न हो। यदि आपको किसी भी लक्षण के बारे में किसी भी तरह की शंका है, तो कृपया डॉक्टर से परामर्श करें।
आपको या परिवार के किसी सदस्य में ये लक्षण दिखें या आपका कोई सवाल हो तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श करें। शरीर का वजन बहुत कम होने पर एनोरेक्सिया जीवन के लिए खतरा हो सकता है। आहार संबंधी डिसऑर्डर से ग्रसित ज्यादातर लोग इलाज का विरोध करते हैं क्योंकि उन्हें लगता कि उन्हें कोई समस्या नहीं है। हमेशा उनका सपोर्ट करें और विश्वास दिलाएं कि उन्हें एक समस्या है और इलाज की जरूरत है।
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अभी तक एनोरेक्सिया नर्वोसा के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। इस बीमारी के लिए कई कारण हो सकते हैं जैसे अवसाद या अन्य मानसिक बीमारी। जींस और हार्मोन भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
डॉक्टर शारीरिक परीक्षण (फिजिकल टेस्ट), लेबोरेटरी टेस्ट आदि से इस डिसऑर्डर का पता करता है। एनोरेक्सिया के लिए कोई विशिष्ट टेस्ट मौजूद नहीं है।
यदि डॉक्टर को एनोरेक्सिया डिसऑर्डर का संकेत होता है, तो वह कुछ और टेस्ट करवा सकता है। इन परीक्षणों में शामिल हैं-
एनोरेक्सिया नर्वोसा के इलाज में व्यक्ति को उसकी बीमारी का एहसास दिलाना सबसे बड़ी चुनौती है। एनोरेक्सिया से ग्रसित लोग इस बात से इंकार करते हैं कि उन्हें कोई डिसऑर्डर है। इस डिसऑर्डर के उपचार में शामिल हो सकते हैं:
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एनोरेक्सिया नर्वोसा की वजह से निम्नलिखित शारीरिक परेशानी बढ़ सकती है। जैसे:
इन परेशानियों के साथ-साथ अन्य शारीरिक या मानसिक परेशानी हो सकती है। इसलिए शरीर में हो रहे बदलाव को नजरअंदाज न करें और हेल्थ एक्सपर्ट से सम्पर्क करें।
अगर आपको अपनी समस्या को लेकर कोई सवाल है, तो कृपया अपने डॉक्टर से परामर्श लेना ना भूलें।