LFT: जानें क्या है लिवर फंक्शन टेस्ट?

By Medically reviewed by Dr Sharayu Maknikar

परिभाषा

लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Testing) क्या है?

लिवर फंक्शन टेस्ट एक तरह का ब्लड टेस्ट है जो लिवर की बीमारी और किसी तरह की क्षति की जांच के लिए किया जाता है। यह टेस्ट ब्लड में कुछ एंजाइम्स और प्रोटीन की मात्रा को मापता है।

कुछ टेस्ट यह पता लगाने के लिए किए जाते हैं कि लिवर प्रोटीन बनाने और रक्त के अपशिष्ट पदार्थ बिलिरुबिन को साफ करने का अपना सामान्य काम कितनी अच्छी तरह कर रहा है। कुछ अन्य लिवर टेस्ट उन एंजाइम्स को मापते हैं जो लिवर की कोशिकाओं द्वारा बीमारी या क्षति के कारण रिलीज किया जाता है।

लिवर टेस्ट का असामान्य होने का मतलब लिवर की बीमारी का संकेत हो ऐसा जरूरी नहीं है। आपका डॉक्टर रिजल्ट को अच्छी तरह समझाएगा।

लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Testing) क्यों किया जाता है?

लिवर फंक्शन टेस्ट यह पता लगाने के लिए किया जाता है:

  • हैपेटाइटिस जैसे लिवर संक्रमण का पता लगाना
  • किसी बीमारी की निगरानी जैसे वायरल और एल्कोहलिक हैपेटाइटिस। साथ ही यह पता लगाने के लिए कि बीमारी का इलाज कितनी अच्छी तरह चल रहा है।
  • किसी बीमारी की गंभीरता को मापना, खासतौर पर लिवर के जख्म (सिरोसिस)।
  • दवाइयों के साइड इफेक्ट की निगरानी करना।

लिवर फंक्शन टेस्ट आपके खून में कुछ एंजाइम्स और प्रोटीन के स्तर को मापता है। इन स्तर का सामान्य से कम या ज्यादा होना लिवर की समस्या का संकेत है। कुछ आम लिवर फंक्शन टेस्ट में निम्न शामिल हैं-

  • एलनिन ट्रांसएमिनेस (ALT)। ALT लिवर में पाया जाने वाला एंजाइम है जो शरीर को प्रोटीन के चयापचय (metabloism) में मदद करता है। जब लिवर क्षतिग्रस्त होता है तो ALT ब्लड में छोड़ दिया जाता है जिससे इसका स्तर बढ़ जाता है।
  • एस्पार्टेट ट्रांसएमिनेस (AST)। AST एक एंजाइम है जो एलेनिन को चयापचय में मदद करता है, एलेनिन एक अमिनो एसिड है। ALT की तरह ही AST भी खून में थोड़ी मात्रा में मौजूद रहता है, मगर लिवर या मसल्स को क्षति पहुंचने पर इसका स्तर बढ़ जाता है।
  • एल्कालाइन फॉस्फेट्स (ALP)। ALP लिवर, पित्त नलिकाओं और हड्डियों में पाया जाने वाला एंजाइम है। इसका सामान्य से ज्यादा होना लिवर के रोगग्रस्त होने जैसे पित्त नलिकाओं में ब्लॉकेज या कुछ हड्डियों की बीमारी का संकेत हो सकता है।
  • एल्बुमिन और टोटल प्रोटीन। एल्बुमिन लिवर में बनने वाले कई प्रोटीन में सेएक है। शरीर को संक्रमण से बचाने और अन्य कार्य के लिए इन प्रोटीन की जरूरत होती है। एल्बुमिन और टोटल प्रोटीन का सामान्य से कम स्तर लिवर के क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त होने का संकेत हो सकते हैं।
  • बिलीरुबिन सामान्य रूप से रेड ब्लड सेल्स के टूटने के दौरान बनने वाला अपशिष्ट है। यह लिवर से गुज़रता हुआ मल के ज़रिए बाहर निकलता है। बिलीरूबिन का उच्च स्तर लिवर की बीमारी, क्षति या किसी तरह के एनिमिया का संकेत हो सकता है।
  • गामा-ग्लूटामाइलट्रांसफेरेज़ (GGT)। GGT खून में पाया जाने वाला एंजाइम है। इसकी बढ़ी हुई मात्रा लिवर या पित्त नलिका के क्षतिग्रस्त होने का संकेत हो सकता है।
  • एल- लैक्टेट डिहाइड्रोजनेज (LD)। LD लिवर में मौजूद एंजाइम है। इसका उच्च स्तर क्षतिग्रस्त लिवर का संकेत हो सकता है, वैसे यह अन्य बीमारियों की वजह से भी बढ़ सकता है।
  • प्रोथॉम्बिन टाइम (PT)। PT वह समय है जब आपके खून का थक्का बनता है। इसकी बढ़ी हुई मात्रा लिवर के क्षतिग्रस्त होने का संकेत हो सकता है, लेकिन यह खून को पतला करने के लिए ली जा रही कुछ दवाइयों जैसे वार्फरिन के कारण भी बढ़ सकता है।

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सावधानियां और चेतावनियां

लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Testing) से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए ?

ब्लड सैंपल लेने की प्रक्रिया सामान्य है और इससे किसी तरह के साइड इफेक्ट की गुंजाइश शायद ही होती है। हालांकि ब्लड सैंपल देते समय निम्न जोखिम हो सकते हैंः

  • स्किन के नीचे से खून निकलना या हेमाटोमा
  • बहुत ज़्यादा खून बहना
  • बेहोशी
  • संक्रमण

प्रक्रिया

लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Testing) के लिए कैसे तैयारी करें?

इस टेस्ट के लिए ब्लड सैंपल कैसे देना है इस बारे में डॉक्टर आपको पूरी जानकारी दे देंगे।

कुछ दवाइयां और खाद्य पदार्थ खून में मौजूद एंजाइम और प्रोटीन के स्तर को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां न खाने और टेस्ट से कुछ देर पहले कुछ भी न खाने की सलाह दे सकता है। टेस्ट के पहले ढेर सारा पानी पीना न भूलें।

ऐसे कपड़े पहनकर जाएं जिसमें बांह आसानी से फोल्ड हो सकते, इससे ब्लड सैंपल लेने में आसानी होगी।

लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Testing) के दौरान क्या होता है?

हॉस्पिटल या लैब में आप ब्लड सैंपल दे सकते हैं। सैंपल लेने के पहले हेल्थ प्रोफेशनलः

  • जहां से ब्लड लेना है उस जगह को साफ करेगा ताकि किसी तरह के कीटाणु न रहें जिससे संक्रमण हो सकता है।
  • आपकी बांह पर एक पट्टी बांधता है जिससे नसें साफ दिख सकें। सुई की मदद से सैंपल के लिए ब्लड निकाला जाता है।
  • खून निकालने के बाद उस जगह पर पट्टी या रूई लगा दी जाती है। वे ब्लड सैंपल को टेस्टिंग के लिए लैब में भेज देते हैं।

लिवर फंक्शन टेस्ट (Liver Function Testing) के बाद क्या होता है?

टेस्ट के बाद आप घर जा सकते हैं और अपनी दिनचर्या शुरू कर सकते हैं। हालांकि यदि आपको चक्कर आ रहा है या सिर घूम रहा है तो कुछ देर आराम करने के बाद घर जाएं।

लिवर फंक्शन टेस्ट के बारे में किसी भी तरह की जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

परिणाम की व्याख्या

मेरे परिणाम का क्या मतलब है?

लिवर फंक्शन टेस्ट के लिए किए जाने वाले सामान्य ब्लड टेस्ट में शामिल हैः

  • एएलटी 7 से 55 यूनिट प्रति लीटर (U/L)
  • 8 से 48 U/L
  • 45 से 115 U/L
  • 3.5 से 5.0 ग्राम प्रति डेसीलीटर (g/dL)
  • टोटल प्रोटीन 6.3 से 7.9 g/dL
  • 0.1 से 1.2 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL)
  • 9 से 48 U/L
  • 122 से 222 U/L
  • 9.5 से 13.8 सेकंड्स

यह परिणाम खासतौर पर पुरुषों के लिए है। सामान्य परिणाम हर लैब में अलग-अलग हो और महिलाओं व बच्चों के लिए भी थोड़ा अलग हो सकते हैं।

आपका डॉक्टर इस परिणाम के आधार पर आपकी स्वास्थ्य स्थितियों का निदान और उपचार निर्धारित करेगा। यदि आपको पहले से लिवर की बीमारी है तो लिवर फंक्शन टेस्ट से इलाज की प्रगति का पता चलेगा।

लैबोरैट्री और अस्पताल के आधार पर लिवर फंक्शन टेस्ट की सामान्य रेंज अलग-अलग हो सकती है। टेस्ट रिजल्ट के बारे में किसी तरह का संदेह होने पर डॉक्टर से सलाह लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी तरह की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता है।

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रिव्यू की तारीख सितम्बर 17, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया सितम्बर 18, 2019

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