प्रोजेरिया को हम हचिंसन गिलफर्ड सिंड्रोम (Hutchinson-Gilford progeria syndrome [HGPS]) कहते हैं। आमतौर पर इस बीमारी में शरीर बहुत जल्दी वृद्धावस्था में पहुंच जाता है और जल्दी ही मृत्यु हो जाती है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों की औसत उम्र 13 साल और ज्यादा से ज्यादा 20 साल होती है।जन्म लेने पर ये बच्चे आम बच्चो जैसे ही दिखते हैं, लेकिन समय बीतने पर वृद्धावस्था के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। पहले वर्ष से ही बच्चे की बढ़ने की क्षमता कम होगी और धीरे-धीरे बाल भी गिरने लगेंगे।
आज तक प्रोजेरिया के मात्र 74 मामले ही सामने आए हैं। ये बीमारी किसी भी लिंग और जाति के लोगो को हो सकती है। अनुमान लगाया जाता है कि हर साल जन्म लेने वाले 40 लाख शिशुओं में से एक बच्चे (Child) को ये बीमारी होती है। और अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी डॉक्टर से जरूर मिलें।

प्रोजेरिया के लक्षण आसानी से बच्चे के पहले या दूसरे वर्ष में देखे जा सकते हैं इससे ऊपरी बदलाव आएंगे लेकिन बच्चे का दिमागी विकास बिल्कुल साधारण रूप से होगा । प्रोजेरिया से ग्रस्त बच्चो में शारीरिक विकास (Body development) साधारण नहीं होता है , कुछ लक्षण जो इन्हें असाधारण बनाते हैं वे ये हैं :
अगर आपको अपने बच्चे का विकास असाधारण लग रहा है या फिर आपको कोई ऐसे लक्षण दिख रहे हैं जिनसे आपको लगता है उसके विकास में रुकावट आ रही है तो अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।
प्रोजेरिया जेनेटिक बीमारी (Genetic disease) है और ये बीमारी माता – पिता से बच्चे में नहीं जाती है। परिवार में एक से ज्यादा ऐसी बीमारी का होना लगभग असंभव है। ये बीमारी लैमिन जीन में खराबी के कारण होती है। लैमिन प्रोटीन सेल न्यूक्लीयस (Nucleus)को बांधे रखने का काम करती है। अगर इस प्रोटीन (Protein) में कोई खराबी है तो आपको प्रोजेरिया (Progeria) हो सकता है।
और पढ़ें : बच्चों के विकास के लिए परिवार और कम्युनिटी क्यों है जरूरी ?
प्रोजेरिया (Progeria) के लिए कोई निश्चित कारण नहीं है क्योकि ये म्यूटेशन स्पर्म या अवम में बच्चे के जन्म (Babies birth) से पहले होता है। लैमिन जीन में खराबी होने पर कोशिकाएं अस्थिर हो जाएंगी और बुढ़ापे की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है। अगर परिवार में 100 में से किसी एक बच्चे को ये बीमारी होती है तो संभव है कि ये बीमारी एक ही परिवार में एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाए।
यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं है। और अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।
किसी को देखकर ही आसानी से प्रोजेरिया (Progeria) पता लगाया जा सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि सामान्य चेकअप के दौरान डॉक्टर लक्षणों को देखकर प्रोजेरिया होने की पुष्टि करें। आपके बच्चे की पल्स रेट (Puls rate), सुनने की क्षमता (Hearing power), देखने (Vision) की क्षमता और वजन को दूसरे समान उम्र के बच्चों के साथ तौल कर डॉक्टर आपके बच्चे में प्रोजेरिया (Progeria) होने या न होने की स्थिति की पुष्टि करेंगे।
खून की जांच (Blood test) और जेनेटिक टेस्ट (Genetic test) की मदद से भी प्रोजेरिया का पता लगाया जा सकता है।
इस बीमारी का कोई सटीक इलाज नहीं है लेकिन वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद कुछ तरीके इजात किये हैं। कैंसर (Cancer) के इलाज में प्रयोग किया जाने वाला फार्निसिलट्रांस्फ़ेरेस इन्हीबिटर (Farnesyltransferase inhibitors [FTIs]) नाम का केमिकल प्रोजेरिया के इलाज में मदद कर सकता है। ये न्यूक्लियर संरचना को ठीक करके इलाज करने में कारगर हो सकता है। चूहों में किए गए प्रयोग इस केमिकल की सफलता का संकेत देते हैं।
आजकल दिए जाने वाले इलाज में प्रोजेरिया के लक्षणों को कम करने की कोशिश की जाती है। जैसे कि :
इन बदलावों और घरेलू उपायों की मदद से आप प्रोजेरिया को नियंत्रित किया जा सकता है :
किसी भी और सवाल के लिए अपने डॉक्टर से जरूर मिलें।