Blood Test : ब्लड टेस्ट क्या है?

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अपडेट डेट सितम्बर 4, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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बेसिक्स को जाने

ब्लड टेस्ट क्या है?

ब्लड टेस्ट यानी हमारे रक्त का परीक्षण रक्त के नमूने पर किया जाता है। जो रक्त में कुछ पदार्थों की मात्रा को मापने के लिए या विभिन्न प्रकार के रक्त कोशिकाओं को गिनने के लिए किया जाता है। बीमारियों के लक्षण या बीमारी होने के संकेतों को देखने के लिए किया जा सकता है। एंटीबॉडी या ट्यूमर मार्करों की जांच करने के लिए भी ब्लड टेस्ट किया जा सकता है।

सबसे आम रक्त परीक्षण में से कुछ हैं:

  • पूर्ण रक्त गणना (CBC)
  • ब्लड केमिस्ट्री टेस्ट
  • ब्लड एंजाइम टेस्ट
  • हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने के लिए ब्लड टेस्ट

ब्लड टेस्ट क्यों किया जाता है?

ब्लड टेस्ट के जरिए रोगी की बीमारियों और सेहत की स्थितियों की जांच करने में मदद मिलती है। ये टेस्ट यह भी बताता है कि आपके शरीर के अंग कैसे कार्य कर रहे हैं। जिसके आधार पर किसी भी बीमारी का इलाज करना बहुत ही आसान हो जाता है।

विशेष रूप से, ब्लड टेस्ट डॉक्टर्स की मदद कर सकते हैं:

  • लिवर, किडनी और हृदय जैसे अंग कितने अच्छे काम कर रहे हैं इसका आंकन करने के लिए
  • कैंसर, एचआईवी/एड्स, मधुमेह, एनीमिया और दिल से जुड़ी जैसी बीमारियों और स्थितियों के इलाज के लिए
  • इसका पता करने के लिए कि आपको दिल से जुड़ी कोई समस्या है या नहीं
  • जांचें कि आप कौन सी दवाएं ले रहे हैं
  • इसका आकलन करें कि आपका खून कितना अच्छा है

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जानने योग्य बातें

ब्लड टेस्ट कराने से पहले मुझे क्या पता होना चाहिए?

ब्लड टेस्ट बहुत ही सामान्य होता है। जब भी आप नियमित तौर पर अपने स्वास्थ्य की जांच कराते हैं, तो आपका डॉक्टर यह देखने के लिए ब्लड टेस्ट की सिफारिश कर सकता है कि आपका शरीर कैसे काम कर रहा है। आपके स्वास्थ्य की स्थिति की जांच करने के लिए एक निश्चित चिकित्सा प्रक्रिया के तहत डॉक्टर ब्लड टेस्ट की सिफारिश करते हैं।

इस टेस्ट के लिए बहुत ही कम मात्रा में खून का नमूना लिया जाता है, इसलिए इससे आपको किसी तरह की स्वास्थ्य परेशानी महसूस नहीं होगी।

फिर भी, कुछ लोगों को टेस्ट के दौरान और बाद में चक्कर आना महसूस होता है। अगर आपके साथ पहले ऐसा हुआ है, तो डॉक्टर को इसके बारे में बताएं, ताकि उन्हें आपके स्वास्थ्य की स्थिति का अंदाजा रहे।

इस टेस्ट के बाद, जहां से खून का नमूना लिया गया होगा वहां पर कुछ दिनों तक निशान और हल्के दर्द का एहसास हो सकता है। जो कुछ समय बाद अपने आप ही ठीक हो जाएगा।

अगर इंजेक्शन लगाए गए स्थान पर किसी तरह का घाव, सूजन या इंफेक्शन जैसी समस्या होती है तो इस बार में जल्द से जल्द अपने डॉक्टर को बताएं।

ब्लड टेस्ट के दौरान बहुत ही कम लोगों को बेहोशी महसूस होती है। अगर आपको ऐसी स्थिति महसूस हो तुरंत टेस्ट करने वाले डॉक्टर या नर्स को बताएं। क्योंकि बेहोशी को रोकने के लिए तुरंत लेट जाना चाहिए।

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जानिए क्या होता है

कैसे करें ब्लड टेस्ट की तैयारी?

इस टेस्ट के लिए आपके खून का नमूना लेने वाले डॉक्टर या नर्स आपको बताएंगे कि क्या आपको टेस्ट से पहले किस तरह के निर्देशों का पालन करना चाहिए।

उदाहरण के लिए, ब्लड टेस्ट के प्रकार के आधार पर आपसे यह पूछा जा सकता है:

  • 12 घंटे तक कुछ भी खाना या पीना नहीं चाहिए। सिर्फ पानी पी सकते हैं।
  • अगर नियमित तौर पर किसी तरह की दवा का सेवन करते हैं तो टेस्ट कराने से पहले उसका सेवन बंद करें।
  • अपने स्वास्थ्य स्थिति की सही जानकारी डॉक्टर को दें, क्योंकि यह टेस्ट के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

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ब्लड टेस्ट के दौरान क्या होता है?

ज्यादातर मामलों में यह टेस्ट करने में सिर्फ कुछ मिनट का समय लगता है। इस टेस्ट को आप अपने स्थानीय अस्पताल में डॉक्टर, नर्स या फ़ेलबोटोमिस्ट (रक्त के नमूने लेने में विशेषज्ञ) से करवा सकते हैं।

अगर आपकी नसें आसानी से दिखाई देती या खोजी जा सकती हैं तो खून का नमूना लेने में बहुत ही कम समय लगता है। आमतौर पर इस प्रक्रिया में 5 से 10 मिनट का समय लगता है।

फिर भी, कभी-कभी कुछ लोगों की नस की पहचान करने में अधिक समय लग सकता है। जिसके लिए आमतौर पर निर्जलीकरण जैसे विकार, फेलोबोटोमिस्ट या डॉक्टर का अनुभव और आपकी नसों का आकार जिम्मेदार हो सकता है।

बल्ड टेस्ट में आमतौर पर आपकी बांह की नस से खून का नमूना लिया जाता है।

हाथ से नमूना इसलिए लिया जाता है क्योंकि यह शरीर का एक सुविधाजनक हिस्सा है। जहां से आसानी से खून का नमूना लिया जा सकता है। क्योंकि, कोहनी या कलाई की नसें सतह के करीब होती हैं।

वहीं, बच्चों से खून के नमूने अक्सर हाथ के पीछे से लिए जाते हैं। नमूना लेने से पहले उनकी त्वचा पर एक विशेष प्रकार का स्प्रे या क्रीम लगा कर उस हिस्से को सुन्न किया जाता है। ताकि उन्हें दर्द का एहसास न हो।

इसके अलावा टूर्निकेट को आमतौर पर बांह के ऊपरी ओर आसानी से लगाया जा सकता है। यह हाथ को कसता है और अस्थायी रूप से खून के प्रवाह को धीमा कर देता है जिससे शिरे में सूजन आ जाती है। जिससे खून का नमूना लेना आसान हो जाता है।

नमूना लेने से पहले, डॉक्टर या नर्स एंटीसेप्टिक के साथ बांह वाली त्वचा के क्षेत्र को आसानी से साफ भी कर सकते हैं।

नमूने के लिए एक सिरिंज या विशेष कंटेनर से जुड़ी सुई को नस में डाला जाता है। सिरिंज का इस्तेमाल आपके खून की कुछ बूंदें निकालने के लिए किया जाता है। जैसे ही सुई अंदर जाती है थोड़ी चुभन या खरोंच महसूस हो सकती है, लेकिन यह दर्दनाक नहीं होता। अगर इस दौरान आपको दर्द का अधिक एहसास होता है तो नमूना लेने वाले व्यक्ति को इसके बारे में बताएं ताकि वे इस प्रक्रिया को आपके लिए अधिक आरामदायक बना सकें।

खून की बूंदें लेने के बाद सुई को बाहर निकाल लिया जाता है। जहां पर कुछ मिनट के लिए कॉटन से दबाव बनाया जाता है ताकि खून न बहे।

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ब्लड टेस्ट के बाद क्या होता है?

खून का नमूना लेने के बाद, इसे एक बोतल में डाल दिया जाएगा और आपके नाम और जानकारी के साथ उस पर लेबल लगा दिया जाएगा। फिर इसे लैब में भेजा जाएगा जहां इसकी जांच माइक्रोस्कोप या रसायनों की मदद से किया जाएगी।

कुछ सप्ताह बाद आप अपने ब्लड टेस्ट का परिणाम जान सकेंगे।

अगर आपके पास इस टेस्ट के बारे में कोई प्रश्न हैं, तो कृपया अपने निर्देशों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श करें।

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रिजल्ट को समझें

मेरे परिणामों का क्या मतलब है?

बेसिक मेटाबोलिक पैनल

  • एल्बुमिन: 3.9 से 5.0 g/dL – यह आपके खून में प्रोटीन को मापता है।
  • क्षारीय फॉस्फेटस: 44 से 147 IU/L – यह आपके लिवर और पोषण की स्थिति को देखता है।
  • एएलटी (एलेनिन एमिनोट्रांस्फरेज़): 8 से 37 IU/L – आपके लिवर की कार्यप्रणाली/स्थिति को मापता है।
  • एएसटी (एस्पर्टेट एमिनोट्रांसफ़रेस): 10 से 34 IU/L – किडनी और लिवर की स्थिति को देखता है।
  • बून (ब्लड यूरिया नाइट्रोजन): 7 से 20 mg/dL – दिल और किडनी के कामकाज के बारे में बताता है।
  • कैल्शियम: 8.5 से 10.9 mg/dL – शरीर के लगभग सभी अंगों के लिए महत्वपूर्ण होता है। यह कई बीमारियों की जानकारी दे सकता है। यह
  • हड्डियों में कैल्शियम को नहीं मापता, लेकिन खून में कैल्शियम की कितनी मात्रा है इसकी जानकारी देता है।
  • क्लोराइड: 96 से 106 mmol/L – विषैले और क्षारीय/एसिडोसिस को माप सकता है (शरीर में पीएच कितना बेहतर है)
  • CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड): 20 से 29 mmol/L – मेटाबोलिक फ़ंक्शन और पीएच बैलेंस बताता है।
  • क्रिएटिनिन: 0.8 से 1.4 mg/dL – किडनी के कामकाज को आंकता है।
  • ग्लूकोज टेस्ट: 100 mg/dL – मधुमेह और इंसुलिन के कामकाज का मापता है।
  • पोटेशियम: 3.7 से 5.2 mEq/L – दवाओं के कारण उच्च/निम्न हो सकता है और शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है।
  • सोडियम: 136 से 144 mEq/L – हाइड्रेशन की स्थिति को मापता है। यह कई बीमारियों को आंकता है और धमनियों पर बन रहे दबाव को संतुलित करता है।
  • कुल बिलीरुबिन: 0.2 से 1.9 mg/dL – लिवर के कामकाज को आंकता है।
  • कुल प्रोटीन: 6.3 से 7.9 g/dL – किडनी/लिवर की बीमारियों और इंफेक्शन को मापता है।
  • इसके परिणाम टेस्ट करने वाली लैब के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।

कोलेस्ट्रॉल पैनल

  • कुल कोलेस्ट्रॉल: <200 mg/dL –मिश्रित LDL और HDL को मापता है।
  • एलडीएल कोलेस्ट्रॉल: <100 mg/dL – “खराब” कोलेस्ट्रॉल की जानकारी देता है।
  • एचडीएल कोलेस्ट्रॉल: > 40-59 mg/dL (> 60 हृदय रोग के खिलाफ सुरक्षित माना जाता है) – आपका “अच्छा” कोलेस्ट्रॉल।
  • ट्राइग्लिसराइड: <150 mg/dL – खून में एक अलग तरह के वसा को मापता है।
  • कोलेस्ट्रॉल अनुपात: एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को अपने कुल कोलेस्ट्रॉल में विभाजित करें। अगर आपका कुल कोलेस्ट्रॉल 200mg/dL है और
  • आपका HDL कोलेस्ट्रॉल 50 mg/dL है, तो आपके कोलेस्ट्रॉल का अनुपात 4 से 1 है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, यह लक्ष्य
  • आपके कोलेस्ट्रॉल के अनुपात को 5 से 1 के तहत रखना है। अच्छा अनुपात 3.5 से 1 को माना गया है। उच्च अनुपात दिल से जुड़ी बीमारियों का संकेत देता है। जबकि, कम अनुपात कम जोखिम का संकेत देती है।

रक्त के अन्य कामों का मान

सी-रिएक्टिव प्रोटीन: यह भी ब्लड टेस्ट है। यह हृदय रोग के लिए अधिक सटीक जानकारी देता है। सी-रिएक्टिव प्रोटीन सूजन को आंकता है (आपका शरीर तनाव या अंदर हुए किसी क्षति को कैसा ठीक कर रहा है)। इसका इस्तेमाल भविष्य में दिल से जुड़ी होने वाली बीमारियों की पहचान के लिए किया जा रह है।

अगर आपका hs-CRP स्तर 1.0 mg/L से कम है, तो आपको हृदय रोग होने का खतरा कम है।
अगर आपका स्तर 1.0 और 3.0 mg/L के बीच है, तो आपको हृदय रोग से जुड़े कुछ खतरे हो सकते हैं।
अगर आपका hs-CRP स्तर 3.0 mg/L से अधिक है, तो आपको हृदय रोग से जुड़े गंभीर खतरे हो सकते हैं।
होमोसिस्टीन: अगर किसी व्यक्ति में बी12 या फोलेट की कमी है या अगर किसी को दिल का दौरा या स्ट्रोक आता है, तो डॉक्टर उसका होमोसिस्टीन टेस्टे कराने का आदेश देगा। यह हृदय रोग के लिए एक मार्कर भी है और सामान्य ब्लड प्रेशर और बुनियादी मेटाबोलिक पैनल की जानकारी दे सकता है। सामान्य स्तर 4 से 14 µmol/L है और हृदय रोग और स्ट्रोक के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है।
HbA1c/ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन: सामान्य <5.7%, प्री डाइबिटीज 5.7 से 6.4%, 6.5% या हाई लेवल के डाइबिटीज का मतलब है। यह टेस्ट कई हफ्तों या महीनों में आपके शरीर में शुगर की मात्रा मापता है। अगर आपको डायबिटीज है, तो आपका डॉक्टर आपको बताएगा कि आपको अपने स्तर को मापने के लिए कितनी बार ब्लड टेस्ट कराने की आवश्यकता हो सकती है। इस टेस्ट के बारे में अपने डॉक्टर को बाएं अगर आपके परिवार में पहले भी कभी किसी सदस्य को डायबिटीज की समस्या रही है तो।
डॉक्टर से अपने खून के बारे में आए सभी परिणामों को अच्छे से समझें। आपका खून सामान्य रेंज से अगर बाहर काम करता है तो इसके में उनसे पूछें। कभी-कभी यह जानने में कुछ महीनों या साल भर का भी समय लग जाता है कि क्या आपके ब्लड टेस्ट के परिणाम एक निश्चित तरीके से चल रहे हैं या नहीं।

प्रयोगशाला और अस्पताल के आधार पर, ब्लड टेस्ट के लिए सामान्य सीमा अलग-अलग हो सकती है। कृपया अपने चिकित्सक से चर्चा करें कि आपके परीक्षा परिणामों के बारे में आपके कौन से प्रश्न हो सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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