मधुमेह और हृदय रोग का क्या है संबंध?

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Update Date जून 27, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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कहते हैं किसी भी अच्छे काम की शुरुआत मीठे से होनी चाहिए। लेकिन, अगर ब्लड में शुगर लेवल बढ़ जाए तो ये आपके लिए खतरनाक हो सकता है। आज जानेंगे डायबिटीज की वजह से होने वाली बीमारियों के बारे में। डायबिटीज (मधुमेह) होने का मतलब है कि आपको दिल की बीमारी, दिल का दौरा या स्ट्रोक जैसी समस्या हो सकती है। मधुमेह और हृदय रोग  एक दूसरे से संबंधित हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है की इन बीमारियों से बचा नहीं जा सकता है। अगर आपको डायबिटीज है, तो आप ब्लड शुगर लेवल और साथ ही ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करके दिल की बीमारी और स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं। “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में जानते हैं कि आखिर कैसे मधुमेह और हृदय रोग एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

मधुमेह और हृदय रोग बीच क्या है कनेक्शन

ज्यादा वक्त से डायबिटीज के कारण हाई ब्लड शुगर शरीर में मौजूद ब्लड वेसल्स, हार्ट ब्लड वेसेल्स और दिल को नियंत्रित करने वाले नर्व्स को नुकसान पहुंचा सकता है। जितनी अधिक समय तक आपको डायबिटीज रहेगा, उतनी अधिक संभावना हृदय रोग की बढ़ेगी। डायबिटीज की वजह से हार्ट डिजीज का खतरा युवा अवस्था से ही शुरू हो जाता है। ज्यादातर डायबिटीज के वयस्क मरीजों में मौत का कारण हार्ट डिजीज ही होते हैं। वहीं कम उम्र में स्ट्रोक का भी खतरा बना रहता है। हालांकि, अगर आप डायबिटीज को नियंत्रित रखेंगे तो दिल की बीमारी या स्ट्रोक का खतरा कम हो सकता है। इसके अलावा रिपोर्ट की मानें तो मधुमेह और हृदय रोग का आपस में एक-दूसरे से संबंधित हैं। लगभग 80% प्रतिशत शुगर से ग्रस्त मरीजों को दिल की बीमारी होती है। मधुमेह की वजह से ग्रस्त कई व्यक्तियों में हार्ट डिजीज के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। इसलिए, इसे अक्सर साइलेंट हार्ट डिजीज भी कहा जाता है।

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इन कारणों से बढ़ सकती है हार्ट या स्ट्रोक की संभावना

फैमिली हिस्ट्री (family history)

अगर आपके परिवार (ब्लड रिलेशन) में किसी को हार्ट डिजीज है तो ऐसे में आपको भी दिल की बीमारियों की संभावना ज्यादा होती है। यही नहीं अगर 50 साल की उम्र से पहले अगर हार्ट अटैक से एक से ज्यादा लोगों की मौत परिवार में हो चुकी है तो आपको सतर्क रहना चाहिए।

मधुमेह और हृदय रोग की एक वजह मोटापा या पेट की चर्बी

वजन अत्यधिक होने की स्थिति में डायबिटीज के मरीजों के लिए हार्ट से जुड़ी बीमारियों के साथ-साथ अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में आपको अपने आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए और मोटापा कम करना चाहिए।

हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure)

अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है, तो आपके हृदय को रक्त पंप करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण आपके दिल पर ज्यादा दवाब ज्यादा हो सकता है, ब्लड वेसेल्स को नुकसान हो सकता है और आपकाे दिल का दौरा, स्ट्रोक, आंखों की समस्याएं और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपको मधुमेह के साथ हाइपरटेंशन है तो ब्लड प्रेशर 140/90 एमएमएचजी के बीच होना चाहिए वहीं, अगर आप गर्भवती हैं और आपको मधुमेह के साथ उच्च रक्तचाप है तो ब्लड प्रेशर 120–160/80–105 एमएमएचजी के बीच होना चाहिए।

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असामान्य कोलेस्ट्रॉल का स्तर

  • कोलेस्ट्रॉल एक तरह का फैट है जो लिवर से निकलता और ब्लड में मौजूद होता है। ब्लड में दो प्रकार के कोलेस्ट्रॉल हैं: एलडीएल (LDL) और एचडीएल (HDL) होता है। एलडीएल बैड कोलेस्ट्रॉल होता है, जो ब्लड वेसल्स में अवरोध पैदा करता है। वहीं एलडीएल बढ़ने से हार्ट से जुड़ी परेशानी शुरू हो जाती है। एक अन्य प्रकार का ब्लड फैट जिसे ट्राइग्लिसराइड्स कहते हैं। यह भी हार्ट से जुड़ी समस्या को बढ़ा सकता है।
  • स्मोकिंग करने से हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। यदि आपका शुगर लेवल ज्यादा है, तो स्मोकिंग नहीं करना चाहिए। क्योंकि स्मोकिंग और डायबिटीज दोनों ही ब्लड वेसेल्स (रक्त वाहिकाओं) को संकीर्ण करते हैं। धूम्रपान से फेफड़ों की बीमारी भी बढ़ जाती है। धूम्रपान आपके पैरों के ब्लड वेसेल्स को भी नुकसान पहुंचा सकता है और निचले पैर के संक्रमण, अल्सर जैसी बीमारी शुरू हो सकती है।
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डायजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDKD) के अनुसार  हाई शुगर लेवल दिल और ब्लड वेसेल्स को नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे वक्त से चल रही डायबिटीज की समस्या डायबिटिक पेशेंट में हार्ट से जुड़ी परेशानी शुरू कर सकता है। सामान्य लोगों की तुलना में डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है।

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डायबिटीज होने पर कैसे कम करें स्ट्रोक और हार्ट डिजीज का खतरा?

ऐसी परिस्थिति में सबसे पहले डायबिटीज को कंट्रोल रखना जरूरी है। क्या करना चाहिए:

  • आहार पर ध्यान दें और पौष्टिक आहार का सेवन करें।
  • डायबिटीज लेवल की जांच करते रहें
  • पानी खूब पीएं।
  • समय पर खाना खाएं और थोड़ी-थोड़ी देर पर खाने की आदत बनाएं।
  • 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
  • शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • मधुमेह और हृदय रोग की संभावना को कम करने के लिए ब्लड शुगर पर ध्यान दें। इसके लिए आवश्यक जांचें करवानी चाहिए।

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मधुमेह और हृदय रोग से बचाव के लिए क्या करें?

30-35 वर्ष की आयु के बाद सभी महिलाओं और पुरुषों को डॉक्टर या विशेषज्ञ के निर्देशानुसार हर साल में कम से कम एक बार ब्लड चेक अप अवश्य करवाएं। इससे शुरुआती स्तर पर ही रोगों का पता चलने से इलाज शीघ्र और प्रभावी होता है। सही डाइट, एक्सरसाइज, तनाव से दूर रहना, 8-9 घंटे की नींद लेना और वजन नियंत्रित रखना आदि से द्वारा मधुमेह और हृदय रोग की संभावना को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मधुमेह और हृदय रोग को कम करने के लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव करना बेहद जरूरी होता है। किसी भी बीमारी के दस्तक देने से पहले ही अपने आपको हेल्दी रखने की कोशिश करें। पौष्टिक आहार लें और रोजाना एक्सरसाइज करें अगर एक्सरसाइज नहीं कर पा रहें हैं तो पैदल चलें (वॉक करें) और इन सबके साथ डॉक्टर से मिलकर सलाह लें। उम्मीद आपको मधुमेह और हृदय रोग पर लिखा गया यह आर्टिकल पसंद आया होगा। आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं साथ ही अगर आपका कोई सवाल है तो वह भी आप हमसे पूछ सकते हैं।

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