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Heart Disease: हार्ट डिजीज बन सकती हैं मौत का कारण, रखें ये सावधानियां

Heart Disease: हार्ट डिजीज बन सकती हैं मौत का कारण, रखें ये सावधानियां

हार्ट डिजीज का नाम सुनते ही लोगों के मन में डर बैठ जाता है। हार्ट डिजीज ऐसी बीमारी है, जो ज्यादातर लोगों की मौत का कारण बनती है। कुछ ऐसी बीमारियां है, जो हार्ट की बीमारियों के खतरे को बढ़ाने का काम करती हैं। हार्ट डिजीज किसी भी उम्र में हो सकती है। कुछ हार्ट डिजीज ऐसी होती हैं, जिनका समय पर अगर ट्रीटमेंट कराया जाए, तो बीमारी के खतरे को दूर किया जा सकता है। आज इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको हार्ट डिजीज के बारे में जानकारी देंगे और साथ ही हार्ट की बीमारियों से बचने के उपाय के बारे में भी बताएंगे।

क्या होती हैं हार्ट डिजीज? (Heart Disease)

Heart Disease

हार्ट डिजीज कई कार्डियोवस्कुलर प्रॉब्लम से जुड़ी हुई है। जानिए हार्ट डिजीज से कौन-कौन सी बीमारियां जुड़ी हुई हैं और कैसे इनसे बचाव किया जा सकता है।

“इस बारे में डॉ बिपीनचंद्र भामरे, फोर्टिस अस्पताल, का कहना है कि कुछ कंडिशन में हो सकती है, जैसे कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease), हार्ट अटैक (Heart Attack) या कुछ स्थितियां, जिसमें आपके दिल को पर्याप्त रक्त पंप करने कठनाई हो रही हो। इससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और हार्ट कमजोर होने लगता है। इस प्रकार, आपका हृदय कमजोर होने के साथ, पूरे शरीर में रक्त को प्रभावी ढंग से पंप करने में असमर्थ होने लगता है। फिर रक्त शरीर में जमा होने लगता है, जिसे हम क्लाॅट कहते हैं। जिससे सूजन हो जाती है और व्यक्ति को हृदय गति रुकने के खतरे बढ़ जाते हैं। ऐसा होने पर व्यायाम करते समय या चलने या कपड़े पहनने जैसी साधारण गतिविधियाें के दौरान भी सांस फूलने की समस्या हो सकती है।”

और पढ़ें : कार्डिएक अरेस्ट से बचने के लिए रखें इन बातों का खास ख्याल

हार्ट एरिथिमिया (Heart arrhythmia)

हार्ट एरिथिमिया (Heart arrhythmia) के कारण हार्ट रिदम संबंधित समस्या या हार्ट रिदम डिसऑर्डर की समस्या हो जाती है। आजकल की व्यस्त और तनाव भरी लाइफस्टाइल के कारण लोगों को हार्ट रिदम डिसऑर्डर हो जाता है, जिसके कारण हार्ट बीट सामान्य रूप से काम नहीं कर पाती है और बहुत तेजी से या बहुत धीमी गति से चलने लगती है। हार्ट एरिथिमिया के कारण हार्ट ब्लॉक भी हो सकता है। अगर आपको इस तरह की समस्या महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से चेकअप कराएं। हार्ट एरिथिमिया के कारण निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं।

  • चक्कर आना
  • दिल की धड़कन असामान्य होना
  • सिर चकराना
  • छाती में दर्द

हार्ट एरिथिमिया के कारण मुख्य रूप से डायबिटीज, जन्मजात दिल से संबंधित दोष (congenital heart defects), हाय ब्लड प्रेशर, तनाव और चिंता या हार्ट डैमेज के कारण हो सकता है।

और पढ़ें :हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट में क्या अंतर है?

एथेरोस्केलेरसिस (Atherosclerosis)

एथेरोस्केलेरोसिस आर्टरी की दीवार में बनने वाली लेयर को कहते हैं। जब खाने में अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल, फैट लिया जाता है,तो आर्टरी वॉल में लेयर बन जाती है। इसे ही एथेरोस्केलेरसिस के नाम से जाना जाता है। इस हार्ट डिजीज के कारण ब्लड को एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने में समस्या होती है। अगर समय रहते बीमारी का इलाज नहीं कराया गया, तो ये मौत का कारण भी बन सकती है। आपको इस बीमारी से बचने के लिए खानपान में पौष्टिक आहार शामिल करने के साथ ही हेल्दी लाइफस्टाइल अपनानी चाहिए। एथेरोस्केलेरसिस के कारण ब्लड फ्लो कम हो जाता है, जिसके कारण छाती में दर्द की समस्या हो सकती है साथ ही एथेरोस्केलेरसिस होने पर निम्नलिखित लक्षण दिख सकते हैं।

  • ठंडक का एहसास
  • अंगों का सुन्न हो जाना
  • शरीर के कुछ हिस्सों में दर्द
  • हाथ-पैरों में कमजोरी का एहसास

कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy)

कार्डियोमायोपैथी हार्ट डिजीज के कारण हार्ट मसल्स प्रभावित होती हैं, जिसके कारण हार्ट को पूरे शरीर में ब्लड पंप करने में दिक्कत होती है।कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy) के कारण हार्ट फेलियर की समस्या भी हो सकती है।कार्डियोमायोपैथी के कारण सांस फूलना, पैरों में सूजन और पेट में सूजन की समस्या हो सकती है।कार्डियोमायोपैथी के कारण हार्ट मसल्स कमजोर हो जाती हैं और निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं।

  • थकान (fatigue)
  • ब्लोटिंग (bloating)
  • एंकल और फीट में सूजन
  • सांस लेने में समस्या (shortness of breath)
  • रैपिड पल्स (rapid pulse)

कार्डियोमायोपैथी तीन प्रकार की होती है। डाइलेटेड कार्डियोम्योपैथी (Dilated cardiomyopathy) में हार्ट मसल्स कमजोर हो जाती हैं। हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी (Hypertrophic cardiomyopathy) में हार्ट मसल्स अधिक मोटी हो जाती है और रिस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी (Restrictive cardiomyopathy) में हार्ट वॉल कठोर हो जाती है लेकिन मोटी नहीं होती है। ऐसे केसेज में डॉक्टर इम्प्लांटेड डिवाइस, सर्जरी या ट्रांसप्लांट की सलाह दे सकते हैं।

और पढ़ें: पुरुष हार्ट हेल्थ को लेकर अक्सर करते हैं ये गलतियां

हार्ट डिजीज के बारे में अधिक जानकारी के लिए देखें ये बायो डिजिटल वीडियो

जन्म से होनेवाली हार्ट की समस्याएं ( congenital heart disease)

कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट (congenital heart defects) वो हार्ट की समस्याएं हैं, जो जम्न से होती हैं। बच्चों में अनुवांशिक कारणों से कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट की समस्या हो जाती है। इस कारण से ब्लड फ्लो में समस्या होती है। चार में से एक बच्चे को कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट की समस्या से गुजरना पड़ सकता है। कुछ बच्चों के हार्ट में छेद, एट्रिअल सेप्टल डिफेक्ट्स (Atrial Septal Defect), वाल्व की खराबी (Valve Defects) आदि समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट की समस्या भ्रूण के विकास के दौरान पैदा होती है। कुछ दोष ऐसे होते हैं, जिनका ट्रीटमेंट संभव नहीं होता है। कंजेनिटल हार्ट डिफेक्ट होने पर निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं।

  • त्वचा का रंग नीला होना
  • सांस लेने में कठिनाई
  • थकान और एनर्जी कम लगना
  • हार्ट बीट में कम या ज्यादा होना

कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease)

जो लोग बैड कोलेस्ट्रॉल का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, उन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease) की समस्या हो सकती है।कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण ब्लड, ऑक्सिजन और न्यूट्रीएंट्स दिल तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पाते हैं और कोरोनरी आर्टरी ब्लॉक हो जाती है। इस कारण से छाती में दर्द की समस्या हो सकती है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज होने पर निम्नलिखित लक्षण दिखते हैं।

  • सीने में दर्द
  • छाती में दबाव
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • जी मिचलाना
  • अपच

और पढ़ें: दिल और दिमाग के लिए खाएं अखरोट, जानें इसके फायदे

हार्ट इंफेक्शन की समस्या (Heart infections)

हार्ट इंफेक्शन की समस्या बैक्टीरिया, वायरस या पैरासाइट के कारण हो सकती है। अगर शरीर में किसी कारण से इंफेक्शन फैला है, तो ये हार्ट को भी संक्रमित कर सकता है। हार्ट इंफेक्शन के कारण हार्ट डैमेज हो सकता है। हार्ट इंफेक्शन एंडोकार्डाइटिस (Endocarditis), मायोकार्डाइटिस (Myocarditis), पैरीकार्डाइटिस (Pericarditis) प्रमुख हैं। हार्ट इंफेक्शन होने पर निम्नलिखित लक्षण नजर आ सकते हैं।

  • सीने में दर्द
  • खांसी
  • थकान
  • बुखार
  • ठंड लगना और पसीना आना
  • बीमार महसूस करना
  • मांसपेशियों में दर्द
  • सांस लेने में समस्या
  • पेट में सूजन

और पढ़ें: Silent Heart Attack : साइलेंट हार्ट अटैक के लक्षण, कारण और उपाय क्या हैं?

महिलाओं में पुरुषों की अपेक्षा दिल का दौरा स्मॉल और नॉनफेटल होता है। कुछ दिल की बीमारियां जैसे कि हार्ट फेल होना, एरिथिमिया, एंजाइना, कोरोनरी हार्ट डिजीज, हार्ट इन्फेक्शन आदि की समस्याओं से महिलाओं को गुजरना पड़ता है। हाय कोलेस्ट्रॉल (High cholesterol), हाय बीपी (High BP), मोटापा, डायबिटीज (Diabetes), मेंटल स्ट्रेस, मोनोपॉज, प्रेग्नेंसी कॉम्प्लीकेशन, इंफ्लामेट्री डिजीज आदि कारणों से महिलाओं में दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अगर इन बीमारियों के लक्षणों को पहचानकर सही समय पर इलाज कराया जाए, तो बीमारियों से बचा जा सकता है।

हार्ट डिजीज के लिए ट्रीटमेंट (Treatment for heart disease)

हार्ट डिजीज का ट्रीटमेंट बीमारी के प्रकार पर निर्भर करता है। अगर आपको हार्ट इंफेक्शन की समस्या है, तो डॉक्टर एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करने की सलाह देंगे। डॉक्टर मेडिकेशन के साथ ही हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने की सलाह भी देते हैं। हार्ट डिजीज को ठीक करने के लिए तीन तरीके अपनाएं जा सकते हैं।

मेडिकेशन (Medications)

मेडिसिन की सहायता से हार्ट की समस्या को नियत्रिंत किया जा सकता है। ये बीमारी के लक्षणों को कम करने का काम करती है। हार्ट डिजीज के प्रकार के अनुसार ही डॉक्टर दवाओं का सेवन करने की सलाह देंगे।

लाइफस्टाइल में बदलाव (Lifestyle changes)

लाइफस्टाइल में बदलाव कर भी हार्ट डिजीज की समस्या से बचा जा सकता है। अगर आप स्वास्थ्य जीवनशैली को अपनाएंगे, तो बीमारी के लक्षणों को काबू में रख सकते हैं। आपको डॉक्टर डायट में बदलाव के साथ ही एक्सरसाइज करने की सलाह भी दे सकते हैं। खाने में कम नमक की मात्रा और कम मात्रा में फैट हेल्दी हार्ट के लिए जरूरी होता है।

सर्जरी (Surgery)

जब किसी कारण से आर्टरी पूरी तरह से ब्लॉक हो जाती है, तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है। सर्जरी की सहायता से बीमारी के लक्षणों को बढ़ने से रोका जा सकता है। डॉक्टर सर्जरी के दौरान स्टेंट को आर्टरी में इंसर्ट करते हैं, ताकि ब्लड फ्लो में किसी तरह की समस्या न हो। डॉक्टर हार्ट की बीमारी के अनुसार ही सर्जरी करने या न करने का फैसला लेते हैं।

हार्ट डिजीज से बचने के लिए डायट

दिल की बीमारियों से बचने के लिए आपको खाने में पौष्टिक आहार शामिल करने चाहिए। आपको खाने में फाइबर फूड शामिल करने चाहिए। साथ ही खाने में केले, चिया सीड्स, बेरी, ककड़ी, एवोकैडो आदि शामिल करने चाहिए। खाने में फलों और सब्जियों की पर्याप्त मात्रा को शामिल करें, जिनमें विटामिन और फाइबर्स पाया जाता है। खाने में अनाज का सेवन जरूर करें क्योंकि ये शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने का काम करता है। आप खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए गार्लिक और दालचीनी का इस्तेमाल कर सकते हैं। ये खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही हार्ट हेल्थ के लिए भी अच्छी होती हैं।

और पढ़ें: ट्राइग्लिसराइड्स की बीमारी से क्यों बढ़ता है हार्ट अटैक का खतरा?

इन फूड्स का न करें सेवन

जैसा कि हम आपको पहले ही बता चुके हैं कि बैड कोलेस्ट्रॉल के कारण हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए आपको खाने में पैक्ड फूड या प्रोसेस्ड फूड को अवॉयड करना चाहिए और फ्राइड फूड से तौबा करना चाहिए। आपको अधिक मात्रा में बटर या कोकोनट ऑयल का सेवन नहीं करना चाहिए। वनस्पति घी भी स्वास्थ्य के लिए अच्छे नहीं होते हैं। आप खाने में ऑलिव ऑयल, सनफ्लावर ऑयल आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं।

हार्ट डिजीज से बचने के लिए एक्सरसाइज

हार्ट डिजीज से बचने के लिए आपको एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए। अगर आप रोजाना आधे से एक घंटे एक्सरसाइज करते हैं, तो दिल की बीमारियों का खतरा बहुत कम हो सकता है। आपको एक्सरसाइज में कार्डियो एक्सरसाइज, एरोबिक्स एक्सरसाइज, स्ट्रेंथ वर्क आदि को शामिल करना चाहिए। अगर आप दिल की बीमारी से पीड़ित हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी एक्सरसाइज न करें। अगर आपको रोजाना कुछ घंटे वॉक करते हैं, तो भी शरीर में बढ़ें हुए कोलेस्ट्रॉल लेवस को कम करने का काम करता है। आप एक्सपर्ट की सलाह के बाद योग भी कर सकते हैं। योग के माध्यम से हाय ब्लड प्रेशर की समस्या को नियंत्रित करने में मदद मिलती है।

हार्ट डिजीज से बचने के लिए लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव

  • खाने में पौष्टिक आहार शामिल करें।
  • चिंता या स्ट्रेस न लें। अगर कोई समस्या है, तो अपनों से बात करें।
  • पर्याप्त मात्रा में नींद लें।
  • एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें।
  • अगर दिल की कोई बीमारी है, तो समय पर दवाओं का सेवन करें।
  • हाय ब्लड प्रेशर को आम बीमारी न समझें। बेहतर होगा कि रोजाना दवाओं का सेवन करें।
  • अगर सर्जरी हुई है, तो बताई गई सावधानियों का पालन करें।

अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखेंगे, तो खुद को हार्ट डिजीज की समस्या से बचा सकते हैं। हेल्दी हार्ट ही अच्छी सेहत की निशानी होता है। अगर आपको किसी प्रकार की समस्या महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं और बीमारी का ट्रीटमेंट कराएं। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

हार्ट से संबंधित अधिक जानकारी के लिए देखें ये वीडियो –

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बीएमआई कैलक्युलेटर

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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