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Heart rhythm disorder (Arrhythmia): हार्ट रिदम डिसऑर्डर क्या है?

परिचय|कारण|जोखिम|लक्षण|परीक्षण|इलाज|जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार
Heart rhythm disorder (Arrhythmia): हार्ट रिदम डिसऑर्डर क्या है?

परिचय

हार्ट रिदम डिसऑर्डर क्या है?

हृदय की विद्युत प्रणाली, दिल की धड़कन को प्रभावित करती है। विद्युत प्रणाली में गड़बड़ होने पर दिल की सामान्य धड़कन भी हिल जाती है। ऐसे में हृदय बहुत तेजी से धड़कना शुरू कर सकता है या बहुत धीमा भी हो सकता है। इसे ही हार्ट रिदम डिसऑर्डर कहते हैं।

हार्ट का काम बहुत पेचीदा होता है। यह पूरे शरीर में रक्त और पोषक तत्वों को प्रवाहित करता है। दिल एक स्थिर गति से धड़कता है इसलिए आप इसे सुन सकते हैं। दिल की धड़कन को विद्युत प्रणाली नियंत्रित करती है। जब उस प्रणाली में समस्या होती है दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है। दिल की धड़कन उस समय भी बढ़ जाती है जब आपने दौड़ लगाई हो। लेकिन कुछ समय तक दिल की धड़कन तेज होना सामान्य बात है लेकिन ये हमेशा बने रहने से खतरा हो सकता है। कई मामलों में हार्ट रिदम डिसऑर्डर समस्या पैदा कर सकता है। इससे आपको दिल की बीमारी भी हो सकती हैं।

हार्ट रिदम डिसऑर्डर के प्रकार

हार्ट रिदम डिसऑर्डर कई प्रकार के होते हैं। जानते हैं इनके बारे में—

एडम स्टोक डिसीज

इसे स्टोक एडम डिसीज भी कहते हैं। यह हृदय को ब्लॉक करने जैसी स्थिति होती है। इससे हृदय गति काफी धीमी हो जाती है। जिससे आप बेहोश भी हो सकते हैं। यह तब होता है जब दिल की विद्युत प्रणाली बाधित होती है।

एट्रियल फ्लूटर

एट्रियल फ्लूटर तब होता है जब तेजी से बिजली के संकेत तेजी से हृदय के ऊपरी कक्षों की मांसपेशियों को छूते हैं तो दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाती है। एट्रियल फ्लूटर किसी को भी हो सकता है।

सिक साइनस सिंड्रोम

जब साइनस नोड अपने विद्युत संकेतों का ठीक से संचालन नहीं कर पाती है तो हृदय की गति धीमी हो जाती है। इसे साइनस सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है

साइनस अरिदमिया

यह बीमारी ज्यादातर बच्चों में पाई जाती है। सांस लेते और छोड़ते समय अगर दिल की धड़कन या धीमी होती है तो उसे साइनस अरिदमिया कहा जाता है।

हार्ट बीट तेज होने की वजह क्या होती है ?

हार्ट बीट कई कारणों से प्रभावित होती है। कई बार मौसम बदलने पर भी हार्टबीट में परिवर्तन हो सकता है। विंटर में टेम्प्रेचर कम हो जाता है और हार्ट रेट अचानक से बढ़ सकती है। अगर आप चलने के दौरान, सोने के दौरान या मेहनत वाले काम करने के दौरान हार्ट बीट में बदलाव महसूस कर रहे हैं तो ये घबराने की बात नहीं है। हार्ट बीट तेज होने की वजह विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं, लेकिन हार्ट बीट तेज होने की वजह अगर कम नींद, चिंता, तनाव या फिर स्लीपिंग डिसऑर्डर है तो आपको अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। अनियमित दिल की धड़कन कई प्रकार की समस्याएं खड़ी कर देती है। ऐसे में डॉक्टर से जांच कराना बहुत जरूरी हो जाता है।

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कारण

हार्ट रिदम डिसऑर्डर के कारण क्या हैं?

विद्युत आवेगों में किसी भी प्रकार की रुकावट होती है तो हार्ट रिदम डिसऑर्डर हो सकता है। स्वस्थ दिल वाले व्यक्ति की हृदय गति 60-100 बीट प्रति मिनट के बीच होनी चाहिए। एक व्यक्ति जितना अधिक फिट होता है, उसकी हृदय गति उतनी ही कम होती है। उदाहरण के लिए, ओलंपिक एथलीटों में आमतौर पर दिल की धड़कन 60 बीट्स प्रति मिनट से कम होती है क्योंकि उनके दिल बहुत मजबूत होते हैं। कई कारणों से हार्ट रिदम डिसऑर्डर हो सकता है। जैसे—

  • शराब का सेवन
  • ज्यादा दवाई खाना
  • ज्यादा कॉफी पीना
  • दिल की बीमारी होना
  • धूम्रपान
  • कुछ आहार
  • कुछ हर्बल दवाइयां
  • कुछ दवाएं

एक स्वस्थ व्यक्ति शायद ही कभी लंबे समय तक हार्ट रिदम डिसऑर्डर से पीड़ित होगा। अगर कोई नशीली दवाओं का प्रयोग ज्यादा करता है तो उसकी विद्युत प्रणाली असंतुलित हो जाती है। जिससे हार्ट रिदम डिसऑर्डर की संभावना बढ़ जाती है।

अनियमित दिल की धड़कन के अन्य कारण

इलेक्ट्रिकल सिग्नल ठीक से नहीं मिलने के कारण अनियमित दिल की धड़कन की समस्या होती है। ऐसा तब होता है जब स्पेशल नर्व सेल्स इलेक्ट्रिकल इंपल्स ठीक तरह से हार्ट तक नहीं पहुंच पाता है। वहीं अगर हार्ट के दूसरे हिस्से से इलेक्ट्रिकल सिग्नल शुरू हो जाए तो भी एरिथमिया की समस्या हो सकती है।

निम्न परिस्थितियों में एरिथमिया की परेशानी शुरू हो जाती है।

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जोखिम

किन कारणों से बढ़ सकती है एरिथमिया की समस्या ?

एरिथमिया या अनियमित दिल की धड़कन की परेशानी निम्नलिखित कारणों से बढ़ सकती है:

  • हार्ट अटैक, हार्ट फेल होना, नेरौ हार्ट वाल्व या कॉनजेनाइटल हार्ट डिफेक्ट, हार्ट सर्जरी या कार्डियोवैस्कुलर परेशानी होना।
  • ब्लड प्रेशर हाई होने की स्थिति में कॉरोनरी आर्ट्री डिजीज होने की वजह से एरिथमिया का खतरा बढ़ सकता है। इसके साथ ही लेफ्ट वेंट्रिकल अत्यधिक सख्त हो जाता है (इसी कारण इलेक्ट्रिकल इंपल्स में समस्या होती है )।
  • थायरॉइड की समस्या होना
  • अपनी मर्जी से दवाइयों का सेवन करना।
  • हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज लेवल ठीक नहीं होने की स्थिति में एरिथमिया होने का खतरा बढ़ सकता है।
  • अत्यधिक एल्कोहॉल का सेवन करने के कारण एरिथमिया की समस्या हो सकती है।
  • कैफीन या निकोटिन की अत्यधिक मात्रा एरिथमिया को दस्तक दे सकते हैं।

एलेक्ट्रोलाइट की अनियमित्ता जैसे पोटैशियम, सोडियम, कैल्शियम और मैग्नेशियम की समस्या होने पर एरिथमिया की समस्या हो सकती है।

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लक्षण

हार्ट रिदम डिसऑर्डर के लक्षण क्या हैं?

एक स्वस्थ हृदय प्रति मिनट 60 से 100 बार धड़कता है। व्यायाम के दौरान या तनाव की स्थिति में दिल की धड़कन तेज हो सकती है। सोते समय यह धीमी गति से धड़कता है। दिल की धड़कन का तेज होना या धीमा हो जाना, एक सामान्य बात होती है। इसी वजह से जब हार्ट रिदम डिसऑर्डर होता है तो कई लोग इसे महसूस नहीं कर पाते हैं। हार्ट रिदम डिसऑर्डर के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं—

  • पैल्पिटेशन, या “स्किप बीट्स”
  • सीने में कंपन महसूस होना
  • दिल में सेंसेशन महसूस होना
  • बेहोशी या थकान महसूस होना
  • सिर दर्द होना
  • सांस ना ले पाना
  • बेचैनी
  • ये सभी लक्षण हार्ट रिदम डिसऑर्डर के अलावा चिंता, तनाव या अन्य कारणों से भी हो सकते हैं।
  • गले और चेस्ट में फड़कने जैसा एहसास होना
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • हार्टबीट धीरे होना
  • चेस्ट में दर्द महसूस होना
  • सांस लेने में परेशानी महसूस होना
  • चक्कर आना
  • अत्यधिक पसीना आना
  • बेहोश होना या ऐसी स्थिति बनना

ये भी पढ़ें: कहीं आप में भी तो नहीं हैं इस खतरनाक बीमारी के लक्षण

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि आपका दिल बहुत तेजी धड़कता है या सीन में सेंसेशन महसूस होता है तो आप खतरे में हैं। ये स्थिति हमेशा बनी बनी रह सकती है या कभी-कभी भी हो सकती है। अगर ऐसा एक बार होता है तो घबराने की जरूरत नहीं है। अपने डॉक्टर से इस बारे में बात करें। यदि आपने दवाई ली है और असर नहीं हो रहा है तो डॉक्टर से बताएं। इसके अलावा ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं।

  • सांस ना ले पाना
  • बेहोशी महसूस होना
  • अगर महसूस हो कि आपका दिल बहुत तेजी से या धीरे धड़क रहा है
  • सीने में दर्द

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परीक्षण

हार्ट रिदम डिसऑर्डर का परीक्षण कैसे होता है?

डॉक्टर यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि रोगी की हार्ट रिदम डिसऑर्डर कब-कब महसूस होता है। इसमें डॉक्टर आपसे कई सारे सवाल पूछ सकते हैं। जैसे आपकी पिछली बीमारी के बारे में, कोई आनुवांशिक बीमारी, आहार और जीवनशैली क्या है?

लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के साथ-साथ शारीरिक जांच कर हार्ट रिदम डिसऑर्डर की स्थिति समझी जाती है। डॉक्टर हार्ट से जुड़ी परेशानियों और थायरॉइड की जानकारी पेशेंट से ले सकते हैं। डॉक्टर बीमारी की जानकारी के लिए हार्ट मॉनेटरिंग टेस्ट की सलाह देते हैं। इन टेस्ट में शामिल हैं:

  • एलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG): ECG की मदद से हार्ट में हो रहे इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को समझा जा सकता है।
  • हॉल्टर मॉनिटर: यह पेशेंट के हृदय और उसके आस-पास जोड़ दिया जाता है और एक या उससे ज्यादा (डॉक्टर के अनुसार) दिनों तक हार्ट के गतिविधि को रिकॉर्ड करता है।
  • इवेंट मॉनिटर: इस डिवाइस की मदद से परेशानी महसूस होने के दौरान हार्ट रिदम की जानकारी मिल सकती है।
  • 2-डी ईकोकार्डियोग्राम इससे हार्ट के साइज, स्ट्रक्चर और मोशन की जानकारी मिल सकती है।
  • इम्प्लांटेबल लूप रिकॉर्डर: इस डिवाइस की मदद से हार्ट रिदम की जानकारी मिलने के साथ-साथ चेस्ट के अंदुरुनी स्किन की जानकारी भी मिल जाती है।

अगर टेस्ट के दौरान एरिथमिया की जानकारी नहीं मिल पाती है, तो ऐसी स्थिति में ऊपर बताए गए जांच के अलावा अन्य जांच किए जाते हैं। जैसे:

  • स्ट्रेस टेस्ट: स्ट्रेस टेस्ट के दौरान एरिथमिया की स्थिति आसानी से समझ आ सकती है।
  • टिल्ट टेबल टेस्ट: इस टेस्ट के दौरान पेशेंट को इस पोजिशन में रखा जाता है, जिससे मरीज को चक्कर आने जैसा एहसास हो। इस दौरान पेशेंट की हृदय गति कैसी रहती है इसकी जानकारी ली जाती है।
  • एलेक्ट्रोफीजियोलॉजिकल टेस्टिंग एंड मैपिंग: इस टेस्ट की मदद में डॉक्टर ब्लड वेसल्स में पतली लचीली ट्यूब कैथेटर की मदद से एरिथमिया की स्थिति की जानकारी लेते हैं।

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इलाज

हार्ट रिदम डिसऑर्डर का इलाज कैसे होता है?

  • यदि आपको इलाज की आवश्यकता है, तो डॉक्टर सबसे पहले यह देखेगा कि आपको किस तरह का हार्ट रिदम डिसऑर्डर है। आपको दवा, सर्जरी, कार्डियक एब्लेशन या प्रत्यारोपित डिवाइस की आवश्यकता हो सकती है।
  • कार्डियक एब्लेशन में हार्ट रिदम डिसऑर्डर का कारण बनने वाला हृदय ऊतक सर्जरी करके नष्ट किया जाता है। एक अन्य प्रकार की सर्जरी में, डॉक्टर आपके सीने या पेट में एक कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (ICD) रखता है।
  • वेगल मेन्यूवेर्स- कुछ मूवमेंट जो पेशेंट खुद से कर सकते हैं इस दौरान एरिथमिया की जानकारी मिल सकती है।
  • मेडिकेशन- सिर्फ दवा से एरिथमिया की परेशानी पूरी तरह से ठीक तो नहीं हो सकती है लेकिन, इसे कम जरूर किया जा सकता है।
  • कार्डियोवर्शन- इलेक्ट्रिक शॉक की मदद से इलाज किया जाता है।
  • एबलेशन थेरिपी- एक या अधिक कैथेटर ब्लड वेसेल्स के माध्यम से हृदय में जाता है। एरिथमिया की शंका जहां-जहां होती है वहां कैथेटर को रखा जाता है, जो एरिथमिया की परेशानी को दूर करने में सहायक होता है।
  • आईसीडी (implantable cardioverter-defibrillator)- यह डिवाइस कालर्बोन के लेफ्ट साइड पर लगाया जाता है। अगर आईसीडी एरिथमिया की जानकारी मिलने पर उसे सामान्य करने में मदद करता है।
  • मेज प्रोसीजर- हृदय से जुड़ी सर्जरी की जाती है। इस सर्जरी की मदद से इलेक्ट्रिकल सिग्नल को ठीक किया जाता है।
  • वीएएस (Ventricular aneurysm surgery)- वीएएस की मदद से एन्यूरिज्म को हटा दिया जाता है।
  • कोरोनरी बाइपास सर्जरी– अगर पेशेंट कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित है, तो डॉक्टर कोरोनरी बाइपास सर्जरी की सलाह देते हैं। जिससे हार्ट तक ब्लड फ्लो ठीक हो जाए।

यह आपके दिल को ट्रैक करेगा और यदि यह समस्या है तो दिल की धड़कन को फिर से सामान्य करने की कोशिश करेगा। दिल की धड़कन सामान्य हो जाने के बाद इसे निकाल दिया जाता है। आईसीडी की मदद से आप खुद भी अपने दिल की धड़कन को जब चाहें सामान्य कर सकते हैं।

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हार्ट रिदम डिसऑर्डर का इलाज होने के बाद बढ़ने वाली समस्याएं

इलाज के बाद निम्न दो तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं:

स्ट्रोक – फाइब्रिलेशन यानी सीने में कंपकंपी महसूस होने का मतलब है कि हृदय ठीक से पंप नहीं कर रहा है। ठीक से रक्त पंप ना होने के कारण खून के थक्के बन सकते हैं। इससे ब्लॉकेज होने की संभावना होती है। ऐसा होने मस्तिष्क सहित शरीर के कुछ हिस्सों में खून पहुंचना बंद हो सकता है। यह कभी-कभी बहुत घातक होता है।

हार्ट फेल होना – लंबे समय तक टैचीकार्डिया या ब्रैडीकार्डिया से हृदय शरीर और उसके अंगों को पर्याप्त रक्त पहुंचाने में असफल हो जाता है। यह हार्ट फेल की स्थिति पैदा करता है। ठीक से इलाज करवाया जाए तो इस समस्या से बचा जा सकता है। बेहतर जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

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जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपचार

जीवनशैली में बदलाव या घरेलू उपचार क्या हैं जो एरिथमिया की समस्या को कम कर सकता है ?

एरिथमिया की समस्या को कम करने के लिए निम्नलिखित टिप्स को अपनाया जा सकता है।

उपरोक्त दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार एरिथमिया से जुड़ी रिसर्च अभी भी की जा रही है।यदि बीमारी से जुड़े कोई सवाल हैं, तो बेहतर इलाज के लिए चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
27/02/2020 पर Bhawana Sharma के द्वारा लिखा
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