गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से कम हो सकती है मिसकैरिज की संभावना!

By Medically reviewed by Dr. Pranali Patil

गर्भावस्था में शतावरी का सेवन क्यों है लाभकारी?

शतावरी (Asparagus Racemosus) को आयुर्वेदिक औषधी की श्रेणी में रखा जाता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लमेटरी और एंटी-डिप्रेसेंट जैसे तत्व मौजूद होने के कारण इसे क्वीन ऑफ हर्ब (औषधि की रानी) भी कहा जाता है। इसे सर्वगुण संपन्न माना जाता है।  गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से कई लाभ मिलते हैं इसके साथ ही इससे इम्यून सिस्टम भी स्ट्रांग होता है। गर्भावस्था में शतावरी का सेवन कैसे किया जाए जानते हैं।

गर्भावस्था में शतावरी का सेवन कैसे करें?

शतावरी चूर्ण और सब्जी दोनों रूप में मिलती है। यह हिमालय पर पाई जाने वाली औषधि है। इसका उपयोग सब्जी के रूप में भी किया जाता है। साथ ही इसके चूर्ण को भी खाया जाता है। इसे आप किस रूप में और कैसे खाना चाहते हैं इस बारे में डॉक्टर से सलाह लें। वे ही आपको इसके उपयोग के बारे में सही जानकारी दे सकेंगे। गर्भवती महिलाओं को फोलेट खिलाना चाहिए क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में फोलेट पाया जाता है। फोलेट बच्चों को रीढ़ की हड्डी और दिमाग के विकास में मदद करता है।

इस बारे में इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, आयुर्वेदिक एवं काउंसलर डॉ. शरयु माकणीकर कहती हैं कि शतावरी में मौजूद एंटी-ऑक्सिटॉसिन जैसे तत्व मिसकैरिज की संभावना को कम करते हैं। यही नहीं इसके सही मात्रा में सेवन से गर्भावस्था के दौरान होने वाली तनाव और चिंता दूर होती है। यह मूड स्विंग से भी बचाती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान शतावरी के सेवन करने से मिल्क फॉर्मेशन बेहतर होता है। इससे शिशु को स्तनपान करवाने में सहायता मिलती हैडिलिवरी के बाद इसके सेवन से इम्यूनिटी स्ट्रांग होती है और बॉडी फिट होती है, लेकिन इसके सेवन से पहले अपने हेल्थ एक्सपर्ट से एक बार जरूर सलाह लें कि इसका सेवन कैसे करना चाहिए?

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गर्भावस्था में शतावरी सेवन के क्या हैं फायदे?

शतावरी में मौजूद सेपोनिन्स, सल्फर-कंटेनिंग एसिड, ऑलिगोसेकेराइड्स और एमिनो एसिड शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते हैं। प्रेग्नेंसी में शतावरी के सेवन से निम्नलिखित फायदे होते हैं।

1. फॉलिक एसिड

शतावरी में फोलिक एसिड की मौजूदगी गर्भ में पल रहे फीटस के विकास में सहायक होती है। इसका सेवन गर्भावस्था के पहले (प्रेग्नेंसी प्लानिंग) के वक्त से और गर्भावस्था के दौरान भी सेवन करना चाहिए। गर्भावस्था में फोलिक एसिड युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन शिशु के DNA बनने में सहायक होता है। इससे हार्ट संबंधी परेशानी नहीं होती है और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी कम होता है।

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2. स्तनपान कराने में मदद करता है

शतावरी में मौजूद गइलेक्टागो (galactagogue) मिल्क बनने में सहायता करता है। हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार शतावरी के जड़ से बना पाउडर भी शरीर के लिए लाभकारी होता है। इसलिए यह स्तनपान में सहायक होता है।

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3. शतावरी में ग्लूटाथिओन मौजूद होता है 

शतावरी में ग्लूटाथिओन मौजूद होता है, जो गर्भवती महिला के सेहत के लिए हितकारी होता है। इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स एंटीऑक्सिडेंट की तरह काम करता है। इससे शिशु में जन्मजात बीमारियों का खतरा कम होता है और DNA को भी डैमेज होने से बचाता है। 

4. कैल्शियम की मौजूदगी

शरीर को फिट रखने के लिए अन्य खनिज तत्व की तरह कैल्शियम भी आवश्यक होता है। कैल्शियम की कमी हड्डियों और दातों को कमजोर कर सकती है। इसलिए गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु में कैल्शियम की कमी नहीं होती है और नवजात भी स्वस्थ्य होता है। रिसर्च के अनुसार यह गर्भ में पल रहे फीटस के विकास में भी सहायक होता है।

5. विटामिन-सी की उपस्थिति

शतावरी में विटामिन-सी की भरपूर मात्रा शरीर को पोषण पहुंचाने में मदद करती है। इसके सेवन से इम्यूनिटी बढ़ने के साथ ही वायरल इंफेक्शन का खतरा भी कम होता है और त्वचा हेल्दी होती है।

6. विटामिन-ई

गर्भवती महिला और फीटस दोनों के लिए विटामिन-ई आवश्यक होता है। शतावरी में विटामिन-ई की प्रचुर मात्रा शरीर को टॉक्सिन से बचाती है। गर्भ में पल रहे शिशु के नर्व को बेहतर रखने में भी यह मदद करती है। अत: गर्भावस्था में शतावरी का उपयोग महिला को कई सारे लाभ पहुंचाता है।

7. विटामिन बी-6

 विटामिन-बी 6 (पाइरिडोक्सिन) का उपयोग आमतौर पर एक प्रकार के एनीमिया (सिडरोबलास्टिक एनीमिया) के इलाज के लिए किया जाता है। साथ ही पाइरिडोक्सिन की कमी, हाई होमोसिस्टीन ब्लड लेवल, नवजात शिशुओं को पड़ने वाले दौरे के इलाज लिए भी इसका उपयोग किया जाता है। इसमें विटामिन बी-6 भी भी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यानी गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से फायदे तो हैं ही इसके बाद भी इसका सेवन उपयोगी साबित होता है।

8. विटामिन-के

विटामिन-के दिल और ​​हड्डियों के लिए फायदेमंद है। यह आपकी हड्डियों को स्ट्रांग बनाकर चोट लगने की परिस्थिति में उनके टूटने के खतरे को कम करता है। इसके अलावा यह चोट लगने पर खून के बहाव को भी रोकता है और खून की कमी होने से बचाता है। यह ब्लड प्रेशर को काबू रखने में भी सहायक है। इसलिए गर्भवस्था में शतावरी के सेवन से फायदा होता है।

शतावरी के अन्य फायदे 

गर्भावस्था में शतावरी के फायदे के अलावा इसके उपयोग के नॉर्मल लाइफ में भी कई फायदे हैं।

  • इसकी तासीर ठंडी होती है इसलिए यह बुखार में फायदेमंद होता है।
  • यौन रोगों को ठीक करने और यौन शक्ति बढ़ाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है।
  • खांसी और गले की खराश को दूर करने में भी इसका उपयोग किया जाता है। इसके लिए शतावरी की जड़ के रस का उपयोग करते हैं।
  • शतावरी तनाव काे दूर कर अनिद्रा से राहत दिलाती है।

गर्भावस्था में शतावरी का सेवन करने के अलावा ऊपर बताई गई परेशानियों का सामना कर रहे लोग भी इसका उपयोग कर सकते हैं।

शतावरी के नुकसान क्या है?

  • गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से नुकसान भी हो सकता है। इसलिए महिलाएं जो शतावरी कल्प का सेवन गर्भावस्था में करती हैं उन्हें ब्रेस्ट में बदलाव महसूस हो सकता है।
  • ब्रेस्ट के साइज में भी बदलाव आ सकता है।
  • गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से कुछ महिलाओं का वजन जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है ऐसे में हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना चाहिए।
  • किडनी की बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए यह नुकसानदायक हो सकता है।

हमें उम्मीद है कि गर्भावस्था में शतावरी के सेवन के फायदे पर आधारित ये आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। गर्भावस्था में शतावरी का सेवन करना है या नहीं इसके बारे में एक अपने हेल्थ एक्सपर्ट से जरूर पूछें। हर गर्भवती महिला की स्थिति अलग होती है। जिसे डॉक्टर ही ठीक से समझ सकते हैं। गर्भावस्था में किसी भी प्रकार की दवाइयां या हर्बल प्रोडक्ट्स का उपयोग करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। अगर आप गर्भावस्था में शतावरी के सेवन से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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