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कैसा हो मिसकैरिज के बाद आहार?

कैसा हो मिसकैरिज के बाद आहार?

मिसकैरिज के बाद डायट समझने से पहले ये समझना बेहदर जरूरी है की मिसकैरिज क्या है? दरअसल प्रेग्नेंसी के 20वें हफ्ते से पहले गर्भ में फिट्स की मौत हो जाना मिसकैरिज कहलाता है। अमेरिकन सोसायटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में 10-25% प्रेग्नेंसी गर्भपात होने की वजह से पूरी नहीं हो पाती है। केमिकल प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भ ठहरने के बाद और प्रेग्नेंसी के 5वें हफ्ते के पहले ही गर्भपात होता है। मिसकैरिज के बाद आहार का विशेष ख्याल रखना चाहिए। गर्भपात के बाद निम्नलिखित खाद्य पदार्थों का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इनमें शामिल हैं।

मिसकैरिज के बाद आहार कैसा हो?

आयरन रिच फूड

मिसकैरिज की वजह से महिला को अत्यधिक ब्लीडिंग होती है। जरूरत से ज्यादा ब्लीडिंग से शरीर में आयरन की कमी हो सकती है और महिला एनीमिया की शिकार हो सकती हैं। इसलिए गर्भपात के बाद आयरन से भरपूर आहार का सेवन करें। रोजाना हरी सब्जी जैसे ब्रोकली, पालक, बीन्स, ब्राउन राइस और दाल खाएं। ये आयरन का अच्छा सोर्स हैं।

पसंदीदा फूड

मिसकैरिज के बाद होने वाले हैवी ब्लीडिंग से भी ज्यादा तकलीफ महिलाएं तनाव के कारण महसूस करती हैं। इसलिए इस दौरान ऐसे खाद्य पदार्थ जो आपको पसंद हो, लेकिन नुकसान न पहुंचाएं उनका सेवन करें। आप इस दौरान चॉकलेट का सेवन और नट्स का सेवन कर सकती हैं। खुद को तनाव, चिंता और डिप्रेशन से बचा कर रखें। क्योंकि अगर आप हेल्दी होंगी तो नेक्स्ट प्रेग्नेंसी जल्द प्लान कर सकती हैं।

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कैल्शियम से भरपूर आहार

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कैल्शियम की मात्रा तेजी से कम होती है। इसलिए मिसकैरिज के बाद कैल्शियम युक्त आहार जैसे ड्राई फ्रूट्स, डेयरी प्रोडक्ट, दूध, सी-फूड और सोया जैसे खाने-पीने की चीजें जरूर अपने आहार में शामिल करें।

मिसकैरिज के बाद आहार में हरी सब्जी और फलों का सेवन करें

गर्भावस्था के नुकसान के बाद आपके शरीर को पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसलिए नियमित रूप से फलों और सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

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मिसकैरिज के बाद पौष्टिक आहार लेना चाहिए। कुछ ऐसे भी खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन इस दौरान नहीं करना चाहिए।

मिसकैरिज के बाद आहार जिनके सेवन से हो सकता है नुकसान

फैटी मिल्क

मिसकैरिज के बाद आहार में फैटी मिल्क जैसे बटर या चीज का सेवन न करें। इससे बेचैनी या दर्द की समस्या हो सकती है।

गर्भपात के बाद आहार : मीट

गर्भपात के बाद लांब, बीफ या पोर्क का सेवन न करें। इससे नुकसान हो सकता है।

लो-फायबर स्टार्च

लो-फायबर स्टार्च वाले खाद्य पदार्थ जैसे नूडल्स, पास्ता या इंस्टेंट राइस का सेवन न करें। लो-स्टार्च फूड के सेवन से शरीर में शुगर की मात्रा बिगड़ सकती है। इसलिए मिसकैरिज के बाद आहार लो-स्टार्च फूड न खायें।

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मिठाई

कम से कम मिठाइयों का सेवन किया जा सकता है लेकिन, कार्बोनेटेड ड्रिंक और कैंडीज का सेवन करने से बचें।

गर्भपात के बाद आहार : जंक फूड

जंक फूड से हम सभी अवगत हैं कि इसका सेवन शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए गर्भपात के बाद भी इसके सेवन से बचें। यह ध्यान रखें की मिसकैरिज के बाद जंक फूड का सेवन मेन कोर्स की तरह न करें। दरअसल जंक फूड में कैलोरी की मात्रा ज्यादा होती है और पौष्टिक तत्वों की मात्रा न के बराबर। इसके सेवन से शरीर को फायदा न मिलकर नुकसान ही पहुंचेगा। इसलिए मिसकैरिज के बाद आहार के रूप में जंक फूड का सेवन न करें।

गर्भपात के बाद आहार : सोया फूड

मिसकैरिज के बाद आहार में सोया फूड प्रोडक्ट का इस्तेमाल न करें। हालांकि हमसभी जानते हैं सोया शरीर के लिए लाभदायक होता है। लेकिन, सोया में मौजूद फायटेट (Phytate) शरीर में मौजूद आयरन की मात्रा को एब्सॉर्ब कर लेता है। ऐसी स्थिति में शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। इसलिए मिसकैरिज के बाद आहार में सोया शामिल न करें।

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प्रेग्नेंसी लॉस किसी भी कपल के लिए सदमे से कम नहीं है, लेकिन इस वक्त इससे निकलने की जरूरत है। जब आप दोनों हेल्दी और खुश रहेंगे तभी फिर से बेबी प्लानिंग की जा सकती है। इसलिए इस दौरान एक-दूसरे का साथ दें, एक-दूसरे का ध्यान रखें और वक्त दें। वैसे मिसकैरिज से बचने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें। इनमें शामिल हैं।

रिसर्च के अनुसार 60 प्रतिशत तक मिसकैरिज फर्टिलाइजेशन के दौरान एब्नॉर्मल क्रोमोसोम के कारण होता है। ऐसा जेनेटिक कारणों की वजह से होता है, जिसे ट्रांसलोकेशन (Translocation) कहते हैं। बढ़ती उम्र के कारण भी मिसकैरिज होता है लेकिन, इसके कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं। ऐसा माना जाता है की 50 से 75 प्रतिशत महिलाओं में बार-बार मिसकैरिज का पता भी नहीं चलता है। प्रेग्नेंसी लॉस या मिसकैरिज के बाद महिला का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। मिसकैरिज के बाद कब प्रेग्नेंसी प्लानिंग करें और मिसकैरिज के बाद महिला कितनी फिट हैं गर्भधारण करने के लिए ये समझना जरूरी है।

मिसकैरिज के बाद बेबी प्लानिंग जरूर करें लेकिन, सबसे पहले पीरियड्स (मासिक धर्म) को नॉर्मल होने दें (पीरियड्स साइकिल डेट के अनुसार ठीक होने दें)। पीरियड साइकिल ठीक नहीं होने पर इंफेक्शन का खतरा और मोलर प्रेग्नेंसी (Molar Pregnancy) या एक्टॉपिक प्रेग्नेंसी (Ectopic Pregnancy) की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए पीरियड्स नॉर्मल होने तक इंतजार करें और अगर पीरियड्स की समस्या ठीक होने में ज्यादा वक्त लग रहा हो तो इस बारे में अपने डॉक्टर को बातएं। बदलती लाइफ स्टाइल की वजह से पीसीओडी या पीसीओएस की समस्या होना सामान्य हो गया है। जिसमें पीरियड्स अनिमियत रहते हैं। ऐसे में पहले इस बीमारी का इलाज करवाना चाहिए। जिससे गर्भधारण आसानी से किया जा सकता है। डॉक्टर का इलाज और लाइफस्टाइल में चेंज करके आप इस बीमारी को ठीक कर सकती हैं। मिसकैरिज के बाद ध्यान रखें की किसी भी बात का ज्यादा स्ट्रेस न लें। स्ट्रेस की वजह से आपकी परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है।

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इन टिप्स को फॉलो कर मिसकैरिज के बाद बेबी प्लानिंग जल्दी की जा सकती है, लेकिन अगर आप मिसकैरिज के बाद आहार से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।उपरोक्त दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

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ड्यू डेट कैलक्युलेटर

अपनी नियत तारीख का पता लगाने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें। यह सिर्फ एक अनुमान है - इसकी गैरेंटी नहीं है! अधिकांश महिलाएं, लेकिन सभी नहीं, इस तिथि सीमा से पहले या बाद में एक सप्ताह के भीतर अपने शिशुओं को डिलीवर करेंगी।

सायकल लेंथ

28 दिन

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Healthy Eating for Pregnancy Healthy Eating/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC6396620/Accessed on 22/11/2019

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 27/07/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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