Chocolate: चॉकलेट क्या है?

    Chocolate: चॉकलेट क्या है?

    परिचय

    चॉकलेट क्या है?

    यह कोकोआ बीन से बनती है। बहुत से शोध के अनुसार चॉकलेट शब्‍द मूलत: स्‍पैनि‍श भाषा का शब्‍द है। ज्‍यादातर तथ्‍य इशारा करते हैं कि चॉकलेट शब्‍द माया और एजटेक सभ्‍यताओं की देन है। चॉकलेट की प्रमुख सामग्री कोकाेआ के पेड़ की खोज 2000 वर्ष पूर्व अमेरि‍का के वर्षा वनों में की गई थी। इस पेड़ की फलि‍यों में जो बीज होते हैं उनसे चॉकलेट बनाई जाती है। सबसे पहले चॉकलेट बनाने वाले लोग मैक्‍सि‍को और मध्‍य अमेरि‍का के थे।

    यह कैसे काम करता है?

    यह हर्बल सप्लिमेंट्री कैसे काम करता है, इस बारे में पर्याप्त अध्ययन नहीं किए गए हैं। अधिक जानकारी के लिए कृपया अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर से राय लें।

    उपयोग

    चॉकलेट की क्या उपयोगिता है?

    इसका इस्तेमाल इन हेल्थ कंडीशन के इलाज के लिए किया जाता है:

    समय से पहले त्वचा में झुर्रियां आना

    कुछ शोध से पता चलता है कि अकेले कोकोआ त्वचा की समस्याओं के लिए उपचार के तौर पर प्रभावकारी है।

    अनियमित हर्ट बीट

    जो लोग इसका अधिक सेवन करते हैं उन्हें अनियमित दिल के धड़कने का खतरा नहीं रहता है।

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    सिरोसिस

    अनुसंधान से पता चलता है कि तरल भोजन और डार्क चॉकलेट का सेवन सिरोसिस वाले लोगों में यकृत के स्वास्थ्य में सुधार कर सकता है।

    कब्ज

    रोजाना कोको लेने से कब्ज की समस्या वाले बच्चों में मल नरम हो सकता है।

    डायबिटीज

    कोकाओ इंसुलिन प्रतिरोध को कम कर सकता है और संवेदनशीलता में सुधार कर सकता है। हालांकि, कोको रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित नहीं करता है।

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    ह्रदय का रुक जाना

    जो लोग प्रति सप्ताह 250 ग्राम चॉकलेट खाते हैं, उन्हें दिल की विफलता का खतरा कम होता है। हालांकि, प्रति सप्ताह 300 ग्राम चॉकलेट या अधिक खाने से कम जोखिम के साथ जुड़ा हुआ नहीं लगता है।

    वजन घटना

    कम कैलोरी वाले आहार का पालन करना, डार्क चॉकलेट के दो वर्ग खाने और 18 सप्ताह तक रोजाना शुगर-फ्री काेकोआ ड्रिंक पीने से वजन कम नहीं होता है।

    • हाई ब्लड प्रेशर
    • सिरोसिस (पुरानी जिगर की बीमारी)
    • हाई कोलेस्ट्रॉल
    • हाई ब्लड शुगर
    • दिल की बीमारी
    • डायबिटीज
    • कब्ज
    • क्रोनिक फटीग सिंड्रोम
    • यह प्रेगनेंसी को सपोर्ट करने के लिए भी इस्तेमाल होता है।

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    सावधानियां और चेतावनियां

    चॉकलेट का इस्तेमाल करने से पहले किन जानकारियों का होना जरूरी है?

    अपने चिकित्सक या फार्मासिस्ट या हर्बलिस्ट से परामर्श करें, यदि:

    • आप प्रेग्नेंट हैं या ब्रेस्ट फीडिंग करा रही हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दौरान गर्भवती मां की इम्यूनिटी कमजोर होती है, ऐसे में किसी भी तरह की दवाई लेने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए
    • आप पहले से ही दूसरी दवाइयां ले रहे हैं। इसमें वो सारी दवाइयां शामिल हैं जो बिना डॉक्टर के प्रिसक्रीप्शन के खरीदे जा सकते हैं।

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    • आपको कोई अलग तरह की बीमारी, डिसऑर्डर, या हेल्थ कंडीशन है
    • आपको किसी तरह की एलर्जी है

    दवाइयों की तुलना में हर्ब्स लेने के लिए नियम ज्यादा सख्त नहीं हैं। बहरहाल यह कितना सुरक्षित है इस बात की जानकारी के लिए अभी और भी रिसर्च की जरूरत है। इस हर्ब को इस्तेमाल करने से पहले इसके रिस्क और फायदे को अच्छी तरह से समझ लें। हो सके तो अपने हर्बल स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से सलाह लेकर ही इसे यूज करें।

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    चॉकलेट कितना सुरक्षित है?

    प्रेगनेंसी और ब्रेस्टफीडिंग:

    इस बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। बेहतर होगा इस नाजुक स्थिति में चॉकलेट के होने वाले फायदे और नुकसान को अच्छी तरह से डॉक्टर से डिस्कस करें।

    सर्जरी:

    सर्जरी के लिए तय किए गए डेट से कम-से-कम 2 सप्ताह पहले चॉकलेट लेना बंद कर दें।

    साइड इफेक्ट्स

    चॉकलेट के क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

    इसके बहुतेरे साइड इफैक्ट्स हैं, जैसे:

    • सिरदर्द, माइग्रेन, जलन, घबराहट, चिंता और चक्कर आना।
    • मुंहासे, त्वचा की एलर्जी के रिएक्शंस
    • गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल डिसऑर्डर
    • बोन डेंसिटी में कमी, दांतों का खराब होना, एक्जिमा
    • कोलेस्ट्रॉल के लेवल में बढ़ोतरी
    • इंसुलिन सेंसटिविटी में सुधार और इंसुलिन के लेवल में बढ़त
    • इरेगुलर हार्ट रिदम, यूरिन में ऑक्सलेट का लेवल बढ़ जाता है
    • चिड़चिड़ापन, घबराहट, किडनी डिसऑर्डर
    • गर्दन में दर्द, घबराहट, शैकिनेस, नींद की गड़बड़ी
    • त्वचा में सूजन

    जरूरी नहीं कि इसका इस्तेमाल करने वाले हर लोग इन साइड इफेक्ट्स का अनुभव करें। कुछ साइड इफेक्ट्स हमारी लिस्ट में नहीं भी हो सकते हैं। साइड इफेक्ट्स यदि आप की चिंता का सबब बना हुआ है तो कृपया अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर से परामर्श करें।

    प्रभाव

    चॉकलेट का हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

    आप कौन सी दवाइयां ले रहे हैं या आपकी मेडिकल कंडीशन क्या है इस बात पर निर्भर करता है कि आप चॉकलेट का इस्तेमाल करें या नहीं?

    इसलिए चॉकलेट के इस्तेमाल से पहले अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर्स से सलाह लें।

    चॉकलेट इन चीजों पर अपना असर दिखा सकता है:

    • एस्पिरिन, एंटीकोआगुलंट्स (ब्लड थिनर्स) जैसे कि वारफारिन (कौमेडिन) या हेपरिन, एंटी-प्लेटलेट ड्रग्स जैसे क्लोपिडोग्रेल (प्लाविक्स), और नॉन-स्टेरोइडल एंटी-इंफ्लामेटरी ड्रग्स (NSAIDs) दवाएं जैसे इबुप्रोफेन (मोट्रिन, एडविल) या नेप्रोक्सन (नैप्रोसिन, एलेवे)
    • एक्टिव चारकोल, हड्डियों के नुकसान के लिए एजेंट, दांतों के लिए एजेंट, एजेंट जो ब्लड वेसल्स की चौड़ाई को इफेक्ट करते हैं
    • ऐसे एजेंट जो मानसिक कार्य को इफेक्ट करते हैं, एजेंट जो हृदय को इफेक्ट करते हैं (हार्ट की रिदम के साथ), एजेंट जो इम्यून सिस्टम को इफेक्ट करते हैं, एजेंट जो नर्वस सिस्टम को प्रभावित करते हैं, एजेंट जो पेट और आंतों को प्रभावित करते हैं, एजेंट जो लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं, एंजियोटेंसिन-कन्वर्टिंग एंजाइम ( ऐस), एंटी-ऑक्सिडेंट एजेंट, एंटीकैंसर एजेंट, एस्पिरिन
    • एंटीडिप्रेसेंट्स (सेलेक्टिव सेरोटोनिन री पटेक इनहिबिटर, SSRIs), एंटी इंफ्लेमेटरी एजेंट, कैल्शियम लवण, कैनबिनोइड्स (मैरूवाना में मौजूद), कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले तत्व, फर्टिलिटी एजेंट, गामा-एमिनोब्यूट्रिक एसिड (GABA), आयरन एसिड, दर्द निवारक, सालबुटामोल और सनस्क्रीन।

    डोसेज

    चॉकलेट के लिए सामान्य खुराक क्या है?

    यहां दी हुई जानकारियों का इस्तेमाल डॉक्टरी सलाह के विकल्प के रूप में न करें। डॉक्टर या हर्बलिस्ट की राय के बिना इस दवा का इस्तेमाल नहीं करें।

    • प्रेग्नेंसी के दौरान: गर्भकाल से लेकर डिलीवरी तक हर दिन 30 ग्राम चॉकलेट, 13 हफ्ते तक ले सकते हैं।
    • एग्जायटी के लिए: 20-25 ग्राम चॉकलेट रोजाना दो बार दो से पांच दिनों के अंतराल पर लिया जा सकता है।
    • हृदय रोग के लिए: 13.5-80 ग्राम चॉकलेट को रोजाना सिंगल डोज के रूप में लिया जा सकता है। या फिर दिन में 1-3 बार दो से 26 सप्ताह से अधिक दिनों तक।
    • सिरोसिस के लिए: 200 एमएल प्रति किलोग्राम डार्क चॉकलेट के साथ 200 एमएल टेस्ट फूड को एक खुराक के रूप में लिया जा सकता है।
    • हाई ब्लड शुगर के लिए: रोजाना ओरली 100 ग्राम चॉकलेट बार या कोको पेय के रूप में पांच दिन से 18 सप्ताह तक ली जा सकती है।

    इस हर्बल सप्लीमेंट की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और कई अन्य कंडीशंस पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लीमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। कृपया अपने उचित खुराक के लिए अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    Dr. Shruthi Shridhar


    Nikhil Kumar द्वारा लिखित · अपडेटेड 21/07/2020

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