बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले इन बातों को जानना है जरूरी

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जुलाई 16, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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फिट एंड फाइन रहने के लिए हेल्दी फूड और वर्कआउट करना बेहद जरूरी माना जाता है। जैसे ही सेहत की बात आती है, तो हम सभी एक दूसरे को यही सलाह देते हैं कि दूध, दही, फल, हरी सब्जियों का सेवन करें, वॉकिंग या स्विमिंग करें। सेहतमंद रहने के लिए यह जरूरी भी है, लेकिन इन सभी देखरेख के साथ-साथ अच्छी हेल्थ के लिए इंश्योरेंस लेना भी बेहद जरूरी है। आज इस आर्टिकल में बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस लेने के क्या फायदे हैं?  बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले किन-किन बातों को समझना बेहद जरूरी होता है? ऐसे ही कई अन्य सवालों को समझेंगे, लेकिन सबसे पहले जानते हैं इंश्योरेंस या बीमा क्या है?

हेल्थ इंश्योरेंस या स्वास्थ्य बीमा क्या है?

हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लेने से बीमारी में होने वाले खर्च से बचा जा सकता है। दरअसल हेल्थ इंश्योरेंस भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना या बीमारी के बेहतर इलाज में सहायक होता है।

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बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस देखा जाए तो बेहद जरूरी है। अगर आप किसी भी कारण से हेल्थ पॉलिसी लेने से चूक गए हैं, तो आप बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं। बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस किसी सहारे से कम नहीं है। बढ़ती उम्र के साथ-साथ कई बीमारियां दस्तक दे देती हैं। देखा जाए तो बढ़ती मंहगाई, इलाज का खर्च और अन्य खर्च की वजह से तनाव भी घर करने लगता है। इसलिए बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस काफी फायदे का सौदा हो सकता है, साथ ही आपकी टेंशन को भी कम करने में सहायक होता है। अगर आपकी उम्र 60 साल से ज्यादा है, तो भी बीमा कंपनियां बीमा देती हैं। बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस लेने से तकरीबन 50 प्रतिशत तक लाभ मिल सकता है। इसका अर्थ यह है कि बीमारी में खर्च होने वाली कुल राशि से आधा।

बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस सभी प्रकार के चिकित्सा खर्चों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं। वरिष्ठ नागरिकों के सेहत से जुड़ी बढ़ती परेशानी और मंथली या सालाना आय को देखकर लिए जा सकते हैं। बीमा फीस छह महीने या साल में एक बार देनी होती है।

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बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस: क्या होता है कवर?

बुजुर्ग व्यक्तियों की हेल्थ पॉलिसी में बीमारी, दुर्घटना, चोट लगना, एम्बुलेंस का खर्च आदि कवर होते हैं। अगर बुजुर्ग व्यक्ति को अस्पताल में 60 दिनों तक एडमिट रहना पड़ता है, तो ऐसी स्थिति में हेल्थ इंश्योरेंस बेहद मददगार होते हैं। एलोपैथ इलाज के अलावा रजिस्टर्ड आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक या यूनानी अस्पताल में किए जाने वाले इलाज भी बीमा कवर के अंतर्गत आते हैं।

बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस: बीमा के अंतर्गत क्या नहीं आता है?

हेल्थ इंश्योरेंस लेने के बाद अगर आपको पहले से ही (पिछले 30 दिनों में) कोई बीमारी थी, तो ऐसी स्थिति में बीमा का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके साथ ही वृद्ध व्यक्ति का इन 30 दिनों में एक्सीडेंट, डेंटल ट्रीटमेंट या कॉस्मेटिक सर्जरी होने पर बीमा का लाभ नहीं मिल पाता है।

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बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस के क्या-क्या फायदे हैं?

बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस के निम्नलिखित फायदे मिल सकते हैं। जैसे:-

अपने माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस को गिफ्ट की तरह भी दे सकते हैं, जो उनके लिए यह सहारे से कम नहीं होगा। यहां एक और सहारे का अर्थ है कि पहला सहारा बुजुर्ग माता-पिता के बेटे या बेटी और दूसरा हेल्थ पॉलिसी। पेरेंट्स के लिए खरीदे गए हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर 50 हजार रुपए की टैक्स छूट भी मिलती है।

अस्पताल में होने वाले खर्चों से हम सभी परिचित हैं। अचानक आए ऐसे खर्च से बचने के लिए बुढ़ापे में हेल्थ बीमा बुजुर्गों के इलाज के लाभकारी होने के साथ ही घर के बड़े सदस्य या कमाने वाले व्यक्ति के जेब पर कम बोझ डालता है। दरअसल सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस खरीदकर अस्पताल के बिलों की वजह से अचानक से बिगड़ने वाले बजट या परेशानी से बचा जा सकता है।

मेडिकल ट्रीटमेंट के दौरान होने वाले खर्च सीमित नहीं रहते हैं। बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस के साथ आपको कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा भी मिल सकती है। कैशलेस ट्रीटमेंट के टर्म और कंडीशन को जरूर समझना चाहिए। क्योंकि कैशलेश ट्रीटमेंट के नियम अलग होते हैं और अलग-अलग कंपनियां इसके लिए अलग-अलग प्रावधान देती हैं।

भारत में ज्यादातर बीमा कंपनियों ने अभी तक बुढ़ापे में हेल्थ बीमा लेने के लिए सिर्फ 65 वर्ष की आयु ही सीमित रखी है। इसका अर्थ यह है की अगर किसी व्यक्ति की उम्र 65 साल से ज्यादा है, तो वे पॉलिसी नहीं ले सकते हैं। हालांकि, भारतीय बीमा विनियामक विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने हाल ही में बीमा कंपनियों को बुजुर्गों के लिए हेल्थ पॉलिसी की आयु को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस लें या कभी भी पॉलिसी लेने या खरीदने के पहले इसकी पूरी-पूरी जानकारी इससे जुड़े विशेषज्ञों से लें। पॉलिसी के टर्म और कंडीशन को समझें और फिर पॉलिसी का चयन करें।

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बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले कौन से सवाल बीमा कंपनी से करने चाहिए?

निम्नलिखित सवाल बीमा एक्सपर्ट से जरूर पूछें। इन सवालों में शामिल है:

  1. हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में हेल्थ उपकरण को कवर किया जाता है?
  2. बुढ़ापे में हेल्थ इंश्योरेंस लेने पर कितनी रकम का हेल्थ इंश्योरेंस लेना बेहतर होगा?
  3. जो बीमा पॉलिसी आप खरीदने जा रहे हैं उसमें मौजूद बीमारियां कवर होंगी या नहीं?
  4. बुढ़ापे में हेल्थ बीमा अगर आप खरीद रहें हैं तो को-पेमेंट फीचर की जानकारी लें। क्योंकि इससे प्रीमियम को कम किया जा सकता है।

इन चार सवालों के साथ-साथ अगर कोई अन्य सवाल आपके मन हैं तो उसकी जानकारी पॉलिसी एक्सपर्ट से अवश्य लें।

यह भी पढ़ें: बुजुर्गों की देखभाल के लिए चुन सकते हैं ये विकल्प भी

हेल्थ पॉलिसी लेने से पहले 2 से 3 कंपनियों के प्लान और कवर को समझें। पॉलिसी में क्या शामिल है और क्या नहीं इसकी जानकारी लें। यह ध्यान रखें कि सिर्फ प्रीमियम को देखकर पॉलिसी न लें। टर्म और कंडीशन को अच्छी तरह से समझें। सिर्फ किसी के कहने से हेल्थ पॉलिसी न लें। बुढ़ापे में हेल्थ बीमा ले रहें हो, मैटरनिटी बीमा या कोई अन्य हेल्थ पॉलिसी लेने में जल्दबाजी न करें। क्योंकि 60 साल की आयु के बाद हेल्थ पॉलिसी में कई बीमारी कवर नहीं भी हो सकती।

अगर आप बुढ़ापे में हेल्थ बीमा से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल जानना चाहते हैं तो इंश्योरेंस एक्सपर्ट और स्वास्थ्य विशेषज्ञों से समझना और सलाह लेना बेहतर होगा। हमें उम्मीद है आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में बुढ़ापे में हेल्थ बींमा से जुड़ी जानकारी दी गई है। यदि इस लेख को लेकर आपका कोई प्रश्न है तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं।

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