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टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को कैसे रोका जा सकता है?

टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को कैसे रोका जा सकता है?

डिप्रेशन दुनिया भर में विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। ये खुदुकुशी को बढ़ावा देने वाला डिप्रेशन किशोरों और युवाओं की मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। अमेरिका में डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन सेंटर के अनुसार 10 से 24 वर्ष के आयु के लोगों में तीसरा सबसे बड़ा कारण आत्महत्या है। जानकर आपको हैरानी होगी कि हर साल लगभग 46000 लोग सुसाइड करते हैं। हमें टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए।

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टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को पहचानें

  • डिप्रेशन (depression) की प्रारंभिक चेतावनी देने वाले संकेतों की पहचान से टीनएजर्स में खुदकुशी को रोका जा सकता है। इन लक्षणों में लगातार उदास रहना, किसी चीज में दिलचस्पी न लेना, बोरियत और बेचैनी महसूस करना, ऊर्जा में कमी होना, किसी काम में मन न लगना, खुशियों की ओर कोई ध्यान न देना और दूसरे लोगों से बातचीत करने में कोई रुचि न होना शामिल है।
  • कई अन्य जैविक बदलाव जैंसी नींद न आना और बहुत ज्यादा नींद आना, भूख कम लगना या बहुत ज्यादा खाना, शरीर के वजन का लगातार घटना या बढ़ना भी डिप्रेशन के लक्षणों में शामिल है।
  • अगर इंसान कुछ दिन से काफी उदास है या अकेला रहना पसंद करने लगा है तो आप सावधान हो जाएं। ऐसा संभव है कि उसके मन में खुदखुशी के विचार आ रहे हो। बच्चे की उदासी और समस्या को समझने की कोशिश करें। हो सकता है वह अवसाद का शिकार हो रहा हो। इससे आत्महत्या के विचार बढ़ सकते हैं। इसलिए, जरूरी है कि आप अवसाद के लक्षण और उसे दूर करने के उपायों को समझें।

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टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार के चेतावनी संकेत क्या हैं?

युवाओं में सुसाइड टेंडेंसी के कई चेतावनी संकेत मिलते हैं। इन पर ध्यान देना जरूरी है। जैसे-

  • गतिविधियों जो उसे पहले अच्छी लगती थी उनमें अचानक अरुचि का पैदा होना
  • परिवार के सदस्यों और दोस्तों से अलग-थलग रहना
  • शराब या ड्रग्स का सेवन
  • अनावश्यक जोखिम लेना जैसे-रोड क्रॉस करते समय सावधानी न रखना
  • खुद की उपेक्षा करना
  • प्रशंसा की प्रतिक्रिया का अभाव
  • मौत या आत्महत्या के बारे में बात करना
  • ध्यान केंद्रित करने में समस्याएं आदि।

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ध्यान रखें कि हर टीनएजर में आत्महत्या के संकेत अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ युवाओं की इन स्थितियों के बारे में आसानी से पता लगाया जा सकता है, जबकि कुछ युवा अपनी सिचुएशन के बारे में कोई बात नहीं करते हैं। ज्यादातर मामलों में टीनएजर्स अपनी फीलिंग्स और इमोशंस को किसी से शेयर नहीं करते हैं।

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टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को रोकने के लिए अपनाएं ये टिप्स

  • पेरेंट्स और टीचर्स को टीएनजर्स से लगातार खुलकर बातचीत करनी चाहिए। हमें उनको बदलाव को स्वीकार करने की शिक्षा देने और चुनौतियों से पार पाने का तरीका सिखाना चाहिए।
  • हमें उन्हें बताना चाहिए कि अगर उन्हें उनके मनपसंद कॉलेज में दाखिला न मिला या उन्हें अपनी उम्मीदों के अनुसार इम्तहान में नंबर नहीं मिले तो भी उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें बताइए कि यह उनके लिए दुनिया का अंत नहीं है।
  • टीनएजर्स से उनकी पसंद, उनके रूटीन, दिलचस्पी, दोस्तों और पढ़ाई के अलावा खेलकूद और दूसरी गतिविधियों के बारे में बात करना और उन्हें उसी रूप में स्वीकार करना, जिस रूप में वह हैं, वह साधन हैं, जिससे टीनएजर्स को हर हालात में अपने को ढालने में सक्षम बनाया जा सकता है।
  • टीनएजर्स को जिंदगी जीने की कला के साथ यह भी सिखाना चाहिए कि अकेलेपन की हालत में वह अपनी सारी बातें किसी करीबी वयस्क व्यक्ति को बता सकते हैं। इससे उन्हें उचित मार्गदर्शन मिलेगा।
  • उम्र बढ़ने के साथ-साथ कई शारीरिक, भावनात्मक, दिमागी और आनुवांशिक बदलाव आते हैं। हालांकि, टीनएजर्स की तर्क करने की शक्ति अभी विकसित हो रही होती है, लेकिन उनके दिमाग के अन्य हिस्से काफी विकसित होते हैं, जो उन्हें काफी तेजी से कोई फैसला करने में सक्षम बनाते हैं। टीनएजर्स के करीबी और विश्वसनीय इन व्यक्तियों में माता-पिता में से कोई एक व्यक्ति, शिक्षक, रिश्तेदार या स्कूल काउंसलर हो सकता है।
  • अगर संभव है तो उन चीजों को हटा दें जिनका इस्तेमाल करके आत्महत्या का विचार रखने वाला युवा खुद को चोट पहुंचाने के लिए कर सकता है।
  • टीएनजर्स में डिप्रेशन पैदा करने के जोखिम के कारकों में छेड़ना, उनका मजाक बनाना, मादक पदार्थों का सेवन, परिवार से सहारा न मिलना, आत्मसम्मान में कमी, शारीरिक उत्पीड़न, पढ़ाई में खराब प्रदर्शन, आर्थिक चिंताएं, पुरानी बीमारी और जेनेटिक कारक शामिल हैं। इसलिए टीनएजर्स को लचीला और मजबूत बनाकर बनाकर डिप्रेशन और सुसाइड रोकने में मदद मिल सकती है।
  • आत्महत्या के विचार रखने वाले युवा या बहुत ज्यादा उदास इंसान खुद की हेल्प करने में सक्षम नहीं होता है। ऐसे में अगर वह डॉक्टर या मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल से सलाह नहीं लेना चाहता है, तो उसे क्राइसिस सेंटर या हेल्प ग्रुप की मदद लेने की सलाह दें।
  • डिप्रेशन को रोकने में आखिरी, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण कारक आध्यात्मिकता है। आध्यात्म के प्रति झुकाव होने से टीएनजर्स के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

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ये छोटी-छोटी बातें मददगार साबित होंगी

लाइफस्टाइल में कुछ चेंजेस करके टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को कम किया जा सकता है। जैसे-

  • युवाओं को एल्कोहॉल और मादक पदार्थों के उपयोग से बचना चाहिए। ये घातक साबित हो सकते हैं क्योंकि ये नशीले पदार्थ सुसाइड टेंडेंसी को बढ़ावा दे सकते हैं।अगर रोजाना संभव न हो पा तो हफ्ते में कम से कम तीन बार तो जरूर व्यायाम करें। फिजिकल एक्टिविटीज को बढ़ाने से दिमाग में अच्छे केमिकल्स रिलीज होते हैं जो आपको खुश रखने में मददगार साबित होते हैं।
  • नींद कम लेना टीनएजर्स में आत्महत्या के विचार को बढ़ावा दे सकता है। इसलिए, युवाओं को कम से कम छह से आठ घंटे की नींद लेना जरूरी है। अगर आप इंसोम्निया या नींद की अन्य बीमारी से जूझ रहे हैं तो डॉक्टर से इस बारे में बात करें।
  • यदि मन में आत्महत्या के विचार आते हैं तो इसके बारे में जरूरी है किसी से बात करना। अगर आप किसी अपने से बात नहीं कर सकते हैं तो ऐसे कई संगठन और हेल्प ग्रुप हैं जो आपकी सहायता कर सकते हैं। उनसे बात करें।

आइए, हम सब मिलकर जागरूकता जगाएं। एक लचीले और सद्भावपूर्ण समाज का निर्माण करें और टीएनजर्स को जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करें।

डिस्क्लेमर

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

Current Version

09/07/2020

Written by डॉ. हिमानी खन्ना

Updated by: Niharika Jaiswal


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Written by

डॉ. हिमानी खन्ना

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अपडेटेड 09/07/2020

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