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जानिए अवसाद के लक्षण और इसके क्या हैं उपाय?

जानिए अवसाद के लक्षण और इसके क्या हैं उपाय?

डिप्रेशन (अवसाद) एक ऐसी मानसिक परेशानी है, जिसका अगर वक्त रहते पता न चले तो यह स्थिति अत्यधिक गंभीर हो सकती है। आजकल अवसाद (Depression) की बीमारी बढ़ते जा रही गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के रिपोर्ट के अनुसार भारत में डिप्रेस्सेड लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है। भारत की कुल जनसंख्या में 6.5 प्रतिशत लोग डिप्रेशन के शिकार हैं। डब्लूएचओ की रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि साल 2020 तक ये संख्या बढ़कर 20 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में अवसाद के लक्षण और उपाय समझना बेहद जरूरी है।

बदलते लाइफस्टाइल के साथ-साथ वर्क कल्चर में भी बदलाव आया है लेकिन, भारत में बदलते दौर के नाम पर बदलाव महज खाने-पीने और रहन-सहन को लेकर है। भारत में आज भी बड़ी बीमारियों की चर्चा खूब होती है लेकिन, जैसे ही डिप्रेशन का नाम आता है लोग इस पर खुलकर बात करना नहीं चाहते हैं। बिडंबना ये है कि भारत में डिप्रेशन का मतलब पागलपन भी समझा जाता है। वहीं दूसरे देशों में डिप्रेशन पर लोग खुलकर बात करते हैं।

डिप्रेशन का सामना महिला और पुरुष दोनों को करना पड़ता है। इसकी वजह अलग—अलग हो सकती हैं। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन के एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई है कि ज्यादा देर तक काम करने (लॉन्ग वर्किंग ऑवर) की वजह से भी महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या शुरू हो जाती है। कई बार मरीज को पता ही नहीं चल पाता कि वह डिप्रेशन का शिकार है। यहां हम डिप्रेशन के लक्षण और उपाय बता रहे हैं, जिनसे पता लगाया जा सकता है कि आप ​डिप्रेशन के शिकार हैं या नहीं।

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वर्कप्लेस स्ट्रेस-workplace stress

अवसाद के लक्षण और उपाय क्या हैं?

अवसाद के लक्षण कई तरह के हो सकते हैं। दरअसल अवसाद होने के कई प्रकार के कारण होते हैं। उन्ही के आधार पर उनका इलाज भी किया जाता है। जिस कारण से व्यक्ति को अवसाद हुआ रहता है, उसके लक्षण भी उसी से जुड़े हुए होते हैं। डॉक्टर सबसे पहले व्यक्ति के लक्षण जानकर उसके अवसाद का निदान करता है। इसके बाद ही वह इसके उपचार का तरीका बताता है। आम तौर पर अवसाद के इलाज के लिए कुछ ओवर द काउंटर दवाएं और कुछ थेरेपी भी कराई जाती है। आइए जानते हैं, सबसे पहले अवसाद के लक्षण क्या हैं? इसके पश्चात् जानेंगे अवसाद से छुटकारा पाने के उपाय क्या हैं?

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अवसाद के लक्षण क्या हैं?

अवसाद के लक्षण 1. थकान (कमजोरी) महसूस करना – संतुलित आहार लेने के बाद भी हमेशा कमजोरी महसूस करना। दिमाग और शरीर का सुस्त रहना। किसी से बात नहीं करना और लोगों से मिलना जुलना पसंद नहीं करना।

अवसाद के लक्षण 2. अनिंद्रा – नींद नहीं आना। यह अवसाद के शिकार हुए व्यक्ति में सबसे ज्यादा नजर आने वाली परेशानी है। नींद न आने की स्थिति कई शारीरिक परेशानी भी शुरू हो सकती है और डिप्रेशन की समस्या बढ़ सकती है।

अवसाद के लक्षण 3. भूख नहीं लगना- डिप्रेशन की वजह से भूख नहीं लगती है या फिर ज्यादा भूख भी लग सकती है। अवसाद के लक्षण में काफी आसानी से समझा जा सकता है।

अवसाद के लक्षण 4. अच्छा महसूस नहीं करना – ऐसे वक्त में व्यक्ति चिड़चिड़ाहट, घबराहट या फिर किसी न किसी बात को लेकर अक्सर चिंता में रह सकता है। दरअसल इस तरह की चिंता डिप्रेशन के लक्षणों में से एक है।

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अवसाद के लक्षण 5. कॉन्सन्ट्रेट नहीं कर पाना– ऑफिस, घर या किसी अन्य काम में फोकस नहीं कर पाना। डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति किसी भी काम को करने में असमर्थ होते हैं।

अवसाद के लक्षण 6. नकारात्मक सोच- अवसाद के लक्षण में शामिल है नकारात्मक सोच। परिस्थिति कैसी भी हो, लेकिन हर वक्त नेगेटिव सोचना और अपने आपको अकेला महसूस करना इसका प्रमुख लक्षण है।

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डिप्रेशन के कारण

कई बार ऐसा देखा गया है कि व्यक्ति ज्यादा नशा करने लगता है। जो डिप्रेशन का कारण बनता है। फैमिली हिस्ट्री : यदि आपके परिवार में किसी को अवसाद हुआ हो या कोई अन्य मनोदशा विकार हुआ हो तो इससे आपमें भी अवसाद होने की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि ये आपको अपने पूर्वजों से मिलता है। बचपन की किसी घटना की वजह से शरीर में बैठे डर और तनावपूर्ण स्थिति के कारण भी आपको अवसाद हो सकता है।

अगर ऐसे लक्षण आप में या आपके किसी करीबी में हैं, तो उनसे बात करें और उनकी परेशानी समझने की कोशिश करें। अगर अवसाद के लक्षण नजर आ रहे हैं, तो इस नजरअंदाज न करें। डिप्रेशन को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है, क्योंकि कभी-कभी लोग इतने डिप्रेस्ड हो जाते हैं कि वे आत्महत्या भी कर लेते हैं।

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धूम्रपान छोड़ने से अवसाद/depression after quit smoking

डिप्रेशन (Depression) दूर करने के उपाय क्या हैं?

अवसाद एक जटिल समस्या मानी जाती है। इसमें व्यक्ति अपना जीवन एक अंधकार में व्यतीत करता रहता है। अवसाद को दूर करने के लिए निम्नलिखित उपाय हैं। जैसे-

  • खुलकर बात करें – अपनी किसी भी परेशानी के बारे में खुलकर अपने करीबियों या दोस्तों से बात करें। कोई भी बात अपने मन में छुपाकर न रखें। अगर आप किसी से खुलकर बात नहीं करेंगे तो आपकी परेशानी कम होने की बजाये और बढ़ सकती है।
  • योग करें- हम सभी जानते हैं, योग हर चीज का इलाज करने का एक सफल तरीका है। नियमित रूप से योग करने की कोशिश करें। शुरुआत 10 मिनट से भी किया जा सकता है। अगर आप पहली बार योगा करने की सोच रहें हैं, तो योगा एक्सपर्ट से सलाह ले और फिर योगा नियमित रूप से करें।
  • पूरी नींद लें- रोजाना 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लें। अच्छी नींद (साउंड स्लीप) आपको कोई भी मानसिक या शारीरिक परेशानी को दूर करने के लिए सबसे बेहतर तरीका है। अगर आपको नींद आने में परेशानी होती है, तो परेशानी को दूर करें और नियमित रूप से सोने का समय तय करें और उसी वक्त पर रोजाना सोने की आदत डालें।
  • व्यस्त रहें- अपने आपको व्यस्त रखें। कुछ ऐसे काम भी जरूर करें जो आपको पसंद हो। दरअसल अवसाद या डिप्रेशन जैसे बीमारी तब शुरू होती है जब आप बिना वजह किसी बारे में ज्यादा सोचते हैं। इसलिए अपने आपको व्यस्त रखें और खुश रहें। किसी की बातों पर ध्यान न दें जिसका आप पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हो।
  • गोल सेट करें : डिप्रेशन में होने पर हो सकता है कि आपको सब काम अधूरे से लगने लगें। इससे आपको अपने बारे में सबसे बुरा महसूस हो सकता है। खुद को पीछे खींचने के लिए अपने लिए कोई गोल सेट करें।
    किसी छोटे काम से शुरुआत करें जैसे खाना बनाना या बागवानी में मन लगाना। जब आप अपना ध्यान बंटाना शुरू करेंगे तो धीरे धीरे आपको अच्छा महसूस होने लगेगा। आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कोई चुनौतीपूर्ण गोल भी शामिल कर सकते हैं।
  • मेडिटेशन : सांस पर ध्यान केंद्रित करने से मन साफ होता है और दिमाग को शांति एवं स्थिरता मिलती है। इस क्रिया को मेडिटेशन कहते हैं। रोज मेडिटेशन करने से स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

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  • पौष्टिक आहार लें- अवसद के लक्षण में भी यह बताया गया की डिप्रेशन की वजह से लोगों को भूख नहीं लगती है। हालांकि इस दौरान खाने-पीने का विशेष ध्यान रखें। खाने में हरी सब्जियों के साथ फलों को भी शामिल करें
  • डॉक्टर से सलाह लें- खुद को फि​ट रखने के लिए सबसे जरूरी है आप अपनी समस्या अपने आप में हो रहे बदलाव के बारे में मनोचिकित्सक को बताएं।
  • अच्छी सोच रखें- हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार कई बार व्यक्ति नकारात्मक सोच की वजह से भी डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। इसलिए स्टूडेंट, वर्किंग मेन, वर्किंग वीमेन, हाउस वाइफ या कोई भी व्यक्ति क्यों न हो हर परिस्थिति में अपनी सोच सही रखें और मन में नेगेटिव विचार न आने दें। वैसे लोगों से भी दूर रहें जो अत्यधिक नकारात्मक सोच रखते हों
  • एक्सरसाइज : एक्सरसाइज से कुछ समय के लिए शरीर में अच्छा फील करने वाले एंडोर्फिन नामक केमिकल रिलीज होता है। डिप्रेशन से ग्रस्त व्यक्ति को इससे अच्छे लाभ मिलते हैं। रोज एक्सरसाइज करने से दिमाग तरोताजा और पॉजिटिव बनता है। कुछ कदम पैदल चलने से भी लाभ हो सकता है।
  • सप्लीमेंट्स : कुछ सप्लीमेंट्स डिप्रेशन को कम करने में मदद कर सकते हैं। फिश ऑयल, फोलिक एसिड जैसे सपलीमेंट इसमें शामिल हैं। हालांकि, किसी भी सप्लीमेंट का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना ना करें। अगर पहले से ही कोई दवा ले रहे हैं तो सोच-समझकर सप्लीमेंट्स लें।
  • दवा-डिप्रेशन की परेशानी को कम करने के लिए दवा भी प्रिस्क्राइब की जा सकती है

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जिस तरह किसी भी बीमारी से निजात पाई जा सकती है ठीक वैसे ही अवसाद से भी निकला जा सकता है। इसके लिए आपको खुद की मदद करनी होगी और दोस्तों और रिश्तेदारों का सहारा लेना होगा। दी​पिका पादुकोण जैसी सेलिब्रिटीज भी डिप्रेशन से लड़कर बाहर निकली हैं। अगर आप डिप्रेशन या डिप्रेशन के लक्षण और उपाय से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Depression (major depressive disorder)/https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/depression/symptoms-causes/syc-20356007/ Accessed on 10/12/2019

Depression Symptoms and Warning Signs/https://www.helpguide.org/articles/depression/depression-symptoms-and-warning-signs.htm/ Accessed on 10/12/2019

Depression/https://www.nimh.nih.gov/health/topics/depression/index.shtml/ Accessed on 10/12/2019

Depression – https://adaa.org/understanding-anxiety/depression  / Accessed on 10/12/2019

Suicide and self-inflicted injury – https://www.cdc.gov/nchs/fastats/suicide.htm / Accessed on 10/12/2019

लेखक की तस्वीर
Dr. Pooja Bhardwaj के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nidhi Sinha द्वारा लिखित
अपडेटेड 04/07/2019
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