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डिप्रेशन ही नहीं ये भी बन सकते हैं आत्महत्या के कारण, ऐसे बचाएं किसी को आत्महत्या करने से

डिप्रेशन ही नहीं ये भी बन सकते हैं आत्महत्या के कारण, ऐसे बचाएं किसी को आत्महत्या करने से

आत्महत्या का किसी व्यक्ति विशेष से कोई संबंध नहीं है। आए दिन आप ऐसी खबरें पढ़ते-देखते होंगे कि परिवार के सदस्यों ने सामूहिक रूप से सुइसाइड कर लिया या फिर किसी व्यक्ति ने आत्महत्या करने का प्रयास किया। जानते हैं इस लेख में कि आत्महत्या के कारण क्या हैं और ऐसी गंभीर समस्या का समाधान क्या है?

आत्महत्या से पहले व्यक्ति में क्या लक्षण दिखाई देते हैं?

चेतावनी के ये संकेत बताते हैं कि एक व्यक्ति गंभीर खतरे में हो सकता है और उसे तत्काल मदद की आवश्यकता है।

  • मरने या खुद को मारने की इच्छा के बारे में बात करना
  • खुद को मारने का रास्ता खोजना
  • निराशाजनक या बिना किसी उद्देश्य के जीने की बात करना
  • दूसरों पर बोझ होने की बात करना
  • शराब या ड्रग्स का उपयोग बढ़ाना
  • चिंतित, उत्तेजित या लापरवाह होना
  • बहुत कम या बहुत अधिक सोना
  • अलग-थलग महसूस करना
  • अत्यधिक गुस्सा करना या बदला लेने की बात करना
  • हद से ज्यादा मूड स्विंग्स होना

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आत्महत्या के कारण

सुइसाइड करने के कारण व्यक्तिगत, सामजिक या आर्थिक हो सकते हैं। नीचे कुछ मुख्य आत्महत्या के कारण बताए गए हैं। जैसे-

डिप्रेशन (depression)

इसका सबसे बड़ा कारण अवसाद (डिप्रेशन) है। आज कल की भागदौड की जिंदगी में इंसान को इंसान से कमियों और खूबियों से तौला जाना इसका प्रमुख कारण है। व्यक्ति को उसके इच्छा के अनुरूप चीजें नही मिलती, तब वह डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। अगर सही समय पर इसका इलाज ना हुआ तो यह डिप्रेशन इतना बढ़ जाता है कि इसका परिणाम आत्महत्या भी हो सकता है। अवसाद की यह स्थिति आत्महत्या के कारणों में से एक है।

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अत्यधिक नशा करना

किशोरों में आत्महत्या के कारण के रूप में नशीले पदार्थों का उपयोग भी शामिल है। साथ ही साथ अन्य किसी ड्रग की लत होना जैसे हेरोइन, कोकीन, मेथाम्फेटामाइन, ओपिओइड्स (ऑक्सिकोडन, हाइड्रोकोडन, मोर्फिन और मेथाडन आदि) व अन्य नशीले पदार्थ। जब लोग शराब या ड्रग्स का सेवन कर लेते हैं तो वे और अधिक आवेगशील हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे बिना सोचे समझें ही खुदकुशी करने का प्रयास कर सकते हैं। दुर्भाग्य से अक्सर नशे के दौरान ही अधिकतर खुदकुशी करने के प्रयास किए जाते हैं।

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मानसिक विकार आत्महत्या के कारण में से एक

आमतौर पर लोग मानसिक बीमारी को शर्मनाक मानते हैं। किसी को भी अपनी मेंटल डिजीज के बारे में खुलकर बताते नहीं है जिससे आगे चलकर सही उपचार ना मिल पाने की वजह से यह बीमारी एक गंभीर मेंटल डिसऑर्डर में बदल जाती जो अक्सर आत्महत्या का भी कारण बनती है। डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, मनोविदलता (Schizophrenia) आदि मानसिक विकार सुइसाइड के कारण बनते हैं।

आत्महत्या के कारण : तनाव

सुइसाइड की दरों से स्ट्रेस का स्तर भी जुड़ा हुआ है। जो लोग खुदकुशी करते हैं, उनके शरीर में असाधारण उच्च गतिविधियां और स्ट्रेस हार्मोन पाया जाता है। सेरोटोनिन एक प्रकार का मस्तिष्क का कैमिकल (न्यूरोट्रांसमीटर) होता है, जो मूड, चिंता और आवेगशीलता (Impulsivity) से जुड़ा होता है। खुदकुशी करने वाले व्यक्ति के सेरिब्रोस्पाइनल फ्लूड (CSF) और मस्तिष्क में सेरोटोनिन का स्तर सामान्य से कम पाया जाता है।

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डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपके मन में खुदकुशी करने के विचार आते हैं, तो अपने किसी करीबी दोस्त या प्रिय व्यक्ति के पास पहुंचें। भले ही आपको अपनी भावनाओं के बारे में बात करने में कठिनाई महसूस हो रही हो। अपने डॉक्टर या अन्य हेल्थकेयर प्रोवाइडर से मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लें, वो आपको कुछ दवाओं के सेवन के बारे में भी सजेस्ट कर सकता है। खुदकुशी के विचार आने की समस्या अपने आप ठीक नहीं होती, इसलिए जल्दी से जल्दी मनोरोग चिकित्सक की मदद लें।

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आत्महत्या के आंकड़े

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लुएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, हर वर्ष दुनिया में 800000 लोग आत्महत्या करते हैं। जिसके अनुसार लगभग हर 40 सेकेंड में एक व्यक्ति की मृत्यु होती है।
  • राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार भारत में वर्ष 2005 से 2015 के बीच में आत्महत्या करने वालों में 17.3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
  • विश्व में लगभग एक मिलियन लोग अब तक सुइसाइड कर चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 तक यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी के रुप में सामने आएगा, जिससे लोगों की जान को सबसे ज्यादा खतरा है।
  • वैश्विक स्तर पर 15-29 वर्ष के बच्चों में मृत्यु का दूसरा प्रमुख कारण आत्महत्या है।
    आत्महत्या एक वैश्विक घटना है। 2016 में 79% आत्महत्याएं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हुईं। आत्महत्या के कारण दुनिया भर में होने वाली सभी मौतों का 1.4% है, जो 2016 में मृत्यु का 18 वां प्रमुख कारण बना।

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भारत में आत्महत्या के कारण

भारत में सबसे ज्यादा आत्महत्या करने के लिए जिन तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है उनमें जहर (अक्सर कीटनाशक), फांसी, जलना और डूबना शामिल है। किशोरों में उच्च आत्महत्या दर को ध्यान में रखते हुए, मनोचिकित्सा प्रदान करने का महत्व, घातक साधनों तक पहुंच को प्रतिबंधित करना और सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देना ऐसे विभिन्न तरीके हैं जिनके द्वारा भारतीय किशोरों को आत्महत्याओं से बचाया जा सकता है। माता-पिता अपने बच्चों की किसी और बच्चे के साथ तुलना करते हैं, और बार-बार उन्हें दूसरों से बेहतर करने के लिए दबाव डालते हैं, तो ऐसी बातें बच्चों के बाल-मन पर गहरा प्रभाव डालती हैं। इसलिए बच्चों के साथ प्यार सें पेश आना चाहिए और उनके साथ तुलनात्मक व्यवहार नहीं करना चाहिए।

कोई इंसान अपनी परेशानी के बारे में किसी अपने रिश्तेदार या दोस्त को बताता है और उसकी बातों से यह पता चलता है कि वह आत्महत्या करना चाहता है, तो यह उस इंसान की जिम्मेदारी हो जाती है कि वह उस परिस्थिति को समझें और समय रहते अपने मित्र और रिश्तेदार को किसी मनोचिकित्सक की सलाह लेने को कहे।

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आत्महत्या के कारण ये भी

सुइसाइड करना सार्वजनिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्या दोनों है, और विशेष रूप से किशोरों के बीच, मौतों का एक प्रमुख कारण है। डॉक्टरों की मानें तो ,सुइसाइड एक जटिल विषय है। अशिक्षा आत्महत्या का इसका एक बहुत बड़ा कारण है। लोग अक्सर यह सोचते हैं कि मृत्यु के बाद सारी जिम्मेदारियों से मुक्ति मिल जाएगी, आत्महत्या को ही अंतिम समाधान मान लेते हैं। इसके साथ प्रेम-संबंधों अथवा कोई ऐसा तनाव जिसे व्यक्ति व्यक्त नहीं कर पाता और वह आत्महत्या का कारण बन जाता है। पुरूषों में महिलाओं की तुलना में आत्महत्या के विचार ज्यादा आते हैं, जिसका कारण आमदनी का पर्याप्त ना होना, पारिवारिक कलह अथवा नौकरी का न होना है। महिलाएं अक्सर किसी बात को ना सहने की क्षमता और इमोशनल इंबैलेंस (मानसिक उतार-चढाव) की वजह से आत्महत्या करती हैं। वहीं किशोरावस्था में यह आंकड़ा 50-50 प्रतिशत तक का है।

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इन छोटी-छोटी बातों पर करें अमल

  • आत्महत्या के विचारों से बचने के लिए शारीरिक, मानसिक स्तर पर कुछ सुझावों पर अमल करने की जरूरत होती है। जैसे-
    इसके लिए समय पर सोना और एक निश्चित समय पर उठना जरूरी है।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें और संतुलित पौष्टिक आहार ग्रहण करें।
  • शराब और स्मोकिंग से बचें।
  • परिजनों के साथ वक्त बिताएं। उनके साथ अपनी बातों को साझा करें। इसी तरह अपने प्रियजनों और दोस्तों के लिए भी वक्त निकालें।
  • साथ ही मेडिटेशन और योगा को भी अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
  • कोई हॉबी विकसित करें।
  • संगीत सुनें या फिर खेलकूद से संबंधित गतिविधियों में भाग लें।
  • समस्या के बारे में ज्यादा विचार न करके उसके समाधान के बारे में सोचें। ऐसी सोच से आप समस्या को सकारात्मक तरीके से देखकर उसका समाधान कर सकते हैं।
  • अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता।

इन ऊपर बताई गईं छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर किसी भी नकारात्मक विचारधारा से बचा जा सकता है।

कहां मिलेगी खुशी

दरअसल, ऐसा माना जाता है कि डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को अपनी जिंदगी में सिर्फ परेशानियां ही परेशानियां दिखती हैं। जो कि उसे और निराश और हताश बना देती है। लेकिन हमें यह समझने की जरूरत है कि खुशी हमारे आसपास ही है, बल्कि हमारे खुद के अंदर है। यह सिर्फ हमारे नजरिये पर निर्भर करता है कि हम क्या देख रहे हैं। जीवन में सुख और दुख साथ-साथ चलते रहते हैं, न ही सुख हमेशा रहता है और न ही दुख हमेशा रहता है। इसलिए किसी भी भाव को स्थाई मान लेना गलत है।

इसके अलावा, डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति के जीवन में भी खुशी और आनंद के पल आते हैं, मगर वह उन्हें गले नहीं लगाता। वह भूत में अटका हुआ रहता है। अगर कभी आपको कोई परेशानी लगती है, तो अपने करीबियों से उसको बताएं। बेशक बताने से वह कोई समाधान न निकाल पाएंगे, लेकिन आपके मन का बोझ जरूर हल्का होगा। अगर आप दुखी और परेशान रहने लगते हैं, तो ऐसी चीजों को याद करें जो आपको खुशी दिलाती है। चाहे वह कोई व्यक्ति है, चाहे वह कोई आदत है या फिर कोई काम। हमारा दिमाग हमारे कंट्रोल में होता है, जहां हम लगाना चाहेंगे, वह उसी दिशा में कार्य करेगा।

अगर आप आत्महत्या के कारण से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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WARNING SIGNS OF SUICIDE. https://save.org/about-suicide/warning-signs-risk-factors-protective-factors/. Accessed on 25 Aug 2019

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Smrit Singh द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 17/10/2020 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड