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मोटापे के कारण (Causes of obesity) क्या हो सकते हैं जान लें, सिर्फ ज्यादा खाने से ही नहीं बढ़ता वजन

    मोटापे के कारण (Causes of obesity) क्या हो सकते हैं जान लें, सिर्फ ज्यादा खाने से ही नहीं बढ़ता वजन

    मोटापा विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। यह कई रिलेटेड कंडिशन्स से जुड़ी हुई है जिसे एक साथ मेटाबॉलिक सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है। जिसमें हाय ब्लड प्रेशर, बड़ा हुआ ब्लड शुगर और पुअर ब्लड लिपिड प्रोफाइल शामिल है। मेटाबॉलिक सिंड्रोम की वजह से उन लोगों की तुलना में जिनका वेट नॉर्मल है की तुलना में टाइप 2 डायबिटीज और हार्ट डिजीज होने का खतरा बढ़ जाता है। पिछले कुछ सालों में मोटापे के कारण (Causes of obesity) और इसके बचाव के उपाय पर कई रिसर्च की गई हैं। इस लेख में मोटापे के कारण और उनके उपायों के बारे में जानकारी दी जा रही है।

    मोटापा और इच्छाशक्ति (Obesity and willpower)

    कई लोग ऐसा सोचते हैं कि वजन बढ़ना और मोटापा इच्छाशक्ति की कमी से होता है। यह पूरी तरह सच नहीं है। हालांकि वजन का बढ़ना व्यक्ति के खानपान और लाइफस्टाइल का रिजल्ट होता है। ओवरईटिंग कई बायलॉजिकल फैक्टर्स जैसे कि जेनेटिक्स और हॉर्मोन्स के कारण हो सकती है। कुछ लोग बहुत जल्दी वेट गेन कर लेते हैं।

    बेशक, लोग अपनी जीवनशैली और व्यवहार में बदलाव करके अपने आनुवंशिक खामी को दूर कर सकते हैं। जीवनशैली में बदलाव के लिए इच्छाशक्ति, समर्पण और दृढ़ता की आवश्यकता होती है। आगे आप कुछ ऐसे फैक्टर्स के बारे में जानेंगे जो मोटापा, वजन बढ़ने, मोटापा, मेटाबॉलिक डिजीज का कारण बनते हैं।

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    1.जेनेटिक्स (Genetics)

    मोटापे के कारण (Causes of obesity) में जेनेटिक्स का महत्वपूर्ण रोल है। पतले पेरेंट्स की तुलना में पेरेंट्स के ओबेसिटी से ग्रसित होने से बच्चों में भी ओबेसिटी होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। इसका मतलब ये बिलकुल नहीं है कि ओबेसिटी के बारे में पहले से निर्धारित किया जा सकता है। आप जो खाते हैं उसका जीन्स पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।

    नॉन इंडस्ट्रियालाइज्ड सोशायटीज जब वेस्टर्न डायट पर शिफ्ट हो जाती हैं तो वे तेजी से मोटापा विकसित करते हैं। उनके जीन्स में बदलाव नहीं आता, लेकिन वातावरण और जो सिग्नल्स वे जीन्स को भेजते हैं उनमें बदलाव आया। सीधे शब्दों में कहें तो आनुवंशिक घटक वजन बढ़ाने की संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं।

    2.जंक फूड्स (Junk foods)

    बहुत अधिक प्रोसेस्ड फूड्स रिफाइंड इंग्रीडिएंट्स के साथ एडिटिव्स के मिस्क होने से कहीं ज्यादा होते हैं। ये फूड्स सस्ते, लंबे समय तक खराब ना होने वाले होने के साथ ही स्वाद में बहुत बढ़िया होते हैं। निर्माता जितना हो सके इन फूड्स को उतना टेस्टी बनाने की कोशिश करते हैं ताकि बिक्री को बढ़ाया जा सके, लेकिन ये ओवरईटिंग को प्रमोट करते हैं। मोटापे के कारण (Causes of obesity) में ओवरईटिंग प्रमुख है।

    और पढ़ें: मेटाबॉलिक सिंड्रोम के रिस्क को बढ़ा सकते हैं ये 5 फैक्टर्स, पहला है मोटापा!

    3.फूड एडिक्शन (Food addiction)

    फूड एडिक्शन मोटापे के कारण (Causes of obesity) में से एक है। कई मीठे, हाय फैट वाले जंक फूड्स ब्रेन में रिवार्ड सेंटर्स reward centers को स्टिम्युलेट करते हैं। फूड एडिक्शन को कई बार ड्रग्स, एल्कोहॉल, निकोटीन और केनाबिस के एडिक्शन से कंपेयर किया जाता है। ऐसे लोग ईटिंग बिहेवियर पर रहने वाले कंट्रोल को खो देते हैं। ये उसी तरह होता है जैसे लोग एल्कोहॉल एडिक्शन को छोड़ने के लिए स्ट्रगल करते हैं और ड्रिंकिंग बिहेवियर पर कंट्रोल खो देते हैं।

    एडिक्शन एक जटिल समस्या है जिसे दूर करना बहुत मुश्किल हो सकता है। जब आप किसी चीज के आदी हो जाते हैं, तो आप चुनने की स्वतंत्रता खो देते हैं।

    और पढ़ें: मोटापे से हैं परेशान? जानें अग्नि मुद्रा को करने का सही तरीका और अनजाने फायदें

    4.इंसुलिन (Insulin)

    इंसुलिन एक बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मोन है जो एनर्जी स्टोरेज को रेगुलेट करने मदद करता है। इसके एक कार्य में फैट कोशिकाओं को फैट को स्टोर करने के लिए प्रोत्साहित करना और वे जिस फैट को कैरी कर रही हैं उसे होल्ड पर रखना शामिल है। वेस्टर्न डायट ओवरवेट और ओबेसिटी का सामना कर रहे लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्रमोट करती है। जिससे पूरी बॉडी में इंसुलिन का लेवल बढ़ जाता है जिससे एनर्जी उपयोग के लिए उपलब्ध होने की जगह फैट कोशिकाओं में इकठ्ठा हो जाती है।

    जबकि मोटापे में इंसुलिन की भूमिका विवादास्पद है, कई अध्ययनों से पता चलता है कि मोटापे के विकास में उच्च इंसुलिन के स्तर की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इंसुलिन के लेवल को कम करने का एकमात्र तरीका सिंपल और रिफाइंड कार्ब्स को कम करना और फायबर इंटेक को बढ़ाना है। इस प्रकार इंसुलिन को भी मोटापे के कारण में जगह दी जाती है।

    5.अग्रेसिव मार्केटिंग (Aggressive marketing)

    जंक फूड प्रोड्यूर्स मार्केटिंग में बहुत अग्रेसिव रहते हैं। उनकी रणनीति कई बार अनैतिक हो सकती है और वे कभी-कभी बहुत अनहेल्दी प्रोडक्ट्स को हेल्दी प्रोडक्ट्स के रूप में बेचने की कोशिश करते हैं। ये कंपनियां भ्रामक दावे भी करती हैं। इससे भी बुरी बात यह है कि वे अपनी मार्केटिंग को विशेष रूप से बच्चों के लिए टार्गेट करती हैं।

    आज की दुनिया में, बच्चे मोटापे का विकास कर रहे हैं और डायबिटीज और जंक फूड के आदी हो रहे हैं, जब तक कि वे इन चीजों के बारे में निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं। यह भी मोटापे के कारण में एक है।

    6.कुछ दवाएं (Certain Medicine)

    मोटापे के कारण

    कई फार्मासुटेकल दवाओं के साइड इफेक्ट्स के रूप में वजन बढ़ना सामने आता है। उदाहरण के तौर पर एंडीडिप्रेसेंट्स वजन के बढ़ने से लिंक है। डायबिटीज की दवाएं और एंटीसायकोटिक्स भी इसमें शामिल है। यानी ऐसा कहा जा सकता है कि मोटापे के कारण (Causes of obesity) में कुछ दवाएं भी हो सकती हैं। ये दवाएं आपकी इच्छाशक्ति को कम नहीं करती हैं। वे शरीर और मस्तिष्क के कार्य को बदल देती हैं जो चयापचय दर को कम करते हैं या भूख बढ़ाते हैं।

    7.लेप्टिन रेजिस्टेंस (Leptin resistance)

    लेप्टिन एक दूसरा हॉर्मोन है जो आबेसिटी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह फैट कोशिकाओं द्वारा प्रोड्यूस होता है और इनका ब्लड लेवल्स हायर फैट मास के साथ बढ़ता है। इस कारण के चलते लेप्टिन का लेवल मोटे लोगों में हाय रहता है। हेल्दी लोगों में हाय लेप्टिन लेवल भूख को कम करने से लिंक्ड है। जब यह ठीक से काम करता है तो यह ब्रेन को बताता है कि आपका फैट स्टोरेज कितना हाय है।

    परेशानी यह है कि कुछ लोग जिनको ओबेसिटी है उनमें लेप्टिन ठीक से काम नहीं करता, क्योंकि कुछ कारणों से यह ब्लड ब्रेन बैरियर को क्रोस नहीं कर सकता। इस स्थिति को लेप्टिन रेजिस्टेंस कहा जाता है और ऐसा माना जाता है कि यह ओबेसिटी का पेथोजेनेसिस (Pathogenesis of obesity) है।

    और पढ़ें: डायट, वर्कआउट के साथ फिटनेस मिशन बनाकर कम किया मोटापा

    8. चीनी (Sugar)

    एडेड शुगर मॉर्डन डायट का सबसे खराब पहलू हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अधिक मात्रा में सेवन करने पर चीनी आपके शरीर के हॉर्मोन और बायोकैमिकल्स को बदल देती है और साथ ही यह वजन बढ़ाने में योगदान देती है। यानी की मोटापे के कारण (Causes of obesity) में शुगर का अधिक मात्रा में उपयोग शामिल है।

    एडेड शुगर में आधा ग्लूकोज और आधा फ्रुक्टोज है। स्टार्च सहित विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों से लोगों को ग्लूकोज मिलता है, लेकिन अधिकांश फ्रुक्टोज एडेड शुगर से आता है। अधिक फ्रुक्टोज सेवन से इंसुलिन प्रतिरोध और इंसुलिन का बड़ा स्तर हो सकता है। यह उसी तरह से तृप्ति को बढ़ावा नहीं देता जिस तरह ग्लूकोज देता है। इन्हीं सभी कारणों के चलते शुगर एनर्जी स्टोरेज को बढ़ाने और फिर ओबेसिटी को बढ़ाने में मदद करता है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको मोटापे के कारण (Causes of obesity) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    सूत्र

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड