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मॉर्बिड ओबेसिटी : इस मोटापे की दस्तक कई परेशानियां कर सकती हैं खड़ी!

मॉर्बिड ओबेसिटी : इस मोटापे की दस्तक कई परेशानियां कर सकती हैं खड़ी!

मोटापा, यदि ये आपके साथ हो ले, तो इससे पीछा छुड़ाना आसान नहीं होता। मोटापा अपने साथ कई शारीरिक तकलीफों को साथ लेकर आता है, जो हमें परेशानी में डाल सकती हैं। इसलिए हमें एक हेल्दी वेट कैरी करने की जरूरत होती है। मोटापा भी कई तरह का हो सकता है, जहां कुछ शरीर में हो रहे हॉर्मोनल इम्बैलेंस के कारण होता है, तो कुछ लम्बे समय से चल रही बीमारियों के कारण। आज हम मोटापे के ऐसे ही प्रकार के बारे में बात करेंगे, जिसे मॉर्बिड ओबेसिटी यानी कि मॉर्बिड मोटापे के नाम से जाना जाता है। तो चलिए सबसे पहले जान लेते हैं कि मॉर्बिड ओबेसिटी होती क्या है।

क्या है मॉर्बिड ओबेसिटी?

मॉर्बिड ओबेसिटी एक कंडीशन होती है, जिसमें शरीर का बीएमआई यानी कि बॉडी मास इंडेक्स 35 से ज्यादा हो जाता है। बीएमआई बॉडी फैट को मापने का एक तरीका है, जिसमें आपको पता चलता है कि आपने हेल्दी बॉडी वेट मेंटेन किया है या नहीं। हालांकि बीएमआई को एक परफेक्ट मेजरमेंट नहीं माना जाता, ये आपकी हाइट के अनुसार आपके आइडियल वेट का जनरल आइडिया माना होता है। तो अब आपने जाना कि मॉर्बिड ओबेसिटी किसे कहते हैं! चलिए अब जान लेते हैं कि मॉर्बिड ओबेसिटी से जुड़ी कुछ और ख़ास बातें।

क्या है मॉर्बिड ओबेसिटी का कारण?

जब भी आप खाना खाते हैं, तो आपका शरीर कैलोरीज का इस्तेमाल इसे चलाने के लिए करता है। हालांकि जब आप आराम कर रहे होते हैं, तब भी आपके शरीर को कैलोरीज की जरूरत पड़ती है, जिससे वह खाने को पचा सके और हार्ट का ध्यान रख सके। यदि इन कामों के लिए शरीर की कैलोरी का इस्तेमाल ठीक से नहीं होता, तो यह कैलोरी फैट यानी कि वसा के रूप में आपके शरीर में जमा होने लगती है। यदि आप जरूरत से ज्यादा कैलोरी अपने खाने के जरिए कंज्यूम करते हैं और आपके शरीर को एक्सरसाइज या दूसरी एक्टिविटी के जरिए व्यस्त नहीं रखते, तो आप ओबेसिटी का शिकार हो जाते हैं। ओबेसिटी और मॉर्बिड ओबेसिटी दोनों ही आपके शरीर में जमा फैट के कारण होने वाला मोटापा कहलाता है।

कुछ तरह की दवाइयां जैसे एंटीडिप्रेसेंट भी वजन के बढ़ने का कारण बन सकती है। इसके अलावा कुछ तरह की मेडिकल कंडीशन जैसे हायपोथायरायडिज्म भी वेट गेन या वजन के बढ़ने का कारण मानी जाती है। लेकिन इस तरह के वजन को मेंटेन किया जा सकता है।

किन लोगों को होता है मॉर्बिड ओबेसिटी का खतरा?

कोई भी व्यक्ति मोटापे की तरफ बढ़ सकता है, यदि वह शरीर की जरूरत से ज्यादा कैलोरी का सेवन करता है। कहा जाता है कि कुछ जेनेटिक फैक्टर्स के कारण भी आपका शरीर एनर्जी का इस्तेमाल अलग तरह से करता है, इसलिए जेनेटिकली भी आपका शरीर मोटापे की ओर बढ़ता चला जाता है। कई तरह के बिहेवियरल फैक्टर भी मोटापे का कारण बन सकते हैं, जिसमें डेली एक्टिविटी लेवल से ज्यादा खाने की हैबिट एक मानी जाती है। बहुत से लोग बचपन में ही खाने की आदत बना लेते हैं, जिसकी वजह से उम्र के अनुसार उनका बॉडी वेट बढ़ता चला जाता है। बड़े होने के बाद यदि आप का एक्टिविटी लेवल कम होता है, तो खाने की अधिकता के कारण आपका मोटापा बढ़ सकता है।

इसके अलावा कुछ और फैक्टर्स मोटापे का कारण बन सकते हैं, जो आगे चलकर मॉर्बिड ओबेसिटी का कारण बन सकते हैं। जो लोग स्मोकिंग छोड़ते हैं, उन लोगों में भी टेंपरेरी वेट गेन की समस्या देखी जाती है। ऐसी महिलाएं जिन्होंने प्रेगनेंसी के दौरान वजन बढ़ने का एक्सपीरियंस किया है, इन्हें भी वजन घटाने में समस्या का सामना करना पड़ता है। साथ ही जिन महिलाओं का मेनोपॉज के दौरान वजन बढ़ता है, उन महिलाओं में भी मोटापा एक आम समस्या के तौर पर देखा जाता है। हालांकि हर तरह का मोटापा मॉर्बिड ओबेसिटी का कारण नहीं बनता, लेकिन कुछ तरह का मोटापा मॉर्बिड ओबेसिटी का कारण बन सकता है।

कैसे होता है मॉर्बिड ओबेसिटी का निदान?

मॉर्बिड ओबेसिटी का पता करने के लिए डॉक्टर आपका फिजिकल एग्जामिनेशन कर सकते हैं और आपके वेट लॉस के बारे में बात कर सकते हैं। इसके अलावा आपकी डायट और एक्सरसाइज के बारे में भी जानकारी ली जा सकती है, जिसके साथ ही मेडिकल हिस्ट्री की जानकारी भी ली जाती है। इसके अलावा कुछ और तरीके हैं जिससे मॉर्बिड ओबेसिटी का पता लगाया जा सकता है। इसमें से एक है बीएमआई कैलक्युलेट करना।

बीएमआई कैलक्युलेट करना

बीएमआई का पता तब लगता है, जब आपका वजन आपकी ऊंचाई के अनुसार मीटर वर्ग में विभाजित किया जाता है। आप अपने बीएमआई को कैलक्युलेटर पर भी माप सकते हैं। यहां जानिए अपनी बीएमआई रेंज को इन कैटिगरीज के मदद से –

अंडरवेट: 18.5 प्रतिशत से कम

सामान्य: 18.5 से 24.9 प्रतिशत

अधिक वजन: 25.0 से 29.9

मोटापा (क्लास 1): 30.0 और 34.9

मॉर्बिड मोटापा (क्लास 2): 35-39.9

बीएमआई के जरिए मोटापा मापने में कुछ लिमिटेशंस भी हो सकते हैं। बीएमआई आपके बॉडी फैट का एस्टीमेट निकालता है। उदाहरण के तौर पर एथलीट का वजन बीएमआई के अनुसार ज्यादा हो सकता है। लेकिन इसका कारण उनका मसल मास ज्यादा होना हो सकता है। इस तरह वे मोटापे की या मॉर्बिड मोटापे की बीएमआई रेंज में आ सकते हैं। लेकिन असल में उनका बॉडी फैट कम अमाउंट में होता है। इसी कारण के चलते आपके डॉक्टर दूसरे टेस्ट के जरिए आपके बॉडी फैट परसेंटेज का पता लगा सकते हैं।

बॉडी फैट परसेंटेज कैलक्युलेशन

इस टेस्ट का इस्तेमाल बॉडी फैट का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसमें डॉक्टर आपकी बाहों, पेट और जांघों की थिकनेस का मेजरमेंट ले सकते हैं। इसके अलावा बॉडी फैट परसेंटेज का पता लगाने का एक और तरीका है बायोइलेक्ट्रिकल इमपेंडेंस, इसमें बॉडी फैट सटीक तरीके से मापा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आपका ब्लड टेस्ट भी करवा सकते हैं। जिससे आपकी हेल्थ समस्याओं और हॉर्मोन्स के स्तर के बारे में पता लगाया जा सके। कई बार यह भी आपके मोटापे का कारण बन सकते हैं।

ओबेसिटी के कारण होने वाली परेशानियां

ओबेसिटी हमेशा से ही अपने आप में एक परेशानी मानी जाती है, लेकिन ये अपने साथ कई परेशानियों को बुला लेती है। जो इस प्रकार हैं –

  • ऑस्टियोअर्थराइटिस
  • हृदय रोग और ब्लड लिपिड एब्नॉर्मलिटी
  • स्ट्रोक
  • टाइप 2 डायबिटीज
  • स्लीप एपनिया
  • प्रजनन संबंधी समस्याएं
  • गॉलस्टोन
  • कुछ तरह के कैंसर
  • ओबेसिटी हायपोवेंटिलेशन सिंड्रोम
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम

यदि आप इन समस्याओं से ग्रसित होते हैं, तो लंबे समय तक आपको इनसे छुटकारा पाना मुश्किल बनता चला जाता है। आइए अब जानते हैं कि आप मॉर्बिड ओबेसिटी का इलाज कैसे कर सकते हैं।

मॉर्बिड ओबेसिटी का इलाज : जानना है जरूरी!

मॉर्बिड ओबेसिटी से निपटने के लिए आप कई तरह के ट्रीटमेंट का सहारा ले सकते हैं। जिसमें से कुछ इस प्रकार हैं –

डायट और एक्सरसाइज

लंबे समय तक वेट लॉस को मेंटेन रखने के लिए डायट और एक्सरसाइज एक अच्छा तरीका माना जाता है। हेल्दी डायट और रेग्युलर एक्सरसाइज से आप अपनी ओवरऑल सेहत को मेंटेन रख सकते हैं। इसके अलावा स्ट्रेस मैनेजमेंट के जरिए भी आप ओवरईटिंग से बच सकते हैं, जिससे मॉर्बिड ओबेसिटी से आपका बचाव हो सकता है। आप अपने डॉक्टर की सहायता से एक वजन कम करने के लिए एक डायट और एक्सरसाइज प्लान बना सकते हैं, जिसके साथ आप लाइफ़स्टाइल चेंजेज पर ध्यान देकर लंबे समय तक मोटापे से दूर रह सकते हैं।

वजन घटाने की दवाइयां

मॉर्बिड ओबेसिटी के कुछ केसेस में आपको दवाइयां भी डॉक्टर के जरिए प्रिसक्राइब की जा सकती हैं। इन दवाइयों की मदद से आपका मोटापा कम हो सकता है। लेकिन कुछ लोगों में यह समस्या देखी गई है कि जब वे यह दवाई छोड़ देते हैं, तो अचानक उनका वेट गेन हो जाता है। इसमें आप कई हर्बल और ओवर द काउंटर सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल वजन घटाने के लिए कर सकते हैं। जिसका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

सर्जरी

यदि आपने मॉर्बिड ओबेसिटी से छुटकारा पाने के लिए सभी तरह की इलाजों का इस्तेमाल कर लिया है, तो सर्जरी भी मोटापा कम करने का एक तरीका हो सकता है। लंबे समय तक वेट लॉस की प्रक्रिया से गुजरने के बाद भी यदि आपका मोटापा कम नहीं हो रहा और इसी मोटापे के कारण आपको दूसरी तरह के हेल्थ रिस्क दिखाई देते हैं। इसलिए इससे निपटने का सर्जरी एक तरीका हो सकता है। लेकिन सर्जरी में कई तरह के कॉम्प्लिकेशंस हो सकते हैं, इसीलिए सर्जरी का फैसला लेने से पहले आपको डॉक्टर से अच्छी तरह से सलाह ले लेनी चाहिए।वेट लॉस सर्जरी के दो प्रकार होते हैं –

गैस्ट्रिक बैंडिंग सर्जरी

इस प्रोसीजर में सर्जन आपके पेट के ऊपरी हिस्से को बैंड से बांध देते हैं, इससे आपके फूड इनटेक पर लिमिटेशंस लग जाती है। इससे आप लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करते हैं और कम अमाउंट में खाना खाते हैं।

गैस्ट्रिक बायपास सर्जरी

इस सर्जरी में आपकेखाए हुए खाने का ट्रैक बदल दिया जाता है। इसमें डाइजेस्टिव ट्रैक का खाना स्टमक और स्मॉल बॉवेल में जाने दिया जाता है, जिसकी वजह से आप लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस करते हैं और कम खाते हैं। इस तरह सर्जरी की मदद से आप मॉर्बिड ओबेसिटी से छुटकारा पा सकते हैं।

मॉर्बिड ओबेसिटी से बचने के क्या तरीके हो सकते हैं?

ओबेसिटी और मॉर्बिड ओबेसिटी दोनों ही जानलेवा कंडीशन मानी जाती है। एक हेल्दी लाइफ़स्टाइल जैसे हेल्दी डायट और रेग्युलर एक्साइज की मदद से ओबेसिटी से बचाव किया जा सकता है। इसमें कुछ तरीके की प्रैक्टिस आपको हमेशा करनी चाहिए, जिसमें कुछ टिप्स पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

डायट और एक्सरसाइज

मॉर्बिड ओबेसिटी की समस्या में आपको डायट पर ध्यान देने के साथ-साथ आपके ईटिंग बिहेवियर को भी बदलने की जरूरत पड़ती है, जिसमें खाने में सब्जियां और फलों का एडिशन, छोटे-छोटे मिल्स का सेवन, कैलोरी की गणना, माइंडफुल ईटिंग और फैट, ट्रांस फैट्स और रिफाइंड शुगर का सीमित मात्रा में इस्तेमाल

इन तरीकों की प्रैक्टिस के साथ आप मॉर्बिड ओबेसिटी को मेंटेन कर सकते हैं। इसके अलावा एक्सरसाइज में –

  • रनिंग और जॉगिंग
  • स्विमिंग
  • रोप जंपिंग
  • ब्रिस्क वॉकिंग
  • बाइकिंग

आप इन तरीकों से मॉर्बिड ओबेसिटी को मेंटेन कर सकते हैं। इस तरह सही लाइफस्टाइल और सही डायट फॉलो करके आप न सिर्फ मॉर्बिड ओबेसिटी से बच सकते हैं, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ भी रह सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Toshini Rathod द्वारा लिखित
अपडेटेड 31/03/2021
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