Natural birth: जानिए नैचुरल बर्थ के फायदे और रिस्क!
डिलिवरी… शिशु के जन्म से पहले कई तरह की तैयारियां होती है और साथ-साथ बनने वाली मां के मन में लेबर पेन को लेकर भी कई सवाल होते हैं कि लेबर पेन कितने देर होगा, कितनी तकलीफ होगी, ज्यादा परेशानी तो नहीं होगी और ना जाने ऐसे ही कई अन्य सवाल। आज इस आर्टिकल में हम आपके साथ पेनलेस डिलिवरी (Painless delivery) यानी बिना दवा के पेनलेस डिलिवरी (Painless delivery with medication) या फिर आप इसे नैचुरल बर्थ (Natural birth) भी कह सकते हैं और आज इसी बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी शेयर करेंगे।
नैचुरल बर्थ को अगर आसान शब्दों में समझें तो शिशु का जन्म वजायना से होना और इस दौरान बिना दवा के पेनलेस डिलिवरी (Painless delivery with medication) भी हो सकती है। हालांकि इस प्रक्रिया में कई अलग-अलग ऑप्शन भी होते हैं, जिनके बारे में आगे समझेंगे।
हॉस्पिटल के बजाये घर पर शिशु के जन्म के नैचुरल बर्थ के अंतर्गत माना जाता है। वहीं अस्पताल में भी ड्रग-फ्री बर्थ यानी बिना दवा के पेनलेस डिलिवरी के लिए रिक्वेस्ट की जा सकती है।
नैचुरल बर्थ के लिए वैसे हेल्थ एक्सपर्ट एवं गायनोकोलॉजिस्ट के संपर्क में रहना चाहिए जो बेबी डिलिवरी के दौरान की प्रक्रिया को आसान और कम से कम दवाओं का उपयोग करते हों।
नैचुरल बर्थ यानी बिना दवा के पेनलेस डिलिवरी के लिए ऐसे डौला एवं मिडवाइफ के संपर्क में रहें जिन्हें इसकी जानकारी हो।
शिशु के जन्म के दौरान सिर्फ पीठ के बल लेटने की बजाये अलग-अलग पोजीशन चुने जैसे घुटनों के बल बैठना, अपने लाइफ पार्टनर का हाथ थामना या फिर पानी से भरे टब में बैठना भी नैचुरल बर्थ में सहायक माना गया है।
पेनलेस डिलिवरी के लिए हायड्रोथेरिपी (Hydrotherapy), हिप्नोसिस (Hypnosis), मसाज (Massage), रिलेक्सेशन टेक्निक (Relaxation techniques), माइंडफुलनेस मेडिटेशन (Mindfulness meditation), ब्रीदिंग एक्सरसाइज (Breathing exercises) एवं एक्युप्रेशर (Acupressure) जैसे तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है।
शिशु के जन्म के बाद बच्चे को तुरंत मां के संपर्क में रखना जिसमें उनकी त्वचा का आपस में स्पर्श हो सके या ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding) करवाना चाहिए। अस्पतालों में शिशु के जन्म होते ही उसे वेट चेक के लिए भेज दिया जाता है। हालांकि अब ज्यादातर गायनोकोलॉजिस्ट स्किन-टू-स्किन टच (जन्म के तुरंत बाद मां और शिशु का मिलना) को बढ़ावा दे रहें हैं।
इन अलग-अलग तरहों से शिशु के जन्म के दौरान बनने वाली मां को कम से कम तकलीफ होने की संभावना होती है।
नैचुरल बर्थ के फायदे क्या हैं? (Benefits of Natural birth)
नैचुरल बर्थ के फायदे निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे:
शिशु का जन्म अगर नैचुरल हो तो ऐसे में वजायना में कट्स या सी-सेक्शन की जरूरत नहीं पड़ती है, जिसकी वजह से डिलिवरी के बाद महिला आसानी से चल सकती हैं, अपना काम कर सकती हैं या बच्चे को अपने पास रख सकती हैं।
नैचुरल बर्थ के दौरान दर्द को कम करने के लिए किसी तरह की दवा नहीं दी जाती है और गर्भवती महिला के पुश करने से शिशु का जन्म होता है। दवाओं का सेवन नहीं करने के कारण सेंसेशन लूज नहीं होता है।
नैचुरल बर्थ की वजह से आप जल्द से जल्द आसानी से चल सकती हैं।
नैचुरल बर्थ के रिस्क फैक्टर क्या हैं? (Risk factor of Natural birth)
नैचुरल बर्थ के दौरान हर पल होने वाली गतिविधि को आप आसानी से महसूस कर सकती हैं। कुछ महिलाओं के लिए ऐसी स्थिति सहनीय तो कुछ महिलाओं के लिए बेहद कठिन हो सकता है। नैचुरल बर्थ के दौरान जेनरल एनेस्थीसिया (General anesthesia) की जरूरत पड़ सकती है। वहीं अगर शिशु नैचुरल बर्थ घर पर होने वाला है, तो इमरजेंसी की स्थिति में परेशानी हो सकती है।
नोट: अगर आप घर पर रहकर ही डिलिवरी के बारे में सोच रहीं हैं, तो यह ध्यान रखें कि अगर किसी तरह की परेशानी होती है, तो उसे कैसे सॉल्व किया जायेगा। अस्पताल में एक नहीं बल्कि कई हेल्थ एक्सपर्ट होते हैं और हर स्थिति से निपटने के लिए डॉ क्टर्स तैयार होते हैं।
नैचुरल बर्थ के लिए खुद को कैसे तैयार करें? (How to prepare for Natural birth)
पेनलेस डिलिवरी के लिए सबसे पहले इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़ें। अगर आपकी किसी करीबी या फ्रेंड की डिलिवरी नॉर्मल हुई है, तो उनसे बात करें। वहीं इस बारे में डॉक्टर से बात करें और डॉक्टर जिन महिलाओं को नैचुरल बर्थ से बेबी डिलिवरी करवा चुके हैं उनसे भी बात करें। पेनलेस डिलिवरी (Painless delivery) के बारे में जितना हो सके पढ़ें। नैचुरल बर्थ के फायदे और इमरजेंसी की स्थिति को भी समझें।
नोट: अगर आप नैचुरल बर्थ की प्लानिंग कर रहीं हैं, तो इस बारे में अपने गायनोकोलॉजिस्ट से जरूर पूछें। गायनोकोलॉजिस्ट आपकी हेल्थ कंडिशन (Health Condition) को ध्यान में रखकर इस बारे में बेहतर जानकारी देंगे। हालांकि ऐसा कई बार होता है कि डॉक्टर या गर्भवती महिला पहले से नॉर्मल डिलिवरी (Normal delivery) की प्लानिंग करते हैं, लेकिन डिलिवरी के वक्त कुछ ऐसी स्थिति पैदा हो जाती है जिससे सिजेरियन डिलिवरी (C-section) या फिर वजायना में कट (Vaginal Cuts) लगाकर ही शिशु का जन्म होता है।
इस आर्टिकल में हमनें आपके साथ नैचुरल बर्थ (Natural Birth) यानी बिना दवा के पेनलेस डिलिवरी (Painless delivery with medication) की जानकारी शेयर की है। इसलिए अगर आप नैचुरल बर्थ (Natural Birth) यानी बिना दवा के पेनलेस डिलिवरी (Painless delivery with medication) से जुड़े किसी तरह के सवालों का जवाब जानना चाहते हैं, तो हमें कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हैलो स्वास्थ्य के हेल्थ एक्सपर्ट आपके सवालों का जवाब जल्द से जल्द देनी की पूरी कोशिश करेंगे। वहीं ट्विन्स प्रेग्नेंसी के दौरान अगर कोई परेशानी महसूस होती है, तो बिना देर किये जल्द से जल्द डॉक्टर से कंसल्ट करें।
प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला अपना ख्याल तो रखती हैं, लेकिन प्रेग्नेंसी के बाद भी गर्भवती महिला को अपने विशेष ख्याल रखना चाहिए। इसलिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें और एक्पर्ट से जानें न्यू मदर के लिए खास टिप्स यहां।
डिस्क्लेमर
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