Parkinson Disease: पार्किंसंस रोग क्या है? जानिए इसके कारण, लक्षण और उपचार

By Medically reviewed by Dr. Pranali Patil

परिचय

पार्किंसंस रोग (Parkinson Disease) क्या है?

पार्किंसंस रोग एक न्युरोलोजिकल डिऑर्डर है। इसका पहला लक्षण है शरीर में कंपन होना। यह व्यक्ति की चलने-फिरने की क्षमता को प्रभावित करती है। यह शरीर के किसी भी हिस्से से शुरू हो सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण पता भी नहीं लगते लेकिन कुछ सप्ताह और महीनों के बाद ये तेजी से बढ़ते हैं। पहले आपको केवल किसी एक हाथ में कंपन महसूस हो सकती है लेकिन एक समय के बाद यह विकार स्लो एक्टिविटी का कारण बनता है। इसके लक्षण समय के साथ गंभीर होते जाते हैं। इस रोग में व्यक्ति को संतुलन बनाने में मुश्किल होती है। नर्वस सिस्टम में तेजी से फैलने वाले इस विकार से आपकी गतिविधी प्रभावित होती है।

यह बीमारी ज्यादातर उम्रदराज लोगों में देखने को मिलती है, लेकिन आज कल युवाओं में भी यह रोग देखने को मिल रहा है। आपको बता दें, हमारे शरीर में मसल्स मूवमेंट के लिए ब्रेन में एक पदार्थ की जरूरत होती है जिसका नाम है डोपामीन। डोपामीन का उत्पादन दिमाग में न्यूरॉन कोशिकाएं करती हैं। जब डोपामीन का स्तर गिरने लगता है, तो दिमाग शरीर के विभिन्न अंगों पर नियंत्रण रख पाने में असक्षम होता है। दिमाग में डोपामीन का स्तर 60 से 80 प्रतिशत तक गिर जाता है तब इस रोग के लक्षण नजर आने लगते हैं।

इस रोग का कोई इलाज नहीं है। हां कुछ दवाओं से इसके लक्षण में सुधार किया जा सकता है। कई मामलों में डॉक्टर दिमाग के कुछ हिस्सों और लक्षणों को बेहतर करने के लिए सर्जरी रिकमेंड कर सकते हैं।

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लक्षण

पार्किंसंस रोग (Parkinson Disease) के लक्षण क्या है?

इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। शुरुआत में इसके लक्षण पर कोई खास ध्यान नहीं देता है। ज्यादातर इसके लक्षण शरीर के एक हिस्से पर नजर आने शुरू होते हैं। वक्त के साथ स्थिति खराब हो जाती है, शुरुआत में इस रोग के संकेत और लक्षण निम्न हो सकते हैं:

  • सूंघने की क्षमता में कमी (decreased ability to smell)
  • कब्ज (constipation)
  • आवाज बदल जाती है (voice changes)
  • छोटी, तंग लिखावट (small, cramped handwriting)
  • कंपकंपी (tremor)
  • धीमी चाल (slow movement)
  • हाथ, पैर और धड़ की कठोरता (stiffness of arms, legs, and trunk)
  • संतुलन और गिरने की प्रवृत्ति के साथ समस्याएं (problems with balance and tendency to fall)

पार्किंसंस रोग के चार मुख्य लक्षण होते हैं:

  • हाथ, पैर, जबड़े या सिर में कंपन (Tremor in hands, arms, legs, jaw or head)
  • अंगों और धड़ की कठोरता (Stiffness of the limbs and trunk)
  • चाल धीरे होना (Slowness of movement)
  • संतुलन बिगड़ना (Impaired balance)

कुछ लोगों में डिप्रेशन या भवानात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। निगलने में दिक्कत, ठीक से बोल न पाना, यूरिन संबंधित परेशानियां, कब्ज, त्वचा रोग और नींद टूटना आदि भी इसके लक्षण हैं।

इस रोग की शुरुआत आमतौर से हाथ या उंगलियों की कंपन से होती है। हो सकता है आप जब आराम कर रहे हो तब आपके हाथों में कंपकपी हो जाए। वक्त के साथ इस रोग से ग्रसित लोगों के काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। इन लोगों को सरल सा काम करने में भी बहुत मेहनत करनी होती है। चलने की गति धीमी हो जाती है। यहां तक कि खड़े होने में भी कठिनाई महसूस होती है। लोग पैरों को घसीट कर चलने लगते हैं। कुछ लोगों के शरीर के किसी हिस्से की मांसपेशियों में अकड़न होने लगती है। इस बीमारी में शरीर झुक जाता है।

पार्किंसन रोग में कई लोगों की आवाज में परिवर्तन आ जाता है तो किसी की लिखावट बदल जाती है। लिखावट छोटी हो सकती है और लिखने में तकलीफ हो सकती है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि आपको पार्किंसन रोग से जुड़ा कोई लक्षण नजर आता है तो बिना देरी करें डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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कारण

पार्किंसंस रोग (Parkinson Disease) किन कारणों से होता है?

पार्किंसंस रोग में मस्तिष्क में कुछ तंत्रिका कोशिकाएं धीरे-धीरे टूट जाती हैं या मर जाती हैं। कई लक्षण न्यूरॉन्स के नुकसान के कारण होते हैं जो आपके मस्तिष्क में डोपामीन नामक एक रासायन का उत्पादन करते हैं। जब डोपामीन का उत्पादन बंद हो जाता है और शरीर में उसका स्तर गिरने लगता है तो यह सामान्य मस्तिष्क गतिविधि का कारण बनता है। इस स्थिति में दिमाग शरीर के अलग-अलग अंगों पर नियंत्रण रख पाने में असक्षम होता है, जिससे पार्किंसंस रोग के लक्षण नजर आते हैं।

पार्किंसंस रोग के कारण अज्ञात हैं, लेकिन निम्न कारक इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं:

आपके जीन (genes): शोधकर्ताओं ने एक विशिष्ट आनुवंशिक उत्परिवर्तन की पहचान की है जो इस रोग का कारण बन सकता है।
पर्यावरण ट्रिगर (Environmental triggers): कुछ टॉक्सिन्स या पर्यावरणीय कारकों के संपर्क में आने से पार्किंसंस रोग का खतरा बढ़ सकता है।

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रिस्क फैक्टर्स को समझें

पार्किंसंस रोग (Parkinson Disease) के क्या जोखिम हैं?

इस बीमारी के जोखिम कारक निम्नलिखित हैं:

बढ़ती उम्र: बहुत कम होता है कि यह रोग युवाओं में देखा जाए। आमतौर पर यह बढ़ती उम्र में देखने को मिलता है। समय के साथ इसका जोखिम बढ़ता जाता है। सामान्य तौर पर यब बीमारी 60 या उससे अधिक उम्र में देखने को मिलती है।
पुरुषों को होता है ज्यादा रिस्क: महिलाओं की तुलना में यह रोग पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलता है। कई शोध इस बात का समर्थन करते हैं, जिसमें अमेरिकी जर्नल ऑफफ एपिडेमियोलॉजी में बड़े अध्ययन शामिल हैं।
आनुवंशिकता: यदि आपके परिवार में किसी को यह रोग है तो आपको भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
विषाक्त पदार्थ के संपर्क में आने से: वमस्पतिनाशकों और कीटनाशकों के बार बार संपर्क में आने से भी इस रोग के होने की संभावना अधिक होती है।

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निदान और उपचार

पार्किंसंस रोग (Parkinson Disease) का निदान कैसे किया जाता है?

इस रोग के परीक्षण के लिए वर्तमान में कोई जांच नहीं है। इसके लिए आपको न्यूरोलॉजिस्ट को दिखाने की जरूरत होगी। डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, लक्षणों के आधार पर इस रोगा का निदान करेंगे। आपके चिकित्सक इसके साथ हो रही अन्य परेशानियों को दूर करने के लिए परीक्षण कराने का सुझाव दे सकते हैं।

पार्किंसंस रोग (Parkinson Disease) का उपचार क्या है?

इस रोग को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन दवाओं के जरिए इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। गंभीर मामलों में डॉक्टर सर्जरी रिकमेंड कर सकते हैं। डॉक्टर आपको ऐसी दवाएं लिख सकते है जो मस्तिष्क में डोपामीन की अपूर्ति को पूरा करती है।

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