आमतौर पर तेजपत्ते का इस्तेमाल मसाले के रूप में किया जाता है परंतु यह एक गुणकारी औषधि भी है। तेजपत्ते में विटामिन C, पोटेशियम, कैल्शियम, मैगनीज, आयरन, जिंक आदि मिनरल्स पाए जाते है। इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के स्वास्थ्य लाभों के लिए भी किया जाता है। यह पाचन को दुरूस्त करने, जोड़ों के दर्द, रक्त शोधक, दांत चमकाने, सिरदर्द, रक्त चाप, मधुमेह, माइग्रेन, गैस्टिक, अल्सर आदि रोगों में लाभदायी होता है।
आइए जानते है तेजपत्ते के औषधीय गुणों को:
तेजपत्ते का इस्तेमाल डिप्रेशन दूर करने के लिए प्राकृतिक उपाय है। इसमें ऐसे संपूर्ण एंटीऑक्सिडेंट्स होते है जो डिप्रेशन दूर करने के लिए बहुत काम आते है। एक कप तेजपत्ते से बानी चाय अगर आप पिए तो आपमें जोश आ जाता है। ऐसा होने से आपका डिप्रेशन दूर हो जाता है और नकारात्मक सोच और विचारो से दूर रहते है।
2. गठिया के रोग में आराम:
तेजपत्ते में एंटीफंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं, यह फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन को दूर करने में कारगर होता है। इसके प्रयोग से गठिया के रोग में आराम मिलता है।
निमोनिया होने पर तेजपत्ते से बना काढ़ा सुबह-शाम पीने से लाभ होता है। इसको बनाने के लिए तेजपत्ता, बड़ी इलाइची, कपूर, गुड़ तथा लौंग सभी को थोड़े से पानी में उबालकर काढ़ा बना लें।
अगर आप लगातार होने वाली खांसी से परेशान हैं, तो तेजपत्ता आपके लिए लाभकारी साबित हो सकता हैं। इसके लिए तेजपत्ता और पीपल की छाल को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर चाटें। या तेजपत्ता का चूर्ण बनाकर उसमें थोड़ा सा शहद और अदरक मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें।
तेजपत्ते का बना काढ़ा सर्दी जुकाम भगाता है। चाय पत्ती की जगह इसके चूर्ण की चाय पीने से छीकें आना, नाक बहना तथा सिर दर्द दूर होता है। इसके लिए तेजपत्ता और छोटी पिप्पली को पीसकर इसमें शहद मिलाकर लेने से या फिर तेजपत्ता के चूर्ण को गुड़ के साथ सुबह और शाम खाने से धीरे-धीरे जुकाम ठीक हो जाता हैं।
शरीर के किसी भी अंग से खून निकलने पर तेजपत्ता के सेवन से बंद हो जाता है। नाक, मुंह, मल या यूरीन से खून निकलने पर एक गिलास ठंडे पानी में एक चम्मच तेजपत्ते का चूर्ण हर तीन घंटे के बाद सेवन करने से खून का बहना बंद हो जाता है।
सिरदर्द होने पर तेजपत्ते से बना लेप लगाने से आराम मिलता है। इसके लिए तेजपत्ता को पीसकर इसका पेस्ट बना लें, इस पेस्ट को थोड़ा सा गर्म करके माथे पर लगा लें। इस लेप से सर्दी या गर्मी दोनों के कारण होने वाले सिरदर्द दूर हो जाता है।
अगर आप जुओं से परेशान है तो तेजपत्ता आपकी मदद करेगा। इसके लिए तेजपत्तों को 400 ग्राम पानी में उबालें जब पानी 100 ग्राम रह जाए तो इस पानी को सिर की जड़ों में लगा लें। एक-दो घंटे बाद धो दें। पानी उबालने से पहले भृंगराज मिलाने से फायदा अधिक होता है।
तेजपत्ते से बना मंजन करने से पीले होते दांत मोतियों की तरह चमकने लगते है। इसके लिए सूखे तेजपत्तों को बारीक पीसकर हर तीसरे दिन इसका मंजन करने से दांतों में चमक आ सकती है।
अस्थमा और श्वासनली के रोग भी इसके सेवन से ठीक हो जाते है। इसके लिए तेजपत्ता और पीपल को बराबर मात्रा में अदरक के साथ चटें या फिर तेजपत्ते के चूर्ण को गर्म दूध के साथ सुबह-शाम प्रतिदिन सेवन करें।
आपको आजतक शायद तेज़पत्ता एक मसाला है सिर्फ इतना पता होगा,लेकिन अबसे आप उसका इस्तेमाल औषदीय रूप में भी कर सकते है। इसके सेवन से कही साडी समस्याएं दूर हो सकती है। इसक सेवन करने से शायद ही आपको किसी तरह की एलर्जी हो सकती है। फिर भी एक बार अपने डॉक्टर या औषदीय जानकर से इस बारे में बात कर ले।