स्टेनोसिस (Stenosis), फैटी सब्सटांस के बिल्डअप के कारण आर्टरीज के तंग या ब्लॉक होने को कहा जाता है। इन फैटी सब्सटांसेस को प्लाक के नाम से जाना है। जब हार्ट आर्टरीज यानी कोरोनरी आर्टरीज में यह समस्या होती है, तो इसे कोरोनरी आर्टरी स्टेनोसिस (Coronary artery stenosis) कहा जाता है। अब अगर बात की जाए रेस्टेनोसिस (Restenosis) की, तो यह वो बीमारी है जिसमें आर्टरी का कोई भाग जिसका ब्लॉकेज के लिए पहले ही उपचार किया गया हो, फिर से तंग हो जाता है। आइए जानें रेस्टेनोसिस (Restenosis) के बारे में विस्तार से।
रेस्टेनोसिस (Restenosis) किसे कहा जाता है?
जैसा कि पहले ही बताया गया है कि रेस्टेनोसिस (Restenosis) की समस्या तब होती है जब स्टेंट या एंजियोप्लास्टी के साथ ओपन आर्टरी फिर से तंग हो जाती है। आर्टरी के तंग या क्लोज होने से हार्ट तक पर्याप्त ब्लड सप्लाई नहीं हो पाती है। आर्टरी को खोलने के लिए अक्सर स्टेंट लगाए जाते हैं ताकि ब्लड फिर से हार्ट में स्वतंत्र रूप से प्रवाहित हो सके। जब यह क्षेत्र फिर से संकरा हो जाता है, तो इसे रेस्टेनोसिस (Restenosis) कहा जाता है। अब जानते हैं कि क्या हैं इसके लक्षण?
रेस्टेनोसिस (Restenosis) के लक्षण क्या हैं?
स्टेंट के साथ या बिना, रेस्टेनोसिस (Restenosis) की परेशानी धीरे-धीरे होती है। इसमें तब तक लक्षण नजर नहीं आते हैं, जब तक कि ब्लॉकेज इतनी खराब न हो जाए कि हार्ट को आवश्यक मिनिमम ब्लड प्राप्त करने से रोकता है। इसके सामान्य लक्षण शायद एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) के ओरिजनल लक्षणों के जैसे हो सकते हैं, यह इस प्रकार हैं:
- छाती में दर्द, जलन, डिस्कम्फर्ट और हेविनेस
- सांस लेने में समस्या
- जी मिचलाना
- कमजोरी
- इर्रेगुलर या फास्ट हार्टबीट
- पसीना आना
रेस्टेनोसिस (Restenosis) की समस्या आमतौर पर स्टेंट के प्लेस होने के तीन से छह महीने के अंदर होती है। प्रोसीजर के 12 महीने से अधिक समय बाद ऐसा होना असामान्य है। जिन लोगों को डायबिटीज है, उनमें इसके कम लक्षण, असामान्य लक्षण या कोई भी लक्षण नजर नहीं आ सकते हैं। अब जानिए क्या हैं इस रोग के कारण?
रेस्टेनोसिस (Restenosis) के कारण
रेस्टेनोसिस (Restenosis) की समस्या स्कार टिश्यू की ओवरग्रोथ के कारण होती है। जब स्टेंट को पहले प्लेस किया जाता है तो सेल वॉल्स की लायनिंग से हेल्दी टिश्यूज इसके अंदर ग्रो करते हैं। यह अच्छा है, क्योंकि यह खून को स्टेंट के माध्यम से बहने से रोकता है। हालांकि, हेल्दी टिश्यू के नीचे स्कार टिश्यू बन सकते हैं। कुछ मामलों में, स्कार टिश्यू इतना मोटा हो सकता है कि यह ब्लड फ्लो में बाधा डालता है। इसके कुछ रिस्क फैक्टर भी हो सकते हैं। 3 से 20 प्रतिशत लोगों उन लोगों में जिनमें ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (Drug-eluting stent ) होता है , उन्हें यह परेशानी हो सकती है। इसके कुछ रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार हैं:
- डायबिटीज (Diabetes)
- क्रॉनिक किडनी डिजीज (Chronic kidney disease)
- मेटल एलर्जी होना (Metal allergy)
- महिलाओं (Women) को पुरुषों के मुकाबले यह समस्या अधिक होती है
- अधिक उम्र होना (Aged)
- मल्टी वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Multi vessel coronary artery disease)
- ड्रग एल्यूटिंग स्टेंट (Drug-eluting stents) में दवाई से इंफ्लेमेटरी रिस्पांस होना
रेस्टेनोसिस (Restenosis) का निदान
अगर डॉक्टर को किसी व्यक्ति में इस रोग के होने का संदेह है, तो वो आमतौर पर तीन टेस्ट्स की सलाह देते हैं। इन टेस्ट्स से डॉक्टर को ब्लॉकेज की लोकेशन, साइज और अन्य कैरेक्टरिस्टिक के बारे में पता चलता है। यह टेस्ट इस प्रकार हैं:
कोरोनरी एंजियोग्राम (Coronary angiogram)
इस टेस्ट में ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए आर्टरी में डाई को इंजेक्ट किया जाता है और एक्स-रे पर ब्लड फ्लो के बारे में पता चलता है।
इंट्रावैस्कुलर अल्ट्रासाउंड (Intravascular ultrasound)
इस टेस्ट में आर्टरी के अंदर की इमेज बनाने के लिए एक कैथेटर से साउंड वेव्स एमिट होती हैं।
ऑप्टिकल कोहरेन्स टोमोग्राफी (Optical Coherence Tomography )
ऑप्टिकल कोहरेन्स टोमोग्राफी में कैथेटर से लाइट वेव एमिट की जाती हैं, ताकि आर्टरी के अंदर की हाय-रेजोलुशन इमेज बन सके। इसका उपचार इस तरह से संभव है।
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रेस्टेनोसिस (Rest enosis) का उपचार
रेस्टेनोसिस (Restenosis) के उपचार के लिए विभिन्न विकल्प मौजूद हैं। डॉक्टर रोगी के बेहतरीन ट्रीटमेंट के लिए कई चीजों का ध्यान रखते हैं। इसके उपचार के कुछ विकल्प इस प्रकार हैं:
रि-स्टेंटिंग (Re-stenting)
अगर स्टेंट को सही से न लगाया गया हो या यह ठीक से एक्सपेंड न हुआ हो, तो आपके स्टेंट को हाय-प्रेशर बैलून के साथ रि-एक्सपेंड किया जा सकता है। अगर समस्या टिश्यू ही ओवरग्रोथ है, तो अन्य स्टेंट को लगाया जा सकता है।
अगर आपको एक ही जगह पर दो बार से अधिक रेस्टेनोसिस (Restenosis) की समस्या हुई है, तो डॉक्टर सिरोलिमस (Sirolimus) या सिलोस्टाजोल (Cilostazol) की सलाह दे सकते हैं। यह दवा आर्टरी में टिश्यू के बिल्ड-अप को कम करने में मदद करती है।
ब्रैकीथेरेपी (Brachytherapy)
यह एक तरह का रेडिएशन थेरेपी है। यह लगभग 10 मिनट के लिए सीधे आर्टरी के अंदर तक रेडिएशन पहुंचाती है। यह आर्टरी में ऐसे टिश्यूज के विकास को रोकने में मदद कर सकता है जो इस परेशानी का कारण बनते हैं ताकि रेस्टेनोसिस (Restenosis) फिर से न हो।
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कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट सर्जरी (Coronary artery bypass graft surgery)
इस सर्जरी में आर्टरी के ब्लॉक्ड हिस्से के चारों ओर जाने के लिए शरीर में अन्य भागों से हेल्दी ब्लड वेसल्स का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें ब्लड वेसल्स का एक सिरा ब्लॉकेज के नीचे और एक सिरा ब्लॉकेज के ऊपर जुड़ा होगा।
परक्यूटीनियस तकनीक (Percutaneous technique)
अगर किसी व्यक्ति को टोटल ब्लॉकेज की समस्या है, तो डॉक्टर इसे क्लियर करने के लिए परक्यूटीनियस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। यह प्रोसीजर त्वचा में चीरा लगाकर किया जाता है। फिर रुकावट को दूर करने के लिए गाइडवायर और कैथेटर का उपयोग किया जाता है
रेट्रोग्रेड एप्रोच (Retrograde approach)
यह उपचार ब्लड वेसल्स को ब्लॉकेज के आसपास मूव करता है। इसमें नई ब्लड वेसल्स का उपयोग करना शामिल है, जो तब बनती हैं जब एक आर्टरी गंभीर रूप से तंग हो जाती है।
यह तो थे रेस्टेनोसिस (Restenosis) के उपचार के तरीकों के बारे में जानकारी। अब जानते हैं कि इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है।

रेस्टेनोसिस (Restenosis) से कैसे बचें?
रेस्टेनोसिस (Restenosis) से बचाव के लिए कुछ तरीकों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए हमें अपने लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव लाने चाहिए। यह बदलाव इस प्रकार हैं:
- अपने ब्लड प्रेशर को हेल्दी रेंज में रखें। हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure) से हार्ट, आर्टरीज और किडनी में अधिक स्ट्रेन पड़ता है।
- कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखें। हाय कोलेस्ट्रॉल से प्लाक बिल्ड-अप होता है जिससे आर्टरीज ब्लॉक हो सकती हैं।
- ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखें क्योंकि हाय ब्लड शुगर (High blood sugar) से ऑर्गन डैमेज हो सकते हैं।
- एक्टिव रहें। एक्सरसाइज करने और एक्टिव रहने से आपके जीवन की गुणवत्ता बढ़ती है और आप स्वस्थ रहते हैं।
- हेल्दी डायट का सेवन करें। हार्ट डिजीज (Heart disease) से बचने और उन्हें रिवर्स करने के लिए हार्ट हेल्दी डायट के लिए यह प्रभावी तरीका है।
- वजन को सही रखें। अधिक वजन से हार्ट, लंग्स, ब्लड वेसल्स आदि पर स्ट्रेन पड़ता है।
- स्मोकिंग करने से बचें क्योंकि इससे भी हार्ट डिजीज (Heart disease) का जोखिम बढ़ता है।
यह तो थी रेस्टेनोसिस के बारे में जानकारी। यह वो समस्या है जिसमें हार्ट की आर्टरीज यानी कोरोनरी आर्टरीज में सब्सटांस के बिल्ड-अप की वजह से आर्टरी तंग या ब्लॉक हो जाती हैं। ऐसा करने में गंभीर हार्ट डिजीज (Heart disease) का जोखिम बढ़ जाता है। इसके उपचार में दवाइयां सर्जरी और जीवनशैली में बदलाव आदि शामिल है। अगर आपके मन में कोई भी सवाल है, तो उसे डॉक्टर से अवश्य पूछें।