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जानें प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स को कैसे हैंडल करें

जानें प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स को कैसे हैंडल करें

आजकल प्री-टीन्स में मूड स्विंग की समस्या अधिक देखी जा रही है, जैसे कि अधिक गुस्सा आना और छोटी-छोटी बातों पर रिएक्ट करना आदि। कई बार पेरेंट्स बच्चों के व्यवहार में आए बदलाव को देखकर चिंतित हो जाते हैं। पेरेंट्स समझ नहीं पाते हैं कि वे इस स्थिति को हैंडल कैसे करें ? इस बारे में दिल्ली के चाइल्ड केयर की चाइल्ड काउंसलर संगीता गोस्वामी ने हैलो स्वास्थ्य को बताया कि कई बार बच्चों में ​मूड स्विंग्स की समस्या देखी जाती है, लेकिन ऐसी स्थिति बच्चे में लगातार और लंबे समय तक बनी रहे तो पेरेंट्स को प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स को गंभीरता से लेना चाहिए और कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए,जैसे कि:

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1. प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स: बच्चों को प्यार से हैंडल करें

आजकल कई बच्चों में मूड स्विंग की वजह डिफिकल्ट एज्यूकेशन मेथड है। स्कूल की पढ़ाई, एक्स्ट्रा क्लासेस और होमवर्क पूरा करने की चिंता जैसी बातें बच्चों का बचपन छीन रही है। बच्चे जब मूड स्विंग की समस्या से परेशान हो तो उस समय पेरेंट्स को उन्हें प्यार से हैंडल करना चाहिए। ऐसी स्थिति में पेरेंट्स को बच्चों के ऊपर किसी भी प्रकार का प्रेशर नहीं डालना चाहिए क्योंकि, बच्चे बड़ों की तरह हर स्थिति को हैंडल नहीं कर सकते हैं। बच्चे को बहुत प्यार से हैंडल करें। पढ़ाई के अलावा बच्चों में मानसिक तनाव की और भी कई वजहें हो सकती हैं। ​जिसे जानने ​की कोशिश करनी चाहिए।बढ़ रहे मानसिक दबाव में धीरे-धीरे बच्चे खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं।

2. प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स: बच्चे को स्पोर्ट करें

कई बार देखा जाता है कि अगर बच्चे चिल्ला कर बात कर रहे होते हैं, तो पेरेंट्स तुरंत उसके ऊपर रिएक्शन देते हैं। जबकि,पेरेंट्स को ऐसी स्थिति में डांटने या कोई नेगेटिव रिएक्शन देने के बजाए उनके ऐसे बर्ताव का कारण जानना चाहिए। ये जानने की कोशिश करनी चाहिए कि बच्चों के व्यवहार में अचानक से बदलाव क्यों आया है? बच्चों से पूछें कि आखिर उन्हें क्या समस्या हो रही है? हो सकता है कि कई बार बच्चे बात न करना चाहें, तब उन पर दबाव न डालें।

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3. प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स: धैर्य बनाए रखें

जब बच्चे को मूड स्विंग हो रहा हो, तो कई बार वे ओवर रिएक्ट करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आपको धैर्य बनाए रखने की जरूरत है। बच्चे पर गुस्सा करने की बजाए उन्हें प्यार से समझाएं। उन्हें इस बात का एहसास दिलाएं कि आप उनके साथ हैंऔर उन्हें समझने की कोशिश कर रहे हैं। अगर आप उन पर गुस्सा करेंगे तो वे और चिड़चिड़े हो जाएंगे। उन्हें प्यार से धीरे—धीरे समझाएंगे तो वे तनाव से ​बाहर निकलते जाएंगे।

4. प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स: बच्चे के बिहेवियर को लेकर अपनी फीलिंग्स को उनसे शेयर करें

आपको लग रहा होगा आप अपने बच्चे से कुछ कहेंगो तो वो खुद को दोषी मानेगा और शर्मिंदा महसूस करेगा। लेकिन आपके बच्चे के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उनका बिहेवियर आपको व अन्य लोगों को किस कदर प्रभावित करता है। आपका बच्चा समझेगा। यदि आप उन पर चिल्लाएंगे तो इससे उनकी परेशानी बढ़ेगी न की कम होगी।

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5. प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स: बच्चों के लिए नियम बनाएं, लेकिन लादें न

बच्चों को अपना बचपन जीने दें। कई पेरेंट्स हर चीज में बच्चों के लिए नियम बना देते हैं, जोकि सही नहीं है। बच्चों को चिंता से आजाद रहकर बचपन जीने का मौका देना चाहिए। बच्चों के लिए बेशक नियम बनाने चाहिए लेकिन, उन पर पर लादें नहीं। उन्हें डिसिप्लिन में रहने के लिए प्रेरित करें लेकिन, बात-बात पर डांटे नहीं। क्योंकि, कई बार बच्चों को इससे यह महसूस होता है कि आप उनसे हमेशा गुस्सा रहते हैं। बच्चे भी चाहते हैं कि लोग उनकी तारीफ करें। आप खुद भी बच्चों के प्रति सकारात्मक रवैया बनाए रखें।

6. प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स: ओवररिएक्ट न करें

यदि बच्चे के मूड स्विंग्स हो रहे हैं तो कोशिश करें आप उन पर बहुत जल्दी भड़कें नहीं। यदि आप बहुत इमोशनल हैं तो भी नहीं, क्योंकि हो सकता आपका बच्चा आपका गुस्सा हैंडल न कर पाएं। अपने बच्चे को फ्रस्टेशन निकालने दे।

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7. प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स: बच्चों के साथ कभी-कभी खुद भी बच्चा बनें

मूड स्विंग्स से अगर बच्चा परेशान रहता है, तो उन्हें तनाव से निकालने के लिए उनके आस-पास का माहौल खुशहाल बनाए रखें। ऐसे समय में बच्चे पेरेंट्स का साथ और प्यार चाहते हैं। बच्चे का मूड खराब हो तो, आप भी उनकी तरह बच्चा बन जाएं और साथ में खेलने का प्लान बनाएं। ऐसा करना से उनका मूड ठीक होगा। मूड स्विंग्स की समस्या लगभग हर बच्चों में एक समय के लिए होती है। आप बच्चे के दोस्तों के पेरेंट्स से मिलकर उनके अनुभव को जान कर के भी प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स को ठीक कर सकते हैं।

प्री-टीन्स में होने वाले मूड स्विंग्स के लिए इन बातों का रखें ख्याल

साउंड स्लीप

इस बात पर ध्यान दें कि क्या आपका बच्चा पर्याप्त नींद ले रहा है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, टीन्स को प्रतिदिन आठ से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। हाल ही में 15000 टीन्स पर किए एक शोध के अनुसार, नींद की कमी डिप्रेशन से जुड़ी है। जो बच्चे आधी रात में बिस्तर पर जाते हैं उनमें डिप्रेशन होने की संभावना 24% अधिक होती है। इसके अलावा इन बच्चों में आत्महत्या के विचार आने की भी अधिक संभावना देखने को मिली।

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डायट और फिटनेस

आपका बच्चा क्या खाता है और क्या नहीं खाता है, इस पर नजर बनाकर रखें। सबसे पहले यह देखें कि वह कितना हेल्दी खाना खाता है? क्या वह ब्रेकफास्ट करता है। सही डायट उसके मूड और वह कैसा सोचता है इसे प्रभावित करती है। एक स्टडी के अनुसार, जो टीन्स ब्रेकफास्ट करते हैं उनका मूड बेहतर होता है। दूसरी बात जिसका आपको ध्यान देना है वो यह कि आपका बच्चा कितना एक्टिव है। एक्सरसाइज मूड को बूस्ट करती है स्ट्रेस को दूर करती है। क्योंकि एक्सरसाइज करने से फील गूड केमिकल रिलीज होते हैं।

डिप्रेशन

बचपन के वर्षों को जीवन का सबसे अच्छा समय माना जाता है, लेकिन कई बच्चों के लिए ये मुश्किल भरे हो सकते हैं। एक स्टडी के अनुसार, 8 में से 1 किशोर में अवसाद का विकास होता है। भूख या नींद में कमी, लो एनर्जी लेवल, चिड़चिड़ापन अवसाद में होने के लक्षण होते हैं। कुछ बच्चों में हल्के बदलाव होते हैं, तो कुछ बिल्कुल उदास नहीं होते हैं, लेकिन अगर आपको अपने बच्चे के मूड में ऐसे बदलाव दिखते हैं तो उसे गंभीरता से लें। इसे लेकर अपने बच्चे से बात करें। आप किसी चिकित्सक को दिखाकर मदद ले सकते हैं।

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आज के समय में बच्चे भी मानसिक तनाव के शिकार हो रहे हैं, ऐसे में पेरेंट्स के लिए जरूरी है कि वे बच्चों को प्यार से हैंडल करें। उनके साथ दोस्त की तरह व्यवहार करें ताकि बच्चे आपको अपने तनाव की वजह बता सकें। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो इसके लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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बीएमआई कैलक्युलेटर

अपने बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच करने के लिए इस कैलक्युलेटर का उपयोग करें और पता करें कि क्या आपका वजन हेल्दी है। आप इस उपकरण का उपयोग अपने बच्चे के बीएमआई की जांच के लिए भी कर सकते हैं।

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Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/08/2020 को
डॉ. अभिषेक कानडे के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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