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बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कराना नहीं लगेगा मुश्किल, अगर फॉलो करेंगी ये टिप्स

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कराना नहीं लगेगा मुश्किल, अगर फॉलो करेंगी ये टिप्स

    प्रेग्नेंसी को लेकर हमारे समाज में कई तरह की धारणाए हैं जैसे कहा जाता यदि प्रेग्नेंट महिला को हार्ट बर्न की परेशानी अधिक होती है तो इसका मतलब है कि बच्चे के बहुत बाल होंगे। यदि मार्निंग सिकनेस अधिक होती है तो इसका मतलब है लड़की होगी, इसी तरह बड़े ब्रेस्ट का मतलब है कि बच्चे को भरपूर दूध मिलेगा। मगर अफसोस कि ये सारी बातें हमेशा सच नहीं होती। बड़े ब्रेस्ट होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि शिशु को दूध की ज्यादा आपूर्ति होगी, बल्कि यह महिलाओं के लिए मुश्किल स्थिति होती है, क्योंकि बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान थोड़ा चुनौतीपूर्ण है। इस चुनौती का सामना कैसे करें और इससे निपटें जैसी सभी बातें इस लेख में बताई जा रही हैं।

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    बड़े ब्रेस्ट और स्तनपान (Breastfeeding with Big Breast)

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान

    स्तनपान यानी ब्रेस्टफीडिंग का अनुभव हर महिला के लिए अलग होता है। किसी को यह मुश्किल नहीं लगता, तो किसी को यह बहुत चुनौतीपूर्ण काम लगता है। ऐसे में जिन महिलाओं के बड़े ब्रेस्ट होते हैं, उन्हें सामान्य महिलाओं से अधिक परेशानी होती है, क्योंकि यह न सिर्फ उनके लिए असहज होता है, बल्कि बच्चे को भी इससे परेशानी हो सकती है। जहां तक मिल्क सप्लाय का संबंध है तो इसका ब्रेस्ट साइज से कोई लेना-देना नहीं है। बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाओं में मिल्क सप्लाय अधिक होगी, ऐसा जरूरी नहीं है।

    और पढ़ें: जानें गाय के दूध से क्यों बेहतर है ब्रेस्टफीडिंग

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान की चुनौतियां (Breastfeeding challenges with big breast)

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जिसमें निम्न शामिल हैं।

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कराने पर रहता है सफोकेशन (suffocation ) का डर

    कई महिलाओं को डर रहता है कि बच्चे की नाक बड़े ब्रेस्ट से दब सकती है। साथ ही उन्हें इस बात की भी चिंता सताती रहती है कि शिशु का सिर कहीं बड़े स्तन के नीचे दब न जाए और उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो। इस समस्या से बचने के लिए जरूरी है कि नवजात को सही तरह से अपनी बाहों में पकड़ें। नवजात को नुकसान पहुंचने के बारे में सोचकर ही मां स्तनपान को लेकर तनावग्रस्त हो जाती है।

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कराने से हो सकता है गर्दन और पीठ में दर्द

    क्योंकि बड़े ब्रेस्ट नीचे की तरफ लटके होते हैं, ऐसे में बच्चे को स्तन के पास लाने की बजाय ब्रेस्ट को बच्चे के पास ले जाना पड़ता है, जिसकी वजह से गर्दन और पीठ में जल्दी दर्द शुरू हो जाता है। बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कराने के दौरान छाती पर अतिरिक्त भार पड़ता है। जिससे पीठ और कंधे का दर्द भी हो सकता है।

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    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान में ये भी मुश्किल (Breastfeeding with large breast may be difficult)

    बड़े ब्रेस्ट के साथ ब्रेस्टफीडिंग

    नवजात उचित तरीके से दूध पी सके इसके लिए एरोला (Areola) का बड़ा हिस्सा उसके मुंह में सही तरीके से जाना जरूरी है, लेकिन बड़े ब्रेस्ट के कारण नवजात को बड़ा मुंह खोलना पड़ता है और निप्पल को पकड़ने में दिक्कत होती है जिससे वह ठीक से दूध नहीं पी पाता। साथ ही बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कराने के लिए महिलाओं को सही पोजिशन तलाशने में दिक्कत होती है।

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान (Breastfeeding with Big Boobs) कराते वक्त मां को होती ये परेशानी भी

    बड़े स्तन के कारण मां देख नहीं पाती कि नवजात ठीक से दूध पी पा रहा है या नहीं। वह ये भी देख नहीं पाती कि बच्चे की ठुड्डी नीचे है या नाक दब रही है।

    और पढ़ें: ब्रेस्टफीडिंग बचा सकती है आपको कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान (Breastfeeding with Big Boobs) की मुश्किलों को कम करने आसान उपाय

    बड़े ब्रेस्ट वाली महिलाओं को ब्रेस्टफीडिंग के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे उनकी मुश्किलें कम हो सकती हैं।

    मदद मांगने से हिचकिचाए नहीं

    बहुत सी नई मां को इस समस्या के संबंध में किसी से बात करने में झिझक महसूस होती है, लेकिन मदद मांगने में कोई बुराई नहीं है। यदि आपको स्तनपान में दिक्कत हो रही है तो घर की बुजुर्ग महिलाओं या भी एक्सपर्ट्स की मदद बेझिझक लें। इससे आपका तनाव और चिंता कम होगी और आप शिशु को सही तरीके से फीड करा पाएंगी। कुछ महिलाओं को लगता है कि इस संबंध में मदद मांगने पर लोग उसे बुरी मां समझेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है।

    बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान से होता है ये फायदा भी

    बड़े ब्रेस्ट में आमतौर पर सामान्य ब्रेस्ट से अधिक दूध रखने की क्षमता होती है। जिससे शिशु सामान्य से अधिक देर तक दूध पी सकता है। ऐसे में आपको ब्रेस्टफीडिंग का शेड्यूल बनाने की जरूरत है और यह समझने की जरूरत है कि बच्चा कब भूखा होता है। साथ ही इस बात को याद रखें कि एक बार यदि बच्चा ठीक से निप्पल पकड़ने लगता है तो वह आराम से दूध पी सकता है, चाहे ब्रेस्ट छोटा हो या बड़ा।

    और पढ़ें: जानें ब्रेस्टफीडिंग के 1000 दिन क्यों है बच्चे के जीवन के लिए जरूरी?

    बच्चे के वजन पर नजर रखें (Monitor the child weight)

    बड़े ब्रेस्ट में जहां ज्यादा दूध रखने की क्षमता होती है, वहीं कई बार इसमें पर्याप्त मिल्क ना हो ऐसा भी हो सकता है और आपको तुरंत इस बात का पता नहीं चल पाएगा। इसलिए डॉक्टर के पास जाकर बच्चे का वजन नियमित रूप से चेक करती रहें। इससे पता चलेगा कि उसका वजन ठीक है या नहीं और कहीं वह ज्यादा या कम दूध तो नहीं पी रहा।

    ब्रेस्ट में सूजन (Engorged Breasts)

    कुछ मांओं के ब्रेस्ट प्रेग्नेंसी से पहले सामान्य या छोटे होते हैं। जबकि प्रेग्नेंसी के बाद उनके ब्रेस्ट बहुत ज्यादा सूज जाते हैं। इस स्थिति को इनगॉर्जड ब्रेस्ट (Engorged Breasts) कहते हैं। यह ब्रेस्ट मिल्क के अधिक निर्माण और सप्लाय के कारण हो सकते हैं। मां के लिए यह स्थिति बहुत पीड़ादायक होती है और इससे उन्हें दूध पिलाने में दिक्कत होती है। इस स्थिति का इलाज कराना बहुत जरूरी है क्योंकि बाद में गभीर समस्याएं हो सकती हैं।

    ब्रेस्ट को सॉफ्ट रखें

    बड़े ब्रेस्ट में मिल्क प्रोडक्शन अधिक होता है जिससे ब्रेस्ट सख्त हो जाते हैं, तब भी जब बच्चे के दूध पीने का समय नहीं होता। इसकी वजह से ब्रेस्ट बहुत हैवी और सख्त हो जाते हैं और मां को बहुत असहज महसूस होता है। ऐसे स्थिति में जब शिशु दूध पीने की कोशिश करता है तो स्तन सख्त होने की वजह से वह निप्पल को ठीक से पकड़ नहीं पाता। इसलिए जरूरी है कि मां अतिरिक्त दूध को हाथ या पंप की मदद से निकाल दें ताकि बच्चा आराम से दूध पी सके

    आइने की मदद लें

    शिशु को सही तरीके से दूध पिलाने के लिए सही और आरामदायक पोजिशन में बैठना बहुत जरूरी है। आप आइने की मदद ले सकती हैं। आइने में देखकर आपको पता चलेगा कि शिशु का मुंह निप्पल के पास है या नहीं और वह ठीक से फीड कर रहा है या नहीं। क्योंकि बड़े ब्रेस्ट की वजह से मां के लिए शिशु को सीधे देख पाना संभव नहीं होता है ऐसे में आइने से मदद मिलती है और इससे वह बच्चे की पोजिशन को भी ठीक रख सकती हैं।

    ब्रेस्ट को C के शेप में पकड़ें

    C होल्ड यानी ब्रेस्ट को इस तरह पकड़ना की अंग्रजी के c अक्षर का शेप बनें, इससे बच्चे को दूध पीने में आसानी होती है। इसमें हाथ से ब्रेस्ट को सपोर्ट दिया जाता है ताकि निप्पल सही तरीके से बच्चे के मुंह तक पहुंच सके।

    सपोर्टिंग ब्रा (Supporting bra)

    बड़े ब्रेस्ट हैवी हो जाते हैं जिसकी वजह से पीठ और गर्दन में दर्द हो सकता है, खासतौर पर जब आप ज्यादा देर तक स्तनपान कराती हैं। ऐसे में ब्रेस्ट को सपोर्ट देने के लिए अच्छी नर्सिंग ब्रा (Nurshing bra) खरीदें। इससे ब्रेस्ट को सपोर्ट मिलता है और ब्रेस्टफीडिंग भी आसान हो जाती है।

    और पढ़ें: कई महीनों और हफ्तों तक सही से दूध पीने वाला बच्चा आखिर क्यों अचानक से करता है स्तनपान से इंकार

    शिशु के लिए स्तनपान क्यों जरूरी है?

    बड़े ब्रेस्ट के साथ ब्रेस्टफीडिंग

    नवजात के लिए मां का दूध सबसे ज्यादा जरूरी होता है, खासतौर पर 6 महीने की उम्र तक। मगर आजकल कुछ महिलाएं वर्किंग होने की वजह से तो कभी किसी अन्य कारणों से बच्चे को बहुत कम या 6 महीने तक ब्रेस्टफीड नहीं करवा पाती हैं जिसका असर आगे चलकर बच्चे की सेहत पर दिखता है। बच्चे के लिए मां का दूध बहुत फायदेमंद होता है।

    • मां के दूध से बच्चों को पूरा पोषण मिल जाता है, जो फॉर्मूला दूध (Formula Milk) से नहीं मिलता और ब्रेस्ट मिल्क (breast milk) को बच्चे आसानी से पचा भी लेते हैं।
    • मां का पहला दूध जिसे कोलोस्ट्रम (Colostrum) भी कहते हैं, बच्चों में इम्यूनिटी (Immunity in children) बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है। मां का दूध शिशु को पर्याप्त एंटीबॉडी प्रदान करता है जिससे वह एलर्जी और संक्रमण से लड़ पाते हैं।
    • स्तनपान करने वाले बच्चों में सांस से जुड़ी परेशानी भी कम होती है
    • ब्रेस्टफीड कराने से मां और शिशु के बीच मजबूत बॉन्डिंग बनती है। मां की बाहों में सुरक्षित महसूस करता है।
    • एक्सपर्ट्स की मानें तो ब्रेस्टफीड (Breastfeed) करने वाले बच्चों का आई.क्यू लेवल फॉर्मूला दूध पीने वाले बच्चों की तुलना में बेहतर होता है। ऐसे बच्चों को मस्तिष्क का विकास तेजी से होता है और वह कोई भाषा भी जल्दी सीख लेते हैं।
    • स्तनपान करने वाले शिशुओं में मोटापा और डायबिटीज का खतरा भी कम हो जाता है, क्योंकि मां के दूध के रूप में उन्हें पर्याप्त पोषण मिलता है जिससे उनका शरीर स्वस्थ रहता है।
    • स्तनपान करने वाले शिशुओं में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या भी कम होती है।
    • पहले छह महीनों में ब्रेस्टफीड करने वाले बच्चों को बड़े होने पर दिल से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा कम हो जाता है।
    • ब्रेस्टफीडिंग मां और बच्चा दोनों के लिए जरूरी और फायदेमंद होता है, लेकिन बड़े ब्रेस्ट के साथ ब्रेस्टफीडिंग कराना (Breastfeeding with Big Breast) हर महिला के लिए आसान नहीं होता। ऐसे में जरूरी है कि किसी तरह की समस्या होने पर वह बेझिझक मदद मांगे, क्योंकि ऐसा न करना उनके साथ ही बच्चे की सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको यह आर्टिकल पसंद आया होगा और बड़े ब्रेस्ट के साथ स्तनपान कैसे करवाना चाहिए इससे संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    सूत्र

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 19/03/2021 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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