बच्चों को चोकिंग होने पर क्या करें?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 1, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

कोई बाहरी चीज मुंह में डालने से ही चोकिंग नहीं होती, बल्कि नवजात शिशुओं को स्तनपान के दौरान दूध से भी चोकिंग हो सकती है। दूध उनके गले में अटक जाता है, ऐसे में नई मां तुरंत घबरा जाती है। आपके साथ यदि ऐसा हो तो उस स्थिति से कैसे निपटना चाहिए जानिए इस आर्टिकल में। बता दें कि, बच्चों को चोकिंग की समस्या काफी आम देखी जाती है। आमतौर पर यह कोई बड़ी समस्या नहीं होती है, लेकिन गलत तरीके से किया गया उपचार या देखभाल बच्चे के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।

पहली बार मां बनने का एहसास बहुत खास होता है। बच्चे के कोमल अंगों को स्पर्श करना, उसकी मीठी मुस्कान दिल को बहुत सुकून देती है, लेकिन बच्चे को थोड़ी सी भी छींक आ जाए या शरीर गर्म होने लगे तो मां तुरंत घबरा जाती है। ये सब तो छोटी-मोटी समस्याएं हैं जो बच्चों के साथ होती ही रहती है, लेकिन बच्चे के गले में यदि दूध अटक जाए यानी ब्रेस्टफीडिंग के दौरान यदि उन्हें चोकिंग हो जाए तो अधिकांश मांए घबराहट में समझ ही नहीं पाती कि क्या करें। ऐसे में बच्चे को सही समय पर इलाज न मिलने से समस्या बढ़ सकती है। याद रखिए घबराने से समस्या हल नहीं होती, बल्कि बढ़ जाती है, इसलिए यदि कभी ऐसा हो तो सयंम से काम लें और बच्चे को कंधे पर लिटाकर उनकी पीठ थपथपाएं।

और पढ़ें – ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने के लिए अपनाएं ये 10 फूड्स

बच्चों को चोकिंग क्यों होती है?

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान चोकिंग होना आम बात है। चोकिंग कई कारणों से हो सकती है। कुछ कारण बाहरी है जिसे रोका जा सकता है, जबकि कुछ नवजात की आंतरिक शारीरिक बनावट के कारण भी हो सकता है। यदि आपको यह लगता है कि बच्चे को बार-बार चोकिंग हो रही है तो डॉक्टर से सलाह लेने की जरूरत है। वही आपको इसका कारण बता पाएंगे।

हैलो स्वास्थ्य का न्यूजलेटर प्राप्त करें

मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कैंसर और भी बहुत कुछ...
सब्सक्राइब' पर क्लिक करके मैं सभी नियमों व शर्तों तथा गोपनीयता नीति को स्वीकार करता/करती हूं। मैं हैलो स्वास्थ्य से भविष्य में मिलने वाले ईमेल को भी स्वीकार करता/करती हूं और जानता/जानती हूं कि मैं हैलो स्वास्थ्य के सब्सक्रिप्शन को किसी भी समय बंद कर सकता/सकती हूं।

बाहरी कारण जिनकी वजह से चोकिंग हो सकती है उसमें शामिल है, स्तनपान के दौरान गलत पोजीशन में बच्चे को रखना, दूध का फ्लो अधिक होना जिससे वह सीधे शिशु के गले में चला जाता है। इस समस्या से निपटने के लिए बच्चे को  दूध पिलाने से पहले थोड़ा सा दूध पंप करके निकाल लें या निप्पल पर दबाव डालें। साथ ही फीड कराते समय बच्चे को सही तरीके से पकड़ना भी जरूरी है। और दूध पिलाने के बाद कंधे पर लेकर उनकी पीठ थपथपाए जिससे बच्चे को डकार आती है।

और पढ़ें – ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम करता है स्तनपान, जानें कैसे

क्या करें जब बच्चे को चोकिंग हो जाए?

  • बच्चे के सिर पर सपोर्ट देते हुए उठाए और अपने हाथ बच्चे की छाती पर रखें और उसे थोड़ा आगे की ओर झुकाएं। अब बंधी हुई मुट्ठी बच्चे की नाभि के ऊपर रखें और थोड़ा अंदर की ओर धक्का दे। यह जल्दी और थोड़ा जोर से पेट की तरफ किया जाना चाहिए।
  •  बच्चे को उल्टा भी किया जा सकता है और चेस्ट पर थोड़ा दबाव देने के साथ ही पीठ भी थपथपाएं इससे एयरवे खुलेगा। चेस्ट पर ब्रेस्टबोन के नीचे की तरफ 2-3 अंगुलियों से दबाव दें, इस दौरान बच्चे के सिर को दूसरे हाथ से सपोर्ट देते रहें।

और  पढ़ें – पिता के लिए ब्रेस्टफीडिंग की जानकारी है जरूरी, पेरेंटिंग में मां को मिलेगी राहत

क्या चोकिंग एक आपातकालीन स्थिति है?

किसी समय बच्चे के मुंह में कोई वस्तु के अटकने के कारण सांस लेने की नली ब्लॉक हो जाती है। यदि सांस फेफड़ों के अंदर और बाहर जाने पर ब्लॉक होने लगती है तो मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है जिसके कारण यह एक आपातकालीन स्थिति का रूप ले लेती है।

शिशु के चोकिंग करने पर उसे मदद की आवश्यकता तब पड़ती है जब वह –

  • बच्चा घबराया हुआ प्रतीत हो
  • सांस लेने में दिक्कत होना
  • शिशु के हाफने या घरघराहट की वजह से
  • बच्चा बात नहीं कर पाटा या रोने लगता है
  • बच्चे का लंगड़ाना या बेहोश हो जाना
  • नीला पड़ना
  • अपने गले को पकड़ना या आपकी ओर हाथ हिलाना

इन परिस्थितियों में यदि आपको पता है कि क्या करना चाहिए तो तुरंत एब्डोमिनल थ्रस्ट (पेट को दबाने) की प्रक्रिया शुरू करें। चोकिंग से बचाने का यह सबसे प्रथम उपचार होता है।

और पढ़ें – कई महीनों और हफ्तों तक सही से दूध पीने वाला बच्चा आखिर क्यों अचानक से करता है स्तनपान से इंकार

बच्चों को चोकिंग से कैसे बचाएं?

स्तनपान के दौरान चोकिंग न हो इसके लिए आपको कुछ सावधानी बरतने की जरूरत है।

  • मिल्क सप्लाई को कम करें यानी ब्रेस्ट पर दवाब डालकर शरीर को यह कम दूध की आपूर्ति का सिग्नल भेजा जाता है। इसके लिए दाहिने हाथ की हथेली से दाहिने ब्रेस्ट के निप्पल को रिब्स की ओर दबाएं और 5 तक गिनें। यह काउंटर प्रेशर जब कई बार ब्रेस्टफीड से पहले दिया जाएगा तो शरीर को संकेत जाएगा कि ब्रेस्ट में दूध की आपूर्ति नहीं करनी है।
  • हर बार फीडिंग के दौरान एक ही तरफ के ब्रेस्ट से फीड करवाएं ताकि वह पूरी तरह से खाली हो जाए।  इससे शिशु का पेट भर जाएगा और वह स्तनपान करना बंद कर देगा। आप ‘ब्लॉक फीडिंग’ भी करवा सकती है, इसमें एक तरफ के ब्रेस्ट से कुछ घंटे के लिए फीड करवाया जाता है। इससे दूसरे ब्रेस्ट में दूध की सप्लाई कम हो जाती है, जिससे अगली बार उस तरफ से दूध पिलाने पर एक्स्ट्रा दूध नहीं आएगा और चोकिंग की समस्या नहीं होगी।
  • यह सुनिश्चित करें कि बच्चा ठीक तरह से ब्रेस्ट के पास टिका हुआ है और दूध पी रहा है। यदि शिशु निप्पल को अच्छी तरह से मुंह में नहीं पकड़ता है तो दूध सीधे गले में जाने की बजाय उसके मुंह में जमा होता जाता है, जिससे चोकिंग हो सकती है। जबकि यदि वह ठीक तरह से लैचिंग करता है तो दूध का फ्लो गले में ठीक तरह से होता है और चोकिंग की समस्या नहीं होती।

और पढ़ें – ब्रेस्ट मिल्क को फ्रिज और रेफ्रिजरेटर करने के टिप्स

  • शिशु को लेटकर दूध न पिलाएं। बल्कि आप जमीन पर बैठें और बच्चे को अपनी बाहों में सही तरीके से पकड़कर स्तनपान कराएं।
  • डाउन अंडर पोजिशन में फीड करावाना भी सही तरीका है। इसमें मां सीधे लेट जाती है और बच्चे को छाती पर रखकर स्तनपान कराती है, बच्चे को तरह से लिटाया जाता है कि उसका पेट मां के पेट को स्पर्श करे। हालांकि हमेशा ऐसा करना सही नहीं है।
  • स्तनपान कराते समय मां को आरामदायक स्थिति में बैठना चाहिए।
  • फुटबॉल होल्ड की अवस्था में बैठकर भी ब्रेस्टफीड करवाया जा सकता है। इसमें आप शिशु के रीढ़, गर्दन और निचले हिस्से को सहारा दें और दूध पिलाते समय शिशु की पीठ के नीचे तकिया रखें। इस दौरान ध्यान दें कि बच्चे की नाक ब्रेस्ट से दबे नहीं और वह सही तरह से सांस ले सके।
  • क्रास क्रैडल होल्ड पॉजिशन में शिशु को अगर दाईं तरफ से दूध पिला रही हैं, तो उसके सिर और शरीर को बाएं हाथ से सहारा दें। हाथ से उसकी गर्दन व सिर को पकड़ें और उसके मुंह को ब्रेस्ट के पास ले जाएं। इस पोजिशन में बच्चे का मुंह निप्पल से लगा रहेगा और आराम से दूध पी सकेगा।

यदि सावधानी बरतने के बाद भी चोकिंग की समस्या होती है तो पहले तो बच्चे की पीठ थपथपाने की कोशिश करें।

डॉक्टर से कब संपर्क करें?

एक बड़े चोकिंग के हादसे के बाद बच्चे को आपातकालीन कक्ष में ले जाने की जरूरत पड़ सकती है।

यदि निम्न परिस्थितियों में से कोई भी समस्या आती है तो बच्चे को तुरंत आपातकालीन कक्ष में लेकर जाएं –

  • हादसे के बाद से ही बच्चे को लंबे समय से खांसी, ड्रूलिंग, बोल न पाना, निगलने में दिक्कत या सांस लेने में समस्या होना।
  • बच्चा नीला पड़ चूका है, लिम्प यानि लंगड़ा कर चल रहा है या हादसे के दौरान या बाद में बेहोश होने लगा है।
  • यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे ने कोई वस्तु निगल ली है जैसे की खिलौना या बैटरी।

यहां दी गई जानकारी किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

विभिन्न प्रसव प्रक्रिया का स्तनपान और रिश्ते पर प्रभाव कैसा होता है

डिलिवरी का तरीका आपके स्तनपान की प्रक्रिया के साथ-साथ शिशु और मां के बीच के रिश्ते पर भी असर डालता है। इस बारे में विस्तार से चर्चा कर रही हैं हमारी चाइल्डबर्थ एजुकेटर Divya Deswal… How do Different Birthing Practices Impact Breastfeeding and Bonding

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
वीडियो अगस्त 2, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें

ब्रेस्टफीडिंग बनाम फॉर्मूला फीडिंग: क्या है बेहतर?

शिशु के विकास के लिए स्तनपान और फॉर्मूला मिल्क में से क्या बेहतर है, जिससे उसे पर्याप्त पोषण मिल सके। जिंदगी के शुरुआती चरण में शिशु को अगर पर्याप्त पोषण मिलता है, तो वह जिंदगीभर कई बीमारियों व संक्रमणों से दूर रहता है। Breastfeeding vs Formula Feeding

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
वीडियो अगस्त 2, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें

स्तनपान से जुड़ी समस्याएं और रीलैक्टेशन इंड्यूस्ड लैक्टेशन

जानिए कि ब्रेस्टफीडिंग करवा रही महिला को किन-किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है और रीलैक्टेशन इंड्यूस्ड लैक्टेशन क्या है? इसके अलावा, बच्चे के जन्म के बाद स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट क्यों जरूरी है? Common Breastfeeding Problems and Relactation Induced Lactation

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
वीडियो अगस्त 1, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें

नर्सिंग मदर्स का परिवार कैसे दे उनका साथ

स्तनपान कराने वाली मां को उसके परिवार से किस तरह सपोर्ट और देखभाल मिलनी चाहिए, इस बारे में बहुत कम बात की जाती है और लोगों को जानकारी भी नहीं होती। आइए, इस वीडियो में इस विषय पर विस्तार से जानें। Family Support for Nursing Mothers

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
वीडियो अगस्त 1, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

स्तनपान

कोरोना वायरस महामारी के दौरान न्यू मॉम के लिए ब्रेस्टफीडिंग कराने के टिप्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
प्रकाशित हुआ अगस्त 6, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
ब्रेस्टफीडिंग के 1000 दिन

जानें ब्रेस्टफीडिंग के 1000 दिन क्यों है बच्चे के जीवन के लिए जरूरी?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ अगस्त 2, 2020 . 7 मिनट में पढ़ें
स्तनपान है बिल्कुल आसान, मानसिक रूप से ऐसे रहें तैयार

स्तनपान है बिल्कुल आसान, मानसिक रूप से ऐसे रहें तैयार

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
प्रकाशित हुआ अगस्त 2, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
डिलिवरी के बाद अवसाद की समस्या से कैसे पाएं छुटकारा

डिलिवरी के बाद अवसाद की समस्या से कैसे पाएं छुटकारा

के द्वारा लिखा गया Sanket Pevekar
प्रकाशित हुआ अगस्त 2, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें