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पेरेंटिंग का तरीका बच्चे पर क्या प्रभाव डालता है? जानें अपने पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में

पेरेंटिंग का तरीका बच्चे पर क्या प्रभाव डालता है? जानें अपने पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में

बच्चों के विकास पर उनके माता-पिता की पर्सनैलिटी का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ-साथ पेरेंटिंग का तरीका (Way of parenting) उनके दिमाग पर एक परछावा छोड़ता चला जाता है, जो आगे चल कर उनके व्यक्तित्व का एक हिस्सा बन जाता है। हर पेरेंट का अपने बच्चे को पालने का तरीका अलग होता है। पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting style) माता-पिता के बच्चे के प्रति व्यवहार और वह उसे किस तरह ट्रीट करते हैं, उसकी कैसी देखभाल करते हैं व उसे किस प्रकार की सीख और अनुशासन सिखाते हैं, इन सभी बातों पर निर्भर करता है।

आपका पेरेंटिंग का तरीका भले ही कोई भी हो लेकिन यह आपके बच्चे के विकास (Child’s growth) पर क्या प्रभाव डालता है यह अधिक महत्वपूर्ण होता है। हर पेरेंट्स को जीवन में अपने बच्चे को कई महत्वपूर्ण सीख देनी होती है तो कई बातें बच्चे समय के साथ खुद ही समझ जाते हैं।

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हर बच्चा अलग और अनोखा होता है। कम उम्र में बच्चों का मन बेहद चंचल होता है जिसके कारण उनका इंट्रेस्ट चीजों को लेकर रोजाना बदलता रहता है। हालांकि, छोटी उम्र में ऐसा होना अच्छे डेवलपमेंट का संकेत होता है। इससे यह पता चलता है कि बच्चे का दिमाग इन्वॉल्व हो रहा है और वह अपने व्यक्तित्व, समझ और अपनी लाइफ की कहानी को खुद से लिखना शुरू कर रहा है।

पेरेंट्स का सबसे बड़ा कंसर्न उनके बच्चों का भविष्य होता है। हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा बड़ा होकर एक सक्सेसफुल इंसान बनें। करियर में सक्सेसफुल होने के लिए बच्चे का मानसिक और सामजिक विकास अच्छे से होना बेहद आवश्यक होता है। इस पर पेरेंट्स की पर्सनैलिटी का सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। बच्चे अक्सर अपने अंदर माता-पिता के व्यक्तित्व को ढालने की कोशिश करते हैं।

1960 में मशहूर डेवलपमेंटल साइकोलॉजिस्ट डायना बॉमरिंड (Diana Baumrind) ने दुनिया को पेरेंटिंग स्टाइल और बच्चों के विकास के बीच एक गहरे संबंध के बारे में बताया। डायना ने लोगों को समझाया की किस तरह बच्चों पर पेरेंट्स के अलग-अलग बिहेवियर का असर पड़ता है। आगे चल कर ऐसी ही कई स्टडीज में भी पाया गया कि बच्चों के विकास पर माता-पिता के व्यक्तित्व का प्रभाव पड़ता है लेकिन इससे यह पूरी तरह से निर्धारित नहीं किया जा सकता कि बच्चा बड़ा हो कर किस तरह का इंसान बनेगा।

इन स्टडी के आधार निम्न कुछ ऐसे पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting style) हैं जिनका चाइल्ड डेवलपमेंट (Child’s development) पर अधिक प्रभाव पड़ता है। इनकी मदद से आप जान पाएंगे कि किस तरह आपका व्यक्तित्व आपके बच्चे के विकास को इन्फ्लुएंस (Influance) कर सकता है।

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अथॉरिटेरियन टाइगर – Authoritarian Tiger

अथॉरिटेरियन सबसे लोकप्रिय पेरेंटिंग का तरीका माना जाता है। इसको अथॉरिटेरियन टाइगर भी कहा जाता है। अथॉरिटेरियन पेरेंटिंग स्टाइल (Authoritarian parenting style) का मतलब होता है स्ट्रिक्ट पेरेंटिंग (Strict parenting)। इस प्रकार के पेरेंट्स बच्चों से चाहते हैं कि वह बिना किसी सवालों के नियमों का पालन करें। अथॉरिटेरियन टाइगर स्टाइल वाले पेरेंट्स बच्चों को लाइफ में प्रॉब्लम साल्व नहीं करने देते हैं। इसके अलावा वह बच्चों से चाहते हैं कि उनके लिए जो गाइडलाइन बनाई गई हैं वह केवल उन्हीं का पालन करें।

स्टडी में यह पाया गया है कि जिन बच्चों के माता-पिता अथॉरिटेरियन टाइगर (Authoritarian Tiger) होते हैं उनमें आगे चल कर आत्म-समान संबंधी समस्याएं आने की आशंका होती है। इस तरह के डेवलपमेंट से बच्चे को लगता है कि उनकी ओपिनियन की कोई वैल्यू नहीं है। हालांकि, इस प्रकार का पेरेंटिंग का तरीका उन बच्चों के लिए बेहद प्रभावशाली होता है जिन्हें अधिक गाइडेंस की जरूरत होती है। कुछ बच्चों को बेहतर विकास के लिए स्ट्रिक्ट पालन-पोषण (Nutrition) की आवश्यकता होती है।

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अथॉरिटेटिव डॉलफिन – Authoritative Dolphin

अथॉरिटेटिव अथॉरिटेरियन टाइगर (Authoritative Authoritarian Tiger) के बाद दूसरा सबसे अधिक लोकप्रिय पेरेंटिंग का तरीका होता है। चाइल्ड डेवलपमेंट के लिए इस स्टाइल को आमतौर पर अथॉरिटेटिव डॉलफिन पेरेंटिंग स्टाइल (Authoritative Dolphin parenting style) कहा जाता है। इस तरह के डॉलफिन पेरेंट्स बाहर से कठोर लेकिन अंदर से नरम होते हैं। अथॉरिटेटिव का अर्थ होता है आधिकारिक। इस तरह के माता-पिता बच्चों को ठोस नियमों के साथ थोड़ी छूट भी देते हैं।

अथॉरिटेटिव पेरेंटिंग का तरीका बच्चों के विकास के लिए (Child’s growth) सबसे अधिक प्रभावशाली और लाभदायी होता है। इसमें पेरेंट्स अपने बच्चों को उनकी फीलिंग बताने का मौका देते हैं और कुछ मामलों में उनकी ओपिनियन भी पूछते हैं।

इस तरह के पेरेंट्स भले ही कुछ हद तक अथॉरिटेटिव होते हों लेकिन यह बच्चों को इंस्पायर और सीख देने के लिए डिस्कशन, तार्किक परिणाम, विचारों और रोल-मॉडल की मदद लेते हैं। अथॉरिटेटिव डॉलफिन पेरेंट्स गलत व्यवहार को सुधारने के लिए पॉजिटिव डिसिप्लिन (Positive discipline) का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा वह बच्चों के अच्छे काम की प्रशंसा या रिवॉर्ड देकर करते हैं।

स्टडी के अनुसार इस तरह के पेरेंटिंग स्टाइल में पले-बड़े बच्चे आत्मनिर्भर और जोखिमों की सही समझ लेकर बड़े होते हैं। यही कारण है कि अथॉरिटेटिव पेरेंट्स के बच्चे बड़े होकर अधिक सफल और खुश रहते हैं। इन बच्चों की मनोदशा मजबूत होती है और यह आगे चल कर एक जिम्मेदार व्यक्ति बनते हैं। यह अथॉरिटेरियन टाइगर की तरह अपनी बात बोलने में हिचकिचाते नहीं हैं और गर्व से अपनी राय रखते हैं।

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परमीसिव कंगारू – Permissive Kangaroo

परमीसिव का मतलब होता है दयालु और रिआयती। परमीसिव पेरेंट्स अपने बच्चों के प्रति बेहद दयालु होते हैं और उन्हें बेहद छूट देते हैं। यह पेरेंटिंग का तरीका फॉलो करने वाले माता-पिता अधिक नियम निर्धारित नहीं करते हैं। परमीसिव पेरेंटिंग स्टाइल वाले पेरेंट्स नरम होते हैं और केवल गंभीर स्थिति में ही आगे आते हैं। इस प्रकार के पेरेंट्स एक दोस्त की छवि बनाने पर अधिक जोर देते हैं और उनकी सभी समस्याओं के बारे में सुनते हैं। लेकिन यह अपने बच्चों के व्यवहार गलत और निर्णयों को लेकर अधिक ध्यान नहीं देते हैं।

माता-पिता बच्चों को अपनी फीलिंग्स जाहिर करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस तरह के पेरेंट्स बच्चों को आसानी से माफ कर देते हैं और अक्सर सोचते हैं की बच्चे शैतानी नहीं करेंगे तो और कौन करेगा। परमीसिव कंगारू पेरेंट्स जब बच्चों के गलत व्यवहार के लिए उन्हें पनिशमेंट (Punishment) देते हैं तो वह भी बेहद आसान होती हैं।

कम नियमों और अनुशासन के कारण इस पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting style) में पले-बड़े बच्चे अक्सर बड़े होकर अहंकारी बनते हैं। स्टडी की मानें तो पेरेंटिंग स्टाइल में फ्रेंडशिप (Friendship) होनी चाहिए लेकिन साथ ही बच्चों को उनकी सीमाओं और अनुशासन में भी रखना चाहिए, ताकि बच्चे बड़े होकर एक जिम्मेदार इंसान बनें।

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नेग्लिजेंट पांडा – Negligent Panda

नेग्लिजेंट पांडा पेरेंटिंग का मतलब होता है लापरवाह माता-पिता। इस प्रकार का पेरेंटिंग का तरीका सबसे अधिक हानिकारक होता है। इसमें पेरेंट्स अपने बच्चे को केवल पोषण और रहने के लिए जगह दे पाते हैं और कई मामलों में तो यह भी नहीं। नेग्लिजेंट पेरेंट्स (Negligent parenting) इतने लापरवाह होते हैं कि उन्हें अपने बच्चे के भविष्य की कोई टेंशन (Tension) नहीं होती। वह न तो बच्चों के लिए किसी प्रकार के नियम निर्धारित करते हैं और न ही कोई सीमाएं।

पांडा पेरेंटिंग स्टाइल वाले माता-पिता अपना उत्तरदायित्व निभाने में भी असक्षम होते हैं। कुछ मामलों में यह पेरेंट्स अपनी ही समस्याओं जैसे आर्थिक तंगी, मानसिक विकार, अवसाद और शोषण से जूझ रहे होते हैं। इस कारण बच्चे को अधिक फ्रीडम और छूट मिल जाती है और वह गलत राह पर जा सकते हैं।

ऐसा पेरेंटिंग का तरीका बच्चों में आत्मविश्वास और सम्मान की कमी पैदा कर सकता है जिसके कारण वह बड़े होकर अपनी फीलिंग्स को एक्सप्रेस नहीं कर पाते हैं। इस प्रकार के परेटिंग का तरीका कुछ बच्चों के लिए बेहद अच्छा हो सकता है तो कुछ के लिए बेहद खराब। स्टडी की माने तो यह बच्चों के लिए एक हानिकारक पेरेंटिंग का तरीका होता है।

ऐसे पले-बड़े बच्चे समाज में खुद को फिट नहीं कर पाते और ऐसे निर्णय लेते हैं जिनका उनके भविष्य पर गहरा असर पड़ता है। परमीसिव पेरेंटिंग का तरीका बच्चों में पढ़ाई-लिखाई की महत्वकांक्षा को बताने में असफल रहता है। इससे बच्चे का स्कूल में प्रदर्शन खराब रहता है और उसमें व्यवहारिक समस्याएं विकसित होने लगती हैं।

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पेरेंटिंग का बेस्ट तरीका (Best tips for parenting)

आपका पेरेंटिंग का तरीका ऊपर दी गई एक या उससे अधिक केटेगरी में आ सकता है। इसका मतलब है कि आप में अथॉरिटेरियन और अथॉरिटेटिव दोनों पेरेंटिंग के गुण एक साथ हो सकते हैं। पेरेंटिंग का तरीका चाहे जो भी हो आपका मेन कंसर्न उसका अच्छा विकास होना चाहिए। मजबूत और अच्छी बुनियाद ही इंसान को बेहतर, इंडिपेंडेंट (Independent) और आत्म-निर्भर बनाती है। जीवन में हर चीज की तरह बच्चे के विकास के लिए पेरेंट्स में धैर्य और समझ होनी बेहद जरूरी है।

किसी भी पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting style) को अपनाने से कई गुना बेहतर होता है अपने व्यक्तित्व को बेहतर बनाना। पेरेंट्स का यह फर्ज होता है कि वह अपने बच्चे के डेवलपमेंट में पूरा योगदान दें और विकास के सभी चरणों को समझें कि वह बच्चे और आपके दोनों के रिश्ते के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। बच्चों पर माता-पिता की सीख पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting style) से अधिक इम्पैक्ट डालती है। इसलिए बच्चों को नई चीजे सीखने का मौका दें और ऐसी शिक्षा दें जो उसके व्यक्तित्व को बेहतर बनाने में मदद करे।

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सूत्र

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Shivam Rohatgi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 06/07/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड