अगर आपका बच्चा 23 महीने का हो चुका है, तो समझ लिजिए कि वह जीवन के शुरुआती पड़ाव को पार कर चुका है। साथ ही यह भी समझें कि यह उम्र बच्चे के विकास के लिए अहम है। साथ ही वे इस उम्र में जीवन के लिए महत्वपूर्ण दो चीजें सिख रहे होते हैं, जो हैं चलना और बोलना। काफी बच्चे इस में तोड़-तोड़ कर बोलना और लड़खड़ा कर चलना शुरू कर चुके होते हैं।

यदि ऐसा लगता है कि आपके बच्चे का विकास धीमा हो रहा है, खासतौर से पहले साल की तुलना में। पहले साल में बच्चे का वजन जन्म से करीब तीन गुना बढ़ जाता है जबकि दूसरे साल में सिर्फ 1.4 किलो से 2.2 किलो तक ही बढ़ता है। अब आपका बच्चा शिशु की तरह नहीं दिखता। अब वह बिल्कुल सीधा खड़ा रहता है, चलता है और सक्रिय हो जाता है।
वह अपने शरीर को जिस तरह से रखता है और घुमाता है उसका तरीका भी बदल गया होता है। उसकी आगे-पीछे की चाल पहले की तुलना में ज्यादा अच्छी हो गई है। दो साल का बच्चा खिलौने को उठाकर चल सकता है, दौड़ सकता है। आपका बच्चा उन सभी जगहों पर जाने लगता है जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा। वह स्टूल, टेबल या काउंटर पर खड़ा हो जाता है, किचन के कंटेनर खोल सकता और बाथरूम में अकेला जाकर पानी की बाल्टी जैसी खतरनाक जगहों पर भी बड़ी तेजी से जा सकता है इसलिए बच्चे का ध्यान रखें।
बच्चे को बोलने और ज्यादा शब्दों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करें, निम्न तरीकों से आप बच्चे की मदद कर सकते हैं-
हर बच्चे का विकास अलग-अलग होता है। आपको तभी चिंता करने की जरुरत है जब बच्चे का व्यवहार, खाने और सोने की आदतें अचानक से बदल जाएं। इन सबके बारे में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, तब भी जब आपको यह बदलाव मामूली लगें।
आप देख सकते हैं कि आपके बच्चे को सेपरेशन एंग्ज़ाइटी यानी आपसे अलग होने का डर सताता रहता है। ऐसा कुछ समय के लिए होता फिर स्थिति सामान्य हो जाती है। आपको पता होना चाहिए की यह सामान्य बात है। दरअसल, कुछ बातें ऐसी हैं जिससे बच्चे को आपसे अलग होने से डर लगता है, जैसे नई नैनी का आना, छोटे भाई/बहन का आना।
इस स्थिति से निपटने के बेहतरीन तरीका है बच्चे को प्यार से बाय बोलना। कभी भी उसे बाय बोले बिना न जाएं, इससे स्थिति बिगड़ सकती है। बच्चे को लगेगा कि आप उसे छोड़कर चली गई हैं और उसकी सेपरेशन एंग्ज़ाइटी और बढ़ जाएगी। यदि आपको बच्चे की स्थिति में कोई सुधार न दिखे तो इस बारे में डॉक्टर की बताएं, हो सकता है वह इससे निपटने का कुछ तरीका बताए।
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आप पब्लिक प्लेस में बच्चे की नौटंकी को लेकर परेशान हो सकती हैं। खासतौर पर सुपरमार्केट व रेस्टोरेंट में। आप बच्चे के गुस्सा और नखरे का पहले से अनुमान नहीं लगा सकती हैं। कई बार आपको लगता होगा कि इन सब पर आपका कोई कंट्रोल नहीं है लेकिन, यह सामान्य बात है। ऐसे में बच्चे को प्यार से समझाएं कि उनका व्यवहार सही नहीं है, हो सकता है शुरुआत में वह बात न समझे लेकिन, धीरे-धीरे उन्हें समझ आ जाएगा कि उन्हें अपना व्यवहार सुधारने की जरूरत है।
थकान या भूख लगने पर गुस्सा आ सकता है। यदि आपके बच्चे के साथ भी ऐसा होता है, तो उसके नखरे और गुस्से को कम करने के लिए पहले से ही इंतजाम कर लें। आप अपने बैग में कुछ खाने-पीने की चीजे रख सकती हैं और याद रखिए बच्चे के लिए दोपहर की नींद भी जरूरी है।
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23 महीने के बच्चे को खाना खिलाने के लिए पेरेंट्स को खासी मेहनत करनी पड़ सकती है। क्योंकि इस समय तक बच्चे चलने लगते हैं और खाना खाते समय यहां वहां घूमते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को किसी हाई चेयर पर बिठा कर बच्चों को खाना खिलाने की जरूरत होती है। इस उम्र के बच्चों को ज्यादा देर तक एक जगह बिठाना मुश्किल होता है क्योंकि उनका धैर्य जल्दी टूट जाता है। साथ ही इस बात का भी ख्याल रखें कि बच्चों को सर्व करने से पहले ज्यादा इंतजार न कराएं। साथ ही यदि बच्चे का खाने का मन न हो तो उसे खाने के लिए फोर्स न करें।
उम्मीद करते हैं कि आपको 23 महीने के बच्चे का विकास कैसे होता है इससे संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।