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पतली और मोटी त्वचा के कार्य जानें

    पतली और मोटी त्वचा के कार्य जानें

    त्वचा (Skin) शरीर का सबसे बड़ा ऑर्गन है। इसमें तीन मुख्य परतें होती हैं; एपिडर्मिस, डर्मिस (Dermis) और हाइपोडर्मिस (Hypodermis)। त्वचा पतली या मोटी हो सकती है। एन्वॉयरन्मेंटल अग्ग्रेसर्स (Environmental aggressors), कीटाणुओं और बीमारियों से शरीर की रक्षा की पहली लेयर हमारी स्किन है। पूरे शरीर में पतली और मोटी त्वचा के अलग-अलग स्तर हैं। स्किन में तीन परतें होती हैं, और इसमें ज्यादातर वसामय ग्रंथियां और हेयर फॉलिकल्स होते हैं। लेयर्स और उनके कंपोनेंट्स की थिकनेस पूरे शरीर में अलग-अलग होती है। इस आर्टिकल में, हमने पतली और मोटी त्वचा (Thin and thick skin) के फंक्शन, स्ट्रक्चर और उनके बीच के अंतर को स्पष्ट किया है।

    पतली त्वचा (Thin skin) क्या है?

    पतली त्वचा में एक पतली एपिडर्मिस (ऊपरी परत) होती है और इसमें स्ट्रेटम ल्यूसिडम (Stratum lucidum) परत का अभाव होता है। एपिडर्मिस में कुल पांच परतें होती हैं:

    • स्ट्रेटम बेसल या स्ट्रेटम जर्मिनेटिवम (Stratum germinativum): यह एपिडर्मिस की सबसे गहरी परत है और इसमें मेलानोसाइट्स (कोशिकाएं जो मेलेनिन प्रोड्यूस करती हैं) होती हैं।
    • स्ट्रेटम स्पिनोसम (Stratum spinosum): इसमें 8-10 सेल्स की परतें होती हैं और इसमें पेड़ की तरह कोशिकाएं (एक प्रकार की इम्यून सेल्स) होती हैं।
    • स्ट्रेटम ग्रैनुलोसम (Stratum granulosum): इसमें 3-5 सेल परतें होती हैं और इसमें ग्लाइकोलिपिड्स (Glycolipids) होते हैं जो स्किन की सेल्स को अटकाए रखते हैं।
    • स्ट्रेटम ल्यूसिडम (Stratum lucidum): इसमें 2-3 कोशिका परतें होती हैं और यह केवल तलवों और हथेलियों में मोटी त्वचा में पाई जाती है।
    • स्ट्रेटम कॉर्नियम (Stratum corneum): यह सबसे ऊपर की त्वचा की परत है और इसमें केराटिन और मृत केराटिनोसाइट्स (केराटिन का उत्पादन करने वाली कोशिकाएं) से बनी 20-30 कोशिका परतें होती हैं। स्ट्रेटम कॉर्नियम में डेड केराटिनोसाइट्स (Dead keratinocytes) होते हैं, जो डिफेंसिन (Defensins) का प्रोडक्शन करते हैं। डिफेंसिन एमिनो एसिड के स्ट्रिंग्स होते हैं जो शरीर को इंफेक्शन से बचाते हैं।
    • डर्मिस और एपिडर्मिस को जोड़ने वाली संरचनाएं जिन्हें डर्मल पपिल (Dermal papillae) कहा जाता है। पतली त्वचा की तुलना में मोटी त्वचा में डर्मल पपिल ज्यादा प्रॉमिनेंट होते हैं। डर्मल पपिल एपिडर्मिस और डर्मिस के बीच सरफेस एरिया को बढ़ाते हैं, जिससे परतों के बीच अधिक ऑक्सिजन, फ़ूड और वेस्ट को पास करने की अनुमति मिलती है।

    पतली त्वचा (Thin Skin) की परिभाषा

    पैरों के तलवों और हाथों की हथेलियों को छोड़कर, पतली त्वचा ज्यादातर शरीर को कवर करती है, और इसमें मोटी त्वचा की तुलना में कम सेलुलर लेयर्स होती हैं। पतली त्वचा की एपिडर्मिस 0.07–0.15 मिलीमीटर (मिमी) तक होती है। पतली त्वचा शरीर के विभिन्न हिस्सों में मोटाई में अलग-अलग हो सकती है और विशेष रूप से पलकों पर पतली होती है। ऊपरी पीठ पर पतली त्वचा सबसे मोटी होती है। पतली त्वचा में बालों के रोम, पसीने की ग्रंथियां और वसामय ग्रंथियां भी होती हैं।

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    मोटी त्वचा (Thick Skin) की परिभाषा

    • पैरों के तलवों और हाथों की हथेलियों पर मोटी त्वचा मौजूद होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन क्षेत्रों में शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक फ्रिक्शन होता है, और मोटी त्वचा संभावित नुकसान से बचाने में मदद करती है।
    • मोटी त्वचा की एपिडर्मिस 5 मिमी तक हो सकती है। मोटी त्वचा में बालों के रोम या वसामय ग्रंथियां नहीं होती हैं। मोटी त्वचा में कोई अर्रेक्टर पिली मांसपेशियां (Arrector pili muscles) भी नहीं होती हैं, जो गूसबंप का कारण बनती हैं।
    • मोटी त्वचा मोटी होती है क्योंकि इसमें एपिडर्मिस में एक अतिरिक्त परत होती है, जिसे स्ट्रेटम ल्यूसिडम (Stratum lucidum) कहा जाता है।

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    पतली और मोटी त्वचा के कार्य (Causes of Thick and thin skin)

    • सामान्य तौर पर स्किन के कई अलग-अलग फंक्शन होते हैं, जैसे कि प्रोटेक्शन, सेंसेशन और थर्मोरेग्यूलेशन (Thermoregulation)। पतली और मोटी त्वचा में ऐसे गुण होते हैं जो स्किन को सही ढंग से काम करने देते हैं।
    • उदाहरण के लिए, पतली त्वचा में हेयर फॉलिकल्स होते हैं, जो तापमान को कंट्रोल करने और पराबैंगनी रेडिएशन से बचाने में हेल्प करने के लिए बालों के प्रोडक्शन में महत्वपूर्ण हैं। हेयर फॉलिकल्स एपिथेलियल स्टेम सेल (Epithelial stem cells) भी प्रोवाइड करते हैं, जो घावों को रिपेयर होने में हेल्प करते हैं। इसके अलावा, पतली त्वचा में वसामय ग्रंथियां होती हैं, जो सीबम प्रोड्यूस करती हैं। सेबम स्किन को लुब्रिकेट करने और इंफेक्शन से बचाने में हेल्प करता है।
    • पतली त्वचा में एक्रीन (Eccrine) और एपोक्राइन (Apocrine) पसीने की ग्रंथियां भी होती हैं। पसीने की ग्रंथियां शरीर को ठंडा करने के लिए पसीने को छोड़ कर शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में मदद करती हैं, और स्किन डैमेज को ठीक करने में भी मदद करती हैं।
    • मोटी त्वचा उन हिस्सों में डैमेज से प्रोटेक्शन करती है जहां अधिक फ्रिक्शन होता है, जैसे हाथों की हथेली और पैर के तलवे। मोटी त्वचा में शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में हेल्प करने के लिए एक्रीन स्वेट ग्लैंड्स भी होती हैं।

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    पतली और मोटी त्वचा में अंतर (Difference between thin and Thick skin)

    • पतली त्वचा के विपरीत, मोटी त्वचा में सभी पांच एपिडर्मिस लेयर्स होती हैं और यह मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में मौजूद होती है जहां उंगलियों, हथेलियों और तलवों जैसे सबसे अधिक फ्रिक्शन प्राप्त होते हैं। मोटी स्किन हेयरलेस होती है और इसमें वसामय ग्रंथियां और एपोक्राइन पसीने की ग्रंथियां नहीं होती हैं क्योंकि यह बालों के रोम में खुलती है।
    • मोटी त्वचा में वास्तव में पतली त्वचा की तुलना में पतली त्वचा की परत होती है, लेकिन एपिडर्मिस में मौजूद स्ट्रेटम ल्यूसिडम परत के कारण अभी भी मोटी होती है।
    • मोती त्वचा में डर्मल पपिल होता है जिसमें बालों के विकास को नियंत्रित करने के लिए मेसेनकाइमल सेल्स (Mesenchymal cells) होती हैं। पतली स्किन में डर्मल पपिल ज्यादा प्रॉमिनेंट होते हैं।
    • मोटी स्किन में एपिडर्मिस में पांच परतें होती हैं। जबकि पतली त्वचा में एपिडर्मिस में केवल चार परतें होती हैं।
    • मोटी त्वचा में डेन्स सेंसरी रिसेप्टर्स (Sensory receptors) होते हैं। जबकि पतली त्वचा में बिखरे हुए सेंसरी रिसेप्टर्स होते हैं।

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    पतली और मोटी त्वचा (Thin and thick skin) के बारे में जान लें ये भी

    स्किन कई जरूरी भूमिकाओं की एक बड़ी के साथ एक बड़ा और कॉम्प्लेक्स ऑर्गन (complex organ) है। पतली और मोटी त्वचा (Thin and thick skin) की बॉडी में अलग-अलग संरचनाएं और कार्य होते हैं। उनमें मौजूद परतें उन्हें थिकनेस देती हैं और उन्हें अपनी भूमिका निभाने की अनुमति देती हैं। ज्यादातर शरीर पर पतली त्वचा मौजूद होती है, और इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है, टेम्परेचर को कंट्रोल करती है, और बालों को बढ़ने देती है। मोटी त्वचा हाथों की हथेलियों और पैरों के तलवों को ढक लेती है और इन क्षेत्रों को ज्यादा फ्रिक्शन और अब्रेशन से बचाती है। इस प्रकार ह्यूमन स्किन की विभिन्न मोटाई शरीर के विभिन्न कार्यों को बनाए रखने में मदद करती है। हमें उम्मीद है कि इस लेख ने आपको पतली और मोटी त्वचा और उनके द्वारा निभाई जाने वाली भूमिका के बीच के अंतर को समझने में मदद की है।

    उम्मीद करते हैं कि आपको पतली और मोटी त्वचा (Thin and thick skin) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में पतली और मोटी त्वचा से संबंधित अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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    Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 24/05/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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