Insurance: इंश्योरेंस ले डाला, तो लाइफ झिंगालाला, जानें हेल्थ इंश्योरेंस के फायदे

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट जनवरी 13, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
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इंश्योरेंस (बीमा) क्या होता है?

इंश्योरेंस (बीमा) एक अनुबंध होता है, जो कि पॉलिसी द्वारा रिप्रेजेंट किया जाता है। जिसमें किसी व्यक्ति या संस्था को पॉलिसी में लिखित स्थितियों के अंतर्गत होने वाले नुकसान के प्रति फाइनेंशियल प्रोटेक्शन या भरपाई की जाती है। इंश्योरेंस पॉलिसी का उपयोग बीमाधारक या उसकी प्रॉपर्टी को हुए नुकसान या थर्ड पार्टी को पहुंची क्षति या नुकसान की देयता की वजह से होने वाले बड़े या छोटे फाइनेंशियल नुकसान को बचाने के लिए किया जाता है। आसान शब्दों में समझा जाए तो इंश्योरेंस एक तरीका है, जिसके द्वारा आप खुद को या अपनी फैमिली को भविष्य में हो सकने वाले फाइनेंशियल नुकसान से बचा सकते हैं।

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इंश्योरेंस कैसे काम करता है?

इंश्योरेंस में बीमाकर्ता और बीमाधारक को एक लीगल कॉन्ट्रैक्ट दिया जाता है, जिसे इंश्योरेंस पॉलिसी कहा जाता है। इस इंश्योरेंस पॉलिसी में उन सभी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्थितियों और उनके अंतर्गत दी जाने वाली राशि की जानकारी होती है, जिसमें बीमाकंपनी (इंश्योरेंस करने वाली कंपनी) बीमा किए गए व्यक्ति या उसकी संपत्ति को हुए नुकसान आदि के एवज में बीमाधारक या नामांकित व्यक्ति को देती है।

इंश्योरेंस प्रीमियम

आमतौर पर, बड़े इंश्योरेंस कवर के लिए दिया जाने वाला प्रीमियम काफी कम होता है। इंश्योरेंस कंपनी इतने कम प्रीमियम के बदले बड़ा इंश्योरेंस कवर देने का खतरा उठाती है। क्योंकि, आमतौर पर इंश्योरेंस पॉलिसी के मुकाबले ऐसे कम ही मामले होते हैं, जिसमें इंश्योरेंस की राशि दी जाती है। जिससे इंश्योरेंस कंपनी बीमाधारकों से मिलने वाले प्रीमियम या मूल्य की मदद से किसी और रूप में लाभ उठा सकती है।

इंश्योरेंस भुगतान

कोई भी बीमाधारक व्यक्ति या ग्रुप इंश्योरेंस करा चुका कोई फर्म नुकसान या क्षति की भरपाई के बदले राशि की मांग कर सकती है। लेकिन, इंश्योरेंस राशि का भुगतान करना या न करना इंश्योरेंस कंपनी के निर्णय पर निर्भर करता है। इसके लिए इंश्योरेंस कंपनी बीमाधारक व्यक्ति या कंपनी की क्लेम एप्लीकेशन का आंकलन और सत्यता की जांच कर सकती है। आमतौर पर इंश्योरेंस कंपनी हाई-रिस्क एप्लीकेंट्स को इंश्योरेंस उपलब्ध नहीं करवाती है।

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इंश्योरेंस से होने वाले टैक्स बेनेफिट्स क्या हैं?

इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से मिलने वाली सुरक्षा के अलावा, इसे लेने से इनकम टैक्स बेनेफिट्स भी मिलते हैं। जिन्हें इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय लिया जा सकता है। जैसे-

  • इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के मुताबिक 1.5 लाख रूपए तक का लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम भऱने पर टैक्स-सेविंग डिडक्शन के लिए क्लेम किया जा सकता है।
  • इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के मुताबिक खुद के लिए या फैमिली के लिए 25 हजार रुपए तक और अपने माता-पिता के लिए 25 हजार रुपए तक के इंश्योरेंस प्रीमियम पर भी टैक्स-सेविंग डिडक्शन के लिए क्लेम किया जा सकता है।

इंश्योरेंस कितने प्रकार का होता है?

इंश्योरेंस कई प्रकार का हो सकता है। यह इंश्योरेंस कंपनी की अलग-अलग पॉलिसी पर निर्भर करता है, कि वो ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए कितने प्रकार के इंश्योरेंस के विकल्प रखना चाहती है। लेकिन, फिर भी इंश्योरेंस के मुख्य रूप से यह निम्नलिखित प्रकार होते हैं।

  • ऑटो इंश्योरेंस
  • होम इंश्योरेंस
  • लाइफ इंश्योरेंस
  • डिसेबिलिटी इंश्योरेंस
  • हेल्थ इंश्योरेंस
  • लायबिलिटी इंश्योरेंस

ऑटो इंश्योरेंस – इंश्योरेंस के इस प्रकार में बीमाधारक व्यक्ति या कंपनी के ऑटोमोबाइल का इंश्योरेंस किया जाता है। जिसमें, निर्धारित की गई कुछ खास या विषम स्थितियों में उसके ऑटोमोबाइल को हुए नुकसान के बराबर या एक निर्धारित राशि बीमाधारक को प्रदान की जाती है।

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होम इंश्योरेंस – होम इंश्योरेंस के अंतर्गत बीमाधारक या कंपनी के घर या ऑफिस को भविष्य में होने वाले नुकसान के एवज में बराबर या एक निर्धारित राशि अदा की जाती है। लेकिन, राशि अदा करने के लिए पॉलिसी में निर्धारित स्थितियों में ही नुकासन होना चाहिए।

लाइफ इंश्योरेंस – इस इंश्योरेंस पॉलिसी में किसी बीमाधारक व्यक्ति या उसकी फैमिली के अन्य सदस्यों की जान के एवज में निर्धारित की गई राशि नामांकित व्यक्ति को दी जाती है। इसकी इंश्योरेंस राशि व्यक्ति या फैमिली के सोशल स्टेटस या फेस वैल्यू पर निर्धारित हो सकती है।

डिसेबिलिटी इंश्योरेंस – इंश्योरेंस के इस प्रकार में किसी व्यक्ति या उसकी फैमिली के सदस्यों को भविष्य में किसी भी प्रकार की डिसेबिलिटी होने पर एक निर्धारित राशि दी जाती है। दी जाने वाली राशि व्यक्ति को हुई डिसेबिलिटी की गंभीरता पर निर्भर कर सकती है।

लायबिलिटी इंश्योरेंस – लायबिलिटी इंश्योरेंस एक जनरल इंश्योरेंस सिस्टम का हिस्सा होता है। जिसमें, बीमाधारक व्यक्ति या कंपनी पर भविष्य में होने वाली उधारी या लायबिलिटी के एवज में एक निर्धारित राशि अदा की जाती है।

हेल्थ इंश्योरेंस – हेल्थ इंश्योरेंस में व्यक्ति व उसकी फैमिली के सदस्यों या कंपनी के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारियों को भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं या स्वास्थ्य से संबंधित होने वाले खर्चे से बचाने के लिए एक निर्धारित राशि या पूरा खर्चे का इंश्योरेंस किया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर बीमाधारक व्यक्ति को कोई बीमारी या एक्सीडेंट हो जाता है, तो इंश्योरेंस कंपनी बीमाधारक के अस्पताल में होने वाले सभी खर्चे के बराबर या एक निश्चित राशि प्रदान करेगी। इंश्योरेंस कंपनी के कुछ अस्पतालों के साथ टाई-अप भी होते हैं, जिसमें बीमाधारक जाकर इलाज करवा सकता है। हेल्थ इंश्योरेंस को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सरकार भी बीमाधारक को टैक्स बेनेफिट्स देती है।

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हेल्थ इंश्योरेंस की जरूरत क्या है?

आपको अपने लिए या अपनी फैमिली के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेने की जरूरत इसलिए होती है, क्योंकि आजकल मेडिकल केयर बहुत ज्यादा महंगी हो गई है। सरकारी अस्पतालों में भीड़ की वजह से नंबर आने में काफी समय लग जाता है और प्राइवेट अस्पतालों में ट्रीटमेंट काफी महंगा होता है। जो कि आपकी जेब पर काफी बोझ डाल सकता है। इसके अलावा, घर में कमाने वाला व्यक्ति ही बीमार या कमाने की स्थिति में न हो, तो अस्पताल का खर्चा देना बहुत मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में एक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस आपकी आर्थिक स्थिरता को बनाए रखता है। जिसमें, आमतौर पर डॉक्टर की फीस से लेकर, मेडिकल टेस्ट्स, दवाई का खर्चा, अस्पताल का खर्चा आदि शामिल होता है।

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने के फायदे क्या हैं?

कैशलेस ट्रीटमेंट- अगर आपकी इंश्योरेंस कंपनी ने कुछ अस्पतालों के साथ टाई-अप कर रखा है, तो उनमें जाकर कैशलेस ट्रीटमेंट करवा सकते हैं। जिसमें आपको कोई खर्चा नहीं करना होता, बल्कि आपका पूरा खर्चा इंश्योरेंस कंपनी उठाती है।

प्री एंड पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन कॉस्ट कवरेज- आपके द्वारा लिए गए इंश्योरेंस प्लान में अगर है, तो इंश्योरेंस कंपनी अस्पताल में भर्ती होने के पहले और बाद में 60 दिन के पीरियड में हुआ मेडिकल केयर खर्चा भी उठाती है।

नो क्लेम बोनस- यह एक बोनस एलिमेंट है, जो कि पिछले साल में किसी ट्रीटमेंट का क्लेम न करने पर आने वाले साल में मिलता है।

ट्रांसपोर्टेशन चार्ज- इंश्योरेंस पॉलिसी में बीमाकृत व्यक्ति के एंबुलेस का खर्चा भी शामिल होता है।

मेडिकल चेकअप- इंश्योरेंस पॉलिसी में कई हेल्थ चेकअप भी शामिल होते हैं।

रूम रेंट- आपके द्वारा दिए जा रहे इंश्योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम के मुताबिक आपके अस्पताल में भर्ती होने पर कमरे का किराया भी शामिल होता है।

टैक्स बेनेफिट्स- इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80डी के मुताबिक हेल्थ इंश्योरेंस के लिए दिए जाने वाले प्रीमियम पर टैक्स नहीं लगता है।

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हेल्थ इंश्योरेंस का चुनाव कैसे करें?

हालांकि, मार्केट में कई इंश्योरेंस कंपनियां हेल्थ इंश्योरेंस के कई तरह के प्लान दे रही हैं। इस वजह से अपने लिए बेहतर हेल्थ इंश्योरेंस का चुनाव करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। लेकिन, आप कुछ जरूरी चीजों का ध्यान रख सकते हैं, जो आपके हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल होनी चाहिए।

  • मिलने वाली राशि
  • मिनिमम एंट्री ऐज और रिन्यूएबिलिटी क्लॉज
  • रूम रेंट कैपिंग
  • नो क्लेम बोनस
  • अन्य बेनेफिट्स

हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए जरूरी कागजात क्या हैं?

  1. उम्र का प्रमाण
  2. पहचान पत्र
  3. एड्रेस प्रूफ
  4. मेडिकल चेकअप
  5. पासपोर्ट साइज फोटो

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हेल्थ इंश्योरेंस के प्रकार क्या हैं?

हेल्थ इंश्योरेंस के प्रकार इंश्योरेंस कंपनी के ऊपर निर्भर कर सकते हैं। लेकिन, हेल्थ इंश्योरेंस निम्नलिखित रूपों में मुख्य रूप से उपलब्ध रहता है।

इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस- इस पॉलिसी के अंतर्गत बीमाधारक के स्वास्थ्य खर्चों या अस्पताल में भर्ती होने का खर्चा उठाया जाता है। इस हेल्थ पॉलिसी के लिए दिया जाने वाला प्रीमियम बीमाधारक की उम्र पर निर्भर करता है।

फैमिली हेल्थ इंश्योरेंस- इस हेल्थ पॉलिसी के अंतर्गत एक ही कवर में फैमिली के सभी सदस्यों की कई बीमारियों के इलाज का खर्चा कवर किया जाता है। इस पॉलिसी में एक निश्चित राशि दी जाती है, जो कि पूरी फैमिली या फैमिली के एक सदस्य के द्वारा इस्तेमाल की जा सकती है।

सीनियर सिटीजन हेल्थ इंश्योरेंस- इसमें सीनियर सिटीजन या 60 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए हेल्थ इश्यू के खर्चे से राहत दी जाती है।

पर्सनल एक्सिडेंट प्लान- इस पॉलिसी में बीमाधारक का एक्सीडेंट हो जाने पर एक निश्चित राशि दी जाती है। इसमें दिया जाने वाला प्रीमियम पॉलिसी पर निर्भर करता है।

मैटर्निटी हेल्थ इंश्योरेंस- इस पॉलिसी में प्री और पोस्ट नेटल केयर, गर्भवती महिला की डिलीवरी के दौरान होने वाले खर्चा आदि शामिल होता है। इसमें पॉलिसी के मुताबिक एक निश्चित अवधि तक नवजात के ऊपर होने वाला मेडिकल खर्चा भी शामिल किया जाता है।

सर्जरी एंड क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस- इस पॉलिसी में बीमाधारक को गंभीर और बड़ी बीमारियों या सर्जरी के दौरान होने वाले खर्चे में मदद मिलती है। किडनी फेल होना, कैंसर, हृदयघात जैसी बीमारियां या इनका इलाज इसमें शामिल होता है। चूंकि, इन बीमारियों में चिकित्सीय खर्चा अधिक होता है, इसलिए इन पॉलिसी का प्रीमियम भी ज्यादा होता है।

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हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करने का प्रोसेस क्या है?

हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में सभी जानकारी तो आपने जान ली, अब आइए जानते हैं, कि इसमें कवर की गई राशि को क्लेम कैसे किया जा सकता है। हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम करने के मुख्य रूप से दो तरीके होते हैं। जैसे

कैशलेस- इस प्रक्रिया में अगर बीमाधारक अपनी इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ टाई-अप किए हुए अस्पताल में जाकर ट्रीटमेंट करवाता है, तो उसे अस्पताल को किसी भी तरह की कोई राशि नहीं देनी पड़ती है। इसके, अलावा आपको पॉलिसी के मुताबिक प्री या पोस्ट हॉस्पिटलाइजेशन चार्ज भी नहीं देना पड़ सकता है। इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी के मुताबिक अस्पताल को सारा खर्चा खुद देती है।

रीइंबर्समेंट- इस प्रक्रिया में बीमाधारक को अस्पताल से डिस्चार्ज होने तक सारा खर्चा खुद उठाना पड़ता है। जिसके बाद वो उन सभी खर्चों के बिल को इंश्योरेंस कंपनी में जमा करवाता है, फिर इंश्योरेंस कंपनी उन सभी बिलों के बराबर राशि या पॉलिसी में निर्धारित एकमुश्त राशि बीमाधारक को देती है।

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