वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी डे: पेशेंट और हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी कैसे है एक दूसरे पर निर्भर?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 16, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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आज की इस भयानक कोरोना महामारी के काल में पेशेंट और हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी का मुद्दा अहम बन चुका है। इस संदर्भ में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहली बार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी डे मनाने का संकल्प लिया है। हर साल 17 सितंबर को मरीज और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विश्व मरीज सुरक्षा दिवस मनाया जाएगा। असल में मरीज की सुरक्षा जितनी जरूरी है, उतनी ही सेवा कर्मी की सुरक्षा भी जरूरी है। सेवा करना जिनका धर्म हैं, उनकी देखरेख और उनके कष्ट के बारे में भी सोचना चाहिए। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि किसी भी व्यक्ति को, जो मरीज है, उनको जरूरत के अनुसार हर तरह की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी चाहिए। इस मामले में उनका सहयोग करना जिस तरह हॉस्पिटल के कर्मियों का धर्म है, उसी तरह अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों के स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना जरूरी होता है। डब्ल्यूएचओ के इस अभियान में भारत की भी सहमति है। इस दिन को मनाने का एक ही उद्देश्य है, लोगों के मन में पेशेंट और हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी के प्रति जागरूकता पैदा करना। 

वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी डे के अवसर को ध्यान में रखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हेल्थ केयर पॉलिसी और प्रोग्राम्स में मरीज की सुरक्षा को मुख्य एजेंडा बनाया है। इस अवसर पर यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के तहत मरीजों के स्वास्थ्य का विशेष रूप से ध्यान रखने के मुद्दे पर जोर दिया गया है। यहां तक कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दवाओं के आपूर्ती और सुरक्षा के संदर्भ में तीन तरह के टेक्निकल रिपोर्ट को लॉन्च किया है। उनमें है- हाई रिस्क सिचुएशन, पॉलिफार्मेसी, और ट्रैन्जिशन ऑफ केयर। हर देश को इन तीनों क्षेत्रों को प्रमुखता देने के लिए कहा गया है, ताकि दवाओं का लाभ हर मरीज को अच्छी तरह से मिल सके। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए डब्ल्यूएचओ ने मेडिकेशन सेफ्टी के पांच चरण या पांच मूवमेंट बनाए हैं- मेडिकेशन की शुरूआत, मेडिकेशन लेना, मेडिकेशन जोड़ना, मेडिकेशन को रिव्यू करना और फिर मेडिकेशन को बंद करना। मेडिकेशन सेफ्टी के इस पांच चरण से पेशेन्ट या केयर गिवर को मेडिकेशन से होने वाले नुकसान से तो बचाया ही जा सकता है, साथ ही मेडिकेशन का पूरा फायदा भी मिल सकता है। इस मूवमेंट का लक्ष्य है मरीज को खुद का ख्याल रखने के लिए प्रोत्साहित करना। मेडिकेशन सेफ्टी की तरफ हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के साथ पेशेन्ट का भी दायित्व बनता है। अब तक हम विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी डे के अवसर पर होने वाले नए कदम और संकल्पों के बारे में बात कर रहे थे।

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शायद आप सोच रहे होंगे कि आखिर पेशेंट और हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी के ऊपर अचानक इतना जोर क्यों दिया जा रहा है। यह तो आपको पता ही है कि अक्सर अस्पतालों में मरीजों का ठीक तरह से ध्यान नहीं रखने के कारण या हेल्थकेयर ऑर्गनाइजेशन्स की त्रुटी के कारण, दवाओं की ठीक से आपूर्ती न होने के कारण,पेशेन्ट और उनके परिवारजनों को कितना खामियाजा भुगतना पड़ता है। कोरोना संकटकाल में यह समस्या खुलकर सामने आई है। 

पेशेन्ट सेफ्टी, एक तरह का हेल्थ केयर संबंधी अनुशासन है, जो हेल्थ केयर सिस्टम की जटिलताओं, जोखिमों और त्रुटियों के कारण रोगी को जो नुकसान पहुंचता है उसको रोकने और कम करने में मदद करता है। इस अनुशासन के तहत जो स्वास्थ्य कर्मियों को सीखने को मिलता है उससे हेल्थकेयर में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है। आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मरीज की सुरक्षा उनका परम धर्म होता है। इससे हर मरीज को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा दी जा सकती है। हेल्थकेयर के फायदे के बारे में सोचते हुए इस बात का ध्यान रखा गया है कि स्वास्थ्य सेवा सही समय पर और पूरी कुशलता के साथ दी जाए। 

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क्या आपको पता है कि एक परिपक्व स्वास्थ्य प्रणाली की कमी के कारण मनुष्य गलतियों का अधिक शिकार बनता है। चलिए इस बात को और सरलता से समझते हैं, अस्पताल में अक्सर दवाओं की एक तरह की पैकेजिंग के कारण मरीज को गलत दवा मिल जाती है। यह गलती फार्मेसी से दवा लेने से लेकर नर्स के हाथों में आने तक हो सकती है। इन्हीं गलतियों को सुधारने की जरूरत है। जैसा कि सभी जानते हैं, हर साल इसी तरह की  असुरक्षित और खराब क्ववालिटी की हेल्थ केयर फैसिलिटी के कारण लोगों को जान देनी पड़ जाती है। कई चिकित्सा पद्धतियां और स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े खतरे, मरीज के जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इसी संदर्भ में हम कुछ पेशेन्ट सेफ्टी संबंधी चुनौतियों के बारे में बात करेंगे। इन चुनौतियों में शामिल हैं, मेडिकेशन एरर, स्वास्थ्य देखभाल से जुड़े संक्रमण, अनसेफ सर्जिकल केयर प्रोसीजर, अनसेफ इंजेक्शन प्रैक्टिस, अनसेफ ट्रांसफ्यूशन प्रैक्टिस, रेडिएशन एरर, सेप्सिस, वेनस थ्रोम्बोइम्बोलिज्म (Venous thromboembolism -blood clots) आदि। इसके साथ यह भी जरूरी है कि हेल्थ केयर सिस्टम में रोगी की देखभाल करने की लागत भी कम होनी चाहिए। पेशेन्ट सेफ्टी की इन्हीं हेल्थ प्राईऑरटियों को समझते हुए 17 सितम्बर को वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी डे मनाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने समर्थन ज्ञापन किया है।

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पेशेन्ट सेफ्टी की तरह ही हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि जो हमारी सेवा अपने दिन-रात के चैन को भुला कर कर रहे हैं, उनके प्रति भी हेल्थ केयर ऑर्गनाइजेशन का दायित्व बनता है। इस संदर्भ में हेल्थ ऑर्गनाइजेशन हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी के लिए थोड़ी-बहुत चीजों पर ध्यान दे ही सकते हैं, जैसे- 

पेशेंट और हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी/ safety measure
पेशेंट और हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी

1-हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी का रखें ध्यान- स्वास्थ्य कर्मचारियों और सहायक कर्मियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना। इस मामले में  विशेष रूप से कपड़े धोने वाले कर्मचारी, सफाईकर्मी और चिकित्सा संबंधी गंदगी से निपटने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा का ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत होती है। उन्हें मास्क और हैंड गलव्स की आपूर्ती करानी चाहिए, ताकि वह भी सेफ रहें और मरीज भी।

2- हेल्थ वर्कर्स के मानसिक स्वास्थ्य का रखें ध्यान- विशेष रूप से कोरोना महामारी के दौर में स्वास्थ्य कर्मियों को हर दिन मौत का सामना करना पड़ता है। वे अपने परिवार के लोगों से मिल नहीं पाते हैं या उनकी चिंता को दिल में रख कर अपना ड्यूटी दिन रात कर रहे होते हैं। इस हालात में उनके ऊपर भी बहुत बड़ा मेंटल प्रेशर पड़ता है।

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3- हेल्थ वर्कर्स के काम के समय का रखें ध्यान- महामारी का समय हो या किसी आपातकाल का समय हो, उन पर ऐसा वर्कलोड नहीं डालना चाहिए जिससे कि उनके हेल्थ पर बुरा असर हो। उन्हें न चाहते हुए भी डे शिफ्ट और नाइट शिफ्ट में लगातार काम करना पड़े। 

4- हेल्थ सिस्टम को आपातकालिन अवस्थाओं को संभालने के लिए हेल्थ वर्कर्स पर ओवरलोड न देकर दूसरे स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करके उन्हें भर्ती करना चाहिए। इससे सेवा का काम भी सुचारू रूप से हो पाएगा और हेल्थ वर्कर्स की हेल्थ भी सेफ रहेगी।

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5- शिफ्ट वर्क का प्रेशर बन जाता है बीमारियों का कारण- पेशेन्ट के हेल्थ को ध्यान में रखते हुए हेल्थ सिस्टम हेल्थ वर्कर्स के सेहत का ध्यान नहीं रखते हैं। इसके फलस्वरूप वे अनिद्रा, बैकपेन, लो इम्युनिटी, गैस्ट्रोइंटेस्टिनल प्रॉबल्म जैसे समस्याओं का शिकार हो जाते हैं। 

अब तक के चर्चा से आप समझ ही गए होंगे कि पेशेंट और हेल्थ वर्कर्स की सेफ्टी कैसे एक दूसरे पर निर्भर करती है। अगर सेवा करने वाला इंसान खुद बीमार और कमजोर हो, फिर वह मरीज को कैसे स्वस्थ कर पाएगा। इसलिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा आयोजित वर्ल्ड पेशेंट सेफ्टी डे के उद्देश्य को समझकर उसको सफल बनाने की कोशिश हर हेल्थ ऑर्गनाइजेशन को करनी चाहिए। 

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