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वर्ल्ड सेक्शुअल हेल्थ डे पर सेफ सेक्स के लिए अपनाएं ये 6 ट्रिक्स!

वर्ल्ड सेक्शुअल हेल्थ डे पर सेफ सेक्स के लिए अपनाएं ये 6 ट्रिक्स!

सेफ सेक्स के साथ आपकी सेक्शुअल लाइफ कैसी है, ये बात भी बहुत मायने रखती है। इस बार के वर्ल्ड सेक्शुअल हेल्थ डे पर एक्सपर्ट कहते हैं कि कई बार कपल्स सेफ सेक्स और प्रेग्नेंसी से बचने के लिए कई तरह के रास्ते अपनाते हैं। अधिकतर पुरुष कंडोम और महिलाएं गर्भनिरोधक गोली को चुनते हैं। शायद ये इस लिए होता है क्योंकि, उन्हें बाकी अन्य विकल्पों के बारे में पता नहीं होता है। प्रेग्नेंसी से बचाव के लिए कंडोम या किसी गर्भनिरोधक गोली का इस्तेमाल करना गलत नहीं हैं लेकिन, प्रेग्नेंसी से बचाव के लिए ऐसे बहुत से अन्य विकल्प भी है जो आज के समय में उपलब्ध हैं, जो शायद आपके लिये ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं। क्योंकि हर किसी का शरीर अलग है और उसकी जरूरतें भी अलग ही होती है।

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सेफ सेक्स के क्या हैं टिप्स?

सेफ सेक्स के दो फायदे होते हैं। जैसे-

  1. सेफ सेक्स की वजह से सेक्शुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (STI) का खतरा कम होता है।
  2. सेफ सेक्स की वजह से प्रेग्नेंसी से भी बचा जा सकता है।

सेफ सेक्स के लिए निम्नलिखित टिप्स फॉलो करना चाहिए। इन टिप्स में शामिल है-

आई.यू.डी (IUD)

प्रेग्नेंसी से बचने के तरीके में से एक आई.यू.डी है। Intrauterine Contraceptive Device (आई.यू.डी) को गर्भाशय (Uterus) के भीतर डाला जाता है। यह एक छोटी-सी स्पाइरल की संरचना में होती है। आई.यू.डी की सबसे अच्छी बात यह है कि इसके प्रयोग के दौरान आपको कभी किसी तरह की गर्भनिरोधक गोली खाने की जरूरत नहीं होती है। यह आपके शरीर में पांच से दस साल तक रह सकता है। इतना ही नहीं अगर आप इसे जब भी चाहे तब हटा सकते हैं। इससे गर्भधारण से बचा जा सकता है और सेफ सेक्स का यह बेहतर उपाय भी माना जाता है।

सेफ सेक्स (Safe sex): डायाफ्राम (diaphragm)

डायाफ्राम सिलिकॉन से बना एक डोम (Dome) के आकार का कप है जिसे महिलाएं अपनी योनि में डाल सकती है। यह सर्विक्स (cervix) को कवर करता है और स्पर्म को गर्भाशय में प्रवेश करने से रोकता है। डायाफ्राम को सेक्स के बाद कम से कम छः घंटे तक न निकालें। परंतु छः से चौबीस घंटे के बीच में आप इसे बाहर निकालें और साफ करें। आप एक डायाफ्राम को एक बार से ज्यादा उपयोग कर सकते हैं। सेफ सेक्स के लिए डायाफ्राम का प्रयोग बेहतर होगा और साथ ही गर्भधारण से भी बचा जा सकता है।

कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन (contraceptive injection)

एक कॉन्ट्रासेप्टिव इंजेक्शन में प्रोजेस्टोजन नामक हॉरमोन का सिन्थेटिक रूप होता है। यह हॉरमोन सर्वाइकल म्यूकस (Cervical Mucus) को घना कर देता है और स्पर्म को यूट्रस में प्रवेश करने से रोकता है। इसके एक इंजेक्शन का प्रभाव 8-12 सप्ताह तक रह सकता है। इसके प्रयोग से सेक्स में कोई बाधा नहीं होती। इसके उपयोग से महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं लेकिन, इससे गर्भ ठहरने का खतरा न के बराबर होता है।

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कॉन्ट्रासेप्टिव पैच (contraceptive patch)

कॉन्ट्रासेप्टिव पैच में एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टोजन दोनों हॉरमोन होते हैं, और यह विकल्प भी इंजेक्शन के समान काम करता है। हालांकि, पैच को सप्ताह में कम से कम एक बार बदलना लेना जरूरी है। लेकिन निश्चित तौर पर यह तरीका बाकी विकल्पों की तुलना में आसान है। कॉन्ट्रासेप्टिव पैच के बाद इंटरकोर्स किया जा सकता है और यह तरीका सेफ सेक्स के अंतर्गत आता है।

वजायनल रिंग (Vaginal Ring)

यह एक छोटी, लचीली प्लास्टिक है जो योनि (vagina) को प्रोजेस्टोजन और एस्ट्रोजेन होती है। इसे हर महीने तीन सप्ताह के लिए योनि में डाला जाता है और एक सप्ताह की अवधि के लिये हटा दिया जाता है, ताकि आपके पीरियड्स नियमित रूप से हो सकें। इसे आप स्वयं ही बिना किसी डॉक्टरी देखरेख के डाल सकती हैं, क्योंकि आपको इसे बस अपनी योनि के अंदर रखना है, जैसे आप टैम्पोन डालती हैं। यदि आप सुरक्षा के बारे में परेशान हैं तो हम आपको बता दें कि यदि आप उचित स्वच्छता बनायें रखती हैं तो प्रेग्नेंसी से बचाव का यह एक सुरक्षित विकल्प है।

स्त्री नसबंदी (Female sterilisation)

नसबंदी, प्रेग्नेंसी से बचाव का एक स्थायी तरीका है। यह तरीका ऐसे लोगों के लिये उपयुक्त है जो यह सुनिश्चित करते हैं कि वो अब अपने जीवन काल में बच्चे नहीं चाहते या पहले से बच्चे होने के कारण अब वो कोई और संतान नहीं चाहते। नसबंदी महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिये उपलब्ध है। नसबंदी का निर्णय कपल खुद ले सकते हैं। उनके इस निर्णय में कोई हंस्तक्षेप नहीं कर सकता है।

ऊपर सुझाये गये सभी गर्भनिरोधक विकल्पों में से किसी भी विकल्प को चुनने से पहले आप अपनी स्त्री रोग विशेषज्ञ या डॉक्टर से उचित परामर्श लें और उसके बाद ही विकल्प चुने। इन उपायों को कर प्रेग्नेंसी से बचाओ के साथ-साथ इंफेक्शन का खतरा भी कम हो सकता है।

सेफ सेक्स के साथ-साथ ओरल सेक्स से जुड़ी कुछ अहम बातों का भी ध्यान रखें। जैसे-

  • अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार ओरल कैंसर की वजह से थ्रोट इंफेक्शन और थ्रोट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
  • रिसर्च के अनुसार ओरल सेक्स की वजह से युवाओं में तनाव बढ़ सकता है। युवा वर्ग इस ओर ज्यादा (ओरल सेक्स) आकर्षित होते हैं।
  • ओरल सेक्स के दौरान डेंटल डैम के प्रयोग न करने से संक्रमण का खतरा बना रहता है। इसलिए सेफ सेक्स के लिए कोंडम और ओरल सेक्स के लिए डेंटल डैम का प्रयोग करना बेहतर हो सकता है।
  • सामान्य सेक्स की तुलना में ओरल सेक्स से गर्भधारण का खतरा नहीं होता है लेकिन, इंफेक्शन की संभावना बनी रही है।

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सेफ सेक्शुअल एक्टिविटी क्या है?

  • पार्टनर एक दूसरे को हग कर सकते हैं।
  • पार्टनर एक दूसरे को किस कर सकते हैं।
  • यदि आप एचआईवी पॉसिटिव हैं या आपके लाइफ पार्टनर एचआईवी पॉजिटिव हैं या हो सकते हैं, तो आपको नियमित रूप से एसटीआई जांच करवाना चाहिए।
  • यही नहीं अगर सेक्स टॉय का इस्तेमाल करते हैं, तो इसे भी अच्छी तरह से क्लीन करें। क्योंकि सेक्स टॉय की वजह से STI और अन्य इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
  • एक ही व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाना चाहिए।

अगर आप प्रेग्नेंसी से बचाव के साथ-साथ सेफ सेक्स से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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A Woman’s Guide to Safe Sex Basics/https://medlineplus.gov/ency/article/001949.htmAccessed on 28/01/2020

A BASHH GUIDE TO SAFER SEX/https://www.womenshealth.gov/blog/6-steps-safer-sexAccessed on 28/01/2020

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/10/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड