इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) जिसे मस्तिष्क ज्वर भी कहा जाता है मस्तिष्क के ऊतकों की सूजन है। आमतौर पर यह सजून वायरल इंफेक्शन (Viral infection) के कारण होती है। इंसेफेलाइटिस बेहद गंभीर हेल्थ कंडिशन है क्योंकि यह सीधा आपके दिमाग (Brain) पर असर डालता है यानी इससे आपका बाकी शरीर बुरी तरह से प्रभावित होता है। क्या है इंसेफेलाइटिस के कारण और उपचार जानिए इस लेख में।
इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क के ऊतकों की सूजन है। इंसेफेलाइटिस दो तरह के होते हैं प्राइमरी और सेकंडरी। प्राइमरी इंसेफेलाइटिस (Primary Encephalitis) तब होता है जब वायरस सीधे दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड (Spinal cord) को प्रभावित करता है। सेकंडरी इंसेफेलाइटिस (Secondary Encephalitis) तब होता है जब संक्रमण (Infection) शरीर के किसी अन्य हिस्से से शुरू होता है और मस्तिष्क (Brain) तक पहुंच जाता है। इंसेफेलाइटिस दुलर्भ और जानलेवा बीमारी है। इसलिए इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

बच्चों में इंसेफेलाइटिस के कारण पर्सनैलिटी में बदलाव, सिजर्स, कमजोरी और अन्य लक्षण दिख सकते हैं, मगर यह इस बात पर निर्भर करता है दिमाग का कौन सा हिस्सा इंफेक्शन (Infection) से प्रभावित हुआ है। आमतौर पर बच्चे, बुज़ुर्ग और कमजोर इम्यून सिस्टम (Weak immune system) वाले लोगों को इसका खतरा अधिक होता है। चूकि यह वायरल इंफेक्शन के कारण होता है, इसलिए इसे वायरल इंसेफेलाइटिस (Viral Encephalitis) भी कहा जाता है। वैसे यदि सही उपचार मिले तो पीड़ित शख्स पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
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इंसेफेलाइटिस के लक्षणों में शामिल हैः
गंभीर लक्षणों में शामिल हैः
शिशु और छोटे बच्चों में इंसेफेलाइटिस के लक्षण अलग दिख सकते हैं। यदि बच्चों को निम्न समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करेः
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इंसेफेलाइटिस तब होता है जब वायरस, बैक्टीरियल और फंगस सीधे तौर पर मस्तिष्क को संक्रमित (Infection) करते हैं या इम्यून सिस्टम (Immune system) गलती से मस्तिष्क के ऊतकों पर अटैक कर देता है।
प्राइमरी इंसेफेलाइटिस (Primary Encephalitis) के लिए जिम्मेदार वायरस में शामिल हैः
सेकंडरी इंसेफेलाइटिस वायरल इंफेक्शन की जटिलता के कारण होता है। इसमें लक्षण संक्रमण के कई दिनों या हफ्तों बाद दिखते हैं। ऐसे में मरीज का इम्यून सिस्टम (Immune system) हेल्दी ब्रेन सेल्स (Healthy brain cells) यानी मस्तिष्क के ऊतकों को बाहरी वस्तु समझकर अटैक कर देता है। इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) के 50 प्रतिशत मामलों में बीमारी के सही कारणों का पता नहीं चल पाता है।
इंसेफेलाइटिस का खतरा सबसे अधिक इन्हें होता हैः
इसके अलावा जो लोग ऐसे इलाके में रहते हैं जहां मच्छरों और टिक की संख्या अधिक है तो ऐसे में इनके द्वारा संक्रमण (Infection) फैलता है। इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) आमतौर पर गर्मी के महीने में अधिक होता है, क्योंकि इसी समय कीट अधिक सक्रिय होते हैं।
हालांकि MMR (मिजल्स, मंप्स, रुबेला) वैक्सीन (Vaccine) लेने वाले बच्चों में यह दुर्लभ ही होता है। करीब 3 मिलियन में से एक बच्चे ही इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) से पीड़ित होते हैं, जबिक वैक्सीन नहीं लेने वाले बच्चों में ये आंकड़ा काफी ज्यादा है।
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डॉक्टर सबसे पहले आपसे लक्षणों के बारे में पूछता है और यदि उसे इंसेफेलाइटिस का संदेह होता है तो वह निम्न टेस्ट करेगा।
इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका है संक्रमित करने वाले वायरस के संपर्क में आने से बचना इसके लिए इन बातों का ध्यान रखेः
मच्छरों और टिक के काटने से बच्चों को बचाने के लिएः
इंसेफेलाइटिस से गंभीर जटिलताएं हो सकती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने की ज़रूरत है। इसका इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज की उम्र और मेडिकल कंडिशन कैसी है साथ ही इंसेफेलाइटिस (Encephalitis) किस कारण से हुए है। सबका इलाज एक तरह से नहीं किया जा सकता। यदि इंसेफेलाइटिस बैक्टीरियल इंफेक्शन (Bacterial infection) के कारण हुआ है, तो इंट्रावेनस एंटीबायोटिक (Intravenous antibiotic) से इलाज किया जाता है। हर्प्स से होने वाले इंसेफेलाइटिस के उपचार के लिए सपोर्टिव केयर और दवा के साथ इंट्रावेनस एंटीवायरल थेरेपी (Intravenous antiviral therapy) की जरूरत होती है।
सही उपचार से इंसेफेलाइटिस पूरी तरह से ठीक हो जाता है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में इसकी वजह से स्थायी ब्रेन डैमेज का खतरा अधिक होता है। आमतौर पर इंसेफेलाइटिस के उपचार शामिल हैः
हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है, अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।